बुलंदशहर: उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से Lover प्रसंग से जुड़ा एक बेहद भावुक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सिकंदराबाद क्षेत्र की एक किशोरी करीब डेढ़ साल पहले अपने घर से प्रेमी के साथ चली गई थी। किशोरी को उम्मीद थी कि वह अपने प्रेमी के साथ नई जिंदगी शुरू करेगी, लेकिन परिस्थितियों ने ऐसा मोड़ लिया कि प्रेमी ने भी उसका साथ छोड़ दिया। इसके बाद जब वह अपने घर वापस पहुंची तो परिजनों ने भी उसे अपनाने से इनकार कर दिया।

किशोरी अब ऐसी स्थिति में पहुंच गई है, जहां उसके सामने परिवार का सहारा नहीं है। बाल कल्याण समिति ने उसकी सुरक्षा, पुनर्वास और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उसे नारी निकेतन भेजने का निर्णय लिया है।

मोहल्ले के युवक से चल रहा था प्रेम-प्रसंग

जानकारी के अनुसार, सिकंदराबाद क्षेत्र की रहने वाली किशोरी का मोहल्ले के ही एक युवक से काफी समय से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। बताया जाता है कि किशोरी के परिजन इस रिश्ते के विरोध में थे और उन्होंने उसे समझाने का प्रयास भी किया था।

परिजनों के विरोध के बावजूद किशोरी अपने फैसले पर अड़ी रही। वर्ष 2024 में वह कथित तौर पर अपने प्रेमी के साथ घर से चली गई।

किशोरी के अचानक घर से चले जाने के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने सिकंदराबाद कोतवाली में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।

पुलिस ने भी काफी तलाश की

किशोरी के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने भी उसकी तलाश शुरू की। पुलिस ने संभावित स्थानों पर जानकारी जुटाई और किशोरी का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन लंबे समय तक कोई सफलता नहीं मिली।

समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ गया और पुलिस की ओर से की जा रही तलाश में भी कोई ठोस सुराग सामने नहीं आया। अंततः मामले की फाइल बंद कर दी गई।

दूसरी ओर, किशोरी अपने प्रेमी के साथ उत्तर प्रदेश से दूर कोलकाता पहुंच गई थी।

कोलकाता रेलवे स्टेशन पर प्रेमी ने छोड़ा

बताया गया कि युवक किशोरी को लेकर कोलकाता पहुंचा था। दोनों जब रेलवे स्टेशन पर पहुंचे तो वहां चेकिंग चल रही थी। इसी दौरान कथित तौर पर युवक ने किशोरी का हाथ छुड़ा लिया और उसे अकेला छोड़कर वहां से फरार हो गया।

किशोरी ने अपने स्तर पर युवक को तलाशने का प्रयास किया, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद वह रेलवे स्टेशन पर अकेली रह गई।

पुलिस ने किशोरी से पूछताछ की तो वह युवक के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दे सकी। इसके बाद उसकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे संरक्षण में लिया गया।

डेढ़ साल तक नारी निकेतन में रही

कोलकाता में किशोरी को बाल कल्याण व्यवस्था के तहत संरक्षण दिया गया। वह करीब डेढ़ साल तक नारी निकेतन में रही।

इस दौरान उसकी काउंसिलिंग की गई और उसके परिवार तथा स्थायी पते के बारे में जानकारी जुटाने का प्रयास किया गया। काउंसिलिंग के दौरान किशोरी ने अपना घर बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद क्षेत्र में बताया।

इसके बाद कोलकाता बाल कल्याण समिति ने बुलंदशहर बाल कल्याण समिति से संपर्क किया।

काउंसिलिंग के दौरान सामने आई घर की जानकारी

किशोरी से लगातार बातचीत और काउंसिलिंग के दौरान जब उसके घर का पता स्पष्ट हुआ तो संबंधित अधिकारियों ने उसके परिवार से संपर्क साधा।

कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद टीम किशोरी को लेकर बुलंदशहर पहुंची। अधिकारियों को उम्मीद थी कि परिवार अपनी बेटी को वापस स्वीकार कर लेगा और उसे घर का सुरक्षित वातावरण मिल सकेगा।

लेकिन यहां कहानी ने एक और दुखद मोड़ ले लिया।

परिजनों ने किशोरी को अपनाने से किया इनकार

बुलंदशहर पहुंचने के बाद जब अधिकारियों ने किशोरी के परिजनों से बातचीत की तो उन्होंने उसे अपने साथ रखने से इनकार कर दिया।

परिजनों का कहना था कि किशोरी अपनी मर्जी से घर छोड़कर गई थी और उसने परिवार की बात नहीं मानी थी। इसी वजह से अब वे उसे अपने साथ रखने के लिए तैयार नहीं हैं।

बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने परिजनों को काफी समझाने का प्रयास किया। उन्हें किशोरी की परिस्थितियों और उसके भविष्य को लेकर समझाया गया, लेकिन परिजन अपने फैसले पर कायम रहे।

परिजनों ने लिखित में लेने से किया इनकार

मामले में परिजनों ने केवल मौखिक रूप से ही नहीं, बल्कि लिखित रूप में भी किशोरी को अपने साथ ले जाने से इनकार कर दिया।

परिजनों के इस निर्णय के बाद बाल कल्याण समिति के सामने किशोरी के सुरक्षित भविष्य और पुनर्वास की जिम्मेदारी आ गई।

समिति ने परिस्थितियों को देखते हुए किशोरी को तत्काल सुरक्षित संरक्षण देने का निर्णय लिया।

वन स्टॉप सेंटर में रखा गया

शुक्रवार को किशोरी को पहले वन स्टॉप सेंटर में रखा गया। यहां आवश्यक औपचारिकताओं और प्रक्रिया को पूरा किया गया।

अधिकारियों ने किशोरी की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आगे की व्यवस्था की। उसका भविष्य सुरक्षित रहे और उसे आवश्यक संरक्षण तथा परामर्श मिल सके, इसके लिए बाल कल्याण समिति ने आगे की प्रक्रिया शुरू की।

अब नारी निकेतन भेजा गया

सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद किशोरी को पुनर्वास और सुरक्षा के लिए नारी निकेतन भेजने का निर्णय लिया गया है।

नारी निकेतन में उसे सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ उसके भविष्य को लेकर आवश्यक काउंसिलिंग और पुनर्वास की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।

अधिकारियों का उद्देश्य किशोरी को ऐसा सुरक्षित वातावरण देना है, जहां वह अपने जीवन को दोबारा व्यवस्थित कर सके।

बाल कल्याण समिति ने परिवार को समझाने का प्रयास किया

बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष डॉ. अंशु बंसल ने बताया कि समिति की ओर से परिजनों को काफी समझाया गया था। उन्हें किशोरी की परिस्थितियों को देखते हुए उसे अपने साथ रखने के लिए कहा गया, लेकिन परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए।

उन्होंने बताया कि परिजनों ने लिखित रूप में किशोरी को अपने साथ ले जाने से इनकार कर दिया है।

समिति के अनुसार, अब किशोरी के सुरक्षित भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे नारी निकेतन भेजा जा रहा है।

प्रेम की तलाश में निकली, दोनों तरफ से मिला अकेलापन

यह मामला किशोरी के जीवन में आए दो बड़े झटकों को सामने लाता है। वह अपने परिवार की इच्छा के खिलाफ प्रेमी के साथ घर से निकली थी। उसे उम्मीद थी कि प्रेमी उसका साथ देगा और उसके साथ जीवन बिताएगा।

लेकिन कोलकाता पहुंचने के बाद प्रेमी ने कथित तौर पर उसका साथ छोड़ दिया। इसके बाद किशोरी को संरक्षण गृह में रहना पड़ा।

जब डेढ़ साल बाद उसे अपने परिवार तक पहुंचाया गया तो वहां भी उसे अपनाने से इनकार कर दिया गया। इस तरह वह परिवार और प्रेमी, दोनों के सहारे से वंचित हो गई।

सुरक्षित भविष्य के लिए पुनर्वास जरूरी

किशोरी की परिस्थितियों को देखते हुए अब उसके सुरक्षित भविष्य के लिए उचित पुनर्वास सबसे महत्वपूर्ण है। बाल कल्याण समिति और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि उसे आवश्यक संरक्षण, परामर्श और सहयोग उपलब्ध कराया जाए।

किशोरी को भावनात्मक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने के लिए काउंसिलिंग भी महत्वपूर्ण होगी, ताकि वह अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक निर्णय ले सके।

घटना ने खड़े किए कई सवाल

इस पूरे मामले ने परिवार, किशोरों के प्रेम-संबंध, सामाजिक दबाव और संरक्षण व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। किशोरावस्था में लिए गए फैसलों के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं। ऐसे में परिवार और समाज की भूमिका केवल विरोध करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि बच्चों की समस्याओं को समझना और उन्हें सही मार्गदर्शन देना भी जरूरी है।

वहीं, ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई बच्चा या किशोरी घर से अलग हो जाए तो उसकी सुरक्षा और पुनर्वास को प्राथमिकता देना भी आवश्यक है।

बुलंदशहर के सिकंदराबाद क्षेत्र की किशोरी की कहानी बेहद दुखद है। Lover के साथ घर से निकली किशोरी को कोलकाता रेलवे स्टेशन पर कथित तौर पर अकेला छोड़ दिया गया। इसके बाद उसने करीब डेढ़ साल नारी निकेतन में बिताया।

कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब उसे अपने घर वापस लाया गया तो परिजनों ने उसे अपनाने से इनकार कर दिया। परिवार ने लिखित रूप में भी उसे अपने साथ ले जाने से मना कर दिया।

अब बाल कल्याण समिति ने किशोरी की सुरक्षा और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए उसे नारी निकेतन भेज दिया है। उम्मीद है कि उचित काउंसिलिंग, संरक्षण और सहयोग के माध्यम से किशोरी को अपने जीवन की नई शुरुआत करने का अवसर मिलेगा।