श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के Kulgam जिले में शुक्रवार शाम हुए आतंकी हमले ने एक बार फिर घाटी की सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद की चुनौती को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हमले में दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। शुरुआती रिपोर्टों और मीडिया में आई जानकारी के अनुसार, आतंकियों ने कथित तौर पर पहले मजदूरों की पहचान और धर्म की पुष्टि की और उसके बाद उन पर बेहद नजदीक से गोलियां चलाईं। जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। इस घटना के बाद इसे पिछले वर्ष हुए पहलगाम (बैसरन घाटी) आतंकी हमले के पैटर्न से जोड़कर भी देखा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।

ईंट भट्ठे पर किया गया हमला

जानकारी के अनुसार, कुलगाम जिले के केलम इलाके में स्थित एक ईंट भट्ठे पर शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने हमला किया। उस समय वहां कई प्रवासी मजदूर काम कर रहे थे। हमले में दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और सुरक्षा बलों की मदद से दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

दोनों घायलों की इलाज के दौरान मौत

हमले में घायल दीपक रत्रैय ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया। वहीं दूसरे घायल बोपिंदर को पहले अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। बाद में उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS), सौरा रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान शनिवार को उनकी भी मौत हो गई।

अधिकारियों के अनुसार, दोनों मृतक छत्तीसगढ़ के रहने वाले युवा प्रवासी मजदूर थे, जो रोजगार के सिलसिले में जम्मू-कश्मीर आए थे।

धर्म पूछकर निशाना बनाने की आशंका

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जिस ईंट भट्ठे पर हमला हुआ वहां कई प्रवासी मजदूर कार्यरत थे, लेकिन उनमें से केवल दो मजदूर हिंदू समुदाय से थे। शुरुआती जानकारी के आधार पर आशंका जताई जा रही है कि आतंकियों ने कथित तौर पर उनकी पहचान सुनिश्चित करने के बाद उन्हें निशाना बनाया।

हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा अभी नहीं की गई है और मामले की विस्तृत जांच जारी है।

पहलगाम हमले से जोड़ा जा रहा घटनाक्रम

इस घटना की तुलना वर्ष 2025 में पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले से की जा रही है। उस हमले में भी आतंकवादियों पर आरोप लगा था कि उन्होंने पर्यटकों की पहचान पूछने के बाद चुनिंदा लोगों को निशाना बनाया था।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में समानता की पुष्टि होती है तो यह आतंकियों की रणनीति में एक चिंताजनक पैटर्न की ओर संकेत कर सकता है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) पर जांच एजेंसियों की नजर

प्रारंभिक जांच में सुरक्षा एजेंसियों को संदेह है कि इस हमले में एक स्थानीय और एक विदेशी आतंकवादी शामिल हो सकते हैं।

जांचकर्ताओं का ध्यान मोहम्मद लतीफ नामक संदिग्ध पर भी केंद्रित है, जिसके बारे में बताया जा रहा है कि वह पिछले वर्ष लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) में शामिल हुआ था।

गौरतलब है कि पहलगाम आतंकी हमले के मामले में भी जांच एजेंसियों ने TRF की भूमिका की जांच की थी। फिलहाल कुलगाम हमले में किसी संगठन की आधिकारिक जिम्मेदारी की पुष्टि नहीं हुई है।

सुरक्षा एजेंसियों ने शुरू किया व्यापक सर्च ऑपरेशन

हमले के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया और बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां मिलकर आतंकियों की तलाश में जुटी हुई हैं।

घटनास्थल से फोरेंसिक साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और दोषियों को जल्द पकड़ने का प्रयास जारी है।

हाल के दिनों में बढ़ी आतंकी गतिविधियां

कुलगाम की यह घटना ऐसे समय हुई है जब घाटी में हाल के दिनों में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे करीब 10 दिन पहले अनंतनाग शहर में आतंकवादियों ने एक पुलिस अधिकारी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर निगरानी बढ़ा दी है।

प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल

कुलगाम हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में कार्यरत प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न राज्यों से हजारों मजदूर हर वर्ष रोजगार के लिए घाटी में आते हैं और निर्माण कार्य, ईंट भट्ठों तथा अन्य उद्योगों में काम करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को विशेष रणनीति अपनानी होगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई

फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां कुलगाम आतंकी हमले की हर पहलू से जांच कर रही हैं। हमले की प्रकृति, आतंकियों की पहचान, संभावित साजिश और किसी आतंकी संगठन की भूमिका को लेकर जांच जारी है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ सतर्कता, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है।