जमशेदपुर : नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय हिंदी दिवस और राष्ट्रीय अभियंता दिवस के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय सांस्कृतिक समिति की ओर से जहां हिंदी भाषा, साहित्य और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, वहीं प्लेसमेंट सेल और डिपार्टमेंट ऑफ इंजीनियरिंग के संयुक्त तत्वावधान में “नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से सतत भविष्य के लिए स्मार्ट इंजीनियरिंग” विषय पर अतिथि व्याख्यान सह एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित हुई।

दोनों कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों को एक ओर हिंदी के प्रति रुचि और रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर मिला, वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंजीनियरिंग, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप और नवाचार की संभावनाओं से परिचित कराया गया।

हिंदी प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

राष्ट्रीय हिंदी दिवस के अवसर पर कविता पाठ, हिंदी चित्र-कथा लेखन, “पिच योर आइडिया” और हिंदी गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कविता पाठ प्रतियोगिता में बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की शादान नाजनीन ने प्रथम, गुनगुन अग्रवाल ने द्वितीय और बी.फार्म की आलिया समर ने तृतीय स्थान हासिल किया।

चित्र-कथा लेखन प्रतियोगिता में डी.फार्म की रिम्शा इश्तियाक प्रथम, बीबीए की शादान आफरीन द्वितीय और डी.फार्म के द्राक्षन इस्लाम तृतीय रहे। “पिच योर आइडिया” प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने हिंदी में पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन के जरिए बिजनेस आइडिया, स्टार्टअप मॉडल और सामाजिक कल्याण से जुड़े नवाचार प्रस्तुत किए। इसमें लाइबा नय्यर एवं श्रेया सिन्हा की टीम ने पहला और लवली कुमारी एवं हिमांशु कुमार की टीम ने दूसरा स्थान प्राप्त किया।

हिंदी गीत प्रतियोगिता में बी.एड की श्रुति दास प्रथम, बीएससी बायोटेक्नोलॉजी की अमना महमूद एवं अलीशा इमाम संयुक्त रूप से द्वितीय तथा बी.एड की मेमॉन रॉय तृतीय स्थान पर रहीं।

स्मार्ट इंजीनियरिंग और डिजिटल भविष्य पर चर्चा

राष्ट्रीय अभियंता दिवस पर आयोजित कार्यशाला में टाटा मोटर्स लिमिटेड, जमशेदपुर के एजीएम ललाटेंदु महापात्र और टाटा टेक्नोलॉजीज, जमशेदपुर के टीम लीड राकेश जलान ने विद्यार्थियों को स्मार्ट इंजीनियरिंग और डिजिटलाइजेशन की बदलती तस्वीर से अवगत कराया।

ललाटेंदु महापात्र ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में इंजीनियरिंग तेजी से डिजिटल तकनीकों के साथ जुड़ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ समस्या समाधान, नवाचार और व्यावहारिक सोच पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट इंजीनियरिंग का लक्ष्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ पर्यावरण और समाज के प्रति जिम्मेदार तकनीकी समाधान विकसित करना है।

राकेश जलान ने कहा कि AI, ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स और स्मार्ट सिस्टम आने वाले समय में उद्योगों की कार्यप्रणाली को और बदलेंगे। विद्यार्थियों को कक्षा में हासिल ज्ञान को वास्तविक औद्योगिक समस्याओं से जोड़कर सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए।

हिंदी और तकनीक के मेल पर कुलाधिपति का जोर

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति मदन मोहन सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें ज्ञान, कौशल, संस्कार और रचनात्मक सोच से समृद्ध करना है। उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस विद्यार्थियों को भाषा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ता है, जबकि अभियंता दिवस उन्हें आधुनिक तकनीक और नवाचार की दुनिया से परिचित कराता है।

उन्होंने भारतीय भाषाओं और आधुनिक तकनीक के समन्वय को देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने कहा कि मौजूदा प्रतिस्पर्धी दौर में विद्यार्थियों के लिए बहुआयामी प्रतिभा विकसित करना जरूरी है। भाषा प्रभावी संवाद का माध्यम है, जबकि तकनीकी दक्षता रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खोलती है। उन्होंने हिंदी को केवल विषय नहीं, बल्कि ज्ञान, संवाद और नवाचार की प्रभावी भाषा के रूप में विकसित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में कुलसचिव नागेंद्र सिंह, परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोजिब अशरफ, शैक्षणिक सलाहकार प्रो. दिलीप शोम, डीन एडमिनिस्ट्रेशन डॉ. राकेश कुमार, डीन एकेडमिक अभिनव कुमार सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से इंजीनियरिंग, डिजिटलाइजेशन, रोजगार, स्टार्टअप और नवाचार से जुड़े सवाल पूछे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रतियोगिताओं के विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक, तकनीकी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता जताई।