नोवामुंडी: Noamundi College में 30 सितंबर को ‘इंडिया ऑफ ड्रीम्स’ यानी ‘सपनों का भारत’ विषय पर चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान के तहत कार्यक्रम का आयोजन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कॉलेज के अध्यक्ष मधु कोड़ा के निर्देश पर किया गया। इस अवसर पर पूर्व सांसद एवं कॉलेज की कार्यकारी अध्यक्ष गीता कोड़ा भी उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा, रचनात्मकता और राष्ट्र के प्रति भावनाओं का अनूठा प्रदर्शन किया। छात्र-छात्राओं ने सामूहिक रूप से 3600 वर्गफीट की विशाल रंगोली तैयार की। इसके बाद विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाकर भारत का मानचित्र प्रस्तुत किया। इस विशेष प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने सपनों के भारत की परिकल्पना और देश के प्रति अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्र निर्माण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, उनकी रचनात्मक प्रतिभा को प्रोत्साहित करना और उन्हें देश के विकास में अपनी भूमिका समझने के लिए प्रेरित करना था। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और शिक्षा, रोजगार, नवाचार तथा विकसित भारत की अपनी कल्पनाओं को विभिन्न माध्यमों से प्रस्तुत किया।

दीप प्रज्वलन और वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। कॉलेज के अध्यक्ष मधु कोड़ा, गीता कोड़ा, प्राचार्य डॉ. मनोजीत बिस्वास, वित्तीय सलाहकार डॉ. मुरारीलाल वैद्य तथा विद्यार्थियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित किया।
इसके बाद सामूहिक रूप से वंदे मातरम् का गायन किया गया। राष्ट्रगीत के माध्यम से कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने देश के प्रति सम्मान और एकजुटता का संदेश दिया। पूरे आयोजन में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।
आयोजकों ने बताया कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ देश के भविष्य के बारे में सोचने का अवसर प्रदान करते हैं। चित्रकला और भाषण जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति, विचार अभिव्यक्ति और सामाजिक समझ को विकसित करने में भी सहायक होती हैं।
3600 वर्गफीट की विशाल रंगोली बनी आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई 3600 वर्गफीट की विशाल रंगोली विशेष आकर्षण का केंद्र रही। ‘इंडिया ऑफ ड्रीम्स’ विषय पर आधारित इस सामूहिक रचनात्मक प्रस्तुति में विद्यार्थियों ने अपने सपनों के भारत की कल्पना को रंगों के माध्यम से प्रदर्शित किया।
इतने बड़े क्षेत्र में रंगोली तैयार करने के लिए विद्यार्थियों ने सामूहिक प्रयास किया। इस गतिविधि ने उनकी रचनात्मक क्षमता के साथ-साथ आपसी सहयोग और टीम भावना को भी प्रदर्शित किया।
रंगोली के बाद विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाकर भारत का मानचित्र प्रस्तुत किया। इस अनूठी प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय एकता, देशप्रेम और भारत के उज्ज्वल भविष्य के प्रति अपनी आकांक्षाओं को सामने रखा।
विद्यार्थियों की इस पहल ने कार्यक्रम को एक अलग पहचान दी। आयोजन में कला को केवल व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का माध्यम न मानकर सामाजिक संदेश देने और राष्ट्र के प्रति अपने विचार साझा करने के माध्यम के रूप में भी प्रस्तुत किया गया।
भाषण प्रतियोगिता में सृष्टि ठाकुर ने हासिल किया प्रथम स्थान
‘इंडिया ऑफ ड्रीम्स’ विषय पर आयोजित भाषण प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपने सपनों के भारत, युवाओं की जिम्मेदारियों और देश के विकास में शिक्षा की भूमिका जैसे विषयों पर अपनी सोच व्यक्त की।
प्रतियोगिता में सृष्टि ठाकुर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। खुशी चौधरी दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि कसक सिंह ने तीसरा स्थान हासिल किया।
विजेता प्रतिभागियों को मधु कोड़ा और गीता कोड़ा ने आकर्षक पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। इस सम्मान से विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ा और उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन मिला।
प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, तार्किक सोच और सार्वजनिक मंच पर अपने विचार रखने की क्षमता विकसित करना भी था। भाषण प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचारों को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने और देश के भविष्य से जुड़े विषयों पर चिंतन करने का अवसर मिला।
चित्रकला प्रतियोगिता में प्रियंका घोष रहीं प्रथम
चित्रकला प्रतियोगिता में भी विद्यार्थियों ने अपनी कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ‘सपनों का भारत’ विषय पर आधारित इस प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अपनी कल्पनाओं और विचारों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता में प्रियंका घोष ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। बासमती मुर्मू दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि जूली नायक ने तीसरा स्थान हासिल किया।
सभी विजेताओं को मधु कोड़ा और गीता कोड़ा ने पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया। प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रचनात्मक क्षमता का प्रदर्शन करने और देश के भविष्य के प्रति अपने दृष्टिकोण को कलात्मक रूप में अभिव्यक्त करने का अवसर मिला।
चित्रकला जैसी गतिविधियां विद्यार्थियों की कल्पनाशक्ति और मौलिक सोच को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस आयोजन में विद्यार्थियों ने रंगों और चित्रों के जरिए यह दिखाने का प्रयास किया कि वे आने वाले समय में भारत को किस रूप में देखना चाहते हैं।
मधु कोड़ा बोले सपने टूट सकते हैं, लेकिन संकल्प नहीं
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज के अध्यक्ष एवं झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा, “सपने टूट सकते हैं, लेकिन संकल्प नहीं टूटता।”
उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प अभियान का उद्देश्य युवाओं को देश के विकास में उनकी भूमिका समझने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है। उन्होंने ऐसे भारत के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसर उपलब्ध हों।
मधु कोड़ा ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करना और उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करना बेहद जरूरी है। उन्होंने युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं की सोच, उनकी मेहनत और उनकी क्षमताओं पर निर्भर करता है। इसलिए विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज और देश की वास्तविक समस्याओं को समझने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।
उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाना और उन्हें समाज के विकास में योगदान देने योग्य तैयार करना भी है।
विद्यार्थियों को शोध और नवाचार के लिए किया प्रेरित
मधु कोड़ा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों के बीच शोध की प्रवृत्ति विकसित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी को अपने स्तर पर शोध करने की आदत विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शोध का विषय बहुत बड़ा होना जरूरी नहीं है। समाज में मौजूद किसी छोटी समस्या का अध्ययन करके उसका उपयोगी समाधान निकालना भी महत्वपूर्ण शोध हो सकता है। विद्यार्थियों को अपने आसपास की परिस्थितियों का निरीक्षण करना चाहिए और समस्याओं के समाधान के लिए नए विचार विकसित करने चाहिए।
उन्होंने विकसित देशों के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को नई सोच, नवाचार और ज्ञान के क्षेत्रों में आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति में शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
आज के समय में तकनीकी विकास और बदलती आवश्यकताओं के बीच विद्यार्थियों के लिए जरूरी है कि वे केवल परंपरागत तरीकों पर निर्भर न रहें, बल्कि नई तकनीकों और आधुनिक ज्ञान को भी अपनाएं। शोध और नवाचार के माध्यम से विद्यार्थी न केवल अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान में भी योगदान दे सकते हैं।
नोवामुंडी कॉलेज में बनेगा बड़ा भवन और ऑडिटोरियम
मधु कोड़ा ने नोवामुंडी कॉलेज में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या का उल्लेख करते हुए कॉलेज के विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कॉलेज के विकास के लिए एक बड़े भवन और ऑडिटोरियम का निर्माण कराया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित भवन और ऑडिटोरियम से विद्यार्थियों को सामूहिक रूप से बैठने और विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने की सुविधा मिलेगी। बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के एक साथ बैठने की व्यवस्था होने से कॉलेज में कार्यक्रमों के आयोजन में भी सहूलियत होगी।
कॉलेज में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने के साथ शैक्षणिक सुविधाओं, आधारभूत संरचना और सामूहिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त स्थान की आवश्यकता भी बढ़ती है। ऐसे में भवन और ऑडिटोरियम के निर्माण की योजना को संस्थान के विकास से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने और कॉलेज में उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हुए अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया।
गीता कोड़ा ने मातृभाषा और कौशल विकास पर दिया जोर
कार्यक्रम में पूर्व सांसद एवं कॉलेज की कार्यकारी अध्यक्ष गीता कोड़ा ने नई शिक्षा नीति के संदर्भ में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा और कौशल अपनाने के साथ अपनी मातृभाषा तथा स्थानीय भाषा से भी जुड़े रहना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भाषा व्यक्ति की पहचान, संस्कृति और सामाजिक जुड़ाव का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। अपनी भाषा से जुड़ाव बनाए रखते हुए आधुनिक ज्ञान और तकनीकी शिक्षा प्राप्त करना विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक हो सकता है।
गीता कोड़ा ने कॉलेज के विकास में कौशल विकास, रोजगारोन्मुखी शिक्षा और विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में केवल शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों के पास व्यावहारिक कौशल होना भी आवश्यक है।
उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वे पढ़ाई के साथ-साथ अपनी क्षमताओं को विकसित करें, नई तकनीकों को सीखें और भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करें। उनके अनुसार, कौशल आधारित शिक्षा युवाओं को रोजगार के अवसरों का लाभ उठाने और आत्मनिर्भर बनने में मदद कर सकती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार लक्ष्य निर्धारित करने तथा उन्हें हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करने की प्रेरणा दी।
शिक्षा के साथ रोजगारोन्मुखी कौशल विकसित करने की अपील
गीता कोड़ा ने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि कॉलेजों की भूमिका केवल विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। संस्थानों को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने पर भी ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बदलते समय में विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई के साथ संवाद कौशल, तकनीकी ज्ञान, रचनात्मकता और समस्या समाधान जैसी क्षमताओं को विकसित करना चाहिए। इससे उन्हें भविष्य में उपलब्ध विभिन्न अवसरों का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने आधुनिक शिक्षा के साथ स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखने की आवश्यकता भी बताई। उनके अनुसार, शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने परिवेश से जोड़े रखते हुए उन्हें व्यापक अवसरों के लिए तैयार करना होना चाहिए।
कार्यक्रम में प्रस्तुत विशाल रंगोली, भारत के मानचित्र की मानव श्रृंखला और विभिन्न प्रतियोगिताओं को विद्यार्थियों की रचनात्मकता तथा सामूहिक भागीदारी का उदाहरण बताया गया।
राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर कुलजिंदर सिंह ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया और विभिन्न गतिविधियों के दौरान प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगान के साथ आयोजन का समापन हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
इंडिया ऑफ ड्रीम्स विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के भविष्य के बारे में सोचने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका समझने का अवसर मिला। विशाल रंगोली, मानव श्रृंखला, भाषण और चित्रकला प्रतियोगिताओं ने आयोजन को विशेष स्वरूप प्रदान किया।
मधु कोड़ा और गीता कोड़ा के संबोधन में शिक्षा, शोध, नवाचार, मातृभाषा, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी शिक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। कार्यक्रम का समग्र संदेश यही रहा कि युवाओं की रचनात्मक सोच, दृढ़ संकल्प और ज्ञान के माध्यम से देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
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