जमशेदपुर: Mango flyover के निर्माण कार्य में नियम-कायदों की अनदेखी और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी का आरोप लगाते हुए जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने पथ निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोमवार की दोपहर सरयू राय ने अपने समर्थकों के साथ मानगो फ्लाइओवर के निर्माण कार्य का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने बालीगुमा पानी टंकी का भी निरीक्षण किया।

मुआयने के बाद जारी बयान में सरयू राय ने कहा कि मानगो फ्लाइओवर के पायल सिनेमा के पास वन-वे हिस्से का रैंप वन विभाग की जमीन पर बनाया गया है। उनका दावा है कि संबंधित जमीन के लिए अभी तक वन विभाग से आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और क्लीयरेंस नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि किसी विभाग की जमीन पर निर्माण से पहले जरूरी अनुमति लेना बुनियादी प्रक्रिया है, लेकिन यहां निर्माण पहले कर दिया गया और अनुमति की प्रक्रिया बाद में पूरी करने की बात सामने आ रही है।

वन विभाग की जमीन पर रैंप बनाने पर उठाया सवाल

सरयू राय ने कहा कि पायल सिनेमा के पास फ्लाइओवर का रैंप उतारे जाने के कारण सड़क की चौड़ाई प्रभावित हुई है। सड़क संकरी होने से इस मार्ग पर यातायात का दबाव बढ़ गया है और प्रतिदिन जाम की स्थिति बन रही है। इससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि फ्लाइओवर जैसी बड़ी और महत्वपूर्ण परियोजना का उद्देश्य शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना है। ऐसे में निर्माण के दौरान यदि सड़क और संकरी हो जाए तथा लोगों को रोज जाम का सामना करना पड़े तो परियोजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अनुमति से पहले निर्माण क्यों?

सरयू राय ने निर्माण कार्य में अपनाई जा रही प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिस जमीन पर निर्माण किया जाना है, उसके स्वामित्व और उपयोग से जुड़े सभी विभागीय पहलुओं को पहले स्पष्ट किया जाना चाहिए था। संबंधित विभाग से अनुमति और आवश्यक दस्तावेज हासिल करने के बाद ही निर्माण शुरू होना चाहिए था।

उन्होंने आरोप लगाया कि Mango flyover के मामले में इसके उलट पहले निर्माण कार्य आगे बढ़ा दिया गया और अब अनुमति तथा जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करने की बात कही जा रही है।

सरयू राय ने कहा कि यदि निर्माण स्थल वन विभाग की जमीन पर है तो वहां काम शुरू करने से पहले वन विभाग की अनुमति लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि नियमों की अनदेखी कर किसी भी महत्वपूर्ण परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।

कार्यपालक अभियंता से फोन पर की बात

सरयू राय ने बताया कि उन्होंने सोमवार को इस मुद्दे पर पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि वन विभाग के डीएफओ की ओर से कुछ आवश्यक दस्तावेज मांगे गए हैं, तो अब तक वे दस्तावेज उपलब्ध क्यों नहीं कराए गए।

उनका कहना था कि जब तक वन विभाग को आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे, तब तक वन विभाग की जमीन को पथ निर्माण विभाग के लिए हस्तांतरित अथवा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया कैसे पूरी होगी।

इस पर कार्यपालक अभियंता ने कहा कि वह पता लगाएंगे कि वन विभाग की ओर से कौन-कौन से दस्तावेज मांगे गए हैं। सरयू राय ने इसी जवाब को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि जब इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर निर्माण कार्य चल रहा है और विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को यह तक स्पष्ट नहीं है कि अनुमति के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का विषय है।

गाड़ी को घोड़े के आगे रख दिया गया

सरयू राय ने विभागीय कार्यप्रणाली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि इस स्थिति को ही कहा जाता है कि गाड़ी को घोड़े के आगे रख दिया गया है। उन्होंने सवाल किया कि जब आवश्यक अनुमति और दस्तावेज पहले से तैयार नहीं हैं तो परियोजना का काम किस आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में तेजी जरूरी है, लेकिन तेजी के नाम पर नियमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बड़ी परियोजनाओं में सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय होना जरूरी है, ताकि बाद में किसी तरह की कानूनी या प्रशासनिक अड़चन सामने न आए।

सड़क संकरी होने से लोगों को परेशानी

विधायक ने कहा कि पायल सिनेमा के पास रैंप बनने से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई प्रभावित हुई है। इस कारण यातायात व्यवस्था पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों और स्थानीय लोगों को जाम का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि फ्लाइओवर का निर्माण लोगों की सुविधा के लिए किया जा रहा है। ऐसे में निर्माण के दौरान आम जनता को होने वाली परेशानी को भी ध्यान में रखना जरूरी है। निर्माण एजेंसी और संबंधित विभागों को यातायात व्यवस्था सुचारू रखने के लिए उचित व्यवस्था करनी चाहिए।

महत्वपूर्ण परियोजना का मतलब नियमों को किनारे करना नहीं

सरयू राय ने कहा कि Mango flyover निश्चित रूप से एक महत्वपूर्ण परियोजना है और इसके निर्माण से शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने की उम्मीद है। लेकिन किसी परियोजना को महत्वपूर्ण मानने का अर्थ यह नहीं है कि उसके लिए नियम-कानून और विभागीय प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर दिया जाए।

उन्होंने कहा कि वन विभाग की जमीन से संबंधित सभी आवश्यक अनुमतियां और क्लीयरेंस पहले प्राप्त किए जाने चाहिए थे। इसके बाद ही वहां निर्माण कार्य आगे बढ़ना चाहिए था।

उन्होंने कहा कि इतना निर्माण कार्य पूरा हो जाने के बाद भी यदि वन विभाग की अनुमति का मामला लंबित है तो यह गंभीर सवाल खड़ा करता है कि परियोजना की शुरुआत से पहले संबंधित विभागों के बीच कितना समन्वय था।

मामले को गंभीरता से देखने की बात

सरयू राय ने कहा कि वह इस पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं। उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई कराने की बात कही। उनका कहना है कि उनकी कोशिश होगी कि अनुमति और दस्तावेजों से जुड़ी प्रक्रिया जल्द पूरी हो तथा निर्माण के कारण लोगों को हो रही यातायात संबंधी परेशानी को कम किया जा सके।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा।

बालीगुमा पानी टंकी छह साल से तैयार, फिर भी नहीं पहुंचा पानी

करोड़ों की लागत से बनी व्यवस्था का लोगों को नहीं मिल रहा लाभ

मानगो फ्लाइओवर के निरीक्षण के बाद सरयू राय ने बालीगुमा स्थित पानी की टंकी का भी जायजा लिया। उन्होंने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा मानगो नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बालीगुमा की पानी की टंकी करीब छह वर्षों से बनकर तैयार है, लेकिन आज तक मुख्य पाइपलाइन से इसमें पानी नहीं पहुंच पाया है।

उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर जलापूर्ति से जुड़ी व्यवस्था तैयार कर दी गई, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर मानगो क्षेत्र के लोग पेयजल की समस्या से जूझ रहे हैं।

पाइपलाइन बिछाने में भी एनओसी का सवाल

सरयू राय ने आरोप लगाया कि आनन-फानन में जयपाल कॉलोनी के रास्ते गली से पाइपलाइन बिछाकर पानी की टंकी तक ले जाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि आगे कृषि विभाग की जमीन पड़ती है और वहां से पाइपलाइन ले जाने को लेकर कृषि विभाग की ओर से आपत्ति जताई गई है।

उनके अनुसार, कृषि विभाग की जमीन से पाइपलाइन ले जाने के लिए आवश्यक एनओसी नहीं ली गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना संबंधित विभाग की अनुमति के पाइपलाइन बिछाने का प्रयास क्यों किया गया।

उन्होंने कहा कि यह मामला भी विभागों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाता है। जलापूर्ति जैसी आवश्यक सेवा से जुड़ी परियोजना में पहले से सभी विभागों की अनुमति और जरूरी कागजात सुनिश्चित किए जाने चाहिए थे।

छह साल से टंकी तैयार फिर भी जलापूर्ति व्यवस्था अधूरी

सरयू राय ने कहा कि सरकार को यह जांच करानी चाहिए कि बालीगुमा की पानी की टंकी छह साल से तैयार होने के बावजूद अब तक मुख्य जलापूर्ति व्यवस्था से क्यों नहीं जोड़ी गई।

उन्होंने कहा कि एक तरफ क्षेत्र में पानी की समस्या है और दूसरी तरफ जलापूर्ति के लिए बनाई गई टंकी तैयार पड़ी है। यदि तकनीकी, जमीन या एनओसी से जुड़ी कोई समस्या थी तो उसका समाधान समय रहते किया जाना चाहिए था।

पेयजल विभाग नगर निगम और एनएचएआई की भूमिका की जांच की मांग

सरयू राय ने पूरे मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि बालीगुमा पानी की टंकी को मुख्य जलापूर्ति व्यवस्था से जोड़ने में इतनी देरी क्यों हुई।

साथ ही जयपाल कॉलोनी के रास्ते पाइपलाइन बिछाने के मामले में भी जांच की मांग की गई है कि संबंधित विभागों से आवश्यक अनुमति क्यों नहीं ली गई।

उन्होंने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अभियंताओं, मानगो नगर निगम के अधिकारियों और एनएचएआई की भूमिका की भी जांच की मांग की। उनका कहना है कि जांच से यह स्पष्ट होना चाहिए कि विकास परियोजनाओं में बार-बार विभागीय समन्वय और अनुमति से जुड़ी समस्याएं क्यों सामने आ रही हैं।

जनता को परेशानी से राहत दिलाने की मांग

सरयू राय ने कहा कि चाहे Mango flyover का निर्माण हो या पेयजल परियोजना अंतिम उद्देश्य आम लोगों को सुविधा उपलब्ध कराना होना चाहिए। विभागों की लापरवाही या आपसी समन्वय की कमी का खामियाजा जनता को नहीं भुगतना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मानगो क्षेत्र में यातायात और पेयजल दोनों महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इसलिए संबंधित विभागों को निर्माण और जलापूर्ति से जुड़े लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए, ताकि लोगों को जल्द राहत मिल सके।