जमशेदपुर: Jamshedpur ब्रह्माकुमारी संस्थान से जुड़े नियमित राजयोग साधकों के लिए आयोजित दो दिवसीय ‘ऊँची उड़ान — संपूर्णता की ओर’ राजयोग तपस्या शिविर का शनिवार को विधिवत शुभारंभ हुआ। बिष्टुपुर स्थित बेल्डीह ट्रायंगल के लॉयला स्कूल ऑडिटोरियम में आयोजित इस विशेष शिविर में जमशेदपुर सहित झारखंड और देश के विभिन्न शहरों से लगभग एक हजार भाई-बहनों ने भाग लिया।
शिविर का उद्देश्य राजयोग साधकों को आत्मिक उन्नति, सकारात्मक चिंतन, स्वमान, क्षमा, कृतज्ञता, आत्म-चिंतन और परमात्म-स्मृति के माध्यम से जीवन में संपूर्णता की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में राजयोग, ध्यान और आत्मिक जागरूकता से जुड़े विभिन्न सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
माउंट आबू से पहुंचे वरिष्ठ राजयोगी सूरज भाई
शिविर में अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू से पधारे वरिष्ठ राजयोगी एवं प्रखर वक्ता राजयोगी ब्रह्माकुमार सूरज भाई के सान्निध्य में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लंबे समय से राजयोग के अनुभवी साधक और प्रशिक्षक रहे सूरज भाई लेखक एवं गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं। उन्हें चाणक्य अवॉर्ड सहित अनेक सरकारी एवं गैर-सरकारी सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।

उनके साथ वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका गीता दीदी और रोहित भाई जी भी विशेष रूप से जमशेदपुर पहुंचे हैं। तीनों राजयोग के अनुभवी प्रशिक्षक और प्रभावशाली वक्ता के रूप में प्रतिभागियों को विभिन्न आध्यात्मिक एवं व्यावहारिक विषयों पर मार्गदर्शन दे रहे हैं।
दीप प्रज्वलन और कैंडल लाइटिंग से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं कैंडल लाइटिंग के साथ हुआ। इस अवसर पर महिला समाजसेवी पूरबी घोष, इंडस्ट्रियलिस्ट तरु बेन कमानी, मनोज कुमार, रीजनल मैनेजर एलआईसी, इंडस्ट्रियलिस्ट जितेंद्र अग्रवाल, आनंद सिंह सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
लॉयला स्कूल के फादर प्रिंसिपल ने भी कार्यक्रम में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अलावा जमशेदपुर और आसपास के क्षेत्रों से वरिष्ठ राजयोग साधिकाओं रागिनी दीदी, सुधा दीदी, पूनम दीदी, लक्ष्मी दीदी, उन्नति दीदी, रूबी दीदी और राजवंती बहन, शिवकन्या दीदी सहित अनेक वरिष्ठ बहनों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
सूरज भाई ने बताया स्वमान का महत्व
शिविर के प्रथम सत्र में सूरज भाई ने ‘स्वमान’ यानी Self Respect के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों को राजयोग के माध्यम से स्वमान का अनुभव कराया और बताया कि व्यक्ति यदि स्वयं को केवल शरीर के रूप में देखने के बजाय आत्मिक स्वरूप में पहचानता है, तो उसके विचार और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन आ सकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों को विशेष रूप से इस संकल्प का अभ्यास कराया—
“मैं सर्वशक्तिमान पिता की संतान हूँ, मैं मास्टर सर्वशक्तिमान आत्मा हूँ।”
सूरज भाई ने कहा कि इस प्रकार के सकारात्मक संकल्पों का चलते-फिरते और दैनिक कार्य करते हुए निरंतर अभ्यास करने से व्यक्ति के भीतर सकारात्मक एवं ईश्वरीय ऊर्जा का अनुभव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि मन में शुभ संकल्पों की शक्ति बढ़ने से व्यक्ति अपने कल्याण के साथ-साथ दूसरों के कल्याण के लिए भी सकारात्मक कर्म करने की दिशा में आगे बढ़ता है।
क्षमा और कृतज्ञता को बताया आंतरिक खुशी का आधार
शिविर के अगले सत्र में गीता दीदी ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब किसी व्यक्ति के व्यवहार से हमें दुःख पहुंचता है और हम उस घटना को बार-बार मन में दोहराते रहते हैं, तो उसका असर हमारी मानसिक शांति पर पड़ सकता है।
उन्होंने प्रतिभागियों को नकारात्मक विचारों को पकड़े रखने के बजाय क्षमा का भाव अपनाने के लिए प्रेरित किया। उनके अनुसार क्षमा का भाव मन को हल्का करने और सकारात्मकता का अनुभव कराने में सहायक हो सकता है।
गीता दीदी ने कृतज्ञता को भी जीवन की महत्वपूर्ण शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि परमात्मा ने प्रत्येक व्यक्ति को बहुत कुछ दिया है, लेकिन जब व्यक्ति अपनी तुलना दूसरों की उपलब्धियों और परिस्थितियों से करने लगता है, तो उसे अपने जीवन में कमी महसूस होने लगती है। इसके स्थान पर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता का भाव रखने से संतोष और आंतरिक खुशी का अनुभव बढ़ सकता है।
इसके बाद उन्होंने प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास भी कराया।
Self Checking से स्वयं की स्थिति को समझने का संदेश
शाम के सत्र में ब्रह्माकुमारी अंजू दीदी ने दिनभर के सत्रों के सार के रूप में Self Checking यानी स्व-चेकिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को नियमित रूप से अपनी सोच, व्यवहार और कर्मों की समीक्षा करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि आत्म-जाँच के माध्यम से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचान सकता है और उन्हें दूर करने का प्रयास कर सकता है। अपनी गलतियों से सीखना और उन्हें दोबारा न दोहराना व्यक्ति की सकारात्मक प्रगति में सहायक हो सकता है।
अंजू दीदी ने इसे ‘इमोशनल बैंक अकाउंट’ से जोड़ते हुए समझाया कि अच्छे विचार, शुभ भावनाएं और सकारात्मक कर्म इस खाते में लगातार जमा होते रहते हैं। इस प्रकार की आत्म-जाँच व्यक्ति को स्वयं के साथ-साथ दूसरों के लिए भी प्रेरणादायक बनने में सहयोग कर सकती है।
गतिविधियों के माध्यम से कराया आत्म-चिंतन
इसके बाद आपा बहन ने प्रतिभागियों के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित कराईं। इसमें प्रतिभागियों को अपने जीवन के ऐसे अनुभव लिखने के लिए प्रेरित किया गया, जब उन्होंने किसी व्यक्ति को क्षमा किया और उसके बाद मन में हल्केपन का अनुभव हुआ।
इसी प्रकार प्रतिभागियों से ऐसा अनुभव भी साझा करने के लिए कहा गया, जब अपनी किसी गलती को स्वीकार कर किसी व्यक्ति से ‘सॉरी’ कहने के बाद उन्हें खुशी और मानसिक हल्केपन का अनुभव हुआ हो। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने जीवन के अनुभवों को आत्मिक दृष्टि से देखने और उनसे सकारात्मक सीख लेने के लिए प्रेरित किया गया।
परमात्मा के साथ का अनुभव कराने पर जोर
संध्या सत्र में रोहित भाई जी ने परमात्मा के साथ का अनुभव करने की विधि पर प्रकाश डाला। उन्होंने राजयोग के माध्यम से परमात्म-स्मृति को जीवन का हिस्सा बनाने और नियमित अभ्यास के महत्व पर चर्चा की।
इसके बाद सूरज भाई जी ने अपनी विशेष कॉमेंट्री के माध्यम से प्रतिभागियों को राजयोग मेडिटेशन का गहन अभ्यास कराया। मेडिटेशन सत्र के दौरान प्रतिभागियों को मन को शांत रखने, सकारात्मक विचारों पर केंद्रित करने और परमात्म-स्मृति का अनुभव करने का अभ्यास कराया गया।
शुभकामनाओं और ईश्वरीय शांति का कराया अनुभव
कार्यक्रम के समापन सत्र में गीता दीदी ने ईश्वरीय शांति एवं शुभकामनाओं की शक्ति का अनुभव कराया। उन्होंने प्रतिभागियों को मन के माध्यम से दूसरों को शक्ति और शुभभावनाएं देने का अभ्यास कराया।
उन्होंने बताया कि सकारात्मक विचार और शुभभावनाएं व्यक्ति के स्वयं के मन को भी शांत रखने में सहायक हो सकती हैं। इस दौरान प्रतिभागियों ने राजयोग मेडिटेशन के माध्यम से आंतरिक शांति और सकारात्मकता का अनुभव करने का प्रयास किया।
विभिन्न शहरों से पहुंचे लगभग एक हजार प्रतिभागी
दो दिवसीय इस विशेष शिविर में जमशेदपुर के अलावा गया, हजारीबाग, रामगढ़, पटना, मुजफ्फरपुर, देवघर, कोलकाता, रांची, चांडिल, बलरामपुर और देवरिया सहित विभिन्न स्थानों से लगभग एक हजार भाई-बहन भाग लेने पहुंचे हैं।
बड़ी संख्या में साधकों की भागीदारी से पूरे कार्यक्रम में आध्यात्मिक एवं सकारात्मक वातावरण देखने को मिला। प्रतिभागियों के लिए विभिन्न सत्रों के माध्यम से राजयोग, ध्यान, आत्म-चिंतन और सकारात्मक जीवनशैली से जुड़े विषयों को व्यावहारिक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
आत्मिक उन्नति और संपूर्णता की ओर बढ़ने का संदेश
‘ऊँची उड़ान — संपूर्णता की ओर’ राजयोग तपस्या शिविर का मूल उद्देश्य नियमित राजयोग साधकों को अपने जीवन में आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। शिविर में स्वमान, सकारात्मक चिंतन, क्षमा, कृतज्ञता, आत्म-चिंतन और परमात्म-स्मृति जैसे विषयों को केंद्र में रखकर प्रतिभागियों को अपने विचारों और व्यवहार की समीक्षा करने का संदेश दिया जा रहा है।
ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से इस विशेष आयोजन में शामिल सभी भाई-बहनों, अतिथियों, समाजसेवियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। साथ ही सभी के जीवन में शांति, शक्ति, खुशी और सफलता की कामना की गई।




















