भारत: Dengue से बचाव की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। भारतीय औषधि महानियंत्रक (CDSCO) ने देश में पहली बार डेंगू वैक्सीन Qdenga (TAK-003) के उपयोग को मंजूरी दे दी है। हर साल मानसून के दौरान डेंगू के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यह वैक्सीन डेंगू के चारों प्रकार के वायरस से सुरक्षा देने के लिए विकसित की गई है और इसे बच्चों से लेकर वयस्कों तक लगाया जा सकेगा। आइए जानते हैं इस वैक्सीन से जुड़ी हर जरूरी जानकारी।

भारत की पहली Dengue वैक्सीन को मिली मंजूरी

बारिश का मौसम शुरू होते ही देशभर में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। ऐसे में पहली बार भारत को एक ऐसी वैक्सीन मिली है जो डेंगू के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

CDSCO ने Qdenga वैक्सीन को मंजूरी देकर भारत में डेंगू रोकथाम के प्रयासों को नई दिशा दी है। यह वैक्सीन पहले से कई देशों में इस्तेमाल की जा रही है और अब भारतीय लोगों के लिए भी उपलब्ध होगी।

किस कंपनी ने तैयार की है Qdenga वैक्सीन?

Qdenga (TAK-003) का विकास जापान की प्रसिद्ध फार्मास्युटिकल कंपनी Takeda ने किया है। हालांकि भारत में इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत किया जाएगा।

इसके लिए टाकेडा ने हैदराबाद स्थित प्रमुख वैक्सीन निर्माता Biological E के साथ साझेदारी की है। भारत में उत्पादन होने से इसकी उपलब्धता बढ़ेगी और लागत भी अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है।

आखिर Qdenga वैक्सीन इतनी खास क्यों है?

डेंगू वायरस के कुल चार अलग-अलग प्रकार (Serotypes) होते हैं। पहले उपलब्ध वैक्सीन सभी प्रकारों पर समान रूप से प्रभावी नहीं थीं या उन्हें केवल उन्हीं लोगों को लगाया जाता था जिन्हें पहले डेंगू हो चुका हो।

Qdenga एक टेट्रावेलेंट (Tetravalent) वैक्सीन है, जिसका मतलब है कि यह डेंगू के चारों प्रकार के वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करती है।

इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे उन लोगों को भी लगाया जा सकता है जिन्हें पहले कभी डेंगू नहीं हुआ है।

क्लिनिकल ट्रायल में कितना असरदार साबित हुई?

क्लिनिकल ट्रायल्स के दौरान Qdenga के परिणाम काफी सकारात्मक रहे।

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • 90 प्रतिशत से अधिक लोगों में मजबूत एंटीबॉडी विकसित हुई।
  • गंभीर डेंगू होने का खतरा काफी कम हुआ।
  • अस्पताल में भर्ती होने की संभावना में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई।
  • लंबे समय तक प्रतिरक्षा प्रदान करने के संकेत मिले।

यही कारण है कि कई देशों में इसे सफलतापूर्वक अपनाया जा चुका है।

किन लोगों को लगाई जाएगी यह वैक्सीन?

CDSCO के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह वैक्सीन निम्न आयु वर्ग के लोगों को दी जा सकती है—

  • 4 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चे
  • किशोर
  • युवा
  • 60 वर्ष तक के वयस्क

डॉक्टर व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए वैक्सीन लगाने की सलाह देंगे।

कितने डोज लेने होंगे?

Qdenga वैक्सीन की दो डोज दी जाती हैं।

पहला डोज: डॉक्टर द्वारा निर्धारित तिथि पर लगाया जाएगा।

दूसरा डोज: पहले डोज के लगभग 3 महीने बाद लगाया जाएगा।

यह वैक्सीन सबक्यूटेनियस (Subcutaneous) इंजेक्शन के रूप में बांह में दी जाती है।

दोनों डोज समय पर लेना जरूरी माना गया है ताकि बेहतर सुरक्षा मिल सके।

क्या पहले डेंगू होना जरूरी है?

नहीं।

यही Qdenga की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है। पहले कुछ डेंगू वैक्सीन केवल उन्हीं लोगों को दी जाती थीं जिन्हें पहले डेंगू हो चुका होता था।

लेकिन Qdenga उन लोगों के लिए भी सुरक्षित और प्रभावी मानी गई है जिन्हें जीवन में कभी डेंगू नहीं हुआ।

क्या इसके कोई साइड इफेक्ट हैं?

दुनिया के 40 से अधिक देशों में इस वैक्सीन का उपयोग किया जा चुका है और इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से भी मान्यता मिली है।

अन्य सामान्य टीकों की तरह इसके कुछ हल्के साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जैसे—

  • हल्का बुखार
  • सिरदर्द
  • इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द
  • सूजन
  • हल्की थकान

गंभीर दुष्प्रभाव बहुत ही दुर्लभ बताए गए हैं। किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

भारत में इसकी कीमत कितनी होगी?

फिलहाल सरकार और निर्माता कंपनी ने इसकी आधिकारिक कीमत की घोषणा नहीं की है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में उत्पादन होने के कारण इसकी कीमत अन्य आयातित वैक्सीन की तुलना में कम हो सकती है, जिससे अधिक लोगों तक इसकी पहुंच संभव होगी।

लॉन्च के शुरुआती छह महीनों तक इसके प्रभाव और सुरक्षा की लगातार निगरानी भी की जाएगी।

क्या वैक्सीन लगने के बाद भी बचाव जरूरी है?

बिल्कुल।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैक्सीन डेंगू से अतिरिक्त सुरक्षा देती है, लेकिन यह मच्छरों से बचाव का विकल्प नहीं है।

इसलिए निम्न सावधानियां पहले की तरह जरूरी रहेंगी—

  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
  • मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
  • पूरी बांह के कपड़े पहनें।
  • मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का उपयोग करें।
  • कूलर, टंकी और गमलों की नियमित सफाई करें।

इन उपायों को अपनाने से डेंगू सहित अन्य मच्छरजनित बीमारियों से भी बचाव किया जा सकता है।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी उपलब्धि?

हर वर्ष भारत में लाखों लोग डेंगू से प्रभावित होते हैं। कई मामलों में मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है और गंभीर स्थिति में जान का खतरा भी बढ़ जाता है।

ऐसे में Qdenga वैक्सीन की मंजूरी देश के सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इससे भविष्य में डेंगू के गंभीर मामलों और अस्पतालों पर बढ़ने वाले बोझ को कम करने में मदद मिल सकती है।

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन Qdenga (TAK-003) को मिली मंजूरी डेंगू रोकथाम की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह वैक्सीन डेंगू के चारों प्रकार के वायरस से सुरक्षा प्रदान करने की क्षमता रखती है और 4 से 60 वर्ष तक के लोगों को दो डोज में दी जाएगी। हालांकि वैक्सीन एक मजबूत सुरक्षा कवच है, फिर भी मच्छरों से बचाव के पारंपरिक उपाय अपनाना उतना ही आवश्यक रहेगा। आने वाले समय में यह वैक्सीन भारत में डेंगू नियंत्रण की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।