नई दिल्ली: दिल्ली के Kalkaji इलाके के आस्था कुंज पार्क में नाबालिग के साथ कथित गैंगरेप के मामले में पुलिस की जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पीड़िता और उसके दोस्त को डराने के लिए खुद को पुलिसकर्मी बताया था। आरोपियों के पास पिस्तौल भी थी, जिसे देखकर दोनों नाबालिगों को उनकी बात पर विश्वास हो गया। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने कानून और पुलिसिया कार्रवाई से जुड़ी भाषा का इस्तेमाल करते हुए दोनों को डराया और इसके बाद वारदात को अंजाम दिया।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने तीनों आरोपियों से पूछताछ की है। उनके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की गई। पुलिस का कहना है कि अभी तक आरोपियों के फोन में पुलिस से संबंधित फोटो, वीडियो, फर्जी पहचान पत्र या ऐसी कोई अन्य संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है।
पुलिस बनकर आरोपियों ने नाबालिगों को डराया
संयुक्त पुलिस आयुक्त विजय कुमार के अनुसार, आरोपियों ने पार्क में बैठे दोनों नाबालिगों के पास जाकर खुद को पुलिसकर्मी बताया। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि वे पुलिस से हैं और दोनों कम उम्र के हैं। इसके बाद उन्हें पार्क में इस समय बैठने और गलत गतिविधि में शामिल होने का आरोप लगाकर सख्त कार्रवाई की धमकी दी गई।

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने जानबूझकर ऐसी भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे दोनों नाबालिगों को लगा कि सामने मौजूद लोग वास्तव में पुलिसकर्मी हैं। आरोपियों ने अपनी बात को प्रभावी बनाने के लिए पिस्तौल भी दिखाई।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ में आरोपी आसिफ ने बताया कि उसने और उसके साथियों ने दोनों नाबालिगों को पार्क में अकेले बैठे देखा था। इसके बाद उन्होंने उनका फायदा उठाने के लिए खुद को पुलिसकर्मी बताया और उन्हें डराया।
आरोपियों को कानून की जानकारी होने की बात सामने आई
पुलिस की पूछताछ में यह भी सामने आया है कि आरोपियों को कानून और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी कुछ जानकारी थी। इसी वजह से उन्होंने कथित तौर पर नाबालिगों से बात करते समय पुलिस जैसी भाषा का इस्तेमाल किया।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि आरोपियों को इस तरह की जानकारी कहां से मिली और क्या उन्होंने पहले भी इसी तरह किसी व्यक्ति को डराने का प्रयास किया था। फिलहाल पुलिस आरोपियों के बयान, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों को आपस में जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है।
मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच
मामले में पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच की। जांच का एक उद्देश्य यह पता लगाना भी था कि क्या आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी साबित करने के लिए कोई फोटो, वीडियो, फर्जी पहचान पत्र या अन्य सामग्री अपने पास रखी थी।
पुलिस के अनुसार, तलाशी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के बावजूद आरोपियों के पास से पुलिस से संबंधित ऐसी कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली। इसके बावजूद जांच जारी है और पुलिस आरोपियों के बयानों तथा अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का सत्यापन कर रही है।
जन्मदिन पर मंदिर में दर्शन करने निकली थी किशोरी
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पीड़िता 21 सितंबर को अपने जन्मदिन के मौके पर अपने दोस्त के साथ दिल्ली घूमने निकली थी। दोनों ने पहले इस्कॉन मंदिर में दर्शन किए। इसके बाद वे पैदल आस्था कुंज पार्क की तरफ चले गए।
बताया जा रहा है कि दोनों ने इस्कॉन मंदिर के पास गेट नंबर सात की तरफ से पार्क में प्रवेश किया था। मंदिर में दर्शन के बाद दोनों लाला लाजपत राय मार्ग से होते हुए पार्क पहुंचे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों ने करीब दो किलोमीटर पैदल सफर किया था।
इसके बाद दोनों पार्क के एक हिस्से में बैठ गए। इसी दौरान आरोपियों की नजर उन पर पड़ी और उन्होंने कथित तौर पर खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए दोनों को डराया।
आस्था कुंज पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद आस्था कुंज पार्क की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। करीब 143 एकड़ में फैले इस बड़े पार्क में सात प्रवेश द्वार बताए जाते हैं। पार्क के अधिकांश गेटों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहती है।
पार्क के सुरक्षाकर्मी अमर पासवान के अनुसार, शाम करीब सात बजे के बाद सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए जाते हैं। इसके अलावा देर रात पुलिस की वैन की तैनाती भी रहती है। इसके बावजूद पार्क की कई जगहों पर टूटी हुई दीवारें सुरक्षा व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं।
इन टूटी दीवारों के जरिए लोग बिना निर्धारित प्रवेश द्वार के पार्क में दाखिल हो सकते हैं। पुलिस और स्थानीय लोगों के लिए यह चिंता का विषय है, क्योंकि जंगलनुमा और सुनसान हिस्सों में निगरानी अपेक्षाकृत मुश्किल हो जाती है।
जंगलनुमा हिस्से में पहले भी हुई वारदातें
आस्था कुंज पार्क में आपराधिक घटनाओं का इतिहास भी रहा है। अदालत के रिकॉर्ड में पार्क के जंगलनुमा हिस्से में महिला के साथ दुष्कर्म का मामला दर्ज है। वर्ष 2019 में दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई थी।
बताया गया था कि पार्क के सुनसान हिस्से में एक युवती को देखकर आरोपियों ने उसे अपना निशाना बनाया था। पुराने मामलों का रिकॉर्ड सामने आने के बाद मौजूदा घटना के संदर्भ में पार्क की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है।
वर्ष 2014 में 19 वर्षीय युवक की हत्या
वर्ष 2014 में भी आस्था कुंज पार्क में लूट के इरादे से 19 वर्षीय दीपू की हत्या किए जाने का मामला सामने आया था। दीपू मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला था और घटना से करीब एक महीने पहले ही नौकरी की तलाश में कन्नौज से दिल्ली आया था।
पुलिस के अनुसार, बदमाशों ने लूट के इरादे से उस पर हमला किया था और उसकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने भी पार्क के सुनसान इलाकों में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
जून 2025 में अमेरिकी नागरिक पर हमला
जून 2025 में भी आस्था कुंज पार्क में एक अमेरिकी नागरिक के साथ लूट और हिंसक हमले का मामला सामने आया था। पुलिस के अनुसार, अमेरिकी नागरिक अपनी महिला मित्र के साथ पार्क में मौजूद था, तभी कुछ बदमाशों ने उन पर हमला कर दिया।
बताया गया कि हमले में धारदार हथियार का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना के बाद भी पार्क में सुरक्षा व्यवस्था और सुनसान इलाकों में पुलिस गश्त को लेकर सवाल उठे थे।
पार्क में छिपा था कुख्यात गैंगस्टर
वर्ष 2025 में आस्था कुंज पार्क उस समय भी चर्चा में आया था, जब नेपाल और भारत से जुड़े कुख्यात गैंगस्टर बहादुर जोगा के यहां छिपे होने की जानकारी सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, वह कार्रवाई से बचने के लिए पार्क के सुनसान इलाके में छिपा हुआ था।
इसके बाद गुरुग्राम और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की थी। पुलिस के अनुसार, इसी दौरान मुठभेड़ में बहादुर जोगा मारा गया था।
सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत
आस्था कुंज पार्क की मौजूदा घटना के बाद एक बार फिर बड़े और जंगलनुमा पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। पार्क के निर्धारित प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा के बावजूद यदि टूटी दीवारों और दूसरे रास्तों से लोग प्रवेश कर सकते हैं, तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मौजूदा मामले में पुलिस आरोपियों से पूछताछ के साथ-साथ घटनास्थल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले आरोपियों ने पीड़ितों पर किस तरह नजर रखी और उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताने की योजना कैसे बनाई।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस के अनुसार, जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




















