जमशेदपुर: स्वच्छता ही सेवा (SHS) 2026 अभियान के तहत NIT जमशेदपुर में ई-कचरा प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। संस्थान के GoGreen Club द्वारा टाटा स्टील UISL RRR Centres के सहयोग से “E-Waste to Responsible Recycling” विषय पर ई-वेस्ट संग्रहण अभियान आयोजित किया गया। अभियान का उद्देश्य संस्थान के विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं उनके परिवार के सदस्यों को ई-कचरे के जिम्मेदार निस्तारण, वैज्ञानिक पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति के प्रति जागरूक करना था।
अभियान को संस्थान समुदाय की ओर से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। लोगों ने अपने घरों और कार्यस्थलों में अनुपयोगी पड़े इलेक्ट्रॉनिक एवं विद्युत उपकरणों को अभियान के तहत जमा कराया। अभियान के दौरान कुल 160 इलेक्ट्रॉनिक एवं विद्युत उपकरणों से लगभग 58.42 किलोग्राम ई-कचरा एकत्र किया गया।
160 इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से जुटाया गया 58.42 किलो ई-कचरा
ई-वेस्ट संग्रहण अभियान के दौरान विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक और विद्युत उपकरण जमा किए गए। इनमें प्रिंटर कार्ट्रिज, यूपीएस, लैपटॉप, मोबाइल फोन, की-बोर्ड, माउस, माइक्रोवेव ओवन, केबल, चार्जर और वाई-फाई राउटर प्रमुख रूप से शामिल रहे।

इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक खिलौने, स्मार्ट वॉच, बैटरियां, पावर बैंक, सेट-टॉप बॉक्स, डिश एंटीना सहित कई अन्य अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक एवं विद्युत उपकरण भी संग्रहित किए गए। इस तरह अभियान ने घरों और संस्थान समुदाय के बीच जमा हो रहे विभिन्न प्रकार के ई-कचरे को जिम्मेदार तरीके से संग्रहित करने का अवसर उपलब्ध कराया।
ई-कचरे को सामान्य कचरे से अलग रखने पर जोर
अभियान के दौरान प्रतिभागियों को ई-कचरे के उचित प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। लोगों को बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से निकलने वाले कचरे को सामान्य घरेलू कचरे के साथ नहीं मिलाना चाहिए। इसे अलग एकत्र कर अधिकृत माध्यमों के जरिए पुनर्चक्रण के लिए देना आवश्यक है।
प्रतिभागियों को ई-कचरे के पृथक्करण और जिम्मेदार निस्तारण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। उन्हें समझाया गया कि पुराने मोबाइल फोन, चार्जर, बैटरियां, कंप्यूटर से जुड़े उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं बेकार हो जाने के बाद भी उनमें कई उपयोगी संसाधन मौजूद हो सकते हैं।
टाटा स्टील UISL RRR Centres की टीम ने दी जानकारी
अभियान में टाटा स्टील UISL RRR Centres की टीम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम ने प्रतिभागियों को बताया कि संग्रहित इलेक्ट्रॉनिक कचरे को किस प्रकार वैज्ञानिक एवं जिम्मेदार तरीके से संसाधित किया जाता है।
इस दौरान यह जानकारी दी गई कि उचित पुनर्चक्रण प्रक्रिया के माध्यम से ई-कचरे में मौजूद उपयोगी सामग्रियों और संसाधनों को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। इससे संसाधनों को दोबारा उपयोग में लाने और कचरे के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है।
इस पहल के माध्यम से प्रतिभागियों को संसाधन पुनर्प्राप्ति और चक्रीय अपशिष्ट प्रबंधन की अवधारणा से भी परिचित कराया गया।
निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने बताया सामूहिक जिम्मेदारी
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने ई-कचरे के जिम्मेदार निस्तारण को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सामूहिक जिम्मेदारी बताया।
उन्होंने कहा कि ई-कचरे का जिम्मेदार निस्तारण पर्यावरण संरक्षण और मूल्यवान संसाधनों की पुनर्प्राप्ति की दिशा में आवश्यक कदम है। ऐसे प्रयास स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
उन्होंने संस्थान समुदाय की भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों को सफल बनाने में विद्यार्थियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और उनके परिवारों की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है।
Spin & Win गतिविधि ने बढ़ाया उत्साह
ई-वेस्ट संग्रहण अभियान को अधिक सहभागी और रोचक बनाने के लिए “Spin & Win” गतिविधि का भी आयोजन किया गया। इसके तहत कम से कम तीन ई-वेस्ट वस्तुएं लाने वाले प्रतिभागियों को इस गतिविधि में भाग लेने का अवसर दिया गया।
प्रतिभागियों को गतिविधि के माध्यम से छोटे पर्यावरण-अनुकूल उपहार भी दिए गए। इस पहल से लोगों में ई-वेस्ट जमा करने को लेकर उत्साह बढ़ा और अभियान में अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने में मदद मिली।
GoGreen Club के स्वयंसेवकों की रही अहम भूमिका
अभियान को सफल बनाने में एनआईटी जमशेदपुर के GoGreen Club के स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वयंसेवकों ने ई-वेस्ट संग्रहण, प्रतिभागियों को जानकारी देने और अभियान की गतिविधियों के संचालन में सक्रिय योगदान दिया।
संस्थान ने अभियान के सफल आयोजन में योगदान देने वाले GoGreen Club के सभी स्वयंसेवकों के समर्पित प्रयासों की सराहना की। स्वयंसेवकों की सक्रियता के कारण अभियान को संस्थान समुदाय के बीच व्यापक स्तर पर पहुंचाने में मदद मिली।
टाटा स्टील UISL के सहयोग के लिए जताया आभार
एनआईटी जमशेदपुर ने ई-कचरे के जिम्मेदार पुनर्चक्रण और संसाधन पुनर्प्राप्ति के लिए सहयोग प्रदान करने हेतु टाटा स्टील UISL के प्रति आभार व्यक्त किया। संस्थान ने विशेष रूप से श्री मनोज सिंह शेखावत के सहयोग को भी सराहा।
संस्थान की ओर से कहा गया कि पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी ऐसी पहल तभी प्रभावी हो सकती है, जब विभिन्न संस्थाएं और समुदाय मिलकर जिम्मेदारी निभाएं। ई-कचरे के उचित प्रबंधन के लिए सहयोगात्मक प्रयास इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. नवीन कुमार वेलदुर्थी के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
कार्यक्रम का समग्र समन्वय डॉ. नवीन कुमार वेलदुर्थी, नोडल अधिकारी, स्वच्छता ही सेवा, एनआईटी जमशेदपुर के मार्गदर्शन में किया गया।
कार्यक्रम के समन्वय में डॉ. श्री कृष्ण सुधाम्सु, डॉ. कनिका प्रसाद एवं श्री प्रवोत रॉय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों ने अभियान को सफल बनाने के लिए समन्वित रूप से कार्य किया।
जिम्मेदार उपभोग और संसाधन पुनर्प्राप्ति का दिया संदेश
ई-वेस्ट संग्रहण अभियान ने संस्थान समुदाय के बीच जिम्मेदार उपभोग, कचरे के उचित पृथक्करण, संसाधन पुनर्प्राप्ति और चक्रीय अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर जागरूकता बढ़ाने का काम किया।
अभियान के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल बड़े स्तर की योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि घरों और संस्थानों में रोजमर्रा के कचरे के उचित प्रबंधन से भी इसकी शुरुआत की जा सकती है। पुराने इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को इधर-उधर फेंकने के बजाय अधिकृत माध्यमों से पुनर्चक्रण के लिए देना पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार का हिस्सा है।
स्वच्छ और सतत परिसर की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
NIT जमशेदपुर में आयोजित यह ई-वेस्ट संग्रहण अभियान स्वच्छता ही सेवा 2026 के उद्देश्यों के अनुरूप स्वच्छ और सतत परिसर के निर्माण की दिशा में संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
अभियान के दौरान एकत्र किए गए 58.42 किलोग्राम ई-कचरे और 160 इलेक्ट्रॉनिक एवं विद्युत उपकरणों का संग्रहण संस्थान समुदाय की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है। इस पहल ने जहां अनुपयोगी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उचित प्रबंधन का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया, वहीं विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों को पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर भी दिया।
एनआईटी जमशेदपुर की यह पहल ई-कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, उपयोगी संसाधनों की पुनर्प्राप्ति और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आई। अभियान से यह संदेश भी मजबूत हुआ कि सामूहिक भागीदारी और जिम्मेदार व्यवहार के माध्यम से स्वच्छ, स्वस्थ और सतत भविष्य के निर्माण में योगदान दिया जा सकता है।




















