नई दिल्ली। मेहनत, अनुभव और सरकारी आर्थिक सहायता के बेहतर इस्तेमाल से स्वच्छता कर्मी अजय कुमार ने अपनी आजीविका को नए मुकाम तक पहुंचाया है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी 39 वर्षीय अजय कुमार ने नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) के तहत मिली सहायता से मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं का विस्तार किया। इसके बाद उनकी मासिक आय बढ़कर करीब 30 से 35 हजार रुपये हो गई है।

अजय कुमार गाजियाबाद के मोहन नगर क्षेत्र की राजीव कॉलोनी में रहते हैं। आर्थिक परिस्थितियां कमजोर होने के कारण वह आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई जारी नहीं रख सके। कम उम्र से ही परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में हाथ बंटाने लगे और बाद में स्वच्छता से जुड़े काम को अपनी आजीविका का जरिया बनाया।

सीवर और सेप्टिक टैंक के काम का मिला अनुभव

कई वर्षों तक स्वच्छता सेवाओं में काम करते हुए अजय कुमार ने सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़े कार्यों का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया। वह मोहन नगर क्षेत्र में नगर निगम गाजियाबाद के अंतर्गत ट्रैक्टर और सीवर-सक्शन से संबंधित कार्य करते रहे।

हालांकि सीमित संसाधनों के कारण वह अपने काम का विस्तार नहीं कर पा रहे थे। परिवार के बढ़ते खर्च, बच्चों की पढ़ाई और मां के इलाज की जिम्मेदारी ने आर्थिक दबाव और बढ़ा दिया था।

11.34 लाख की परियोजना से बढ़ा कारोबार

अजय कुमार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की नमस्ते योजना के स्वच्छता उद्यमी योजना के तहत ट्रैक्टर-कम-सीवर सक्शन मशीन खरीदने के लिए आर्थिक सहायता मिली। परियोजना की कुल लागत 11.34 लाख रुपये थी।

इसमें 7.25 लाख रुपये का ऋण और 4.08 लाख रुपये की अग्रिम पूंजीगत सब्सिडी शामिल थी। इस सहायता से उन्होंने मशीनीकृत स्वच्छता उपकरण हासिल किया और अपनी सेवाओं का दायरा बढ़ाया। ऋण की मासिक किस्त करीब 11,460 रुपये है।

30-35 हजार रुपये तक पहुंची मासिक आय

मशीनीकृत उपकरण मिलने के बाद उनके काम की क्षमता और पहुंच में सुधार हुआ। सरकारी सहायता से शुरू हुए इस उद्यम के जरिए उनकी मासिक आय अब करीब 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

मासिक किस्त और कारोबार से जुड़े खर्च निकालने के बाद वह लगभग 10 से 20 हजार रुपये तक बचत कर पा रहे हैं। इससे परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है।

बेटियों की पढ़ाई और मां के इलाज में मिली राहत

अजय कुमार के परिवार में पत्नी और तीन बेटियां हैं। उनकी मां को नियमित डायलिसिस की जरूरत पड़ती है, जिसके इलाज का खर्च भी परिवार की बड़ी जिम्मेदारी है। बढ़ी हुई आय से अब वह अपनी बेटियों की शिक्षा, घरेलू जरूरतों और मां के इलाज का खर्च अधिक आसानी से उठा पा रहे हैं।

अजय कुमार के मुताबिक बेहतर आजीविका मिलने से वह अपने परिवार की जिम्मेदारियां अब ज्यादा आत्मविश्वास और सम्मान के साथ निभा पा रहे हैं।

दूसरे स्वच्छता कर्मियों के लिए भी मिसाल

अजय कुमार की सफलता यह दिखाती है कि उचित वित्तीय सहायता, मशीनीकरण और स्वरोजगार के अवसर मिलने पर स्वच्छता कर्मी अपने पारंपरिक काम को एक स्थायी उद्यम में बदल सकते हैं। उनकी कहानी नमस्ते-सुय के तहत आजीविका सहायता और स्वच्छता सेवाओं के मशीनीकरण के उद्देश्य को भी रेखांकित करती है।

सरकारी सहायता से मिले संसाधनों का उपयोग कर अजय कुमार ने न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि अपने परिवार के लिए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य की दिशा में भी कदम बढ़ाया है।