जमशेदपुर: पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में जनसुविधाओं से संबंधित समस्याओं को लेकर प्रतिनिधि मुकुल मिश्रा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल को पूर्वी सिंहभूम के DM से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) द्वारा जनहित से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों के क्रियान्वयन में बरती जा रही कथित उदासीनता और लापरवाही का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया।
प्रतिनिधिमंडल ने DM को अवगत कराया कि क्षेत्र के नागरिक लंबे समय से साफ-सफाई, कचरा उठाव, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक शौचालय, पेयजल व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, लेकिन जेएनएसी की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा रही है।
डोर-टू-डोर कचरा उठाव व्यवस्था पर सवाल
ज्ञापन में सबसे प्रमुख रूप से डोर-टू-डोर कचरा उठाव व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं का उल्लेख किया गया। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि कई इलाकों में नियमित रूप से कचरा संग्रहण नहीं हो रहा है, जिसके कारण सड़कों और मोहल्लों में गंदगी का अंबार लग रहा है।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होने से न केवल लोगों को परेशानी हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं। गर्मी और बरसात के मौसम में गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बनी रहती है।
साफ-सफाई की व्यवस्था नहीं होने से बढ़ रही परेशानी
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि कई क्षेत्रों में नियमित सफाई नहीं होने के कारण नागरिकों को गंभीर असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। नालियों की सफाई समय पर नहीं हो रही है और कई स्थानों पर कचरा लंबे समय तक जमा रहता है।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि नगर प्रशासन की ओर से सफाई व्यवस्था की प्रभावी निगरानी नहीं की जा रही है, जिसके कारण स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है।
खराब स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइटें बनी चिंता का विषय
ज्ञापन में क्षेत्र की खराब पड़ी स्ट्रीट लाइटों और हाईमास्ट लाइटों की समस्या भी प्रमुखता से उठाई गई। बताया गया कि कई स्थानों पर लंबे समय से स्ट्रीट लाइटें खराब हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है।
रात के समय अंधेरे के कारण लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। साथ ही सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ जाती हैं। प्रतिनिधिमंडल ने खराब पड़ी सभी स्ट्रीट लाइटों और हाईमास्ट लाइटों की शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की।
निविदा के बावजूद शुरू नहीं हुए विकास कार्य
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि पिछले वर्ष कई बार निविदा रद्द होने के बाद जिन योजनाओं की निविदा निकाली गई थी, उन कार्यों को अब तक प्रारंभ नहीं किया गया है।
प्रतिनिधिमंडल ने सवाल उठाया कि जब योजनाओं की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो विकास कार्यों में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने लंबित योजनाओं को शीघ्र शुरू कराने की मांग की।
खराब चापाकलों की मरम्मत नहीं होने से लोग परेशान
गर्मी के मौसम में पेयजल संकट को देखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत का मुद्दा भी उठाया। ज्ञापन में कहा गया कि क्षेत्र के कई चापाकल लंबे समय से खराब पड़े हैं, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं कराई जा रही है।
इस कारण स्थानीय लोगों को पेयजल के लिए अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने खराब चापाकलों को अविलंब दुरुस्त कराने की मांग की।
सार्वजनिक शौचालयों की बदहाल स्थिति
ज्ञापन में सार्वजनिक शौचालयों की साफ-सफाई और रखरखाव की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों का कहना था कि कई सार्वजनिक शौचालयों की नियमित सफाई नहीं हो रही है, जिससे वहां गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों को सफल बनाने के लिए सार्वजनिक शौचालयों का बेहतर संचालन और रखरखाव सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
ई-रिक्शा उपलब्ध होने के बावजूद बाधित है कचरा उठाव
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि विधायक निधि से कचरा उठाव व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए छह ई-रिक्शा उपलब्ध कराए गए हैं। इसके बावजूद कचरा उठाव कार्य प्रभावित हो रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने सवाल उठाया कि पर्याप्त संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद व्यवस्था सुचारु रूप से क्यों नहीं चल रही है। उन्होंने इस संबंध में जवाबदेही तय करने की मांग की।
सफाई कार्य की निविदा रद्द होने पर उठाए सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने ज्ञापन के माध्यम से यह भी पूछा कि लगभग दो माह पूर्व साफ-सफाई कार्य के लिए निकाली गई निविदा को क्यों रद्द किया गया। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि यदि निविदा रद्द की गई थी तो अब तक नई निविदा क्यों नहीं निकाली गई।
उनका कहना था कि इस कारण सफाई व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और नागरिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
शिकायत निवारण प्रणाली को बताया अप्रभावी
ज्ञापन में नागरिकों द्वारा की जाने वाली शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए गए। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि जनसुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध और प्रभावी समाधान नहीं हो रहा है।
उन्होंने शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की मांग की, ताकि आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
DM से हस्तक्षेप की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त से आग्रह किया कि वे पूरे मामले की समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में प्रशासनिक स्तर पर हस्तक्षेप कर समस्याओं का समाधान कराया जाना चाहिए।
प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि उपायुक्त इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देंगे और नागरिकों को राहत दिलाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएंगे।
प्रतिनिधिमंडल में ये लोग रहे शामिल
DM को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में मुकुल मिश्रा के अलावा चुन्नू भूमिज, उषा यादव, भीम सिंह, नीरज सिंह, धर्मेंद्र प्रसाद, विवेक पांडेय, राघवेंद्र प्रताप सिंह, मनोज सिंह, कुंअर अतुल सिंह, रणजीत कुमार, तारक मुखर्जी, विनोद सिंह, ललित सिंह तथा बुद्धेश्वर कर्मकार सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि जनसुविधाओं से संबंधित समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो क्षेत्र के नागरिकों के साथ आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल लोगों की अपेक्षा है कि प्रशासन उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करेगा।
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