लखीसराय: बिहार के लखीसराय जिले के Kiul रेलवे स्टेशन से एक बेहद भावुक और चिंताजनक मामला सामने आया है। स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 3 और 4 पर तीन छोटे बच्चे लंबे समय तक अकेले बैठे अपनी मां का इंतजार करते रहे। जब काफी देर तक उनके साथ मौजूद महिला वापस नहीं लौटी, तो यात्रियों को कुछ अनहोनी की आशंका हुई। लोगों ने तत्काल मानवता का परिचय देते हुए किऊल जीआरपी (Government Railway Police) को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। बाद में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें बाल संरक्षण इकाई के सुपुर्द कर दिया गया। फिलहाल पुलिस महिला और बच्चों के परिजनों की तलाश में जुटी हुई है।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, घटना लखीसराय के किऊल रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 3 और 4 की है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि एक महिला तीन छोटे बच्चों के साथ प्लेटफॉर्म पर बैठी हुई थी। कुछ समय बाद वह बच्चों को वहीं छोड़कर कहीं चली गई और काफी देर तक वापस नहीं लौटी।

शुरुआत में लोगों को लगा कि महिला किसी जरूरी काम से गई होगी, लेकिन समय बीतने के बावजूद जब वह वापस नहीं आई तो यात्रियों को चिंता होने लगी। बच्चे लगातार अपनी मां का इंतजार करते रहे और इधर-उधर नजरें दौड़ाते रहे।

यात्रियों ने दिखाई इंसानियत

स्टेशन पर मौजूद यात्रियों ने बच्चों की बेबसी देखकर तुरंत जिम्मेदारी निभाई। उन्होंने बच्चों को अकेला छोड़ने के बजाय उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किऊल जीआरपी को सूचना दी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस को सूचना नहीं दी जाती, तो बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी। यात्रियों की सतर्कता और संवेदनशीलता के कारण तीनों बच्चों को सुरक्षित संरक्षण मिल सका।

जीआरपी ने तुरंत संभाला मोर्चा

सूचना मिलते ही किऊल जीआरपी की टीम स्टेशन पहुंची और तीनों बच्चों को सुरक्षित अपने साथ थाना ले गई।

पुलिस ने बच्चों को भोजन और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई। इसके बाद बाल कल्याण से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए बच्चों को जिला मुख्यालय स्थित बाल संरक्षण इकाई के सुपुर्द कर दिया गया, जहां उनकी देखभाल की जा रही है।

अपना पता भी नहीं बता सके बच्चे

किऊल जीआरपी थाना प्रभारी बिंद कुमार के अनुसार, पुलिस ने बच्चों से उनके घर और परिवार के बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया।

हालांकि, तीनों बच्चे काफी छोटे होने के कारण अपना पूरा पता या परिजनों की सही जानकारी नहीं दे सके। इससे पुलिस के सामने उनकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

यूनिफॉर्म से मिली जांच की अहम कड़ी

पुलिस जांच के दौरान एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। तीन बच्चों में से एक बच्चा हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के आसपास के किसी विद्यालय की यूनिफॉर्म पहने हुए मिला है।

पुलिस का मानना है कि यह यूनिफॉर्म बच्चों और उनके परिवार की पहचान तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकती है। इसी आधार पर अन्य राज्यों से भी संपर्क करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

महिला की तलाश में जुटी पुलिस

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि बच्चों को स्टेशन पर छोड़कर जाने वाली महिला कौन थी और वह बच्चों को छोड़कर क्यों चली गई।

जांच के तहत रेलवे स्टेशन पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही आसपास के रेलवे स्टेशनों और संबंधित एजेंसियों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।

यदि महिला की पहचान हो जाती है तो पुलिस पूरे मामले की वास्तविक परिस्थितियों की जांच करेगी।

बाल संरक्षण इकाई में हो रही देखभाल

तीनों बच्चों को फिलहाल बाल संरक्षण इकाई में रखा गया है, जहां उन्हें भोजन, कपड़े, चिकित्सा सुविधा और अन्य आवश्यक देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है।

बाल संरक्षण विभाग के अधिकारी बच्चों की काउंसलिंग भी कर रहे हैं ताकि वे सहज महसूस कर सकें और परिवार से जुड़ी कोई जानकारी याद आने पर साझा कर सकें।

हर आहट पर मां का इंतजार

बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों के अनुसार, तीनों बच्चे अब भी अपनी मां के लौटने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

दरवाजे पर होने वाली हर हलचल पर उनकी नजर चली जाती है। उन्हें अब भी विश्वास है कि उनकी मां उन्हें लेने जरूर आएगी। बच्चों की यह मासूम उम्मीद वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर रही है।

पुलिस कर रही कई स्तरों पर जांच

पुलिस इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। रेलवे स्टेशन की सीसीटीवी फुटेज, यात्रियों के बयान, बच्चों से मिली सीमित जानकारी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर महिला और बच्चों के परिजनों की पहचान करने का प्रयास जारी है।

इसके साथ ही अन्य राज्यों की पुलिस और बाल संरक्षण एजेंसियों से भी समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि बच्चों के परिवार तक जल्द पहुंचा जा सके।

विशेषज्ञों की राय

बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। यदि कोई बच्चा रेलवे स्टेशन या सार्वजनिक स्थान पर लावारिस अवस्था में मिले, तो उसे अकेला छोड़ने के बजाय तुरंत पुलिस, रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी या चाइल्ड हेल्पलाइन को सूचना देनी चाहिए।

समय पर सूचना देने से बच्चों को किसी भी संभावित खतरे से बचाया जा सकता है।

Kiul रेलवे स्टेशन पर तीन मासूम बच्चों का अकेले मिलना एक संवेदनशील और चिंता का विषय है। यात्रियों की सतर्कता और जीआरपी की त्वरित कार्रवाई से बच्चों को सुरक्षित संरक्षण मिल सका। फिलहाल पुलिस बच्चों की मां और अन्य परिजनों की पहचान करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। वहीं, बाल संरक्षण इकाई में रह रहे तीनों बच्चे अब भी अपनी मां के लौटने की उम्मीद लगाए हुए हैं। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पीछे की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।