नई दिल्ली: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना PMMVY देशभर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा वर्ष 2017 में शुरू की गई यह योजना गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर सुरक्षित मातृत्व, बेहतर पोषण और नवजात शिशुओं की समुचित देखभाल सुनिश्चित करने का कार्य कर रही है।
योजना के माध्यम से महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं लेने, पौष्टिक आहार अपनाने और संस्थागत प्रसव के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के साथ-साथ स्वस्थ भारत के निर्माण की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
मिशन शक्ति के तहत योजना को मिला नया स्वरूप
एक अप्रैल 2022 से प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना को मिशन शक्ति कार्यक्रम में शामिल किया गया। इसके बाद योजना के स्वरूप में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए।

पहले जहां मातृत्व लाभ तीन किस्तों में दिया जाता था, वहीं अब इसे दो किस्तों में प्रदान किया जाता है। इसके अलावा योजना का दायरा बढ़ाते हुए दूसरे बच्चे के लिए भी लाभ देने का प्रावधान किया गया है, बशर्ते दूसरा शिशु बालिका हो। इस बदलाव का उद्देश्य बालिका जन्म को प्रोत्साहित करना और लैंगिक समानता को मजबूत करना है।
पहले और दूसरे बच्चे के लिए कितनी मिलती है आर्थिक सहायता
प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना के तहत पात्र महिलाओं को पहले बच्चे के जन्म पर दो किस्तों में कुल 5,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
यदि दूसरा शिशु बालिका होती है तो लाभार्थी महिला को 6,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाती है। यह राशि गर्भावस्था के प्रारंभिक पंजीकरण, प्रसवपूर्व जांच, टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण चरणों से जुड़ी होती है।
इस वित्तीय सहायता का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन, आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं और प्रसव पूर्व एवं प्रसव पश्चात पर्याप्त आराम उपलब्ध कराना है।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से पारदर्शी भुगतान व्यवस्था
प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) तंत्र है। इसके माध्यम से पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे सहायता राशि भेजी जाती है।
इस व्यवस्था से पारदर्शिता बनी रहती है और लाभार्थियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित होता है। साथ ही योजना में गर्भ क्षति (Miscarriage) या मृत शिशु जन्म जैसी परिस्थितियों के लिए भी नए पात्रता प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे यह योजना पहले की तुलना में अधिक समावेशी बन गई है।
आर्थिक सहायता से महिलाओं को मिल रही बड़ी राहत
गर्भावस्था के दौरान कई गरीब और जरूरतमंद परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत मिलने वाली सहायता महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण सहारा साबित हो रही है।
इस राशि की मदद से महिलाएं पौष्टिक भोजन खरीदने, नियमित स्वास्थ्य जांच कराने और आवश्यक दवाइयों की व्यवस्था कर पा रही हैं। इससे गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम हो रहे हैं और सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा मिल रहा है।
30 अप्रैल 2026 तक करोड़ों महिलाओं को मिला लाभ
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का विस्तार लगातार बढ़ रहा है और इसका लाभ देशभर में करोड़ों महिलाओं तक पहुंच चुका है।
30 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- योजना के तहत 4.27 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को भुगतान किया जा चुका है।
- अब तक 20,150 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष रूप से हस्तांतरित की जा चुकी है।
ये आंकड़े इस योजना की व्यापक पहुंच और प्रभावशीलता को दर्शाते हैं।
जमीनी स्तर पर दिख रहा योजना का सकारात्मक प्रभाव
प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना का वास्तविक प्रभाव ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
ऐसी कई महिलाएं जिन्हें पहले गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं, अब योजना की आर्थिक सहायता से नियमित प्रसवपूर्व जांच करा रही हैं। उन्हें पौष्टिक भोजन और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं, जिससे वे स्वस्थ शिशुओं को सुरक्षित रूप से जन्म देने में सक्षम हो रही हैं।
योजना ने मातृत्व के दौरान वित्तीय चिंता को कम कर महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है।
संस्थागत प्रसव और बालिका जन्म को मिल रहा बढ़ावा
प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करना भी है। योजना के कारण अधिक महिलाएं अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव करा रही हैं, जिससे प्रसव के दौरान होने वाले जोखिमों में कमी आई है।
इसके अलावा दूसरे बच्चे के रूप में बालिका जन्म पर अतिरिक्त सहायता राशि देने की व्यवस्था ने समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा दिया है। यह पहल लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
स्वस्थ भारत के निर्माण में निभा रही अहम भूमिका
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का मानना है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने वाली योजना नहीं है, बल्कि यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार का एक व्यापक अभियान है।
योजना के माध्यम से पोषण, सुरक्षित मातृत्व, संस्थागत प्रसव और शिशु स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे देश में स्वस्थ और सशक्त परिवारों के निर्माण में भी मदद मिल रही है।
प्रधानमंत्री मातृ Vandana योजना आज देश की करोड़ों महिलाओं के लिए सुरक्षा कवच बनकर उभरी है। वित्तीय सहायता, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण संबंधी जागरूकता के माध्यम से यह योजना मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को नई मजबूती प्रदान कर रही है। सरकार की यह पहल न केवल सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा दे रही है, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण, बालिका संरक्षण और स्वस्थ भारत के लक्ष्य को भी मजबूती से आगे बढ़ा रही है। आने वाले समय में योजना का दायरा और प्रभाव बढ़ने से देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सूचकांकों में और अधिक सुधार की उम्मीद की जा रही है।
🚨 क्राइम
🌿 झारखंड
🏛️ बिहार
🌍 विश्व

रक्षा मंत्री ने सीतापुर में 250 मेगावाट सौर Energy परियोजना को दी मंजूरी रक्षा भूमि पर बनेगी देश की पहली सोलर-बीईएसएस परियोजना
















