जमशेदपुर: Karim City College के शिक्षा संकाय, मानगो कैंपस में बी.एड. एवं डी.एल.एड. सत्र 2025–27 के विद्यार्थियों के लिए सूक्ष्म शिक्षण (माइक्रो टीचिंग) कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य भावी शिक्षकों के शिक्षण कौशल को विकसित करना, उनकी प्रस्तुतीकरण क्षमता को बेहतर बनाना तथा उन्हें कक्षा में प्रभावी ढंग से पढ़ाने के लिए तैयार करना है। कार्यशाला का आयोजन 28 सितंबर से 8 अक्टूबर 2025 तक किया जा रहा है। इसमें शिक्षा संकाय के प्राध्यापकों द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षण से संबंधित विभिन्न कौशलों की सैद्धांतिक जानकारी देने के साथ उनका व्यावहारिक अभ्यास भी कराया जा रहा है।

कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि कक्षा में किसी विषय को किस प्रकार सरल, व्यवस्थित और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया जाए। इसके साथ ही प्रश्न पूछने, विषय की व्याख्या करने, विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने, श्यामपट्ट का प्रभावी उपयोग करने और कक्षा में संवाद स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण शिक्षण कौशलों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर शिक्षा संकाय की अध्यक्ष डॉ. सुचेता भुइयां ने सूक्ष्म शिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके माध्यम से भावी शिक्षकों को वास्तविक कक्षा में शिक्षण कार्य शुरू करने से पहले अपने कौशलों को विकसित करने और उनमें सुधार करने का अवसर मिलता है। यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों को आगामी स्कूल इंटर्नशिप के दौरान प्रभावी एवं व्यवस्थित ढंग से शिक्षण कार्य करने में भी सहायक होगा।

भावी शिक्षकों के कौशल विकास पर विशेष जोर

शिक्षक बनने के लिए केवल किसी विषय का ज्ञान होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस ज्ञान को विद्यार्थियों तक सरल और प्रभावी तरीके से पहुंचाने की क्षमता भी आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए करीम सिटी कॉलेज के शिक्षा संकाय में सूक्ष्म शिक्षण कार्यशाला आयोजित की जा रही है।

इस कार्यशाला में बी.एड. एवं डी.एल.एड. के विद्यार्थियों को शिक्षण प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया जा रहा है। उन्हें बताया जा रहा है कि कक्षा में पढ़ाते समय विषयवस्तु का चयन, पाठ की योजना, शिक्षण सामग्री का उपयोग और विद्यार्थियों की सहभागिता किस प्रकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को अपने शिक्षण कौशल का अभ्यास करने का अवसर भी दिया जा रहा है। इससे वे अपनी कमियों को पहचानकर उनमें सुधार कर सकते हैं। साथ ही, उन्हें यह समझने में मदद मिलती है कि किसी विषय को पढ़ाते समय विद्यार्थियों की समझ और उनकी सीखने की गति को ध्यान में रखना क्यों आवश्यक है।

शिक्षा संकाय का उद्देश्य ऐसे भावी शिक्षकों को तैयार करना है, जो विषय ज्ञान के साथ-साथ प्रभावी संवाद, बेहतर कक्षा प्रबंधन और विद्यार्थियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी विकसित कर सकें।

दो सत्रों में आयोजित की जा रही है कार्यशाला

करीम सिटी कॉलेज की इस सूक्ष्म शिक्षण कार्यशाला को मुख्य रूप से दो सत्रों में विभाजित किया गया है। दोनों सत्रों के माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षण कौशलों की जानकारी देने के साथ उनके व्यावहारिक उपयोग का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।

प्रथम सत्र में सैद्धांतिक जानकारी और प्रस्तुतीकरण: इस सत्र में शिक्षा संकाय के प्राध्यापकों द्वारा विभिन्न शिक्षण कौशलों की व्याख्या की जाती है। विद्यार्थियों को बताया जाता है कि प्रभावी शिक्षण के लिए किन तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए और कक्षा में उनका प्रयोग किस प्रकार किया जा सकता है।

द्वितीय सत्र में व्यावहारिक अभ्यास: इस सत्र में विद्यार्थी सीखे गए कौशलों का अभ्यास करते हैं। उन्हें शिक्षण के दौरान विषय प्रस्तुत करने, प्रश्न पूछने, उदाहरण देने और विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करने जैसे पहलुओं पर काम करने का अवसर मिलता है।

इन दोनों सत्रों के संयोजन से विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के बीच संबंध समझने में मदद मिलती है। इससे वे भविष्य में स्कूल इंटर्नशिप और वास्तविक कक्षा शिक्षण के लिए बेहतर तैयारी कर सकते हैं।

सूक्ष्म शिक्षण से विकसित होंगे जरूरी शिक्षण कौशल

सूक्ष्म शिक्षण शिक्षक प्रशिक्षण की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें शिक्षण के विभिन्न कौशलों का छोटे स्तर पर अभ्यास कराया जाता है, ताकि भावी शिक्षक अपनी प्रस्तुतीकरण शैली और कक्षा संचालन की क्षमता में सुधार कर सकें।

कार्यशाला में विद्यार्थियों को कई महत्वपूर्ण शिक्षण कौशलों का अभ्यास कराया जा रहा है।

  • पाठ प्रस्तुत करने का कौशल: विषयवस्तु को क्रमबद्ध, स्पष्ट और सरल तरीके से विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करना।
  • प्रश्न पूछने का कौशल: विद्यार्थियों की समझ को परखने और उनकी जिज्ञासा बढ़ाने के लिए उचित प्रश्न तैयार करना।
  • व्याख्या कौशल: कठिन विषयों को सरल भाषा, उदाहरणों और उपयुक्त शिक्षण विधियों के माध्यम से समझाना।
  • पुनर्बलन कौशल: विद्यार्थियों के सही उत्तरों और सकारात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित करना।
  • श्यामपट्ट उपयोग कौशल: श्यामपट्ट पर विषयवस्तु को साफ-सुथरे और व्यवस्थित तरीके से लिखना।
  • कक्षा अंतःक्रिया कौशल: विद्यार्थियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करना और उन्हें शिक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना।

इन कौशलों का अभ्यास भावी शिक्षकों को कक्षा में अधिक आत्मविश्वास के साथ पढ़ाने और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण करने में मदद करेगा।

डॉ. सुचेता भुइयां ने बताया सूक्ष्म शिक्षण का महत्व

कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर शिक्षा संकाय की अध्यक्ष डॉ. सुचेता भुइयां ने कहा कि शिक्षक प्रशिक्षण में सूक्ष्म शिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके माध्यम से भावी शिक्षकों को कक्षा-कक्ष की वास्तविक परिस्थितियों का सामना करने से पहले अपने शिक्षण कौशलों को विकसित एवं परिष्कृत करने का अवसर मिलता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक प्रभावी शिक्षक बनने के लिए निरंतर अभ्यास और अपनी शिक्षण पद्धति में सुधार करना आवश्यक है। सूक्ष्म शिक्षण विद्यार्थियों को अपनी प्रस्तुतीकरण क्षमता, विषय की व्याख्या और कक्षा में संवाद स्थापित करने के तरीकों को बेहतर बनाने का अवसर प्रदान करता है।

डॉ. भुइयां ने कहा कि यह प्रशिक्षण आगामी स्कूल इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगा। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव उन्हें विद्यालयों में शिक्षण कार्य करते समय अधिक व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभाने में सहायता करेंगे।

दूसरे सत्र में डॉ. समीउल्लाह ने सिखाया राइटिंग इंस्ट्रक्शनल ऑब्जेक्टिव कौशल

कार्यशाला के दूसरे सत्र में डॉ. समीउल्लाह द्वारा ‘राइटिंग इंस्ट्रक्शनल ऑब्जेक्टिव’ (शिक्षण उद्देश्यों को लिखने का कौशल) का शिक्षण किया गया। इस सत्र में शिक्षण उद्देश्यों को स्पष्ट, व्यवस्थित और उद्देश्यपूर्ण तरीके से लिखने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया।

शिक्षण उद्देश्यों का निर्धारण किसी भी पाठ योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इससे शिक्षक को यह स्पष्ट करने में मदद मिलती है कि किसी पाठ के पूरा होने के बाद विद्यार्थियों को क्या जानना, समझना या करने में सक्षम होना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर, किसी पाठ के उद्देश्य में यह निर्धारित किया जा सकता है कि विद्यार्थी पाठ के मुख्य विचारों को समझ सकें, किसी अवधारणा की व्याख्या कर सकें या सीखी गई जानकारी का व्यावहारिक उपयोग कर सकें।

इस कौशल के माध्यम से भावी शिक्षकों को पाठ योजना तैयार करते समय शिक्षण के अपेक्षित परिणामों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने की समझ विकसित करने का अवसर मिला। इससे शिक्षण प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने और विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का आकलन करने में सहायता मिल सकती है।

दूसरे सत्र में इस कौशल पर विशेष ध्यान दिया जाना कार्यशाला के व्यावहारिक स्वरूप को दर्शाता है, क्योंकि स्पष्ट शिक्षण उद्देश्य निर्धारित करना प्रभावी पाठ योजना और सफल कक्षा शिक्षण की आधारभूत आवश्यकताओं में शामिल है।

स्कूल इंटर्नशिप की तैयारी में मिलेगी सहायता

बी.एड. और डी.एल.एड. के विद्यार्थियों के लिए स्कूल इंटर्नशिप शिक्षक प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण चरण होता है। इस दौरान उन्हें विद्यालय के वातावरण में वास्तविक शिक्षण कार्य करने और विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने का अवसर मिलता है।

सूक्ष्म शिक्षण कार्यशाला इंटर्नशिप से पहले विद्यार्थियों को आवश्यक कौशलों का अभ्यास करने का अवसर प्रदान करती है। इससे उन्हें पाठ योजना तैयार करने, कक्षा में विषय प्रस्तुत करने और विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने की तैयारी करने में मदद मिलती है।

इसके अलावा, कक्षा प्रबंधन, समय का उचित उपयोग, शिक्षण सामग्री का चयन और विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देने जैसे पहलुओं पर अभ्यास करने से भावी शिक्षक अपनी कार्यक्षमता बढ़ा सकते हैं।

कार्यशाला में विकसित किए जा रहे कौशल विद्यार्थियों को वास्तविक कक्षा की परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करने में सहायक होंगे। इससे उन्हें अपने शिक्षण कार्य को अधिक आत्मविश्वास और व्यवस्थित तरीके से करने का अवसर मिलेगा।

प्राध्यापकों के सहयोग से हो रहा कार्यशाला का संचालन

इस कार्यशाला के सफल संचालन में शिक्षा संकाय की प्राध्यापक डॉ. नुसरत बेगम, डॉ. बीना सहित संकाय के सभी प्राध्यापकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्राध्यापकों द्वारा विद्यार्थियों को शिक्षण कौशलों की जानकारी देने और उनके व्यावहारिक अभ्यास में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।

कार्यशाला में बी.एड. एवं डी.एल.एड. सत्र 2025–27 के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान आत्मविश्वास, प्रस्तुतीकरण क्षमता, कक्षा प्रबंधन और प्रभावी शिक्षण कौशल विकसित करने पर विशेष बल दिया जा रहा है।

कार्यशाला का आयोजन 28 सितंबर से 8 अक्टूबर 2025 तक निर्धारित है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को शिक्षण के विभिन्न पहलुओं का अभ्यास कराने और उन्हें भविष्य की शैक्षणिक जिम्मेदारियों के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण शिक्षक प्रशिक्षण की दिशा में पहल

Karim City College के शिक्षा संकाय, मानगो कैंपस में आयोजित यह सूक्ष्म शिक्षण कार्यशाला भावी शिक्षकों के व्यावसायिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। सैद्धांतिक जानकारी और व्यावहारिक अभ्यास के संयोजन से विद्यार्थियों को शिक्षण की बारीकियों को समझने का अवसर मिल रहा है।

कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ाने, शिक्षण उद्देश्यों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करने, प्रभावी पाठ योजना बनाने और कक्षा में सकारात्मक वातावरण विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।