नई दिल्ली: सरकारी अस्पतालों में मरीजों का इलाज करने वाले Doctor को अब अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों के साथ-साथ ऑनलाइन प्रशिक्षण भी पूरा करना होगा। शासन के निर्देश के तहत सरकारी डॉक्टरों के लिए आईगोट कर्मयोगी पोर्टल पर एक विशेष मॉड्यूल अनिवार्य किए जाने की जानकारी सामने आई है। इस मॉड्यूल के तहत डॉक्टरों को वीडियो देखने, उपलब्ध अध्ययन सामग्री पढ़ने और इसके बाद ऑनलाइन परीक्षा में शामिल होने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

बताया गया है कि परीक्षा में निर्धारित अंक हासिल करने के बाद ही डॉक्टरों को ऑनलाइन प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। इसके लिए कम से कम 70 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होगा। कोर्स पूरा नहीं करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। जिला अस्पताल के सीएमएस ने इस संबंध में सभी डॉक्टरों को पत्र जारी कर समय सीमा के भीतर प्रशिक्षण पूरा करने को कहा है।

कर्मयोगी पोर्टल पर चलेगा विशेष प्रशिक्षण

भारत सरकार द्वारा संचालित आईगोट कर्मयोगी पोर्टल पर सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के क्षमता निर्माण के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण पाठ्यक्रम उपलब्ध कराए जाते हैं। इसी व्यवस्था के तहत अब एलोपैथिक डॉक्टरों के लिए भी विशेष अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य डॉक्टरों को चिकित्सा क्षेत्र में होने वाले बदलावों, नई गाइडलाइन, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं और मरीजों के साथ व्यवहार से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देना बताया गया है।

Doctor को पोर्टल पर उपलब्ध निर्धारित सामग्री का अध्ययन करना होगा। इसके बाद उन्हें ऑनलाइन परीक्षा की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

वीडियो और स्टडी मैटेरियल पढ़ना होगा

प्रशिक्षण मॉड्यूल में डॉक्टरों के लिए वीडियो के साथ-साथ नोट्स और अन्य अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई गई है। डॉक्टरों को इन सभी सामग्रियों को देखना और पढ़ना अनिवार्य होगा।

सीएमएस के अनुसार, प्रशिक्षण वीडियो में मरीजों के साथ व्यवहार, चिकित्सा क्षेत्र की नई गाइडलाइन, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और मेडिकल एथिक्स जैसे विषयों पर जानकारी दी गई है।

इसका उद्देश्य केवल डॉक्टरों के तकनीकी ज्ञान को बढ़ाना नहीं, बल्कि मरीजों के साथ संवाद, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं को भी मजबूत करना है।

ऑनलाइन परीक्षा में पूछे जाएंगे बहुविकल्पीय सवाल

वीडियो देखने और स्टडी मैटेरियल पढ़ने के बाद डॉक्टरों को पोर्टल पर ही ऑनलाइन परीक्षा देनी होगी। परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे।

डॉक्टरों को निर्धारित प्रश्नों के उत्तर ऑनलाइन देने होंगे। उनके उत्तरों के आधार पर अंक निर्धारित किए जाएंगे। बताया गया है कि प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए डॉक्टरों को कम से कम 70 प्रतिशत अंक हासिल करना होगा।

इस व्यवस्था के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि प्रशिक्षण सामग्री का अध्ययन करने के बाद डॉक्टरों को संबंधित विषयों की कितनी जानकारी है।

70 प्रतिशत अंक हासिल करने पर मिलेगा प्रमाण पत्र

ऑनलाइन परीक्षा में निर्धारित न्यूनतम अंक प्राप्त करने वाले डॉक्टरों को पोर्टल के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र डॉक्टर द्वारा प्रशिक्षण पूरा करने का रिकॉर्ड माना जाएगा।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस प्रमाण पत्र को डॉक्टरों के वार्षिक ग्रेड और परफॉर्मेंस रिपोर्ट से जोड़ने की व्यवस्था की गई है। ऐसे में प्रशिक्षण और परीक्षा को डॉक्टरों की विभागीय कार्यप्रणाली के साथ भी जोड़ा गया है।

इससे डॉक्टरों के लिए समय पर मॉड्यूल पूरा करना और परीक्षा में निर्धारित अंक हासिल करना महत्वपूर्ण हो गया है।

कोर्स नहीं किया तो वेतन रोकने की चेतावनी

जिला अस्पताल के सीएमएस ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी डॉक्टरों को निर्धारित प्रशिक्षण समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। डॉक्टरों को बताया गया है कि शासन के निर्देश के तहत यह प्रशिक्षण प्राथमिकता में शामिल है।

निर्देश के अनुसार, जो डॉक्टर निर्धारित प्रक्रिया के तहत कोर्स पूरा नहीं करेंगे, उनकी सूची शासन को भेजी जा सकती है। साथ ही, ऐसे डॉक्टरों का वेतन रोके जाने की चेतावनी भी दी गई है।

हालांकि वेतन रोकने की वास्तविक कार्रवाई संबंधित विभागीय नियमों और आगे जारी होने वाले निर्देशों के अनुसार होगी।

मरीजों से व्यवहार पर भी दिया जाएगा प्रशिक्षण

प्रशिक्षण मॉड्यूल में डॉक्टरों के मरीजों और उनके तीमारदारों के साथ व्यवहार को भी महत्वपूर्ण विषय बनाया गया है। अस्पतालों में मरीजों और डॉक्टरों के बीच संवाद स्वास्थ्य सेवा का अहम हिस्सा होता है।

कई बार मरीज या उनके परिजन डॉक्टरों अथवा अस्पताल कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर शिकायत करते हैं। प्रशिक्षण में इस बात पर जोर दिया गया है कि मरीजों से किस प्रकार संवाद किया जाए, उनकी समस्याओं को कैसे सुना जाए और आवश्यकता पड़ने पर उनकी काउंसलिंग किस तरीके से की जाए।

इससे डॉक्टरों में मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा की समझ विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

नई मेडिकल गाइडलाइन और प्रोटोकॉल की जानकारी

ऑनलाइन प्रशिक्षण में चिकित्सा से जुड़ी नई गाइडलाइन और प्रोटोकॉल की जानकारी भी शामिल की गई है। डॉक्टरों को बदलते चिकित्सा मानकों के अनुरूप अपनी जानकारी को अपडेट रखने की जरूरत होती है।

प्रशिक्षण में दवाओं के प्रोटोकॉल, इमरजेंसी स्थिति में आवश्यक प्रबंधन और संक्रमण से बचाव से जुड़े नए नियमों पर भी जानकारी दी जा रही है। इसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाओं को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित करने में मदद करना है।

सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर भी फोकस

मॉड्यूल में विभिन्न सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी को भी शामिल किया गया है। डॉक्टरों को योजनाओं के उद्देश्य और उनके प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।

इनमें आयुष्मान भारत, जननी सुरक्षा योजना, टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और मिशन इंद्रधनुष जैसी योजनाएं शामिल बताई गई हैं। प्रशिक्षण के जरिए डॉक्टरों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि संबंधित योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक किस प्रकार प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है।

कागजी प्रशिक्षण के बजाय ऑनलाइन मूल्यांकन

इस व्यवस्था में प्रशिक्षण पूरा करने के साथ ऑनलाइन परीक्षा को जोड़ना महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। पहले कई प्रशिक्षण कार्यक्रमों में कर्मचारियों की भागीदारी या प्रशिक्षण पूरा करने की प्रक्रिया कागजी स्तर पर दर्ज की जाती थी।

ऑनलाइन परीक्षा के जरिए यह देखने का प्रयास किया जाएगा कि संबंधित डॉक्टर ने उपलब्ध अध्ययन सामग्री को वास्तव में पढ़ा और समझा है या नहीं। परीक्षा के अंक और प्रमाण पत्र डिजिटल रूप से दर्ज होने से प्रशिक्षण प्रक्रिया का रिकॉर्ड भी उपलब्ध रहेगा।

वार्षिक रिपोर्ट और विभागीय प्रदर्शन से जुड़ाव

प्रशिक्षण के प्रमाण पत्र को डॉक्टरों की वार्षिक ग्रेड और परफॉर्मेंस रिपोर्ट से जोड़ने की बात कही गई है। इससे यह प्रक्रिया केवल एक सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि डॉक्टरों के विभागीय रिकॉर्ड का हिस्सा बन सकती है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य डॉक्टरों को नियमित रूप से अपने ज्ञान और कार्यप्रणाली को अपडेट करने के लिए प्रोत्साहित करना बताया गया है।

समय पर कोर्स पूरा करने के निर्देश

शासन के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों के प्रशिक्षण को लेकर तैयारियां चल रही हैं। जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी संबंधित डॉक्टरों को निर्देशों का पालन करने और निर्धारित मॉड्यूल को समय पर पूरा करने को कहा है।

डॉक्टरों को पोर्टल पर लॉगिन कर प्रशिक्षण सामग्री देखने, नोट्स पढ़ने और परीक्षा पूरी करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। निर्धारित अंक प्राप्त करने के बाद ही प्रमाण पत्र मिलने की व्यवस्था बताई गई है।

स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर जोर

इस प्रशिक्षण व्यवस्था के पीछे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और सरकारी अस्पतालों में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने का उद्देश्य बताया जा रहा है। तकनीकी चिकित्सा ज्ञान के साथ मरीजों से संवाद, मेडिकल एथिक्स और सरकारी योजनाओं की जानकारी भी डॉक्टरों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।

अब ऑनलाइन प्रशिक्षण और परीक्षा के माध्यम से डॉक्टरों को इन सभी पहलुओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि शासन के निर्देशों के तहत प्रशिक्षण पूरा करना आवश्यक है और लापरवाही करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा सकती है।

इस व्यवस्था के लागू होने के बाद सरकारी डॉक्टरों के लिए मरीजों के इलाज के साथ अपने प्रशिक्षण और ऑनलाइन मूल्यांकन को पूरा करना भी उनकी विभागीय जिम्मेदारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।