जमशेदपुर: Motilal Nehru Public School जमशेदपुर में बी.एड. प्रशिक्षु शिक्षकों की इंटर्नशिप सफलतापूर्वक संपन्न होने के अवसर पर विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यालय परिवार के सदस्यों ने प्रशिक्षु शिक्षकों के साथ अपने अनुभव साझा किए और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समारोह का वातावरण भावनात्मक, उत्साहपूर्ण और प्रेरणादायक रहा। इस दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों को उनके प्रशिक्षण काल में प्राप्त अनुभवों को भविष्य के शिक्षण कार्य में उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के अध्यक्ष श्री अखिलेश दुबे, सचिव श्री ललन प्रसाद रॉय, प्रधानाचार्या श्रीमती संगीता सिंह, उप-प्रधानाचार्या श्रीमती राखी मित्रा तथा जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एवं बी.एड. प्रशिक्षुओं की सुपरवाइजर डॉ. त्रिपुरा झा की गरिमामयी उपस्थिति रही। विद्यालय के कई शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारी भी समारोह में शामिल हुए। सभी ने प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रयासों और उनके प्रशिक्षण के दौरान किए गए कार्यों की सराहना की।
शिक्षण पेशे में ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का विशेष महत्व
समारोह को संबोधित करते हुए जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एवं प्रशिक्षु शिक्षकों की सुपरवाइजर डॉ. त्रिपुरा झा ने शिक्षण पेशे में ईमानदारी, नैतिकता और कर्तव्यनिष्ठा के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, विचारों और व्यवहार को आकार देने में शिक्षकों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में एक शिक्षक के लिए विषय का ज्ञान रखने के साथ-साथ नैतिक मूल्यों का पालन करना भी आवश्यक है।

डॉ. त्रिपुरा झा ने अपने संबोधन में प्रसिद्ध हिंदी कहानी ‘नमक का दरोगा’ का उदाहरण दिया। उन्होंने इस कहानी के माध्यम से समझाया कि ईमानदारी मनुष्य के जीवन का एक महत्वपूर्ण गुण है। व्यक्ति को परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अपने सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से समझौता नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईमानदारी का महत्व केवल शिक्षा के क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में इसकी आवश्यकता होती है।
उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को संदेश दिया कि वे अपने भावी शिक्षण कार्य में ईमानदारी, अनुशासन और जिम्मेदारी को प्राथमिकता दें। विद्यार्थियों के सामने शिक्षक का आचरण एक उदाहरण प्रस्तुत करता है। इसलिए शिक्षकों को अपने व्यवहार और कार्यशैली के माध्यम से भी बच्चों को अच्छे संस्कार देने का प्रयास करना चाहिए।
विद्यार्थियों को ज्ञान देने के साथ अच्छे संस्कार विकसित करना भी शिक्षक का दायित्व
डॉ. त्रिपुरा झा ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम से संबंधित विषयों का ज्ञान देना नहीं है, बल्कि उनके भीतर अच्छे संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास करना भी है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों को ज्ञानवान बनाने के साथ उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में तैयार करना है।
उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को समझाया कि कक्षा में पढ़ाते समय प्रत्येक विद्यार्थी की रुचि, क्षमता और सीखने के तरीके को ध्यान में रखना चाहिए। एक अच्छे शिक्षक को विद्यार्थियों की समस्याओं को समझने, उनके प्रश्नों का समाधान करने और उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विद्यार्थियों के साथ सकारात्मक संवाद स्थापित करना शिक्षण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शिक्षक का व्यवहार ऐसा होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी बिना किसी संकोच के अपनी बात रख सकें और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त कर सकें। इस प्रकार शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच विश्वास का संबंध विकसित होता है, जो प्रभावी शिक्षा के लिए आवश्यक है।
विद्यालय प्रबंधन ने प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के सचिव श्री ललन प्रसाद रॉय ने प्रशिक्षु शिक्षकों के कार्यों और उनके प्रशिक्षण के दौरान किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप बी.एड. प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से भावी शिक्षकों को वास्तविक कक्षा के वातावरण को समझने और शिक्षण की व्यावहारिक चुनौतियों का अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई बातों को अपने भविष्य के कार्यक्षेत्र में अपनाना चाहिए। शिक्षण एक जिम्मेदारीपूर्ण पेशा है, जिसमें निरंतर सीखने, धैर्य रखने और विद्यार्थियों के प्रति संवेदनशील रहने की आवश्यकता होती है।
श्री रॉय ने प्रशिक्षु शिक्षकों को अपने ज्ञान और कौशल को लगातार विकसित करते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यालय में प्राप्त अनुभव उनके भावी करियर में उपयोगी सिद्ध होंगे और वे अपने कार्यों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक योगदान देंगे।
प्रधानाचार्या ने अनुभवों को भविष्य में अपनाने की दी सलाह
विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती संगीता सिंह ने भी प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रयासों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षक के लिए व्यावहारिक अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त अनुभव भावी शिक्षकों को कक्षा की वास्तविक परिस्थितियों को समझने और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण पद्धतियां अपनाने में सहायता करते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षु शिक्षकों को सलाह दी कि वे इंटर्नशिप के दौरान सीखी गई बातों को अपने शिक्षण जीवन का हिस्सा बनाएं। एक शिक्षक को समय के साथ अपनी शिक्षण शैली में सुधार करते रहना चाहिए और विद्यार्थियों को सरल, रोचक तथा प्रभावी तरीके से पढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।
प्रधानाचार्या ने यह भी कहा कि शिक्षण कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए विषय की जानकारी के साथ-साथ धैर्य, अनुशासन, समय प्रबंधन और विद्यार्थियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने सभी प्रशिक्षु शिक्षकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वे आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इंटर्नशिप के दौरान मिला व्यावहारिक शिक्षण का अनुभव
Motilal नेहरू पब्लिक स्कूल में इंटर्नशिप के दौरान बी.एड. प्रशिक्षु शिक्षकों को शिक्षण कार्य के विभिन्न पहलुओं को नजदीक से समझने का अवसर मिला। इस दौरान उन्होंने पाठ योजना तैयार करने, कक्षा में शिक्षण करने, विद्यार्थियों की गतिविधियों को संचालित करने और कक्षा प्रबंधन से संबंधित व्यावहारिक अनुभव प्राप्त किए।
प्रशिक्षु शिक्षकों ने सीखा कि प्रभावी शिक्षण के लिए पाठ योजना का निर्माण किस प्रकार किया जाता है और निर्धारित समय में विद्यार्थियों तक विषयवस्तु को सरल भाषा में कैसे पहुंचाया जा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने कक्षा में अनुशासन बनाए रखने, विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने और उनकी सीखने की क्षमता के अनुरूप शिक्षण गतिविधियों को संचालित करने का अनुभव भी हासिल किया।
इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों के साथ संवाद स्थापित करना भी प्रशिक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। प्रशिक्षु शिक्षकों को यह समझने का अवसर मिला कि बच्चों की जिज्ञासाओं का समाधान किस प्रकार किया जाए तथा उन्हें पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए किन तरीकों का उपयोग किया जा सकता है।
इस प्रकार इंटर्नशिप ने प्रशिक्षु शिक्षकों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक शिक्षण कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान किया। विद्यालय के शैक्षणिक वातावरण में काम करते हुए उन्होंने शिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारियों और चुनौतियों को समझा, जो उनके भावी करियर में उपयोगी साबित हो सकती हैं।
प्रशिक्षु शिक्षकों ने विद्यालय परिवार के प्रति जताया आभार
विदाई समारोह के दौरान प्रशिक्षु शिक्षकों ने विद्यालय प्रबंधन, प्रधानाचार्या, उप-प्रधानाचार्या, शिक्षकों, शिक्षकेतर कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बिताया गया इंटर्नशिप का समय उनके लिए सीखने, अनुभव प्राप्त करने और नई यादें संजोने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।
प्रशिक्षु शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि विद्यालय में उन्हें शिक्षण की व्यावहारिक बारीकियों को समझने का अवसर मिला। शिक्षकों के मार्गदर्शन और सहयोग से वे कक्षा में पढ़ाने, पाठ योजना बनाने तथा विद्यार्थियों के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करने जैसे महत्वपूर्ण कौशल सीख सके।
उन्होंने कहा कि इंटर्नशिप के दौरान प्राप्त अनुभव उनके लिए भविष्य में एक बेहतर शिक्षक बनने की दिशा में सहायक होंगे। विद्यालय परिवार से मिले सहयोग और मार्गदर्शन को उन्होंने अपने प्रशिक्षण काल का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
प्रशिक्षु शिक्षकों ने यह भी व्यक्त किया कि विद्यालय में बिताए गए समय से उन्हें शिक्षण के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और अपने कौशल को बेहतर बनाने की प्रेरणा मिली है।
भावपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ विदाई समारोह
कार्यक्रम के समापन पर प्रशिक्षु शिक्षकों ने विद्यालय परिवार के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की और भावपूर्ण वातावरण में विदाई ली। समारोह ने प्रशिक्षण अवधि के दौरान बने आपसी संबंधों और साझा अनुभवों को यादगार रूप दिया।
विद्यालय प्रबंधन की ओर से प्रशिक्षु शिक्षकों को भविष्य में अपने कार्य के प्रति ईमानदार, अनुशासित और समर्पित रहने की प्रेरणा दी गई। वक्ताओं ने उम्मीद जताई कि वे अपने प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभवों का उपयोग विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए करेंगे।
इस विदाई समारोह के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि एक सफल शिक्षक बनने के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं है, बल्कि ईमानदारी, नैतिकता, संवेदनशीलता और निरंतर सीखने की भावना भी आवश्यक है। मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल में आयोजित यह समारोह प्रशिक्षु शिक्षकों के लिए उनके प्रशिक्षण काल की एक यादगार विदाई साबित हुआ।
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