जैसलमेर: राजस्थान के Jaisalmer जिले के पोकरण क्षेत्र से नाबालिग बालिका की कथित खरीद-फरोख्त और जबरन शादी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि बिहार के अरवल जिले में रहने वाले एक पिता ने अपनी दूसरी पत्नी और कुछ परिचितों के साथ मिलकर अपनी नाबालिग बेटी का कथित तौर पर 2 लाख रुपये में सौदा कर दिया। इसके बाद बालिका को बिहार से राजस्थान लाया गया, जहां पोकरण निवासी एक युवक ने उससे शादी करने और उसे अपने साथ रखने की बात सामने आई है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद नाबालिग के चाचा ने पोकरण थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस टीम ने संभावित ठिकानों की जानकारी जुटाकर दबिश दी और करीब एक घंटे के भीतर नाबालिग बालिका को सकुशल बरामद कर लिया। पुलिस ने मामले में एक युवक को गिरफ्तार भी किया है।

शिकायत मिलते ही पुलिस ने बनाई विशेष टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक अभिषेक शिवहरे के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह के सुपरविजन में पुलिस टीम का गठन किया गया। शिकायत में बताया गया था कि बिहार के अरवल जिले से नाबालिग बालिका को राजस्थान के पोकरण क्षेत्र में लाकर रखा गया है।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने बिना समय गंवाए बालिका की तलाश शुरू की। पुलिस टीम ने उसके संभावित ठिकानों के बारे में जानकारी जुटाई और अलग-अलग स्तर पर जांच की। पुलिस को सूचना मिली कि बालिका को पुरोहितसर क्षेत्र में रखा गया है। इसके बाद टीम ने वहां दबिश दी और नाबालिग को सकुशल बरामद कर लिया।

पुलिस की इस कार्रवाई के दौरान पोकरण निवासी टीकमचंद पुत्र चौथाराम माली को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस अब उससे पूछताछ कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास कर रही है।

2 लाख रुपये में बेटी का सौदा करने का आरोप

नाबालिग के चाचा की ओर से दी गई शिकायत में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, बिहार के अरवल जिले में रहने वाले नाबालिग के पिता ने अपनी दूसरी पत्नी और कुछ परिचितों के साथ मिलकर बेटी का कथित तौर पर 2 लाख रुपये में सौदा किया।

आरोप है कि इसके बाद नाबालिग को बिहार से राजस्थान लाया गया। पोकरण पहुंचने के बाद उसकी शादी टीकमचंद माली से कराए जाने की बात सामने आई। आरोप यह भी है कि शादी के बाद नाबालिग को युवक अपने साथ पोकरण में रख रहा था।

हालांकि, मामले में लगाए गए सभी आरोपों की पूरी सच्चाई पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नाबालिग को बिहार से राजस्थान तक किस तरह लाया गया और इस पूरी प्रक्रिया में किन-किन लोगों की भूमिका रही।

बिहार से राजस्थान तक कैसे पहुंची नाबालिग?

मामले की जांच में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि नाबालिग बालिका को बिहार के अरवल जिले से राजस्थान के जैसलमेर जिले तक कैसे लाया गया। इतनी लंबी दूरी तय कर बालिका को राजस्थान लाने के दौरान कौन-कौन लोग उसके संपर्क में थे और किसने यात्रा की व्यवस्था की, इसकी भी जांच की जा रही है।

पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित सौदे में केवल परिवार के लोग शामिल थे या फिर किसी बिचौलिए ने भी भूमिका निभाई थी। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस ने एक घंटे के अंदर किया रेस्क्यू

शिकायत मिलने के बाद पोकरण पुलिस ने जिस तेजी से कार्रवाई की, उसके चलते नाबालिग को जल्द ही बरामद कर लिया गया। पुलिस टीम ने संभावित ठिकाने की पहचान की और पुरोहितसर क्षेत्र में दबिश देकर बालिका को अपने संरक्षण में लिया।

पुलिस के अनुसार, कार्रवाई के दौरान बालिका को सुरक्षित बरामद किया गया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया।

मामला नाबालिग से जुड़ा होने के कारण पुलिस बालिका की सुरक्षा और उसके हितों को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई कर रही है।

बाल कल्याण समिति के सामने पेश की गई बालिका

नाबालिग को बरामद करने के बाद पुलिस ने उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। समिति के निर्देश के अनुसार बालिका को उसके सुपुर्द कर दिया गया है।

बाल कल्याण समिति अब बालिका की स्थिति, सुरक्षा और उसके पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेगी। नाबालिग की पहचान और उससे जुड़ी संवेदनशील जानकारी को सार्वजनिक करने से भी बचा जा रहा है।

पुलिस यह भी सुनिश्चित करने में जुटी है कि जांच के दौरान बालिका पर किसी तरह का दबाव न पड़े और उसे सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए।

पोकरण पुलिस ने दर्ज की जीरो नंबर FIR

मामले का मूल संबंध बिहार के अरवल जिले से होने के कारण पोकरण पुलिस ने जीरो नंबर FIR दर्ज की है। इसके बाद मामले को आगे की जांच के लिए अरवल थाना पुलिस को भेज दिया गया है।

जीरो नंबर FIR की व्यवस्था के तहत किसी भी थाना क्षेत्र में अपराध की सूचना मिलने पर मामला दर्ज किया जा सकता है, भले ही घटना का मुख्य क्षेत्र किसी दूसरे थाने के अंतर्गत आता हो। बाद में संबंधित क्षेत्र के थाने को जांच के लिए मामला स्थानांतरित किया जा सकता है।

इसी प्रक्रिया के तहत अब इस मामले की आगे की जांच अरवल पुलिस द्वारा की जाएगी।

पिता दूसरी पत्नी और परिचितों की भूमिका की जांच

अरवल पुलिस के सामने अब इस मामले से जुड़े कई अहम सवाल हैं। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नाबालिग के पिता और उसकी दूसरी पत्नी की क्या भूमिका थी। इसके अलावा शिकायत में जिन परिचितों का उल्लेख किया गया है, उनकी भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी।

पुलिस कथित तौर पर 2 लाख रुपये के लेनदेन, नाबालिग को राजस्थान लाने और उसकी शादी कराने से जुड़े पहलुओं की जांच कर सकती है। यदि किसी बिचौलिए या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

जबरन शादी और बाल विवाह के पहलुओं की भी होगी जांच

चूंकि मामला नाबालिग बालिका की शादी से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए जांच में बाल विवाह और नाबालिग के संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रावधानों को भी देखा जाएगा। पुलिस यह निर्धारित करेगी कि बालिका की उम्र क्या है और कथित शादी किन परिस्थितियों में कराई गई।

नाबालिग की उम्र की पुष्टि के लिए उपलब्ध दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा सकती है। इसके आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

युवक की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ जारी

पोकरण पुलिस ने मामले में टीकमचंद माली को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ के जरिए पुलिस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रही है।

जांच में यह पता लगाया जाएगा कि युवक नाबालिग के संपर्क में कैसे आया, कथित शादी की प्रक्रिया किस तरह हुई और बालिका को उसके साथ रखने की परिस्थितियां क्या थीं। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।

बिहार और राजस्थान पुलिस के बीच समन्वय

मामले की जड़ बिहार के अरवल जिले से जुड़ी होने के कारण अब राजस्थान और बिहार पुलिस के बीच समन्वय के जरिए जांच आगे बढ़ेगी। पोकरण पुलिस द्वारा दर्ज जीरो नंबर FIR को अरवल पुलिस को भेजे जाने के बाद वहां संबंधित लोगों से पूछताछ और अन्य साक्ष्यों को जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नाबालिग को राजस्थान लाने और कथित सौदे में कितने लोग शामिल थे तथा उनकी क्या भूमिका थी।

एक घंटे में रेस्क्यू से टली बड़ी अनहोनी

इस पूरे मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस की त्वरित कार्रवाई महत्वपूर्ण रही। नाबालिग की तलाश शुरू होने के करीब एक घंटे के भीतर उसे बरामद कर लिया गया। इसके बाद उसे बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया और समिति के निर्देश के अनुसार सुरक्षित संरक्षण में दिया गया।

अब जांच का मुख्य फोकस कथित 2 लाख रुपये के सौदे, नाबालिग को बिहार से राजस्थान लाने, कथित शादी और इसमें शामिल लोगों की भूमिका पर रहेगा। अरवल पुलिस की जांच के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।