चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले में Surrender नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है। इसी उद्देश्य से सोमवार को पश्चिमी सिंहभूम समाहरणालय स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय सभागार में उपायुक्त मनीष कुमार एवं पुलिस अधीक्षक अमित रेनू की संयुक्त अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में हाल के दिनों में Surrender करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक पुनर्स्थापन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को समन्वित प्रयासों के माध्यम से लाभुकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए।

मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में प्रशासन की पहल

बैठक के दौरान उपायुक्त एवं पुलिस अधीक्षक ने कहा कि Surrender नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया जाएगा ताकि वे समाज में सकारात्मक भूमिका निभा सकें।

समीक्षा बैठक में पुनर्वास से संबंधित योजनाओं की वर्तमान स्थिति का आकलन किया गया तथा आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए मुख्यालय से अतिरिक्त राशि की मांग करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

सरकारी योजनाओं का प्राथमिकता के आधार पर मिलेगा लाभ

बैठक में संबंधित विभागों को निर्देश दिया गया कि Surrender नक्सलियों एवं उनके परिवारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा जाए।

विशेष रूप से कन्यादान योजना तथा मंईया सम्मान योजना का लाभ पात्र परिवारों तक शीघ्र पहुंचाने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने कहा कि इन योजनाओं से जुड़ने से परिवारों को आर्थिक सहायता मिलेगी और उनका सामाजिक जीवन बेहतर होगा।

स्वरोजगार और कौशल विकास पर दिया गया विशेष जोर

बैठक में Surrender नक्सलियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वरोजगार आधारित योजनाओं को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया। प्रशासन ने निर्णय लिया कि पात्र लाभुकों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत सहायता प्रदान की जाएगी।

इसके साथ ही ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI) के माध्यम से कौशल विकास प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि लाभुक अपनी रुचि एवं क्षमता के अनुसार रोजगार प्राप्त कर सकें या स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकें।

अधिकारियों का मानना है कि कौशल प्रशिक्षण से आत्मसमर्पित युवाओं को सम्मानजनक आजीविका प्राप्त करने में सहायता मिलेगी और वे स्थायी रूप से समाज की मुख्यधारा में जुड़ सकेंगे।

बीमा योजनाओं से भी जोड़े जाएंगे लाभुक

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि Surrender नक्सलियों और उनके परिवारों को विभिन्न सरकारी बीमा योजनाओं से आच्छादित किया जाएगा। इससे आकस्मिक परिस्थितियों में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।

प्रशासन का उद्देश्य केवल पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर स्थायी रूप से सामान्य जीवन जीने योग्य बनाना भी है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान

बैठक के दौरान Surrender नक्सलियों के परिवारों की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर भी चर्चा हुई। प्रशासन ने निर्णय लिया कि महिलाओं को झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जोड़कर स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

इस पहल से परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी, जिससे पूरे परिवार का जीवन स्तर बेहतर बन सकेगा।

विभागवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

उपायुक्त मनीष कुमार एवं पुलिस अधीक्षक अमित रेनू ने बैठक में उपस्थित सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास, आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सहभागिता को लेकर विभागवार विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने कहा कि सभी विभाग समयबद्ध तरीके से अपनी योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि लाभुकों तक सरकारी सुविधाएं बिना किसी विलंब के पहुंच सकें। जिला कार्यालय को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।

कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में अपर पुलिस अधीक्षक (अभियान), जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, पुलिस उपाधीक्षक विशेष शाखा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

सभी अधिकारियों ने पुनर्वास कार्यक्रम को प्रभावी बनाने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की।

पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन द्वारा आयोजित यह समीक्षा बैठक Surrender नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकारी योजनाओं, कौशल विकास, स्वरोजगार, सामाजिक सुरक्षा और महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान देकर प्रशासन उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहा है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होता है तो यह पहल न केवल लाभुकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगी, बल्कि जिले में शांति, विकास और सामाजिक समरसता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।