पटना: बिहार में भ्रष्टाचार और आय से अधिक संपत्ति के मामलों को लेकर निगरानी विभाग की कार्रवाई के बीच पटना के अपर जिला दंडाधिकारी (ADM) सप्लाई रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी के ठिकानों पर छापेमारी का मामला सामने आया है। कुमारी स्वीटी दानापुर में जिला सब रजिस्ट्रार के पद पर तैनात हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 28 सितंबर को निगरानी विभाग की टीम ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में पटना और बेगूसराय स्थित उनके ठिकानों पर तलाशी ली।

कार्रवाई के दौरान नकदी, महंगी घड़ियां, सोने-चांदी के आभूषण और जमीन-मकान से संबंधित दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों स्थानों से कुल करीब 79 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा, लगभग 48 घड़ियां और करीब 250 ग्राम सोने-चांदी के जेवर मिलने की बात कही गई है। जमीन और फ्लैट से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति का ब्योरा भी जांच के दायरे में आया है।

हालांकि, बरामद संपत्ति या नकदी का होना अपने आप में भ्रष्टाचार का अंतिम प्रमाण नहीं है। निगरानी विभाग अब संपत्तियों और रकम का मिलान संबंधित अधिकारियों की ज्ञात एवं घोषित आय से कर रहा है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

पटना के फ्लैट में तलाशी, अलमारी और बक्सों से मिली नकदी

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, निगरानी विभाग की टीम ने पटना के दानापुर स्थित कश्यप ग्रीन सिटी अपार्टमेंट के ब्लॉक-बी के फ्लैट नंबर 304 में तलाशी ली। यह फ्लैट जांच के दायरे में आए अधिकारियों से जुड़ा बताया गया है।

तलाशी के दौरान अलमारी, बक्सों और घर के अन्य हिस्सों से करीब 70 लाख रुपये नकद मिलने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट में 500 रुपये के नोटों की 70 से अधिक गड्डियां मिलने का भी उल्लेख है।

निगरानी विभाग के डीएसपी मिथिलेश कुमार के हवाले से बताया गया कि रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है। तलाशी के दौरान नकदी के अतिरिक्त महंगी घड़ियां और आभूषण भी मिले।

अब जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि बरामद नकदी का स्रोत क्या था। इसके लिए आयकर विवरण, बैंक खातों, वेतन, निवेश और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। साथ ही, यह भी देखा जाएगा कि नकदी का कोई हिस्सा वैध बचत या अन्य घोषित स्रोतों से संबंधित है या नहीं।

48 महंगी घड़ियां और सोने-चांदी के जेवर भी मिले

पटना स्थित फ्लैट से करीब 48 घड़ियां मिलने की बात कही गई है। इन घड़ियों की कुल कीमत लगभग 6 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा करीब 250 ग्राम सोने-चांदी के आभूषण मिलने की जानकारी भी सामने आई है।

महंगी घड़ियों और आभूषणों का मूल्यांकन आय से अधिक संपत्ति की जांच में महत्वपूर्ण हो सकता है। जांच एजेंसी को यह निर्धारित करना होगा कि इन वस्तुओं को कब और किस रकम से खरीदा गया था। खरीद से संबंधित बिल, भुगतान के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज इस प्रक्रिया में उपयोगी हो सकते हैं।

यदि किसी संपत्ति या कीमती वस्तु के मूल्य और संबंधित व्यक्ति की वैध आय के बीच असंगति पाई जाती है, तो एजेंसी उसके बारे में स्पष्टीकरण मांग सकती है। हालांकि, किसी वस्तु की कीमत या संख्या के आधार पर अकेले अवैध आय का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

जमीन और फ्लैट में करोड़ों रुपये के निवेश का दावा

छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों में जमीन और फ्लैट से संबंधित संपत्तियों का विवरण भी शामिल बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब तक करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े कागजात सामने आए हैं।

जांच एजेंसी इन दस्तावेजों के आधार पर संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद की तारीख, भुगतान के तरीके और वास्तविक मूल्य की पड़ताल कर रही है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि संपत्तियां किसके नाम पर दर्ज हैं और उनकी खरीद के लिए धन कहां से आया।

इस मामले में संपत्ति का नाम किसी अधिकारी, उसकी पत्नी या परिवार के किसी अन्य सदस्य के नाम पर होना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। जांच के लिए यह समझना जरूरी है कि खरीद में किसकी रकम लगी और संबंधित संपत्ति का वित्तीय स्रोत क्या था।

दानापुर में दोनों के नाम पर फ्लैट

रिपोर्ट के अनुसार, दानापुर के कश्यप ग्रीन होम्स में कुमारी स्वीटी के नाम पर करीब 49 लाख रुपये का फ्लैट और रविंद्र कुमार दिवाकर के नाम पर लगभग 45 लाख रुपये का फ्लैट होने की जानकारी सामने आई है।

इन दोनों संपत्तियों का कुल बताया गया मूल्य करीब 94 लाख रुपये है। जांच के दौरान इनके खरीद संबंधी दस्तावेजों, रजिस्ट्री, भुगतान और आय के स्रोत का मिलान किया जा सकता है।

फुलवारीशरीफ में तीन प्लॉट

फुलवारीशरीफ में रविंद्र कुमार दिवाकर, उनकी पत्नी और उनके पिता लखन लाल पासवान के नाम पर एक-एक प्लॉट होने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों प्लॉट की कुल कीमत लगभग 1.47 करोड़ रुपये बताई गई है।

जांच में इन प्लॉट की खरीद की तारीख, जमीन के रजिस्ट्री दस्तावेज और भुगतान की व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी संपत्ति की खरीद में परिवार के किसी सदस्य की भूमिका सामने आती है, तो एजेंसी को यह भी जांचना होगा कि भुगतान वास्तव में किसने किया था।

बेगूसराय के बलिया में जमीन

रिपोर्ट के मुताबिक, बेगूसराय के बलिया में रविंद्र कुमार दिवाकर के नाम पर 20 डिसमिल जमीन है। इसके अलावा उनके पिता के नाम पर 4 डिसमिल जमीन होने की जानकारी दी गई है। बताया गया है कि पिता के नाम वाली जमीन बाद में गिफ्ट डीड के माध्यम से रविंद्र कुमार दिवाकर के नाम हस्तांतरित की गई थी।

इस जमीन के संबंध में भी स्वामित्व, हस्तांतरण और मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा सकती है। गिफ्ट डीड के मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दस्तावेज विधिवत तैयार और पंजीकृत थे या नहीं तथा संपत्ति का हस्तांतरण किस परिस्थिति में हुआ।

बेगूसराय के पैतृक घर से भी करीब 9 लाख रुपये मिलने की जानकारी

पटना के अलावा निगरानी विभाग की एक टीम ने बेगूसराय के नगर थाना क्षेत्र स्थित पोखरिया वार्ड नंबर 37 में रविंद्र कुमार दिवाकर के पैतृक घर पर भी तलाशी ली।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, छह सदस्यीय टीम ने यहां तलाशी के दौरान करीब 9 लाख रुपये नकद और सोने के आभूषण मिलने की जानकारी दी। निगरानी विभाग के डीएसपी वासुदेव राय के हवाले से बताया गया कि रविंद्र कुमार दिवाकर के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज है।

रिपोर्ट के मुताबिक, पैतृक घर की तलाशी अदालत से वारंट प्राप्त करने के बाद की गई। पटना में कथित तौर पर मिले करीब 70 लाख रुपये और बेगूसराय में मिले करीब 9 लाख रुपये को जोड़ने पर कुल नकदी लगभग 79 लाख रुपये बताई गई है।

अब एजेंसी को यह पता लगाना होगा कि पैतृक घर में मिली नकदी और आभूषण किसके स्वामित्व में थे तथा उनका स्रोत क्या था। किसी स्थान से रकम मिलने के आधार पर ही उसके मालिक या स्रोत के बारे में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

कौन हैं ADM रविंद्र कुमार दिवाकर?

उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, रविंद्र कुमार दिवाकर ने अपने करियर की शुरुआत शिक्षक के रूप में की थी। वर्ष 2010 में वह बिहार प्रशासनिक सेवा में आए। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने विभिन्न पदों पर काम किया।

बताया गया है कि वह गया में अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) और सारण में जिला जनसंपर्क पदाधिकारी (DPRO) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। फिलहाल वह पटना में ADM सप्लाई के पद पर तैनात बताए गए हैं।

प्रशासनिक सेवा में अधिकारियों की जिम्मेदारी सरकारी योजनाओं, विभागीय कामकाज और निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन से जुड़ी होती है। ऐसे में किसी अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज होने पर उसकी आय, निवेश और संपत्ति के दस्तावेजों की जांच की जाती है।

इस मामले में भी रविंद्र कुमार दिवाकर की सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन, ज्ञात आय के अन्य स्रोतों, निवेश और संपत्ति की खरीद का तुलनात्मक आकलन महत्वपूर्ण होगा।

पत्नी कुमारी स्वीटी भी जांच के दायरे में

रिपोर्ट के अनुसार, रविंद्र कुमार दिवाकर की पत्नी कुमारी स्वीटी वर्ष 2013 में सब रजिस्ट्रार बनी थीं। उनकी पहली पोस्टिंग तेघरा में हुई थी। इसके बाद उन्होंने हवेली खड़गपुर और सकरा में भी काम किया। वर्ष 2024 से वह दानापुर में जिला सब रजिस्ट्रार के पद पर तैनात बताई गई हैं।

चूंकि दोनों सरकारी सेवा में हैं, इसलिए जांच के दौरान उनकी व्यक्तिगत आय और संयुक्त पारिवारिक संपत्तियों का अलग-अलग तथा समग्र रूप से आकलन किया जा सकता है।

ऐसे मामलों में केवल पति-पत्नी की संयुक्त संपत्ति देखना पर्याप्त नहीं होता। यह भी समझना जरूरी होता है कि प्रत्येक संपत्ति किसके नाम पर है, उसकी खरीद के लिए किसने भुगतान किया और संबंधित व्यक्ति की वैध आय कितनी थी।

जांच में सामने आए दस्तावेजों के आधार पर ही यह तय किया जा सकेगा कि कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में दोनों की भूमिका क्या है।

आय से अधिक संपत्ति के मामले में निगरानी विभाग क्या जांचता है?

आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामलों में जांच एजेंसी आम तौर पर संबंधित व्यक्ति की ज्ञात वैध आय और निर्धारित अवधि में अर्जित संपत्तियों तथा खर्चों का आकलन करती है।

इस प्रक्रिया में कई पहलुओं की जांच की जा सकती है:

  • वेतन और अन्य आय: संबंधित अधिकारी की नौकरी से प्राप्त आय तथा वैध अतिरिक्त आय के स्रोत।
  • बैंक खाते: जमा, निकासी, बड़े लेनदेन और रकम के हस्तांतरण का रिकॉर्ड।
  • अचल संपत्ति: जमीन, मकान और फ्लैट की खरीद, रजिस्ट्री तथा भुगतान संबंधी दस्तावेज।
  • कीमती वस्तुएं: सोना, चांदी, घड़ियां और अन्य मूल्यवान सामान का स्वामित्व व मूल्यांकन।
  • पारिवारिक संपत्ति: पति-पत्नी या अन्य परिजनों के नाम पर दर्ज संपत्तियों के वास्तविक वित्तीय स्रोत।
  • कर्ज और बचत: वैध ऋण, पहले से मौजूद बचत तथा अन्य वित्तीय दायित्व।

इन सभी पहलुओं को देखने के बाद एजेंसी यह आकलन करती है कि संपत्तियों और खर्चों का ज्ञात वैध आय से कितना संबंध है। जांच में किसी विसंगति के सामने आने पर संबंधित व्यक्ति से स्पष्टीकरण और दस्तावेज मांगे जा सकते हैं।

अब दस्तावेजों और आय का मिलान करेगी एजेंसी

छापेमारी के दौरान नकदी, आभूषण, घड़ियां और संपत्ति संबंधी कागजात मिलने के बाद जांच का अगला महत्वपूर्ण चरण इनका सत्यापन है। निगरानी विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि बरामद रकम और संपत्तियों का वास्तविक मूल्य क्या है तथा वे किसके स्वामित्व में हैं।

इसके साथ ही, संपत्ति की खरीद और नकदी के स्रोत का मिलान संबंधित अधिकारियों की आय से किया जाएगा। जमीन की रजिस्ट्री, फ्लैट के खरीद दस्तावेज, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल मामले में बरामदगी और संपत्तियों के संबंध में सामने आई जानकारियों को जांच के निष्कर्ष से अलग करके देखना जरूरी है।

बिहार के पटना और बेगूसराय में ADM रविंद्र कुमार दिवाकर और उनकी पत्नी कुमारी स्वीटी से जुड़े ठिकानों पर हुई निगरानी विभाग की छापेमारी में करीब 79 लाख रुपये नकद, 48 घड़ियां, आभूषण और जमीन-मकान से संबंधित दस्तावेज मिलने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों में करीब 3 करोड़ रुपये की संपत्ति के दस्तावेजों का भी उल्लेख किया गया है।

अब इस मामले का मुख्य सवाल यह है कि बरामद नकदी और संपत्तियों का स्रोत क्या है तथा क्या इनका मूल्य संबंधित अधिकारियों की ज्ञात वैध आय के अनुरूप है। इसका जवाब जांच के दौरान सामने आने वाले वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगा।