आदित्यपुर: सामाजिक सेवा, जनजागरण और ग्रामीण विकास के उद्देश्य से आदित्यपुर स्थित Shrinath कॉलेज ऑफ एजुकेशन में नेशनल सर्विस स्कीम (NSS) के तत्वावधान में सात दिवसीय स्पेशल कैंप का शुभारंभ सोमवार, 6 जुलाई 2026 को किया गया। यह विशेष शिविर 6 जुलाई से 12 जुलाई 2026 तक गम्हरिया प्रखंड के उदयपुर गांव में संचालित किया जाएगा। शिविर का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय के साथ संवाद स्थापित करना, सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता फैलाना, स्वयंसेवकों में सेवा-भाव विकसित करना तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर ठोस कार्य करना है।
कार्यक्रम का शुभारंभ कोल्हान विश्वविद्यालय की वर्तमान एनएसएस समन्वयक डॉ. मीनाक्षी मुंडा द्वारा किया गया। उन्होंने शिविर के उद्घाटन अवसर पर ओरिएंटेशन कार्यक्रम के माध्यम से स्वयंसेवकों को शिविर के उद्देश्य, कार्ययोजना, अनुशासन, सामाजिक उत्तरदायित्व और ग्रामीण जीवन से जुड़ाव के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान महाविद्यालय प्रबंधन, शिक्षकगण, एनएसएस इकाई से जुड़े पदाधिकारी, स्वयंसेवक और अन्य उपस्थितजनों ने विशेष शिविर के सफल संचालन का संकल्प लिया।
सामाजिक सरोकारों से जुड़ने का सशक्त माध्यम है एनएसएस
नेशनल सर्विस स्कीम केवल एक शैक्षणिक सह-पाठ्यक्रम गतिविधि नहीं, बल्कि युवाओं को समाज से जोड़ने वाला एक सशक्त मंच है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में सेवा, नेतृत्व, अनुशासन, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यही कारण है कि एनएसएस के विशेष शिविरों को महज औपचारिक कार्यक्रम न मानकर समाज के बीच सक्रिय हस्तक्षेप और सकारात्मक बदलाव के माध्यम के रूप में देखा जाता है।

श्रीनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन द्वारा आयोजित यह सात दिवसीय स्पेशल कैंप भी इसी सोच का विस्तार है। कॉलेज की एनएसएस इकाई ने इस शिविर के माध्यम से ग्रामीण जीवन की वास्तविक चुनौतियों को समझने, गांव के लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने और जरूरत के अनुरूप जागरूकता एवं सेवा कार्यक्रमों का आयोजन करने की योजना बनाई है। यह शिविर स्वयंसेवकों को केवल सामाजिक कार्यों का अनुभव ही नहीं देगा, बल्कि उन्हें संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करेगा।
डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने किया ओरिएंटेशन कार्यक्रम का शुभारंभ
विशेष शिविर के पहले दिन आयोजित उद्घाटन एवं ओरिएंटेशन कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. मीनाक्षी मुंडा ने किया। उन्होंने स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा कि एनएसएस का मूल उद्देश्य केवल सेवा करना नहीं, बल्कि समाज की जरूरतों को समझकर उसके साथ खड़े होना है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इस शिविर को एक जिम्मेदारी और सीखने के अवसर के रूप में लें।
डॉ. मुंडा ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करते समय संवेदनशीलता, धैर्य, अनुशासन और सामुदायिक सहभागिता की भावना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्वयंसेवकों को बताया कि किसी भी सामाजिक अभियान की सफलता तभी संभव है, जब उसमें स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित हो। उन्होंने यह भी कहा कि एनएसएस स्वयंसेवकों को केवल कार्यक्रम आयोजित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि गांव की समस्याओं, जरूरतों और संभावनाओं को समझते हुए रचनात्मक समाधान की दिशा में सोच विकसित करनी चाहिए।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के दौरान शिविर की रूपरेखा, सात दिनों की गतिविधियों, स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियों, ग्रामीणों के साथ व्यवहार, स्वास्थ्य और स्वच्छता संबंधी सावधानियों तथा टीम वर्क के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। इस सत्र ने पूरे शिविर के लिए एक सकारात्मक और उद्देश्यपूर्ण वातावरण तैयार किया।
उदयपुर गांव में सात दिनों तक चलेगा सेवा और जागरूकता का अभियान
यह विशेष शिविर गम्हरिया स्थित उदयपुर गांव में आयोजित किया जा रहा है। शिविर के लिए जो कार्यक्रम तय किए गए हैं, वे ग्रामीण जीवन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र में रखते हैं। इसमें पर्यावरण संरक्षण, प्रौढ़ शिक्षा, स्वास्थ्य जांच, जरूरतमंदों के बीच भोजन वितरण, मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता और सामुदायिक संवाद जैसे विषय शामिल हैं। यह विविधता बताती है कि कॉलेज की एनएसएस इकाई ने शिविर को केवल एक प्रतीकात्मक आयोजन न बनाकर, उसे बहुआयामी सामाजिक हस्तक्षेप के रूप में तैयार किया है।
सात दिनों की यह कार्ययोजना गांव के अलग-अलग वर्गों—बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों, जरूरतमंद परिवारों और युवाओं—को ध्यान में रखकर बनाई गई है। इससे न केवल ग्रामीणों को सीधे लाभ मिलेगा, बल्कि स्वयंसेवकों को भी समाज के विभिन्न पक्षों को समझने का अवसर प्राप्त होगा।
दूसरे दिन पौधरोपण के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश
शिविर के दूसरे दिन जसोए कम्युनिटी के सहयोग से पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण और हरित चेतना को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होगी। वर्तमान समय में पर्यावरणीय असंतुलन, जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और हरित क्षेत्र के घटते दायरे को देखते हुए पौधरोपण जैसे कार्यक्रमों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों और स्वयंसेवकों को यह संदेश दिया जाएगा कि पेड़-पौधे केवल प्रकृति की सुंदरता नहीं बढ़ाते, बल्कि वे जीवन, जल, वायु और पर्यावरण संतुलन के आधार हैं। शिविर के स्वयंसेवक ग्रामीणों के साथ मिलकर पौधे लगाएंगे और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी को लेकर भी जागरूकता फैलाएंगे। इस पहल का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी का भाव विकसित करना है।
तीसरे दिन प्रौढ़ शिक्षा के प्रचार-प्रसार पर रहेगा जोर
शिविर के तीसरे दिन एनएसएस वॉलंटियर्स द्वारा प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम के प्रचार-प्रसार का कार्य किया जाएगा। यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन ग्रामीणों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो किसी कारणवश औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं। प्रौढ़ शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना सिखाने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, जागरूकता और सामाजिक भागीदारी को बढ़ाने का एक प्रभावी साधन है।
एनएसएस स्वयंसेवक गांव में जाकर लोगों को यह समझाने का प्रयास करेंगे कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती और साक्षरता व्यक्ति के जीवन को कई स्तरों पर बदल सकती है। इससे न केवल व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में अधिक सक्षम बनता है, बल्कि सरकारी योजनाओं, बैंकिंग, स्वास्थ्य, बच्चों की पढ़ाई और सामाजिक अधिकारों से जुड़ी जानकारी भी बेहतर तरीके से समझ पाता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से गांव में शिक्षा के महत्व को लेकर सकारात्मक माहौल तैयार करने की कोशिश की जाएगी।
चौथे दिन त्रिनेत्र हॉस्पिटल करेगा ग्रामीणों की निशुल्क नेत्र जांच
विशेष शिविर के चौथे दिन त्रिनेत्र हॉस्पिटल के सहयोग से ग्रामीणों के लिए निशुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता अब भी एक बड़ी चुनौती है, खासकर आंखों से जुड़ी समस्याओं के मामले में लोग अक्सर समय पर जांच नहीं करा पाते। ऐसे में इस तरह का स्वास्थ्य शिविर गांव के लोगों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित होगा।
नेत्र जांच शिविर के दौरान ग्रामीणों की आंखों की जांच की जाएगी और उन्हें आवश्यक परामर्श भी दिया जाएगा। यदि किसी व्यक्ति में दृष्टि संबंधी समस्या, मोतियाबिंद के लक्षण, चश्मे की जरूरत या अन्य नेत्र संबंधी शिकायतें पाई जाती हैं, तो उन्हें आगे के उपचार के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। इस पहल से विशेष रूप से बुजुर्गों और आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीणों को लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह प्रयास शिविर को एक मानवीय और उपयोगी आयाम प्रदान करता है।
पांचवें दिन जरूरतमंदों के बीच भोजन वितरण किया जाएगा
शिविर के पांचवें दिन हाईफाई जमशेदपुर एनजीओ के सहयोग से फूड डिस्ट्रीब्यूशन ड्राइव का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत गांव के जरूरतमंद और वंचित लोगों के बीच भोजन का वितरण किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल खाद्य सामग्री बांटना नहीं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग की भावना को मजबूत करना है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवार ऐसे होते हैं जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण पर्याप्त पोषण और भोजन की समस्या से जूझते हैं। ऐसे में भोजन वितरण कार्यक्रम उनके लिए राहत का माध्यम बन सकता है। साथ ही, यह स्वयंसेवकों को यह समझने का अवसर भी देगा कि सामाजिक सेवा का अर्थ केवल जागरूकता फैलाना नहीं, बल्कि जरूरत के समय प्रत्यक्ष सहयोग देना भी है। इस कार्यक्रम से एनएसएस शिविर का मानवीय पक्ष और अधिक मजबूत होकर सामने आएगा।
छठे दिन मानव तस्करी के खिलाफ जागरूकता कार्यक्रम
शिविर के छठे दिन सहायक प्राध्यापक विनय सिंह सांडिल के द्वारा मानव तस्करी जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दे पर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किया जाएगा। मानव तस्करी आज भी समाज के सामने एक बड़ी चुनौती है, जिसका शिकार विशेष रूप से महिलाएं, किशोरियां, बच्चे और आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लोग बनते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, गरीबी, झूठे रोजगार के लालच और शिक्षा की कमी के कारण लोग कई बार इस जाल में फंस जाते हैं।
इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को मानव तस्करी के स्वरूप, उसके तरीकों, उससे बचाव, कानूनी उपायों और सतर्कता के बारे में जानकारी दी जाएगी। स्वयंसेवकों और ग्रामीणों को यह बताया जाएगा कि संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कैसे की जाए और ऐसी किसी स्थिति में तुरंत प्रशासन या पुलिस से संपर्क क्यों जरूरी है। यह जागरूकता कार्यक्रम सामाजिक सुरक्षा और मानवाधिकार के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सातवें दिन सामुदायिक संपर्क, फीडबैक और उपलब्धियों की समीक्षा
शिविर के अंतिम यानी सातवें दिन महाविद्यालय प्रबंधन तथा एनएसएस इकाई द्वारा सामुदायिक संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दिन ग्रामीणों से शिविर के संबंध में फीडबैक लिया जाएगा और सात दिनों के दौरान किए गए कार्यों, उनके प्रभाव और अनुभवों पर चर्चा की जाएगी। यह चरण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी भी सामाजिक कार्यक्रम की सफलता केवल आयोजन तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह भी जरूरी होता है कि समुदाय उस कार्यक्रम को किस रूप में देखता है और उसे उससे कितना लाभ मिला।
फीडबैक सत्र के दौरान ग्रामीणों से यह जाना जाएगा कि उन्हें कौन-से कार्यक्रम सबसे अधिक उपयोगी लगे, भविष्य में किन विषयों पर और काम किया जाना चाहिए, तथा गांव की प्राथमिक जरूरतें क्या हैं। इसके साथ ही शिविर की उपलब्धियों, स्वयंसेवकों के अनुभवों और सामुदायिक सहयोग पर भी चर्चा होगी। इसी दिन शिविर के समापन की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
ग्रामीण विकास और युवा नेतृत्व का संगम बनेगा यह शिविर
Shrinath कॉलेज ऑफ एजुकेशन का यह विशेष एनएसएस शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवा नेतृत्व और ग्रामीण विकास के संगम का उदाहरण है। एक ओर जहां यह शिविर ग्रामीण समुदाय को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने का प्रयास करेगा, वहीं दूसरी ओर यह स्वयंसेवकों को सामाजिक यथार्थ से जोड़ते हुए उनमें नेतृत्व, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करेगा।
आज के समय में शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों को समाज के साथ सक्रिय संबंध बनाते हुए ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देना होगा, जिनसे विद्यार्थियों का व्यक्तित्व भी विकसित हो और समाज को भी वास्तविक लाभ मिले। एनएसएस शिविर इसी सोच का एक सशक्त उदाहरण है।
आदित्यपुर स्थित Shrinath कॉलेज ऑफ एजुकेशन द्वारा आयोजित नेशनल सर्विस स्कीम का सात दिवसीय स्पेशल कैंप सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास और युवा सेवा-भाव का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया है। 6 जुलाई से 12 जुलाई 2026 तक उदयपुर गांव में चलने वाला यह शिविर शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण, मानवता और सामाजिक जागरूकता जैसे विविध विषयों को समेटे हुए है। डॉ. मीनाक्षी मुंडा द्वारा ओरिएंटेशन कार्यक्रम से शुरू हुआ यह शिविर आने वाले दिनों में पौधरोपण, प्रौढ़ शिक्षा, नेत्र जांच, भोजन वितरण, मानव तस्करी पर जागरूकता और सामुदायिक संवाद जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के माध्यम से ग्रामीण समाज से सीधा जुड़ाव स्थापित करेगा।
निस्संदेह, इस तरह के शिविर विद्यार्थियों को केवल सेवा का अवसर नहीं देते, बल्कि उन्हें समाज के प्रति संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में भी प्रेरित करते हैं। श्रीनाथ कॉलेज ऑफ एजुकेशन की यह पहल न केवल संस्थान की सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि यदि शिक्षा और सेवा का समन्वय हो, तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की मजबूत नींव रखी जा सकती है।
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