जमशेदपुर: Bagbera नया बस्ती क्षेत्र में बाढ़ का पानी निकलने के बाद अब लोगों ने अपने-अपने घरों की साफ-सफाई शुरू कर दी है। बाढ़ के पानी के कारण घरों में जमा गंदगी और कीचड़ को हटाने का काम स्थानीय लोग कर रहे हैं। इसी बीच बागबेड़ा महानगर विकास समिति के अध्यक्ष सह भाजपा नेता सुबोध झा ने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की मांग जिला प्रशासन से की है।
सुबोध झा ने कहा कि बागबेड़ा क्षेत्र को बार-बार होने वाली बाढ़ से बचाने के लिए केवल बाढ़ के दौरान राहत और पानी निकालने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, खरकई नदी में मिलने वाले शिव घाट के पास नाले पर स्लुइस गेट का निर्माण किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही पानी की निकासी के लिए 50 एचपी क्षमता के दो मोटर लगाने की व्यवस्था करने की मांग भी उन्होंने की है।
बाढ़ का पानी निकलने के बाद सफाई में जुटे लोग
Bagbera नया बस्ती में बाढ़ का पानी कम होने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। पानी निकलने के बाद अब घरों में जमा गंदगी, कीचड़ और अन्य कचरे की सफाई शुरू कर दी गई है।

बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश करने के बाद कई परिवारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। पानी निकलने के बाद भी लोगों के सामने घरों की सफाई और पीने के पानी की व्यवस्था जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।
सुबोध झा ने प्रशासन से आग्रह किया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में तत्काल राहत के साथ-साथ साफ-सफाई और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए।
स्लुइस गेट को बताया स्थायी समाधान का जरूरी हिस्सा
सुबोध झा ने कहा कि बागबेड़ा में बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए स्लुइस गेट का निर्माण आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से खरकई नदी में मिलने वाले शिव घाट के पास नाले का उल्लेख करते हुए वहां स्लुइस गेट लगाने की मांग की।
उनका कहना है कि जब तक नाले पर स्लुइस गेट का निर्माण नहीं होगा, तब तक बाढ़ के पानी के आने-जाने की समस्या बनी रह सकती है। उन्होंने जिला प्रशासन से इस दिशा में तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
पूर्व में भी बागबेड़ा क्षेत्र में बाढ़ के दौरान स्लुइस गेट और जल निकासी से जुड़े मुद्दे उठते रहे हैं। हाल की बाढ़ के दौरान भी स्थानीय स्तर पर नाले के रास्ते पानी बस्तियों में आने को लेकर चिंता जताई गई थी।
50 एचपी के दो मोटर लगाने की मांग
सुबोध झा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पानी निकालने के लिए 50 एचपी के दो मोटर लगाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि इन मोटरों के माध्यम से आवश्यकता पड़ने पर पानी को नदी में भेजने की व्यवस्था की जा सकती है।
उनके अनुसार, केवल प्राकृतिक रूप से पानी उतरने का इंतजार करने के बजाय जल निकासी के लिए स्थायी और प्रभावी व्यवस्था तैयार की जानी चाहिए। इससे बाढ़ के बाद प्रभावित इलाकों से पानी जल्द निकालने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि इस व्यवस्था को केवल तत्काल राहत के रूप में नहीं बल्कि भविष्य में बाढ़ की स्थिति से निपटने की स्थायी योजना के रूप में देखा जाए।
हर साल बाढ़ की समस्या से जूझते हैं लोग”
सुबोध झा ने कहा कि बागबेड़ा के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बारिश और नदी का जलस्तर बढ़ने के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से कहा कि समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाना जरूरी है।
हाल की बाढ़ के दौरान भी बागबेड़ा नया बस्ती के निचले इलाकों में कई घरों में पानी प्रवेश करने की रिपोर्ट सामने आई थी। एक रिपोर्ट में करीब 30 से 40 घरों में पानी पहुंचने का उल्लेख किया गया था, जबकि अन्य स्थानीय रिपोर्ट में प्रभावित घरों की संख्या अधिक बताई गई थी।
बाढ़ के बाद पेयजल संकट की चिंता
बाढ़ का पानी निकलने के बाद प्रभावित इलाकों में पेयजल को लेकर भी चिंता बनी हुई है। बाढ़ का पानी कई स्थानों पर हैंडपंप और अन्य जलस्रोतों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में लोगों के लिए साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना जरूरी हो जाता है।
सुबोध झा ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि जब तक स्थानीय जलस्रोत पूरी तरह साफ और उपयोग के योग्य नहीं हो जाते, तब तक टैंकर से पेयजल आपूर्ति लोगों के लिए राहत का माध्यम बन सकती है।
बागबेड़ा में पेयजल संकट के समय टैंकरों से पानी उपलब्ध कराने की मांग पहले भी सामने आती रही है।
ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग
बाढ़ का पानी घरों और आसपास के इलाकों में जमा होने के बाद संक्रमण और गंदगी की समस्या भी सामने आती है। इसे देखते हुए सुबोध झा ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराने और उसके छिड़काव की मांग की है।
उनका कहना है कि पानी निकलने के बाद प्रभावित इलाकों में सफाई अभियान चलाना जरूरी है। घरों के अलावा गलियों, नालियों और सार्वजनिक स्थानों की भी सफाई कराई जानी चाहिए।
बाढ़ के बाद साफ-सफाई में देरी होने पर लोगों को दुर्गंध और दूषित पानी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए उन्होंने प्रशासन से तत्काल सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की अपील
सुबोध झा ने जिला प्रशासन से आग्रह किया कि बागबेड़ा की बाढ़ समस्या को गंभीरता से लेते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि राहत कार्य के साथ भविष्य की तैयारी भी जरूरी है।
उनकी मांगों में स्लुइस गेट का निर्माण, 50 एचपी के दो मोटर लगाने की व्यवस्था, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर से पेयजल आपूर्ति और ब्लीचिंग पाउडर उपलब्ध कराना शामिल है।
उन्होंने प्रशासन से कहा कि इन व्यवस्थाओं पर जल्द कार्रवाई होने से बागबेड़ा के लोगों को भविष्य में बाढ़ की स्थिति के दौरान राहत मिल सकती है।
बाढ़ के बाद स्थायी समाधान पर जोर
Bagbera में बाढ़ की समस्या केवल पानी आने तक सीमित नहीं रहती। पानी निकलने के बाद भी घरों की सफाई, पेयजल, कीचड़, गंदगी और जलजनित समस्याओं से लोगों को जूझना पड़ता है।
इसी वजह से सुबोध झा ने तत्काल राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधान की मांग की है। उनका जोर नाले पर स्लुइस गेट और पर्याप्त पंपिंग व्यवस्था तैयार करने पर है।
उनका कहना है कि यदि जल निकासी की उचित व्यवस्था पहले से तैयार रहे तो बाढ़ की स्थिति में प्रभावित इलाकों से पानी निकालने में समय कम लग सकता है।
Bagbera के लोगों को स्थायी राहत का इंतजार
Bagbera नया बस्ती में बाढ़ का पानी निकलने के बाद लोगों ने अपने घरों को व्यवस्थित करने का काम शुरू कर दिया है। लेकिन स्थानीय लोगों के सामने भविष्य में फिर ऐसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है।
ऐसे में प्रशासन के सामने तत्काल राहत के साथ-साथ जल निकासी की स्थायी व्यवस्था विकसित करने की चुनौती है। सुबोध झा ने इसी मुद्दे को उठाते हुए स्लुइस गेट और पंपिंग व्यवस्था की मांग की है।
फिलहाल बाढ़ प्रभावित परिवार अपने स्तर पर घरों की सफाई में जुटे हैं। प्रशासन की ओर से पेयजल, सफाई और ब्लीचिंग पाउडर की व्यवस्था तथा स्थायी जल निकासी समाधान को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है।




















