जमशेदपुर: Karim सिटी कॉलेज, साकची, जमशेदपुर में सेंटर फॉर गाइडेंस एंड काउंसलिंग विभाग के तत्वावधान में विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कॉलेज के पीजीपीजीसी के साथ-साथ मनोविज्ञान एवं अन्य विषयों के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को आत्महत्या जैसी गंभीर सामाजिक एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या के प्रति जागरूक करना, इसके संभावित कारणों को समझाना तथा समय रहते उचित सहायता और परामर्श उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर चर्चा करना था।

प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज की विशेष उपस्थिति

कार्यक्रम में करीम सिटी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. मोहम्मद रेयाज की विशेष उपस्थिति रही। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं एवं छात्र-छात्राओं का स्वागत किया।

अपने संबोधन में प्राचार्य ने वर्तमान समय में भी सामने आने वाली आत्महत्या की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आत्महत्या जैसी घटनाओं को रोकने के लिए केवल व्यक्तिगत स्तर पर प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज में व्यापक जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसे संवेदनशील विषयों पर खुलकर बातचीत करने और जरूरत पड़ने पर उचित मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार जागरूकता और समय पर सहायता किसी व्यक्ति को गंभीर मानसिक संकट से बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मुख्य वक्ता डॉ. जकी अख्तर ने बताए आत्महत्या के कारण

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता विभागाध्यक्ष डॉ. जकी अख्तर रहे। उन्होंने अपने विशेष वक्तव्य में आत्महत्या से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।

डॉ. जकी अख्तर ने आत्महत्या के संभावित कारणों, उसके प्रभाव और इससे बचाव के उपायों पर विद्यार्थियों को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आत्महत्या की घटनाओं को लेकर समाज में सजगता बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि कई परिस्थितियों में आत्महत्या की प्रवृत्ति मानसिक बीमारी या गंभीर मानसिक संकट के रूप में सामने आ सकती है। ऐसे मामलों में घटना से पहले ही व्यक्ति के व्यवहार और मानसिक स्थिति में कुछ संकेत दिखाई देने लगते हैं। यदि परिवार, मित्र, शिक्षक और समाज के लोग इन संकेतों के प्रति सजग रहें, तो समय रहते सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।

समय रहते लक्षणों की पहचान जरूरी

मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों को समझाया कि आत्महत्या की घटनाओं को रोकने में समय पर पहचान और हस्तक्षेप की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। किसी व्यक्ति के व्यवहार में अचानक बदलाव, अत्यधिक निराशा, सामाजिक गतिविधियों से दूरी या लगातार मानसिक परेशानी जैसी स्थितियों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज करने के बजाय व्यक्ति से बातचीत करना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है।

डॉ. जकी अख्तर ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर समाज में अभी भी खुलकर चर्चा की आवश्यकता है। मानसिक परेशानी को लेकर लोगों में मौजूद झिझक और गलत धारणाओं को दूर करना जागरूकता अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

साइकोथैरिप्यूटिक टेक्निक्स पर विस्तार से चर्चा

कार्यक्रम के दौरान डॉ. जकी अख्तर ने आत्महत्या की रोकथाम से संबंधित साइकोथैरिप्यूटिक टेक्निक्स पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि मानसिक संकट से गुजर रहे व्यक्ति को उचित मनोवैज्ञानिक सहायता और उपचार उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने विभिन्न परिस्थितियों में मनोवैज्ञानिक हस्तक्षेप की भूमिका को समझाया और बताया कि विशेषज्ञ परामर्श के माध्यम से व्यक्ति की मानसिक स्थिति को समझने तथा उसे आवश्यक सहायता देने की दिशा में काम किया जा सकता है।

इसके साथ ही उन्होंने आत्महत्या की रोकथाम के लिए क्यूरेटिव टेक्निक्स के बारे में भी जानकारी दी। विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े उपचारात्मक दृष्टिकोण और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के महत्व से अवगत कराया गया।

विद्यार्थियों ने गंभीरता से सुना विषय

कार्यक्रम में पीजीपीजीसी के अलावा मनोविज्ञान तथा अन्य विषयों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। आत्महत्या रोकथाम जैसे संवेदनशील विषय पर आयोजित कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए जागरूकता और सीखने का महत्वपूर्ण अवसर रहा।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना किसी भी व्यक्ति के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। साथ ही यह भी चर्चा की गई कि मानसिक परेशानी से जूझ रहे व्यक्ति को अकेला छोड़ने के बजाय उसे समझने, सुनने और उचित सहायता तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

मेजर (डॉ.) फखरुद्दीन अहमद ने भी रखी अपनी बात

कार्यक्रम में मेजर (डॉ.) फखरुद्दीन अहमद ने भी आत्महत्या रोकथाम के विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य की सराहना करते हुए इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों की उपयोगिता पर बात की।

उन्होंने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील रहने और अपने आसपास के लोगों की परेशानियों को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. उधम सिंह ने भी किया जागरूक

विभाग के प्राध्यापक डॉ. उधम सिंह ने भी कार्यक्रम में आत्महत्या रोकथाम से संबंधित विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि मानसिक परेशानियों को लेकर संवाद का वातावरण तैयार करना जरूरी है। व्यक्ति को अपनी समस्याएं साझा करने के लिए सुरक्षित और सहयोगपूर्ण माहौल मिलना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पर जोर

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य की तरह ही महत्वपूर्ण है। जिस तरह शारीरिक बीमारी के लिए डॉक्टर की सलाह ली जाती है, उसी तरह मानसिक परेशानी की स्थिति में भी विशेषज्ञ से सहायता लेने में किसी प्रकार की झिझक नहीं होनी चाहिए।

समाज में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ने से लोगों को समय रहते सहायता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। विद्यार्थियों जैसे युवा वर्ग में इस विषय पर जागरूकता और संवाद को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना गया।

कॉलेज में ऐसे कार्यक्रमों की उपयोगिता

Karim सिटी कॉलेज में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों को आत्महत्या रोकथाम के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य के व्यापक विषय से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। शैक्षणिक संस्थानों में ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को संवेदनशील मुद्दों को समझने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को पहचानने में मदद कर सकते हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा जरूरतमंद व्यक्ति तक सहायता पहुंचाने की दिशा में जागरूक किया गया।

धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन

कार्यक्रम के अंत में डॉ. सत्यव्रता पण्डा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित प्राचार्य, मुख्य वक्ता, अन्य वक्ताओं, विभाग के सदस्यों तथा छात्र-छात्राओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर आयोजित चर्चा ने विद्यार्थियों के बीच आत्महत्या रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता बढ़ाने का काम किया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात को प्रमुखता से सामने रखा कि सजगता, समय पर पहचान, संवाद और उचित सहायता के माध्यम से गंभीर मानसिक संकट से जूझ रहे लोगों तक मदद पहुंचाई जा सकती है।

जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में पहल

विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक शैक्षणिक गतिविधि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने का संदेश भी दिया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से संवेदनशीलता के साथ इस विषय को समझने और अपने आसपास के लोगों की मानसिक परेशानियों को गंभीरता से लेने की अपील की।

Karim सिटी कॉलेज के सेंटर फॉर गाइडेंस एंड काउंसलिंग विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को आत्महत्या रोकथाम, मानसिक स्वास्थ्य और समय पर सहायता की आवश्यकता से परिचित कराया। ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर बातचीत का माहौल तैयार करने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में सकारात्मक पहल की जा सकती है।