नई दिल्ली । केंद्र सरकार आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के बीच समन्वय स्थापित कर देश में एक समग्र और सुलभ स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने बताया कि आयुष मंत्रालय ने विभिन्न संस्थागत, शैक्षणिक, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा आधारित पहलों के माध्यम से आयुर्वेद को आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के साथ जोड़ने की व्यापक रणनीति लागू की है।
मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल आयुर्वेद को बढ़ावा देना ही नहीं, बल्कि उसे वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक चिकित्सा पद्धति और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ प्रभावी रूप से एकीकृत करना भी है, ताकि लोगों को समग्र स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
डीजीएचएस में स्थापित हुआ आयुष वर्टिकल
सरकार ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के अंतर्गत एक समर्पित आयुष वर्टिकल स्थापित किया है। यह इकाई सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की योजना, निगरानी और संचालन के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा, क्षमता निर्माण तथा स्वास्थ्य सेवाओं में आयुष के समावेशन के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान कर रही है।

तैयार किए गए साक्ष्य आधारित उपचार दिशानिर्देश
आयुष वर्टिकल ने आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए साक्ष्य आधारित मानक उपचार दिशानिर्देश (Standard Treatment Guidelines – STG) विकसित किए हैं।
इन दिशानिर्देशों में छह सामान्य मस्कुलोस्केलेटल (हड्डी एवं मांसपेशी) रोगों तथा पांच चयापचय (Metabolic) संबंधी बीमारियों के उपचार संबंधी वैज्ञानिक प्रोटोकॉल शामिल किए गए हैं। इनके आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर मास्टर ट्रेनर कार्यक्रम आयोजित किए गए तथा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में चरणबद्ध प्रशिक्षण भी संचालित किया गया।
केंद्र सरकार के अस्पतालों में एकीकृत आयुष विभाग
सरकार ने दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज एवं सफदरजंग अस्पताल तथा लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एकीकृत आयुष विभाग स्थापित किए हैं। इन विभागों में पंचकर्म सहित निवारक, उपचारात्मक और स्वास्थ्य संवर्धन सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अतिरिक्त, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल सहित कई प्रमुख संस्थानों में आयुष अनुसंधान परिषदों द्वारा विस्तारित आयुष ओपीडी सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं।
आयुष संस्थानों के लिए भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक
आयुष मंत्रालय ने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों तथा आयुष अस्पतालों के लिए भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक (IPHS-2024) भी विकसित किए हैं।
इन मानकों का उद्देश्य अस्पतालों के बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन, दवाओं की उपलब्धता तथा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को एक समान बनाना है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में आयुष सेवाओं का प्रभावी एकीकरण सुनिश्चित हो सके।
लू और मंकीपॉक्स पर जारी किए गए आयुष परामर्श
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के सहयोग से आयुष मंत्रालय ने लू (Heat Wave) और मंकीपॉक्स जैसी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों पर आयुष आधारित परामर्श भी जारी किए हैं। इनका उद्देश्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य तैयारियों और आपदा प्रतिक्रिया तंत्र में आयुष की भूमिका को मजबूत करना है।
450 से अधिक आयुष कॉलेजों में तंबाकू निषेध केंद्र
राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत आयुष वर्टिकल ने वर्ष 2025 में तंबाकू निषेध केंद्र (Tobacco Cessation Centre – TCC) स्थापित करने के लिए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए।
इन दिशा-निर्देशों के आधार पर देशभर के 450 से अधिक आयुष महाविद्यालयों में तंबाकू निषेध केंद्र स्थापित किए जा चुके हैं, जहां आयुष आधारित उपचार एवं परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
जिला अस्पतालों और पीएचसी में आयुष सुविधाओं का विस्तार
सरकार ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तथा जिला अस्पतालों में आयुष सेवाओं के सह-स्थापन की नीति अपनाई है।
इस व्यवस्था के तहत मरीजों को एक ही परिसर में एलोपैथी, आयुर्वेद तथा अन्य चिकित्सा पद्धतियों में से अपनी आवश्यकता के अनुसार उपचार चुनने का अवसर मिलता है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से आयुष चिकित्सकों की नियुक्ति और प्रशिक्षण किया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत बुनियादी ढांचे, उपकरण एवं औषधियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
एमबीबीएस छात्रों को मिलेगा आयुष का प्रशिक्षण
भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए राष्ट्रीय आयोग (NCISM) ने एमबीबीएस इंटर्नशिप इलेक्टिव मॉड्यूल तैयार किया है, जिसके माध्यम से मेडिकल छात्रों को आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध चिकित्सा प्रणालियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके साथ ही आयुर्वेद स्नातक शिक्षा के पाठ्यक्रम में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की नवीनतम प्रगति को 40 प्रतिशत तक शामिल करने का भी प्रावधान किया गया है।
अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा
आयुष मंत्रालय वर्ष 2021-22 से “आयुर्ज्ञान” योजना संचालित कर रहा है।
इस योजना के अंतर्गत क्षमता निर्माण, सतत चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं नवाचार तथा Ayurveda Biology Integrated Health Research (ABIHR) जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक चिकित्सा के समन्वय पर उच्च स्तरीय अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है।
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों को मिली सहायता
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के बीच अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष मंत्रालय ने देश के नौ प्रतिष्ठित संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान की है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- टाटा मेमोरियल सेंटर, मुंबई
- केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीडीआरआई), लखनऊ
- जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), नई दिल्ली
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली
- भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी), बेंगलुरु
- एम्स, नई दिल्ली का सेंटर फॉर इंटीग्रेटिव मेडिसिन एंड रिसर्च
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निमहांस), बेंगलुरु
- यकृत एवं पित्त संबंधी विज्ञान संस्थान (आईएलबीएस), नई दिल्ली
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), जोधपुर
इन संस्थानों में चल रही परियोजनाओं का उद्देश्य आयुर्वेद की वैज्ञानिक प्रभावशीलता को प्रमाणित करना तथा उसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार्यता दिलाना है।
आयुर्वेद दिवस के माध्यम से जनजागरूकता
आयुष मंत्रालय प्रत्येक वर्ष आयुर्वेद दिवस मनाता है। वर्ष 2025 में आयोजित 10वां आयुर्वेद दिवस “मानव और धरती के लिए आयुर्वेद” विषय पर केंद्रित था।
इस अवसर पर देशभर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर, आयुर्वेदिक परामर्श, दवा वितरण, महिला एवं बाल स्वास्थ्य शिविर, वृद्धजन स्वास्थ्य कार्यक्रम, गैर-संचारी रोगों पर विशेष अभियान, ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क कार्यक्रम, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए गए।
गोवा स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान कई नई परियोजनाओं और स्वास्थ्य पहलों का शुभारंभ भी किया गया।
महाराष्ट्र में भी व्यापक स्तर पर आयोजन
महाराष्ट्र में आयुर्वेद दिवस से संबंधित गतिविधियों का संचालन राज्य आयुष प्रकोष्ठ के माध्यम से किया जाता है। राज्य के सभी आयुष महाविद्यालयों, जिला अस्पतालों, महिला अस्पतालों, ग्रामीण अस्पतालों और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में सह-स्थापित आयुष इकाइयों के माध्यम से स्वास्थ्य शिविर, जागरूकता अभियान और चिकित्सा सेवाएं संचालित की जाती हैं।
समग्र स्वास्थ्य प्रणाली की ओर बढ़ता भारत
आयुष मंत्रालय की इन बहुआयामी पहलों से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार आयुर्वेद को केवल पारंपरिक चिकित्सा तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उसे वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक चिकित्सा शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ जोड़कर एक समग्र, सुलभ और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार विकल्प उपलब्ध होने के साथ-साथ भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
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