गम्हरिया: समाज में स्वास्थ्य एवं व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मासिक धर्म से जुड़ी भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से Srinath University की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई की ओर से बुधवार को गम्हरिया के जगन्नाथपुर में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। ‘प्रोजेक्ट सहेली’ के अंतर्गत आयोजित इस अभियान में मासिक धर्म स्वास्थ्य, व्यक्तिगत स्वच्छता, किशोरियों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों तथा सामाजिक संकोच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों को जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के दौरान एनएसएस स्वयंसेवकों ने नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर मासिक धर्म से संबंधित आवश्यक जानकारियों को सरल, सहज और प्रभावशाली तरीके से लोगों तक पहुंचाया। इसके साथ ही जागरूकता सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता बनाए रखने, स्वस्थ आदतें अपनाने और इससे संबंधित सामान्य समस्याओं को समझने की जानकारी दी गई। अभियान का मुख्य उद्देश्य मासिक धर्म जैसे प्राकृतिक विषय पर समाज में खुलकर संवाद को प्रोत्साहित करना और इससे जुड़े सामाजिक कलंक को कम करना था।

प्रोजेक्ट सहेली के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता की पहल

Srinath University की एनएसएस इकाई की ओर से आयोजित ‘प्रोजेक्ट सहेली’ का उद्देश्य समुदाय के बीच स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता फैलाना और लोगों को व्यक्तिगत स्वच्छता के महत्व से परिचित कराना रहा। इस पहल के माध्यम से विशेष रूप से मासिक धर्म से जुड़े उन विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिन पर सामाजिक झिझक और जानकारी के अभाव के कारण अक्सर खुलकर चर्चा नहीं हो पाती है।

मासिक धर्म किशोरियों और महिलाओं के जीवन का एक सामान्य जैविक हिस्सा है, लेकिन कई बार इससे जुड़ी अधूरी जानकारी, सामाजिक मान्यताओं और रूढ़िवादी सोच के कारण उन्हें विभिन्न प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। कई परिवारों और समुदायों में आज भी इस विषय पर बातचीत करने में संकोच किया जाता है। इसके कारण किशोरियों को अपने शरीर में होने वाले बदलावों, स्वच्छता के सही तरीकों और सामान्य शारीरिक असुविधाओं के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती।

इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को सही जानकारी उपलब्ध कराने और मासिक धर्म को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने का प्रयास किया गया। आयोजकों ने जागरूकता के जरिए यह संदेश देने पर जोर दिया कि स्वास्थ्य से संबंधित विषयों पर खुलकर बातचीत करना जरूरी है, ताकि किसी भी प्रकार की गलतफहमी या जानकारी के अभाव में लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।

नुक्कड़ नाटक के जरिए समझाया मासिक धर्म का महत्व

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण श्रीनाथ यूनिवर्सिटी के एनएसएस स्वयंसेवकों की ओर से प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। स्वयंसेवकों ने अपने अभिनय के माध्यम से मासिक धर्म चक्र, किशोरियों और महिलाओं के सामने आने वाली विभिन्न चुनौतियों तथा इस विषय से जुड़े सामाजिक संकोच को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

नाटक के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया कि मासिक धर्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि शरीर में होने वाली एक सामान्य और प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है। इस दौरान होने वाले शारीरिक बदलावों को समझना और उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखना आवश्यक है। साथ ही, मासिक धर्म को लेकर किसी भी प्रकार की शर्म या हीनभावना रखने के बजाय इससे संबंधित सही जानकारी प्राप्त करने की जरूरत पर बल दिया गया।

स्वयंसेवकों ने अपने प्रदर्शन के जरिए यह संदेश भी दिया कि मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर परिवार, विद्यालय, कॉलेज और समाज में सहजता के साथ बातचीत होनी चाहिए। जब इस विषय पर खुलकर चर्चा की जाएगी, तभी किशोरियों और महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को साझा करने तथा उचित मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को यह समझाने की कोशिश की गई कि सामाजिक धारणाओं और मिथकों के कारण किसी भी महिला या किशोरी को असहज महसूस नहीं कराया जाना चाहिए। इसके बजाय उन्हें सहयोग, सम्मान और आवश्यक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

जागरूकता सत्र में व्यक्तिगत स्वच्छता पर चर्चा

नुक्कड़ नाटक के बाद मासिक धर्म स्वास्थ्य को लेकर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में मासिक धर्म के दौरान व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने, साफ-सफाई के उचित तरीकों और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्रतिभागियों को बताया गया कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखना स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस अवधि में साफ और सुरक्षित मासिक धर्म उत्पादों का उचित तरीके से उपयोग करना, समय पर उन्हें बदलना, हाथों की सफाई बनाए रखना और इस्तेमाल किए गए उत्पादों का सुरक्षित निपटान करना आवश्यक है।

इसके अतिरिक्त, मासिक धर्म के दौरान होने वाली सामान्य असुविधाओं के संभावित कारणों को भी समझाया गया। इस दौरान पेट में दर्द, ऐंठन, थकान और शारीरिक असहजता जैसी समस्याओं के संबंध में सामान्य जानकारी साझा की गई। प्रतिभागियों को यह भी समझाया गया कि प्रत्येक व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज करने के बजाय आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।

सत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया कि मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी का अभाव कई प्रकार की परेशानियों को बढ़ा सकता है। इसलिए किशोरियों और महिलाओं को विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी प्राप्त करने तथा अपनी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

मासिक धर्म से जुड़े मिथकों और भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास

कार्यक्रम के दौरान मासिक धर्म से संबंधित प्रचलित मिथकों और गलत धारणाओं पर भी चर्चा की गई। समाज के कुछ हिस्सों में आज भी मासिक धर्म को लेकर कई प्रकार की रूढ़िवादी मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनके कारण महिलाओं और किशोरियों को सामाजिक गतिविधियों में असहजता का अनुभव करना पड़ सकता है।

ऐसी धारणाओं को दूर करने के लिए सही वैज्ञानिक जानकारी का प्रसार आवश्यक है। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को समझाया गया कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक शारीरिक प्रक्रिया है और इसे लेकर अनावश्यक शर्म, भेदभाव या सामाजिक कलंक को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।

इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल जानकारी देना ही नहीं, बल्कि लोगों की सोच में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। जब समाज में मासिक धर्म के बारे में सही जानकारी उपलब्ध होगी, तो किशोरियों को अपनी समस्याओं के बारे में बात करने और जरूरी मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

आयोजन के माध्यम से लोगों को प्रोत्साहित किया गया कि वे मासिक धर्म से संबंधित प्रश्नों पर खुलकर बातचीत करें और किसी भी तरह की गलत जानकारी को बिना जांचे-परखे स्वीकार न करें। साथ ही, परिवार और समुदाय के सदस्यों को भी इस विषय पर संवेदनशील और सहयोगात्मक रवैया अपनाने का संदेश दिया गया।

स्वस्थ आदतों को अपनाने पर दिया गया जोर

जागरूकता अभियान में व्यक्तिगत स्वच्छता को दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर भी बल दिया गया। आयोजकों का उद्देश्य था कि प्रतिभागी मासिक धर्म के दौरान स्वास्थ्य की देखभाल के व्यावहारिक तरीकों को समझें और उन्हें अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित हों।

स्वच्छता संबंधी सही आदतें अपनाने से स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है। इसके लिए साफ-सफाई, उचित स्वच्छता उत्पादों का उपयोग, संतुलित दिनचर्या और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व को समझना जरूरी है।

इसके साथ ही, किशोरियों के स्वास्थ्य के प्रति परिवार और समाज की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना गया। यदि परिवार में इस विषय पर सहजता से चर्चा होती है, तो किशोरियों को अपने अनुभव साझा करने और अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सहायता मांगने में आसानी हो सकती है।

कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वास्थ्य जागरूकता केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें परिवार, शैक्षणिक संस्थानों और पूरे समुदाय की भागीदारी आवश्यक है। इस प्रकार की पहल लोगों को स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर अधिक संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने में सहायक हो सकती है।

एनएसएस समन्वयक के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन

इस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन श्रीनाथ यूनिवर्सिटी की एनएसएस समन्वयक सुश्री शालिनी ओझा के निर्देशन और मार्गदर्शन में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की शिक्षिकाओं सुश्री रश्मि सिन्हा, सुश्री नमामी भुइयां और सुश्री सुदेशना पाल की सक्रिय भागीदारी रही।

इसके अलावा शिक्षक श्री हिंदोल चक्रवर्ती, श्री रामशंकर गोस्वामी तथा योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विभाग के पीएचडी स्कॉलर श्री राजेश कुमार गुप्ता ने भी कार्यक्रम में सहभागिता निभाई।

विश्वविद्यालय के शिक्षकों और स्वयंसेवकों की भागीदारी से आयोजित इस पहल के माध्यम से स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में नुक्कड़ नाटक और जागरूकता सत्र जैसे माध्यमों का उपयोग कर जटिल विषयों को सरल तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे समुदाय के लोगों तक आवश्यक जानकारी पहुंचाई जा सके।

सामाजिक जिम्मेदारी और महिला स्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता

Srinath University की एनएसएस इकाई का यह अभियान सामुदायिक जागरूकता, सामाजिक जिम्मेदारी और ज्ञान के माध्यम से सशक्तिकरण की दिशा में एक पहल के रूप में सामने आया। ‘प्रोजेक्ट सहेली’ के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं और किशोरियों के स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर समाज में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है।

मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति सही जानकारी उपलब्ध कराना, व्यक्तिगत स्वच्छता को बढ़ावा देना और सामाजिक मिथकों को दूर करना स्वस्थ एवं जागरूक समुदाय के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका भी अहम है, क्योंकि वे विद्यार्थियों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों तक जागरूकता का संदेश पहुंचा सकते हैं।

एनएसएस स्वयंसेवकों की सक्रिय भागीदारी ने यह दर्शाया कि युवा सामाजिक बदलाव और जन-जागरूकता के प्रयासों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। नुक्कड़ नाटक जैसे रचनात्मक माध्यमों के जरिए स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को लोगों तक सरलता से पहुंचाया जा सकता है।

कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को प्रेरित किया गया कि वे मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर बिना किसी झिझक, सामाजिक कलंक या गलत जानकारी के खुलकर बात करें। साथ ही, व्यक्तिगत स्वच्छता को प्राथमिकता देने और स्वास्थ्य संबंधी सही जानकारी को अपनाने की दिशा में सकारात्मक पहल करें।

इस प्रकार, गम्हरिया के जगन्नाथपुर में आयोजित ‘प्रोजेक्ट सहेली’ अभियान ने मासिक धर्म स्वास्थ्य, स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया। Srinath University की एनएसएस इकाई ने इस पहल के जरिए समुदाय में वैज्ञानिक सोच, संवेदनशीलता और स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देने का संदेश दिया।