लखनऊ: करीब नौ साल से अपने परिवार से बिछड़ी एक मां की अपने बेटे से मुलाकात ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया Gujarat से लापता हुईं 55 वर्षीय रतन बेन आखिरकार लखनऊ पुलिस की मदद से अपने परिवार तक पहुंच गईं। पुलिस को महिला की पहचान और घर का पता बताने के लिए कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। महिला मानसिक रूप से परेशान नजर आ रही थीं और ठीक से बातचीत भी नहीं कर पा रही थीं। ऐसे में उन्होंने पुलिस को केवल एक शब्द बताया फूलपाड़ा
पुलिस ने इसी छोटे से सुराग को आधार बनाया और महिला के परिवार तक पहुंचने की कोशिश शुरू की। गूगल मैप पर फूलपाड़ा की तलाश की गई। जांच आगे बढ़ी तो गुजरात का फूलपाड़ा सामने आया। इसके बाद लखनऊ पुलिस ने गुजरात पुलिस से संपर्क किया और करीब नौ साल पुरानी गुमशुदगी की कहानी का सिरा जुड़ता चला गया।
बालू अड्डा के पास मिली थीं महिला
हजरतगंज पुलिस के मुताबिक, कुछ दिन पहले बालू अड्डा इलाके के पास एक महिला परेशान हालत में मिली थीं। महिला को देखकर पुलिसकर्मियों ने उनसे बातचीत करने और उनकी पहचान जानने का प्रयास किया। हालांकि महिला अपनी पूरी पहचान, घर का पता या परिजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रही थीं।

महिला के जवाब टूटे-फूटे शब्दों में थे। इससे पुलिस को लगा कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ हो सकती हैं। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि महिला को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के साथ-साथ उनके परिवार की पहचान भी की जाए।
काफी प्रयास के बाद महिला ने सिर्फ एक शब्द कहा—“फूलपाड़ा।” यही शब्द पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सुराग बन गया।
एक शब्द बना नौ साल पुरानी तलाश का सुराग
पुलिसकर्मियों ने महिला द्वारा बताए गए “फूलपाड़ा” शब्द को गंभीरता से लिया। इसके बाद संभावित स्थानों की तलाश शुरू की गई। गूगल मैप और अन्य उपलब्ध माध्यमों से फूलपाड़ा नाम के स्थानों की जानकारी जुटाई गई।
खोज के दौरान गुजरात का फूलपाड़ा सामने आया। इसके बाद पुलिस ने गुजरात पुलिस से संपर्क कर वहां दर्ज गुमशुदगी के मामलों की जानकारी हासिल करने का प्रयास किया।
जांच के दौरान पुलिस को वर्ष 2017 में रतन बेन नाम की महिला की गुमशुदगी दर्ज होने की जानकारी मिली। उम्र और अन्य परिस्थितियों की जानकारी का मिलान किए जाने के बाद पुलिस को विश्वास हुआ कि लखनऊ में मिली महिला वही रतन बेन हो सकती हैं, जिनकी तलाश उनका परिवार वर्षों से कर रहा था।
गुजरात पुलिस से संपर्क के बाद परिवार तक पहुंची पुलिस
लखनऊ पुलिस ने गुजरात पुलिस की सहायता से रतन बेन के परिवार का पता लगाया। जांच में सामने आया कि उनका बेटा विशाल जयेश भाई गुजरात के सूरत स्थित फूलपाड़ा इलाके में रहता है।
इसके बाद पुलिस ने विशाल से संपर्क किया। नौ साल से मां की तलाश कर रहे विशाल के लिए यह खबर किसी उम्मीद से कम नहीं थी। हालांकि इतने लंबे समय के बाद मां के लखनऊ में मिलने की सूचना पर उसे पहले विश्वास करना भी मुश्किल हुआ।
पुलिस ने परिवार से आवश्यक जानकारी जुटाने के बाद मां और बेटे की बातचीत कराने की तैयारी की।
वीडियो कॉल पर मां को देखकर भावुक हुआ विशाल
लखनऊ पुलिस ने मंगलवार को वीडियो कॉल के जरिए विशाल की उसकी मां रतन बेन से बातचीत कराई। वीडियो कॉल पर मां को देखते ही विशाल भावुक हो गया। करीब नौ साल से जिस मां की तलाश में परिवार ने कई जगहों पर प्रयास किया था, उन्हें अचानक सामने देखकर उसकी आंखों में आंसू आ गए।
वीडियो कॉल के दौरान दोनों के बीच भावनात्मक पल देखने को मिला। विशाल को यह यकीन करने में समय लगा कि उसकी मां वास्तव में लखनऊ में मौजूद हैं।
इसके बाद विशाल ने तय किया कि वह खुद लखनऊ जाकर अपनी मां को देखेगा और उन्हें घर लेकर आएगा।
Gujarat से लखनऊ पहुंचे विशाल
बुधवार को विशाल गुजरात पुलिस, अपने दोस्त प्रवीण और एक अन्य व्यक्ति के साथ लखनऊ के हजरतगंज थाने पहुंचा। पुलिस ने रतन बेन को थाने में सुरक्षित रखा था।
थाने में रतन बेन एक कुर्सी पर बैठी थीं। विशाल जैसे ही वहां पहुंचा, उसकी नजर मां पर पड़ी। कुछ क्षण तक वह उन्हें देखता रहा। मानो नौ साल के इंतजार के बाद सामने आए इस दृश्य को वह अपनी आंखों में समेट लेना चाहता हो।
इसके बाद विशाल मां से लिपटकर रो पड़ा।
मां ने बेटे का हाथ पकड़कर नहीं छोड़ा
मां और बेटे के मिलन का दृश्य बेहद भावुक था। विशाल अपनी मां को गले लगाकर रोता रहा। रतन बेन ने भी अपने बेटे का हाथ पकड़ लिया। दोनों काफी देर तक भावुक रहे।
रतन बेन की आंखों में भी आंसू थे। उन्होंने बेटे का हाथ थामे रखा और काफी देर तक उसे नहीं छोड़ा। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी इस भावुक क्षण के दौरान दोनों को संभाला।
करीब नौ साल तक अलग रहने के बाद मां और बेटे का मिलन परिवार के लिए किसी बड़ी खुशी से कम नहीं था।
पिता, मामा और नानी की मौत के बाद गहरे सदमे में थीं रतन बेन
विशाल ने पुलिस को बताया कि उसके पिता जयेश भाई रौठार, मामा और नानी की मौत के बाद उसकी मां गहरे सदमे में चली गई थीं। इन घटनाओं के बाद उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई थी।
विशाल के अनुसार, इससे पहले भी रतन बेन एक बार घर से निकल गई थीं। उस समय कुछ दिनों बाद उन्हें खोज लिया गया था और वह वापस घर आ गई थीं।
लेकिन शादी और बेटे के जन्म के बाद जब वह दोबारा घर से निकलीं, तो फिर वापस नहीं लौटीं। इसके बाद परिवार ने उनकी तलाश शुरू की।
परिवार ने थानों और आश्रयगृहों में की तलाश
रतन बेन के लापता होने के बाद परिवार ने उन्हें खोजने के लिए हर संभव प्रयास किया। गुजरात के अलग-अलग पुलिस थानों में संपर्क किया गया। आश्रयगृहों और संभावित स्थानों पर भी उनकी तलाश की गई।
परिवार को उम्मीद थी कि किसी न किसी दिन रतन बेन का पता जरूर चलेगा। लेकिन एक-दो साल नहीं, बल्कि करीब नौ साल बीत गए। इतने लंबे समय तक कोई ठोस सुराग नहीं मिलने के कारण परिवार की उम्मीदें भी कमजोर पड़ती गईं।
इसके बावजूद बेटे विशाल और परिवार ने मां की तलाश पूरी तरह बंद नहीं की।
फूलपाड़ा शब्द ने बदल दी पूरी कहानी
रतन बेन के मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि महिला खुद अपनी पहचान या पता स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थीं। अगर वह पुलिस को “फूलपाड़ा” शब्द नहीं बतातीं, तो उनके परिवार तक पहुंचना काफी मुश्किल हो सकता था।
पुलिस ने महिला के बताए इस एक शब्द को नजरअंदाज नहीं किया। इसी शब्द के आधार पर स्थान की तलाश की गई और गुजरात के फूलपाड़ा तक जांच पहुंची।
इसके बाद वर्ष 2017 की गुमशुदगी से जुड़ी जानकारी सामने आई और आखिरकार पुलिस को रतन बेन के परिवार का पता मिल गया।
नौ साल बाद बेटे की तलाश हुई पूरी
रतन बेन के मिलने के बाद विशाल ने लखनऊ पुलिस का धन्यवाद किया। जिस मां की तलाश में परिवार ने करीब नौ वर्ष बिताए, वह आखिरकार सुरक्षित मिल गईं।
बुधवार को विशाल अपनी मां रतन बेन को लेकर गुजरात के लिए रवाना हो गया। इस तरह एक छोटे से सुराग ने वर्षों से अधूरी पड़ी मां-बेटे की कहानी को फिर से जोड़ दिया।
यह मामला इस बात की मिसाल भी सामने लाता है कि गुमशुदा लोगों की तलाश में छोटी से छोटी जानकारी कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस ने महिला द्वारा बताए गए सिर्फ एक शब्द को आधार बनाकर जांच को आगे बढ़ाया और गुजरात पुलिस के सहयोग से परिवार तक पहुंचने में सफलता हासिल की।




















