नई दिल्ली: वैश्विक बाजार में Gold और चांदी की कीमतों में इन दिनों जोरदार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसलों के बीच कीमती धातुओं की कीमतों पर निवेशकों की नजर बनी हुई है। इसी बीच सोने की कीमत को लेकर वैश्विक वित्तीय संस्थान जेफरीज की ओर से दिया गया लंबी अवधि का अनुमान चर्चा में है।

जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटजी क्रिस्टोफर वुड ने सोने के लिए लंबे समय में 10,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य बताया है। भारतीय मुद्रा में यह स्तर करीब 3.08 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के बराबर बैठता है। हालांकि, यह एक दीर्घकालिक बाजार अनुमान है और वास्तविक कीमत कई आर्थिक एवं वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

वहीं, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। ऐसे में निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि मौजूदा स्तर पर खरीदारी की जाए या किसी करेक्शन का इंतजार किया जाए।

शुक्रवार को किस स्तर पर बंद हुआ सोना और चांदी?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर शुक्रवार, 18 सितंबर को सोना 1,54,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। इसी दिन चांदी 2,43,047 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर बंद हुई।

ऑल इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स के अनुसार 18 सितंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 1,53,727 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। वहीं 22 कैरेट सोने की कीमत 1,48,814 रुपये प्रति 10 ग्राम और 18 कैरेट सोने की कीमत 1,15,295 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई।

चांदी की कीमत इस दौरान 2,36,908 रुपये प्रति किलोग्राम बताई गई।

इन आंकड़ों से साफ है कि सोना और चांदी दोनों ही ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं और छोटी अवधि में कीमतों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है।

फेड के फैसले के बाद भी क्यों बढ़ी कीमतें?

बाजार में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि किसी बड़े आर्थिक फैसले का असर घोषणा से पहले ही कीमतों में शामिल हो जाता है। सोने-चांदी की मौजूदा तेजी को समझाते हुए इंटेलीसिस वेंचर्स के फाउंडर और सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एवं कमोडिटी एक्सपर्ट अमित सुरेश जैन ने भी इसी पहलू की ओर इशारा किया।

उनके मुताबिक, फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले ही ब्याज दरों को लेकर बाजार में चर्चाएं और अनुमान चल रहे थे। ऐसे में बाजार ने संभावित फैसले को पहले ही काफी हद तक कीमतों में शामिल कर लिया था।

फेड की घोषणा के बाद शुरुआती हल्की गिरावट देखने को मिली, लेकिन इसके बाद बाजार में तेजी से रिकवरी आई। इसका असर सोने और चांदी की कीमतों में भी देखने को मिला।

क्या सोना अपना पुराना हाई तोड़ सकता है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि सोना आगे किस स्तर तक जा सकता है। अमित सुरेश जैन के अनुसार, निकट अवधि में जनवरी के पुराने हाई को तुरंत पार करने की संभावना कम दिखाई देती है।

उनके मुताबिक, सोने में 1,56,000 से 1,58,000 रुपये के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण हो सकता है। वहीं 1,49,600 रुपये के नीचे जाने पर बाजार में कमजोरी का खतरा बढ़ सकता है।

लंबी अवधि की बात करें तो विशेषज्ञ ने साल के अंत तक सोने के 1.75 लाख से 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंचने की संभावना जताई है।

हालांकि, ये बाजार विशेषज्ञ का अनुमान है और वास्तविक कीमत इससे अलग हो सकती है।

चांदी को लेकर क्या है अनुमान?

चांदी में भी बाजार विशेषज्ञ तेजी की संभावना देख रहे हैं। अमित सुरेश जैन के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में चांदी एक निश्चित दायरे में कारोबार करती रही है।

उन्होंने बताया कि चांदी पिछले चार महीनों से लगभग 2.25 लाख से 2.60 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में घूम रही है। लंबी अवधि में उनके मुताबिक चांदी 3 लाख से 3.20 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर सकती है।

हालांकि, चांदी में भी उतार-चढ़ाव सोने की तुलना में अलग परिस्थितियों से प्रभावित होता है। औद्योगिक मांग, वैश्विक अर्थव्यवस्था और निवेश मांग जैसे कारक इसकी कीमत को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए?

मौजूदा तेजी के बीच आम निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल खरीदारी को लेकर है। इस बारे में अमित सुरेश जैन ने सावधानी बरतने की बात कही।

उनके मुताबिक, मौजूदा बाजार में बिना सोचे-समझे तेजी के पीछे भागने के बजाय किसी बड़े डिप या करेक्शन का इंतजार किया जा सकता है।

उन्होंने फिजिकल सोने और चांदी की खरीद-बिक्री से जुड़े अंतर की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके अनुसार, फिजिकल सोना बेचते समय कीमत में कुछ अंतर देखने को मिल सकता है। चांदी में भी खरीद और बिक्री के भाव में अंतर हो सकता है।

इसलिए निवेशकों को केवल कीमत बढ़ने की उम्मीद के आधार पर फैसला लेने के बजाय खरीदारी के उद्देश्य, समयावधि और जोखिम को ध्यान में रखना चाहिए।

क्या सोने में बड़ा क्रैश आ सकता है?

कीमती धातुओं में तेजी के बीच निवेशकों के बीच यह चिंता भी रहती है कि कहीं अचानक बड़ी गिरावट न आ जाए। खासकर जब कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर हों, तो करेक्शन की संभावना बाजार का हिस्सा रहती है।

अमित सुरेश जैन के अनुसार, कमोडिटी बाजार में बड़े मूव से पहले कंसोलिडेशन या करेक्शन देखने को मिल सकता है। लेकिन हर समय किसी बड़े क्रैश की आशंका में रहना उचित नहीं है।

उनका कहना है कि निवेशकों को छोटे-छोटे निवेश को चरणों में करने और जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है। किसी भी बाजार में तेजी के साथ गिरावट की संभावना भी बनी रहती है।

अगले एक हफ्ते में क्या रणनीति हो सकती है?

अगले एक सप्ताह के नजरिए से अमित सुरेश जैन ने सोना-चांदी के अलावा क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस जैसे कमोडिटी बाजारों का भी जिक्र किया।

उनके मुताबिक, तकनीकी और मनोवैज्ञानिक नजरिए से क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस में सीमित जोखिम के साथ बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड सेटअप दिखाई दे सकता है।

वहीं Gold पर जेफरीज का बड़ा अनुमान ₹3 लाख के पार जा सकता हैऔर चांदी में शॉर्ट टर्म या लॉन्ग टर्म पोजीशन बनाने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह लेने और स्टॉपलॉस का पालन करने की बात कही गई है।

जेफरीज का 10,000 डॉलर वाला अनुमान क्या है?

अब बात उस अनुमान की, जिसने सोने के बाजार में सबसे ज्यादा चर्चा पैदा की है। सेबी रजिस्टर्ड मार्केट एवं कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, जेफरीज के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी स्ट्रेटजी क्रिस्टोफर वुड ने सोने के लिए लंबी अवधि में 10,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य बताया है।

भारतीय रुपये में इसकी गणना करीब 3.08 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक बैठती है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह तत्काल कीमत का अनुमान नहीं बल्कि लंबी अवधि का लक्ष्य बताया गया है। बाजार में किसी भी कमोडिटी की कीमत कई वैश्विक कारकों के आधार पर बदल सकती है।

अमेरिकी कर्ज और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी का क्या असर?

अनुज गुप्ता के मुताबिक, क्रिस्टोफर वुड का मानना है कि अमेरिकी डेट, दबाव में रहने वाली यील्ड और केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी जैसे कारक भविष्य में सोने की कीमत को समर्थन दे सकते हैं।

इसके अलावा भारत में सोने की मांग भी महत्वपूर्ण कारक मानी जाती है। घरेलू परिवारों और ज्वैलरी क्षेत्र की मांग भारतीय बाजार में सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले प्रमुख पहलुओं में शामिल है।

3.08 लाख रुपये का स्तर कब आएगा?

जेफरीज का 10,000 डॉलर प्रति औंस का अनुमान एक लंबी अवधि का अनुमान है। इसे तत्काल कीमत या निश्चित भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

सोने की कीमत में आगे कितना बदलाव होगा, यह अमेरिकी मौद्रिक नीति, डॉलर की चाल, वैश्विक ब्याज दरें, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और भारत की घरेलू मांग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

इसलिए 3.08 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर कब हासिल होगा, इसकी निश्चित समयसीमा इस अनुमान में नहीं दी गई है।

निवेशकों के लिए क्या है अहम बात?

Gold पर जेफरीज का बड़ा अनुमान ₹3 लाख के पार जा सकता हैऔर चांदी में तेजी के बीच निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात बाजार की अस्थिरता को समझना है। विशेषज्ञों के दिए गए अनुमान अलग-अलग समयावधि के लिए हैं। किसी विशेषज्ञ का दीर्घकालिक लक्ष्य यह सुनिश्चित नहीं करता कि कीमत उसी दिशा में लगातार बढ़ेगी।

निवेश से पहले व्यक्ति को अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना चाहिए। विशेष रूप से कमोडिटी बाजार में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है।

फिलहाल बाजार की नजर सोने के अगले प्रमुख स्तरों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, डॉलर की चाल और वैश्विक मांग पर बनी हुई है। जेफरीज का 10,000 डॉलर का दीर्घकालिक अनुमान जहां चर्चा में है, वहीं निकट अवधि में सोने-चांदी की दिशा बाजार के मौजूदा आर्थिक संकेतकों और मांग-आपूर्ति की स्थिति से तय होगी।