नई दिल्ली। देश में उच्च शिक्षा संस्थानों और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती तथा रिक्त पदों को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। राज्यसभा में शिक्षा मंत्रालय की ओर से दिए गए दो अलग-अलग लिखित उत्तरों में बताया गया कि केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों (सीएचईआई) में मिशन मोड अभियान के तहत अब तक 32,114 रिक्त पदों पर नियुक्तियां की जा चुकी हैं। वहीं स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि शिक्षकों की भर्ती का अधिकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पास है, लेकिन केंद्र लगातार रिक्त पदों को पारदर्शी और योग्यता आधारित प्रक्रिया से भरने पर जोर दे रहा है।
सरकार ने यह भी बताया कि पिछले एक दशक में देश में पीएचडी में नामांकन लगभग 193 प्रतिशत बढ़ा है, जो उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में बढ़ती रुचि तथा क्षमता विस्तार का संकेत है।
स्वायत्त संस्थान स्वयं करते हैं भर्ती
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, केंद्रीय विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) तथा अन्य केंद्रीय वित्त पोषित तकनीकी संस्थान संसद के अधिनियमों के तहत स्थापित स्वायत्त संस्थान हैं।

इन संस्थानों में शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती संबंधित संस्थानों के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स, कार्यकारी परिषद या प्रबंधन बोर्ड द्वारा उनके नियमों और अधिनियमों के अनुसार की जाती है। इसलिए नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह संस्थान स्तर पर संचालित होती है।
रिक्तियां क्यों बनती हैं?
सरकार ने बताया कि किसी भी संस्थान में रिक्तियां एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा होती हैं। इसके प्रमुख कारण हैं—
- शिक्षकों और कर्मचारियों का सेवानिवृत्त होना।
- इस्तीफा देना।
- मृत्यु।
- नए संस्थानों की स्थापना।
- नई योजनाओं एवं परियोजनाओं की शुरुआत।
- छात्रों की संख्या बढ़ने से अतिरिक्त पदों की आवश्यकता।
इन्हीं कारणों से समय-समय पर नए पद सृजित होते हैं और रिक्तियां उत्पन्न होती रहती हैं।
मिशन मोड में चलाया गया विशेष भर्ती अभियान
रिक्त पदों को तेजी से भरने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय ने अगस्त 2021 में सभी केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों को विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया था।
इसके बाद—
- सितंबर 2022 में दोबारा मिशन मोड में भर्ती तेज करने को कहा गया।
- अक्टूबर 2025 में फिर सभी लंबित रिक्तियां जल्द भरने के निर्देश जारी किए गए।
इन अभियानों के परिणामस्वरूप 23 मई 2026 तक देशभर के केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में 32,114 पदों पर नियुक्तियां की गईं।
आरक्षित वर्गों को भी मिला लाभ
सरकार के अनुसार भरे गए कुल पदों में आरक्षित वर्गों के लिए भी बड़ी संख्या में नियुक्तियां हुई हैं।
इनमें शामिल हैं—
- अनुसूचित जाति (SC) – 3,851 पद
- अनुसूचित जनजाति (ST) – 1,643 पद
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) – 6,785 पद
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) – 1,191 पद
सरकार का कहना है कि विशेष भर्ती अभियानों का उद्देश्य केवल रिक्तियां भरना ही नहीं बल्कि आरक्षण नीति का प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करना था।
18,757 नए फैकल्टी सदस्य नियुक्त
सरकार ने बताया कि मिशन मोड अभियान के दौरान केवल संकाय (Faculty) पदों पर ही 18,757 नियुक्तियां की गईं।
इनमें—
- एससी – 2,315
- एसटी – 910
- ओबीसी – 3,986
- ईडब्ल्यूएस – 568
शामिल हैं।
इससे विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों में शिक्षण क्षमता बढ़ने के साथ-साथ शोध कार्यों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई है।
पीएचडी प्रवेश में रिकॉर्ड वृद्धि
शिक्षा मंत्रालय ने बताया कि देश में शोध शिक्षा लगातार मजबूत हो रही है।
एआईएसएचई (AISHE) रिपोर्ट के अनुसार—
- वर्ष 2014-15 में पीएचडी में कुल नामांकन 1,17,301 था।
- वर्ष 2023-24 में यह बढ़कर 3,43,559 हो गया।
यानी लगभग 192.89 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
सरकार के अनुसार नए फैकल्टी सदस्यों की नियुक्ति से शोध पर्यवेक्षकों (Research Supervisors) की संख्या बढ़ती है, जिससे अधिक विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश का अवसर मिलता है।
शोधार्थियों के लिए भी स्पष्ट व्यवस्था
यदि कोई शोध निर्देशक (Guide) सेवानिवृत्त हो जाता है, इस्तीफा देता है या किसी अन्य संस्थान में चला जाता है, तो उसके शोधार्थियों को संस्थान के शैक्षणिक नियमों के अनुसार अन्य योग्य संकाय सदस्यों के अधीन स्थानांतरित किया जाता है।
इस व्यवस्था से शोध कार्य प्रभावित नहीं होता और विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारु रूप से जारी रहती है।
स्कूलों में शिक्षक भर्ती राज्यों की जिम्मेदारी
एक अन्य लिखित उत्तर में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है।
देश के अधिकांश सरकारी विद्यालय संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के अधीन आते हैं।
इसलिए—
- शिक्षक भर्ती,
- सेवा शर्तें,
- स्थानांतरण,
- तैनाती,
का अधिकार राज्यों के पास है।
रिक्तियां लगातार बनती रहती हैं
सरकार ने बताया कि स्कूलों में भी शिक्षकों की रिक्तियां कई कारणों से उत्पन्न होती हैं—
- सेवानिवृत्ति,
- इस्तीफा,
- नए स्कूल खुलना,
- छात्र संख्या बढ़ना,
- शिक्षकों का पुनर्गठन,
- नए पदों का सृजन।
इन रिक्तियों को भरने की समय-सीमा भी संबंधित राज्य सरकारें स्वयं तय करती हैं।
केंद्र ने राज्यों को दी सलाह
हालांकि भर्ती का अधिकार राज्यों के पास है, लेकिन केंद्र सरकार लगातार उन्हें सलाह देती रही है कि सभी रिक्त पदों को—
- पारदर्शी प्रक्रिया,
- मेरिट आधारित चयन,
- आधुनिक तकनीक आधारित भर्ती प्रणाली,
के माध्यम से शीघ्र भरा जाए।
इसके लिए नियमित समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जाती हैं।
समग्र शिक्षा योजना से मिल रही सहायता
केंद्र सरकार ने बताया कि समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
इसका उद्देश्य—
- छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) बनाए रखना,
- नए स्कूल खोलना,
- पुराने विद्यालयों का उन्नयन,
- अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण,
- वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक शिक्षा सुविधाओं का विस्तार
सुनिश्चित करना है।
एनईपी 2020 के मानकों के अनुरूप छात्र-शिक्षक अनुपात
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार—
- सामान्य क्षेत्रों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 से कम होना चाहिए।
- सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों में यह 25:1 से कम होना चाहिए।
यूडीआईएसई+ 2025-26 के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर वर्तमान छात्र-शिक्षक अनुपात इस प्रकार है—
- आधारभूत स्तर – 10
- प्रारंभिक स्तर – 12
- मध्य स्तर – 17
- माध्यमिक स्तर – 21
ये सभी आंकड़े एनईपी द्वारा निर्धारित मानकों के भीतर हैं।
तेलंगाना और आंध्र प्रदेश का प्रदर्शन भी बेहतर
सरकार ने बताया कि—
तेलंगाना में छात्र-शिक्षक अनुपात क्रमशः 11, 10, 11 और 14 है।
वहीं आंध्र प्रदेश में यह 11, 12, 16 और 15 है।
दोनों राज्यों का प्रदर्शन राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मानकों के अनुरूप बताया गया है।
विद्यालय खोलने और बंद करने का अधिकार राज्यों के पास
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नए स्कूल खोलना, विद्यालयों का विलय, बंद करना या पुनर्गठन पूरी तरह संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों का अधिकार क्षेत्र है।
हालांकि आवश्यकता पड़ने पर समग्र शिक्षा योजना के माध्यम से केंद्र सरकार वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराती है।
क्या है इसका व्यापक महत्व?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय उच्च शिक्षा संस्थानों में बड़े पैमाने पर हुई नियुक्तियों से वर्षों से लंबित फैकल्टी की कमी दूर होगी। इससे विश्वविद्यालयों में शिक्षण गुणवत्ता, शोध गतिविधियां और पीएचडी पर्यवेक्षण क्षमता में सुधार होगा। दूसरी ओर, स्कूल शिक्षा में अभी भी राज्यों के स्तर पर शिक्षक भर्ती की गति अलग-अलग है। यदि सभी राज्य समयबद्ध तरीके से रिक्तियां भरते हैं तो सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था और मजबूत हो सकती है।
राज्यसभा में प्रस्तुत जानकारी से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार उच्च शिक्षा संस्थानों में रिक्त पदों को भरने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है और अब तक 32 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं। साथ ही, पीएचडी में रिकॉर्ड वृद्धि यह संकेत देती है कि देश में शोध और नवाचार का दायरा लगातार बढ़ रहा है। वहीं स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में केंद्र सरकार राज्यों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है कि वे पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया अपनाकर शिक्षकों की कमी दूर करें, ताकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सके।
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