रामगढ़/रजरप्पा: केंद्र में प्रधानमंत्री के रूप में 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संथाल समाज की आस्था के प्रमुख केंद्र रजरप्पा स्थित जाहेरगढ़ में विशेष पूजा-अर्चना एवं प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान मरांग बुरु से विकसित भारत के संकल्प की सफलता तथा आदिवासी समाज की समृद्धि, सुरक्षा और सम्मानजनक भागीदारी के लिए प्रार्थना की गई।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज हजारों वर्षों से अपनी पहचान, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और अस्तित्व की रक्षा के लिए संघर्ष करता आया है। बाबा तिलका मांझी, वीर सिदो-कान्हू, धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा, वीर पोटो हो, वीर टाना भगत और वीर तेलंगा खड़िया जैसे महान जननायकों के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का आह्वान किया गया।

आदिवासी परंपराओं के संरक्षण के लिए सुरक्षा कवच की आवश्यकता

वक्ताओं ने कहा कि आधुनिकता और बदलते सामाजिक परिवेश के बीच आदिवासी समाज की पारंपरिक संस्कृति, भाषा और जीवनशैली को संरक्षित रखने के लिए प्रभावी सुरक्षा कवच की आवश्यकता है। समाज की रूढ़िजन्य परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचे, इसके लिए ठोस पहल जरूरी है।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज देश की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में से एक है, लेकिन लंबे समय तक नीतिगत उपेक्षा के कारण यह समुदाय मुख्यधारा के विकास से अपेक्षित लाभ नहीं प्राप्त कर सका। हालांकि हाल के वर्षों में जनजातीय विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की गई हैं, जिनसे समाज को नई दिशा मिली है।

जनजातीय विकास योजनाओं की सराहना

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री जनमन योजना, पीएम वन धन योजना, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान तथा एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की स्थापना जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन योजनाओं से शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार के क्षेत्र में आदिवासी समुदाय को लाभ मिल रहा है।

वक्ताओं ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को पूरे देश में जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाए जाने के निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे आदिवासी वीरों के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है।

PVTG समुदायों तक पहुंच रही मूलभूत सुविधाएं

सभा में कहा गया कि प्रधानमंत्री जनमन योजना के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) तक आवास, बिजली, पेयजल, सड़क और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत पात्र लोगों को अधिकार पत्र और पट्टे उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य जारी है।

विकसित भारत 2047 में आदिवासी भागीदारी जरूरी

वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज भारत की सांस्कृतिक विविधता, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की महत्वपूर्ण धुरी है। ऐसे में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आदिवासी समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।

उन्होंने कहा कि समाज के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रोजगार और नेतृत्व के अवसर मिलें, ताकि वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान स्थापित कर सकें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें।

सीएनटी-एसपीटी एक्ट और विल्किंसन रूल्स के पालन पर जोर

कार्यक्रम में छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act), संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act) तथा विल्किंसन रूल्स जैसे आदिवासी अधिकारों से जुड़े कानूनों के प्रभावी अनुपालन की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य आदिवासी समाज की जमीन, अधिकार और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना है।

भावनात्मक अपील

कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने कहा कि यदि आदिवासी समाज की भाषा, संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों के संरक्षण के लिए समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य की पीढ़ियां अपनी मूल पहचान से दूर हो सकती हैं। उन्होंने इस चिंता को व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले समय में इतिहास की पुस्तकों में केवल यह न लिखा जाए कि “एक थे आदिवासी…”, बल्कि आदिवासी समाज अपनी समृद्ध परंपराओं और गौरवशाली पहचान के साथ आगे बढ़ता रहे।

अंत में उपस्थित लोगों ने “हिरला मरांग बुरु” और “हिरला जाहेर आयो” के जयघोष के साथ समाज की एकता, समृद्धि और सांस्कृतिक संरक्षण का संकल्प दोहराया।