चक्रधरपुर: गोईलकेरा प्रखंड के बिला पंचायत के ग्रामीणों ने Water जीवन मिशन के तहत संचालित जलापूर्ति योजना में कथित अनियमितताओं और लंबे समय से अधूरे पड़े कार्यों के विरोध में बुधवार को चक्रधरपुर स्थित पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (पीएचईडी) के कार्यपालक अभियंता कार्यालय का घेराव कर धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने योजना को जल्द पूरा कराने और पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई।
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई योजना का लाभ अब तक लोगों को नहीं मिल पाया है, जिससे क्षेत्र के हजारों परिवार आज भी पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
58.25 करोड़ रुपये की योजना अब तक अधूरी
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के अनुसार बिला पंचायत में Water जीवन मिशन के तहत लगभग 58.25 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ी जलापूर्ति योजना शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य गोईलकेरा और मनोहरपुर प्रखंड के 50 से अधिक गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था।

ग्रामीणों का आरोप है कि योजना शुरू हुए लगभग पांच वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी अधिकांश कार्य अधूरे पड़े हैं। इसके कारण हजारों लोगों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है और उन्हें पेयजल के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
पाइपलाइन और जलमीनार निर्माण अधूरा होने का आरोप
धरना दे रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि योजना के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने का कार्य अधूरा है। वहीं कई स्थानों पर जलमीनारों का निर्माण भी पूरा नहीं किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि अधूरे निर्माण कार्य के कारण जलापूर्ति व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है, जिससे पूरे क्षेत्र में पेयजल संकट लगातार बना हुआ है। लोगों को आज भी दूर-दराज के जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने लगाए भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने योजना के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और विभागीय लापरवाही के आरोप लगाए। उनका कहना है कि बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित कार्य नहीं दिखाई दे रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि योजना का कार्य समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाता तो आज क्षेत्र के लोगों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा मिल चुकी होती। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
पीएचईडी कार्यालय के समक्ष सौंपा गया ज्ञापन
धरना प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों के प्रतिनिधिमंडल ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में योजना की उच्चस्तरीय जांच कराने, अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई।
इसके अलावा प्रभावित गांवों में जल्द से जल्द नियमित जलापूर्ति शुरू करने और कार्यों की गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग रखी गई।
जल संकट से परेशान हैं ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि भीषण गर्मी और बदलते मौसम के बीच पेयजल की समस्या और गंभीर हो गई है। योजना के अधूरी रहने के कारण लोगों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
महिलाओं और बच्चों को विशेष रूप से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई गांवों में आज भी लोग कुओं, चापाकलों और अन्य सीमित जलस्रोतों पर निर्भर हैं, जिससे दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
Water जीवन मिशन की सफलता पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, लेकिन बिला पंचायत की स्थिति इस लक्ष्य के विपरीत दिखाई दे रही है।
उनका आरोप है कि यदि समय पर कार्य पूरा होता और निगरानी प्रभावी रहती तो करोड़ों रुपये की योजना का लाभ अब तक लोगों को मिल चुका होता। अधूरे कार्यों के कारण योजना की उपयोगिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन होगा तेज
ग्रामीणों ने प्रशासन और विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अधूरे कार्य पूरे नहीं किए गए और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों के हितों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर बड़े स्तर पर जनआंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि विभाग उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा और जल्द आवश्यक कार्रवाई करेगा।
जनहित से जुड़ा है पेयजल का मुद्दा
पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा हर नागरिक का अधिकार है। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत वाली योजना का वर्षों तक अधूरा रहना स्थानीय लोगों की चिंता का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें विभागीय कार्रवाई और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि आखिर कब तक इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ क्षेत्र के लोगों तक पहुंच पाएगा और पेयजल संकट से उन्हें राहत मिलेगी।
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