नई दिल्ली। अगर आप दिल्ली घूमने का प्लान बना रहे हैं और आपकी सूची में राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति भवन संग्रहालय या अमृत उद्यान शामिल है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। 11 से 13 सितंबर 2026 तक आम लोगों के लिए राष्ट्रपति भवन, राष्ट्रपति भवन संग्रहालय और अमृत उद्यान में प्रवेश बंद रहेगा। इतना ही नहीं, 12 सितंबर शनिवार को होने वाला गार्ड परिवर्तन समारोह भी आयोजित नहीं किया जाएगा।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर इन तीनों जगहों में ऐसा क्या खास है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं? आइए, एक छोटी-सी कहानी की तरह जानते हैं राष्ट्रपति भवन की उस दुनिया को, जहां इतिहास, लोकतंत्र, कला और प्रकृति एक साथ दिखाई देते हैं।
जहां से निकलती हैं देश की बड़ी तस्वीरें
दिल्ली की रायसीना पहाड़ी पर खड़ी विशाल इमारत को देखकर शायद पहली नजर में अंदाजा न हो कि इसके भीतर कितनी कहानियां छिपी हैं। यही है राष्ट्रपति भवन—भारत के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास।

इस विशाल भवन का विचार 1911 में आया, जब ब्रिटिश भारत की राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित करने का फैसला हुआ। वास्तुकार एडविन लुटियंस ने इसकी डिजाइन तैयार की। निर्माण 1912 में शुरू हुआ और करीब 17 साल बाद 1929 में पूरा हुआ। भवन में लगभग 340 कमरे और करीब 2.5 किलोमीटर लंबे गलियारे हैं। इसकी वास्तुकला में भारतीय परंपरा की झलक भी दिखाई देती है—गुंबद, छतरियां और जाली का काम इसे खास बनाते हैं।
यानी यह सिर्फ राष्ट्रपति का घर नहीं, बल्कि भारत के राजनीतिक और संवैधानिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अब चलते हैं संग्रहालय की ओर…
कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे संग्रहालय में प्रवेश करते हैं, जहां इतिहास सिर्फ तस्वीरों में नहीं बल्कि राष्ट्रपतियों से जुड़ी असली वस्तुओं और आधुनिक तकनीक के जरिए आपके सामने जीवंत होता है।
राष्ट्रपति भवन संग्रहालय को इसी अंदाज में तैयार किया गया है। यहां पूर्व राष्ट्रपतियों को मिले उपहार, कलाकृतियां, फर्नीचर, वस्त्र, तस्वीरें, अभिलेखीय सामग्री और ऐतिहासिक वस्तुएं प्रदर्शित की गई हैं। संग्रहालय के एक हिस्से में 200 से अधिक उपहार भी प्रदर्शित हैं। (Rashtrapati Bhavan)
यहां राष्ट्रपति के पुराने सामान भी देखने को मिलते हैं। इनमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से जुड़े सफारी सूट भी शामिल हैं। संग्रहालय में राष्ट्रपति की कार और संविधान निर्माण से जुड़े दृश्यों के डायोरामा भी प्रदर्शित हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहां इतिहास को केवल कांच के अंदर रखकर नहीं दिखाया गया है। वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी, होलोग्राम, वीडियो वॉल और 3D प्रोजेक्शन जैसी तकनीकों के माध्यम से घटनाओं को कहानी की तरह समझाया जाता है।
और फिर आता है प्रकृति का संसार—अमृत उद्यान
राष्ट्रपति भवन से जुड़ी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। इसके परिसर में मौजूद अमृत उद्यान मानो पत्थरों और भव्य इमारतों के बीच प्रकृति का अपना अध्याय लिखता है।
लगभग 15 एकड़ में फैला अमृत उद्यान विभिन्न हिस्सों में बंटा है। यहां सेंट्रल लॉन, लॉन्ग गार्डन, सर्कुलर गार्डन, म्यूजिकल गार्डन, आध्यात्मिक उद्यान, सेंसररी/टैक्टाइल गार्डन और आरोग्य वनम् जैसे हिस्से हैं।
कहीं फूलों की कतारें हैं, तो कहीं पानी की धाराएं। लॉन्ग गार्डन खासतौर पर गुलाबों के लिए जाना जाता है, जबकि सर्कुलर गार्डन में कई तरह के मौसमी फूल इसकी खूबसूरती बढ़ाते हैं। यहां बच्चों के लिए बाल वाटिका, बोनसाई गार्डन और प्रकृति से जुड़ी कई आकर्षक चीजें भी हैं।
यानी राष्ट्रपति भवन की यात्रा में एक तरफ इतिहास और सत्ता की कहानी है, दूसरी तरफ संग्रहालय में लोकतंत्र की यादें और तीसरी तरफ अमृत उद्यान में प्रकृति की खूबसूरती।
11 से 13 सितंबर तक क्यों रहेगा बंद?
अब वापस उस जरूरी खबर पर लौटते हैं। राष्ट्रपति भवन की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार 11, 12 और 13 सितंबर 2026 को राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति भवन संग्रहालय आम लोगों के लिए बंद रहेंगे। इस अवधि में 12 सितंबर का नियमित शनिवार वाला गार्ड परिवर्तन समारोह भी नहीं होगा। (Rashtrapati Bhavan)
इसलिए अगर आपने इन दिनों राष्ट्रपति भवन देखने की योजना बनाई है, तो अपनी यात्रा की तारीख बदलना बेहतर होगा।
क्योंकि राष्ट्रपति भवन को सिर्फ बाहर से देखने की कहानी अधूरी है। इसकी असली कहानी तब शुरू होती है, जब आप इसके इतिहास, संग्रहालय की वस्तुओं और अमृत उद्यान की खूबसूरती को एक साथ महसूस करते हैं।




















