नई दिल्ली: कभी सीमित आमदनी में परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना और बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाना श्री Harish Chandra परबत के लिए बड़ी चुनौती थी। लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और आजीविका सहायता के जरिए मशीनीकृत स्वच्छता उपकरण तक पहुंच ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। आज उनकी आमदनी पहले के मुकाबले काफी बेहतर है और उनके तीनों बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर अपने बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं।
श्री Harish Chandra परबत की कहानी इस बात का उदाहरण है कि यदि स्वच्छता क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को आधुनिक उपकरणों और वित्तीय सहायता की सुविधा मिले, तो वे अपनी आजीविका को मजबूत करने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार ला सकते हैं।
बिहार के सीवान से दिल्ली तक का सफर
46 वर्षीय हरीश चंद्र परबत मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के रहने वाले हैं। उन्होंने बारहवीं कक्षा तक शिक्षा हासिल की है। बेहतर रोजगार और सुरक्षित भविष्य की तलाश में वह वर्ष 2015 में दिल्ली आए थे।

दिल्ली आने के बाद उन्होंने सफाई से जुड़े विभिन्न कार्यों में काम करना शुरू किया। काम करते-करते उन्हें सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई जैसी स्वच्छता सेवाओं का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
वर्ष 2015 से 2020 तक उन्होंने इन सेवाओं में लगातार काम किया, लेकिन उस समय उनकी आय इतनी सीमित थी कि परिवार की जरूरतों को पूरा करने के बाद भविष्य के लिए बचत करना बेहद मुश्किल था।
13 से 14 हजार रुपये की आमदनी में चलता था परिवार
श्री परबत की शुरुआती मासिक आय लगभग 13,000 से 14,000 रुपये थी। इसी आमदनी से उन्हें परिवार का दैनिक खर्च, मकान का किराया और बच्चों की शिक्षा से जुड़े खर्च पूरे करने पड़ते थे।
इसके अलावा बिहार के सीवान में रहने वाली अपनी मां की आर्थिक मदद की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर थी। सीमित आय और बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण उनके लिए बचत करना या अपने काम को विस्तार देने के लिए कोई बड़ा निवेश करना संभव नहीं हो पा रहा था।
उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती परिवार की वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के साथ बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करना थी।
बच्चों की बेहतर शिक्षा का देखा सपना
आर्थिक परेशानियों के बावजूद श्री परबत ने अपने बच्चों की शिक्षा को लेकर कभी समझौता नहीं किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही उनके बच्चों को बेहतर भविष्य और सम्मानजनक करियर की ओर ले जा सकती है।
वह चाहते थे कि उनके बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले, जिससे वे आगे चलकर अपने पैरों पर खड़े हो सकें। इसी सोच ने उन्हें अपनी आजीविका को मजबूत करने और कमाई के बेहतर अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया।
स्वच्छता उद्यमी योजना से मिली नई राह
श्री हरीश चंद्र परबत को स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) के तहत वित्तीय सहायता मिली। इस सहायता ने उनके लिए अपने स्वच्छता व्यवसाय को आधुनिक उपकरणों से जोड़ने का रास्ता खोला।
26 नवंबर 2021 को मिली आर्थिक मदद के माध्यम से उन्हें ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन खरीदने में सहायता मिली। इस मशीन ने उनके काम को पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद की।
9.75 लाख रुपये की परियोजना लागत
ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन की कुल परियोजना लागत 9,75,400 रुपये थी। इसमें उन्हें 6,06,550 रुपये का ऋण और 3,68,850 रुपये की अग्रिम पूंजी सब्सिडी मिली।
वित्तीय सहायता के इस मॉडल ने उनके लिए आधुनिक स्वच्छता उपकरण खरीदना संभव बनाया। इससे उन्हें अपने काम का दायरा बढ़ाने और स्वच्छता सेवाओं से होने वाली आय को बेहतर करने में मदद मिली।
मशीनीकृत उपकरण ने बढ़ाई कमाई
मशीनीकृत स्वच्छता उपकरण मिलने के बाद श्री परबत की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। उनके द्वारा बताई गई मासिक आय अब लगभग 40,000 से 45,000 रुपये तक पहुंच गई है।
पहले जहां सीमित आय में परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना मुश्किल था, वहीं बढ़ी हुई आय ने उन्हें बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से संभालने का अवसर दिया।
2022 में परिवार को दिल्ली लाए
आजीविका में सुधार के बाद वर्ष 2022 में श्री परबत अपनी पत्नी और बच्चों को दिल्ली ले आए। इससे परिवार एक साथ रहने लगा और बच्चों को दिल्ली में बेहतर शैक्षिक अवसर प्राप्त हुए।
उनकी पत्नी गृहिणी हैं और घर की जिम्मेदारियां संभालती हैं। परिवार के लिए यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं था, बल्कि बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हुआ।
तीनों बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर रहे
आज श्री परबत के तीनों बच्चे दिल्ली में पढ़ाई कर रहे हैं। उनका बड़ा बेटा स्नातक की अंतिम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। दूसरा बेटा बीटेक के दूसरे वर्ष में है, जबकि उनकी बेटी बीटेक के पहले वर्ष में पढ़ रही है।
यह स्थिति श्री परबत के लिए विशेष उपलब्धि है, क्योंकि कुछ वर्ष पहले तक सीमित आय के कारण बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाना उनके लिए बड़ी चुनौती थी।
अब उनके तीनों बच्चे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और अपने-अपने करियर की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
परिवार की जिम्मेदारियों के साथ जारी है संघर्ष
आमदनी बढ़ने के बावजूद श्री परबत की जिम्मेदारियां कम नहीं हुई हैं। वह परिवार की शिक्षा और घरेलू जरूरतों के साथ लगभग 12,000 रुपये मासिक किराया भी देते हैं।
इसके अलावा उनके ऊपर 13,500 रुपये की मासिक ऋण किस्त की जिम्मेदारी भी है। वह सीवान में रहने वाली अपनी मां की मदद के लिए हर महीने करीब 3,000 रुपये भी भेजते हैं।
इन सभी जिम्मेदारियों के बीच उनके लिए बचत करना अब भी आसान नहीं है, लेकिन बेहतर आमदनी ने उन्हें परिवार की जरूरतों और ऋण भुगतान को पहले की तुलना में अधिक मजबूती से संभालने में सक्षम बनाया है।
ऋण चुकाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे
27 मई 2026 तक श्री परबत की शेष ऋण राशि 1,27,490 रुपये थी। इसका मतलब है कि वह अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को लगातार पूरा करते हुए ऋण चुकाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
उनके लिए यह केवल कर्ज चुकाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि अपने व्यवसाय को मजबूत करने और परिवार को बेहतर भविष्य देने की यात्रा भी है।
सम्मान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने की कहानी
अपनी सफलता के बारे में श्री हरीश चंद्र परबत कहते हैं, “मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी कामयाबी यह है कि मेरे बच्चे उच्च शिक्षा ले रहे हैं और एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। आज, मैं धीरे-धीरे अपना लोन चुका रहा हूं और आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा के साथ आगे बढ़ रहा हूं।”
उनके शब्दों में यह बदलाव साफ दिखाई देता है कि आजीविका में सुधार ने केवल उनकी आमदनी नहीं बढ़ाई, बल्कि उनके आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है।
मशीनीकृत स्वच्छता से बढ़े रोजगार के अवसर
स्वच्छता के क्षेत्र में आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल काम को अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ स्वच्छता पेशेवरों के लिए नए आर्थिक अवसर भी पैदा कर सकता है।
ट्रैक्टर-कम-सक्शन मशीन जैसे उपकरणों की मदद से सीवर और सेप्टिक टैंक से जुड़े कार्य अधिक व्यवस्थित तरीके से किए जा सकते हैं। इससे स्वच्छता सेवाओं की मांग को पूरा करने और काम को व्यावसायिक रूप देने में भी मदद मिलती है।
श्री परबत का अनुभव बताता है कि पारंपरिक तरीके से काम करने वाले स्वच्छता कर्मियों को यदि आधुनिक उपकरण और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, तो वे स्वयं भी उद्यमी के रूप में आगे बढ़ सकते हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
आजीविका में सुधार का सबसे बड़ा असर श्री परबत के परिवार पर पड़ा है। बढ़ी हुई आय ने उन्हें बच्चों की उच्च शिक्षा जारी रखने में मदद की है।
एक समय जहां सीमित कमाई के कारण रोजमर्रा के खर्च पूरे करना चुनौती था, वहीं आज उनके तीनों बच्चे उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं। परिवार एक साथ दिल्ली में रह रहा है और बच्चे अपने करियर को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।
अगली पीढ़ी के लिए बेहतर भविष्य की नींव
श्री परबत की यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि यही है कि उनकी मेहनत और आजीविका में हुए सुधार का लाभ अगली पीढ़ी को मिल रहा है।
उनके तीनों बच्चों का उच्च शिक्षा प्राप्त करना इस बात का संकेत है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सही समय पर आजीविका सहायता मिलने से उनके बच्चों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
यह बदलाव केवल एक व्यक्ति की आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सामाजिक और शैक्षणिक भविष्य में बदलाव की कहानी है।
आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम
श्री हरीश चंद्र परबत की कहानी दिखाती है कि मेहनत के साथ यदि आधुनिक तकनीक, मशीनीकृत उपकरण और वित्तीय सहायता का सहयोग मिले तो स्वच्छता क्षेत्र से जुड़े श्रमिक भी अपने काम को मजबूत व्यवसाय में बदल सकते हैं।
उनकी आय में हुई वृद्धि ने उन्हें परिवार की जिम्मेदारियां निभाने, बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने, मां की आर्थिक मदद करने और ऋण चुकाने में सक्षम बनाया है।
दूसरों के लिए भी प्रेरणा बनी कहानी
हरीश चंद्र परबत की यात्रा उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने का सपना देखते हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में काम जारी रखा और अवसर मिलने पर आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर अपनी आजीविका को मजबूत किया।
उनकी कहानी यह संदेश देती है कि आजीविका विकास, आधुनिक तकनीक और वित्तीय सहायता का सही संयोजन किसी परिवार की आर्थिक दिशा बदल सकता है।
स्वच्छता कर्मी से उद्यमी तक का सफर
श्री Harish Chandra परबत का सफर एक सामान्य स्वच्छता कर्मचारी से मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं से जुड़े उद्यमी बनने तक का सफर है। यह यात्रा संघर्ष, मेहनत और अवसरों के सही इस्तेमाल की कहानी है।
आज वह न केवल अपनी आर्थिक जिम्मेदारियों को संभाल रहे हैं, बल्कि अपने तीनों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उनके लिए बेहतर भविष्य की नींव भी तैयार कर रहे हैं। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि आत्मनिर्भरता केवल आय बढ़ने का नाम नहीं, बल्कि परिवार को बेहतर अवसर और सम्मानजनक जीवन देने की क्षमता हासिल करने का नाम भी है।




















