नई दिल्ली: Delhi के बवाना इलाके के एक निजी स्कूल से तीन साल की बच्ची के साथ कथित यौन शोषण का गंभीर मामला सामने आया है। बच्ची स्कूल में नर्सरी कक्षा में पढ़ती है। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने स्कूल बस के चालक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने मामले में POCSO Act के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पर आरोप है कि वह बच्ची को चॉकलेट का लालच देकर उसके साथ कई बार आपत्तिजनक हरकत करता था। मामले का खुलासा तब हुआ, जब बच्ची के परिजनों ने उसके शरीर पर चोट के निशान देखे और उससे बातचीत की। बच्ची ने परिजनों को स्कूल में मौजूद एक व्यक्ति के बारे में बताया, जिसे वह कथित तौर पर चॉकलेट देने वाले व्यक्ति के रूप में पहचानती थी।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बच्ची की पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है।

नोट: इस रिपोर्ट में आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप पुलिस शिकायत और शुरुआती जांच में सामने आई जानकारी पर आधारित हैं। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
चोट के निशान देखकर परिजनों को हुआ शक
बताया गया है कि 19 अगस्त की रात बच्ची के परिजनों ने उसके शरीर पर चोट के निशान देखे। इसके बाद परिवार को किसी अनहोनी की आशंका हुई।
बच्ची की मां ने उससे प्यार और सहज तरीके से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, बच्ची ने बातचीत के दौरान स्कूल में मौजूद एक व्यक्ति का जिक्र किया और उसे ‘बैड अंकल’ के तौर पर बताया।
बच्ची की उम्र बहुत कम होने के कारण वह आरोपी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी। इसके बाद परिवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्कूल प्रशासन को इसकी जानकारी दी।
बच्ची ने बताया चॉकलेट देने वाले व्यक्ति के बारे में
पुलिस के अनुसार, बच्ची ने बताया कि स्कूल में एक व्यक्ति उसे चॉकलेट देता था। परिजनों को संदेह हुआ कि कहीं इसी व्यक्ति ने बच्ची के साथ कोई गलत व्यवहार तो नहीं किया।
चूंकि बच्ची आरोपी का नाम नहीं बता पा रही थी, इसलिए स्कूल प्रशासन की मदद से संभावित संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की गई।
बच्ची से किसी भी तरह का दबाव डालने के बजाय तस्वीरों और उपलब्ध CCTV फुटेज की सहायता से पहचान कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
CCTV फुटेज देखकर बच्ची ने आरोपी को पहचाना
मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ 24 अगस्त को आया। स्कूल प्रशासन ने बच्ची को स्कूल से संबंधित कुछ तस्वीरें और CCTV फुटेज दिखाए।
पुलिस के अनुसार, फुटेज और तस्वीरों को देखने के बाद बच्ची ने एक व्यक्ति की पहचान उस व्यक्ति के रूप में की, जिसका उसने पहले जिक्र किया था।
आरोपी की पहचान स्कूल बस चालक विकास के रूप में बताई गई है।
बच्ची की पहचान के बाद परिवार ने पुलिस को मामले की सूचना दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई शुरू की।
POCSO एक्ट के तहत दर्ज हुई FIR
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (POCSO) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज की।
पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। साथ ही स्कूल परिसर और बस से जुड़े CCTV फुटेज को जांच के लिए अपने कब्जे में लिया गया।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि बच्ची स्कूल परिसर में किन परिस्थितियों में आरोपी के संपर्क में आई और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्य क्या हैं।
आरोपी करीब आठ महीने से स्कूल बस चला रहा था
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी पिछले करीब आठ महीने से स्कूल बस चला रहा था।
स्कूल में इतने लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारी की गतिविधियों और उसके संपर्क में आने वाले बच्चों के बारे में भी जांच की जा रही है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी की ड्यूटी क्या थी, वह किन स्थानों पर जाता था और स्कूल परिसर में उसकी पहुंच किन-किन हिस्सों तक थी।
CCTV फुटेज में चॉकलेट लेकर घूमता दिखाई दिया आरोपी
जांच के दौरान पुलिस ने स्कूल परिसर में लगे CCTV कैमरों की फुटेज की भी जांच की।
पुलिस के अनुसार, कुछ फुटेज में आरोपी के पास चॉकलेट दिखाई देने की बात सामने आई है। इसी आधार पर पुलिस यह जांच कर रही है कि वह बच्चों के संपर्क में किस उद्देश्य से आता था और क्या उसने अन्य बच्चों के साथ भी इसी तरह व्यवहार किया।
हालांकि, CCTV में दिखाई देने वाली किसी गतिविधि की वास्तविक प्रकृति और उसका मामले से संबंध जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
स्कूल परिसर की सीढ़ियों के आसपास की भी जांच
पुलिस के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी बच्ची के स्कूल में एक स्थान पर उसके संपर्क में आया था।
जांच एजेंसियों ने घटनास्थल से संबंधित CCTV फुटेज और स्कूल परिसर की गतिविधियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद थे और आरोपी की गतिविधियां क्या थीं।
मामले में स्कूल प्रशासन से भी आवश्यक जानकारी ली जा रही है।
आरोपी के मोबाइल फोन की भी जांच
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। पुलिस के अनुसार, फोन में बच्चों से संबंधित कई वीडियो पाए गए हैं।
इन वीडियो की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे कब और कहां बनाए गए तथा उनमें दिखाई देने वाले बच्चों का आरोपी से क्या संबंध है।
किसी वीडियो की मौजूदगी मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसमें कोई अपराध हुआ है। इसलिए पुलिस डिजिटल सामग्री की फोरेंसिक जांच के जरिए पूरे मामले की वास्तविकता पता लगाने में जुटी है।
अन्य बच्चों की भी पहचान और काउंसलिंग
पुलिस की शुरुआती जांच में आरोपी के संपर्क में आए अन्य बच्चों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।
जांच में जिन बच्चों की पहचान आवश्यक समझी जा रही है, उनके संबंध में संबंधित अधिकारियों और विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। जरूरत पड़ने पर बच्चों की काउंसलिंग भी कराई जा रही है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य किसी बच्चे पर दबाव डाले बिना उसके अनुभव और सुरक्षा से संबंधित जानकारी को समझना है।
स्कूल परिसर के CCTV फुटेज पुलिस के कब्जे में
मामले में CCTV फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना जा रहा है। पुलिस ने स्कूल परिसर में लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग अपने कब्जे में ली है।
जांच अधिकारी अलग-अलग समय की फुटेज का अध्ययन कर रहे हैं। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी और बच्ची कब और किन परिस्थितियों में एक-दूसरे के संपर्क में आए।
इसके साथ ही स्कूल बस की गतिविधियों और उसके रूट से संबंधित जानकारी भी जांच का हिस्सा बनाई जा सकती है।
स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल
इस घटना ने स्कूलों में छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। नर्सरी और प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने वाले बच्चे अपनी बात हमेशा स्पष्ट तरीके से नहीं बता पाते। इसलिए स्कूल प्रशासन, अभिभावकों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
स्कूलों में कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले सत्यापन, CCTV निगरानी, बच्चों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई जैसी व्यवस्थाएं बेहद जरूरी हैं।
बच्चों के व्यवहार में बदलाव को नजरअंदाज न करें
विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों में किसी अप्रिय अनुभव के बाद व्यवहार में बदलाव दिखाई दे सकता है। ऐसे में अभिभावकों को बच्चे के व्यवहार, डर, असामान्य चुप्पी या किसी खास व्यक्ति से संबंधित भय जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए।
बच्चे से पूछताछ करते समय उस पर दबाव डालना या बार-बार सवाल करना उचित नहीं होता। संवेदनशील मामलों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों की मदद लेना जरूरी है।
जांच के सामने कई अहम सवाल
इस मामले में पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—
- आरोपी और बच्ची के बीच संपर्क कब और कैसे हुआ?
- बच्ची के आरोपों की पुष्टि करने वाले कौन-कौन से साक्ष्य मौजूद हैं?
- CCTV फुटेज में घटनाक्रम से संबंधित क्या जानकारी मिलती है?
- आरोपी के मोबाइल फोन में मिले वीडियो किस परिस्थिति में बनाए गए?
- क्या आरोपी अन्य बच्चों के संपर्क में भी इसी तरह आया था?
- स्कूल में कर्मचारियों की निगरानी और सत्यापन की प्रक्रिया क्या थी?
- घटना से संबंधित अन्य प्रत्यक्ष या डिजिटल साक्ष्य क्या सामने आते हैं?
इन सभी सवालों का जवाब पुलिस जांच और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर सामने आएगा।
आरोपी की गिरफ्तारी के बाद जांच जारी
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल फोन और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही है।
जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की भूमिका या किसी अन्य बच्चे से संबंधित तथ्य सामने आते हैं, तो पुलिस उनके आधार पर भी आगे कार्रवाई कर सकती है।
फिलहाल जांच एजेंसियों का मुख्य उद्देश्य बच्ची को न्याय दिलाने के साथ-साथ यह पता लगाना है कि कहीं इस मामले में अन्य बच्चे भी प्रभावित तो नहीं हुए।
बच्ची की पहचान की गोपनीयता जरूरी
चूंकि पीड़िता की उम्र तीन वर्ष बताई गई है, इसलिए उसकी पहचान की पूरी तरह गोपनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उसके नाम, फोटो, स्कूल की ऐसी जानकारी या परिवार से संबंधित विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए, जिनसे उसकी पहचान हो सके।
सोशल मीडिया पर भी मामले से जुड़ी संवेदनशील तस्वीरें या वीडियो साझा करने से बचना चाहिए।
Delhiके बवाना इलाके के एक निजी स्कूल में तीन साल की बच्ची के साथ कथित यौन शोषण का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी स्कूल बस चालक को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा बच्ची के परिजनों को उसके शरीर पर चोट के निशान दिखाई देने के बाद हुआ।
बच्ची ने कथित तौर पर स्कूल में चॉकलेट देने वाले एक व्यक्ति के बारे में जानकारी दी। बाद में तस्वीरों और CCTV फुटेज की मदद से उसने आरोपी की पहचान की। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।
पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन और स्कूल परिसर की CCTV फुटेज अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मोबाइल में मिले बच्चों से संबंधित वीडियो की भी जांच की जा रही है। साथ ही पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी के संपर्क में कोई अन्य बच्चा भी आया था या नहीं।




















