जमशेदपुर: मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल, नॉर्दर्न टाउन, जमशेदपुर में 27 अगस्त 2026 को फ्रैंक एंथनी Memorial ऑल इंडिया इंटर-स्कूल डिबेट प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रतिष्ठित वाद-विवाद प्रतियोगिता में क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों से आए प्रतिभाशाली एवं वक्तृत्व कला में दक्ष विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

इस प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने, तार्किक सोच विकसित करने तथा समसामयिक विषयों पर स्वतंत्र एवं रचनात्मक विचार रखने के लिए मंच प्रदान करना था। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने अपनी वाक्पटुता, तर्कशक्ति, आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।

दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर निर्णायक मंडल के सम्मानित सदस्यों एवं प्रतियोगिता के मॉडरेटर की उपस्थिति रही।

दीप प्रज्वलन के माध्यम से कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की गई। इसके बाद प्रतियोगिता में भाग लेने वाले विद्यार्थियों का स्वागत किया गया और उन्हें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में विशेष उत्साह का वातावरण तैयार किया। विभिन्न विद्यालयों से आए प्रतिभागियों ने प्रतियोगिता को बौद्धिक विचारों और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का मंच बनाया।

देशभर की वाद-विवाद प्रतिभाओं को मिला मंच

फ्रैंक एंथनी मेमोरियल ऑल इंडिया इंटर-स्कूल डिबेट प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए अपने विचारों और तर्कों को प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण मंच रही। प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों ने विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार प्रस्तुत किए और अपनी बात को तर्कपूर्ण ढंग से रखने का प्रयास किया।

वाद-विवाद जैसी प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इनके माध्यम से विद्यार्थियों में सार्वजनिक रूप से बोलने का आत्मविश्वास बढ़ता है तथा वे किसी विषय को विभिन्न दृष्टिकोणों से समझने की क्षमता विकसित करते हैं।

प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल की रही उपस्थिति

प्रतियोगिता के लिए एक अनुभवी एवं प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल का गठन किया गया था। निर्णायक मंडल में श्री परविंदर भाटिया, जमशेदपुर ब्यूरो प्रमुख, द पायनियर तथा वरिष्ठ औद्योगिक पत्रकार; श्रीमती सीमा तिवारी, संस्थापक शिक्षिका एवं समन्वयक, जुस्को स्कूल कदमा, साथ ही TEEP Assessor एवं CBSE Trainer; और श्रीमती सुनीता सिन्हा, वरिष्ठ शिक्षाविद्, पूर्व प्राचार्या, लेखिका एवं काव्यप्ता ग्लोबल स्कूल की क्रिएटिव डायरेक्टर शामिल रहीं।

इन सभी निर्णायकों के पास शिक्षा, पत्रकारिता, प्रशिक्षण एवं अकादमिक नेतृत्व के क्षेत्र में लंबा अनुभव है। उनके अनुभव और विशेषज्ञता ने प्रतियोगिता के मूल्यांकन को और अधिक प्रभावी बनाया।

डॉ. राजकुमारी घोष ने किया संचालन

वाद-विवाद सत्र का संचालन डॉ. राजकुमारी घोष द्वारा किया गया। वे अंग्रेजी साहित्य की अनुभवी शिक्षाविद्, पीएचडी धारक, अरका जैन यूनिवर्सिटी में ब्रांड स्ट्रैटेजिस्ट तथा टोस्टमास्टर्स मेंटर हैं।

उन्होंने पूरे सत्र को व्यवस्थित एवं प्रभावी ढंग से संचालित किया। प्रतिभागियों को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया और प्रतियोगिता को निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ाया गया।

उनके संचालन से प्रतियोगिता में अनुशासन और बौद्धिक संवाद का संतुलन बना रहा।

प्राचार्या संगीता सिंह ने दिया प्रेरणादायक संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल की प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरणादायक संदेश दिया। उन्होंने सार्वजनिक वक्तृत्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मंच पर बोलना केवल किसी तर्क को जीतने या हारने तक सीमित नहीं है।

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि प्रभावी सार्वजनिक वक्तृत्व का उद्देश्य आलोचनात्मक सोच, सहानुभूति और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देना भी है। बदलती दुनिया में युवाओं के लिए अपनी बात को स्पष्ट, तार्किक और संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करना अत्यंत आवश्यक है।

प्राचार्या ने प्रतिभागियों के उत्साहपूर्ण एवं प्रभावशाली तर्कों की सराहना की और उन्हें अपनी आवाज का उपयोग समाज में सार्थक परिवर्तन लाने के लिए करने के लिए प्रेरित किया।

सार्वजनिक वक्तृत्व के महत्व पर जोर

कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक वक्तृत्व को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों के लिए अपने विचारों को स्पष्ट एवं प्रभावशाली तरीके से व्यक्त करने की क्षमता भी आवश्यक है।

वाद-विवाद प्रतियोगिता विद्यार्थियों को इसी दिशा में तैयार करती है। मंच पर बोलते समय विद्यार्थी अपने विचारों को व्यवस्थित करना, तथ्यों का उपयोग करना, विरोधी विचारों को समझना और तार्किक तरीके से अपनी बात रखना सीखते हैं।

इस प्रकार की प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों में आत्मविश्वास के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता भी विकसित करती हैं।

आलोचनात्मक सोच को मिलता है बढ़ावा

वाद-विवाद प्रतियोगिता का एक महत्वपूर्ण लाभ यह है कि इससे विद्यार्थियों में आलोचनात्मक सोच विकसित होती है। किसी भी विषय पर अपनी राय बनाने से पहले उसके विभिन्न पक्षों को समझना आवश्यक होता है।

प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को अपने पक्ष के समर्थन में तर्क प्रस्तुत करने के साथ-साथ संभावित विरोधी तर्कों को समझने का अवसर भी मिला। इससे उनमें किसी मुद्दे का गहराई से विश्लेषण करने की क्षमता विकसित होती है।

विद्यालय स्तर पर ऐसी प्रतियोगिताओं का आयोजन विद्यार्थियों को भविष्य में उच्च शिक्षा, पेशेवर जीवन और सामाजिक क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार करता है।

स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण

कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का वातावरण देखने को मिला। विद्यार्थियों ने एक-दूसरे के विचारों को ध्यानपूर्वक सुना और अपनी प्रस्तुति के माध्यम से अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल विजेता घोषित करना नहीं था, बल्कि सभी प्रतिभागियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और नए अनुभव प्राप्त करने का अवसर देना भी था।

ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों में प्रतियोगिता की सकारात्मक भावना विकसित होती है और वे जीत के साथ-साथ सीखने के महत्व को भी समझते हैं।

विद्यार्थियों ने दिखाई शानदार वक्तृत्व क्षमता

प्रतियोगिता में शामिल विद्यार्थियों ने अपनी वाक्पटुता और अभिव्यक्ति क्षमता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखी और विभिन्न तर्कों के माध्यम से अपने विचारों को मजबूत करने का प्रयास किया।

कई प्रतिभागियों ने विषयों को सामाजिक, शैक्षणिक और समकालीन दृष्टिकोण से देखने की कोशिश की। उनके विचारों और प्रस्तुतियों ने यह दिखाया कि आज के विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज और दुनिया में हो रहे बदलावों को लेकर भी जागरूक हैं।

तर्क और अभिव्यक्ति का अनूठा संगम

वाद-विवाद प्रतियोगिता में केवल बोलने की क्षमता ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि तर्कों की मजबूती भी आवश्यक होती है। प्रतिभागियों ने अपने विचारों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करते हुए तार्किक दृष्टिकोण अपनाया।

प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर दिया कि प्रभावशाली संवाद के लिए भाषा, तथ्य, तर्क और प्रस्तुति—इन सभी का संतुलन आवश्यक है।

सहानुभूति और रचनात्मक संवाद की सीख

प्राचार्या संगीता सिंह ने अपने संदेश में विशेष रूप से सहानुभूति और रचनात्मक संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। लोकतांत्रिक समाज में अलग-अलग विचारों का होना स्वाभाविक है, लेकिन उन विचारों पर सम्मानपूर्वक चर्चा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

वाद-विवाद प्रतियोगिताएं विद्यार्थियों को अपने विचार रखने के साथ-साथ दूसरे पक्ष की बात सुनने और समझने की आदत भी सिखाती हैं। यह गुण भविष्य में उन्हें बेहतर नागरिक और जिम्मेदार समाज का हिस्सा बनने में सहायता करता है।

विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका

विद्यालयों में आयोजित भाषण, वाद-विवाद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। ऐसी गतिविधियों से विद्यार्थियों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा मिलता है।

वाद-विवाद प्रतियोगिता में भाग लेने से विद्यार्थी मंच पर अपनी बात रखने से होने वाली झिझक को दूर करते हैं। धीरे-धीरे उनमें सार्वजनिक रूप से बोलने का आत्मविश्वास बढ़ता है।

विजेता टीमों को प्रदान किए गए पुरस्कार

कार्यक्रम के समापन अवसर पर विजेता टीमों को पुरस्कार प्रदान किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों की सराहना की गई और उन्हें उनकी उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।

पुरस्कार वितरण ने विद्यार्थियों के उत्साह को और बढ़ाया। विजेता टीमों के साथ-साथ अन्य प्रतिभागियों के प्रयासों की भी सराहना की गई।

इस अवसर पर यह संदेश दिया गया कि प्रतियोगिता में भाग लेना और अपने कौशल को बेहतर बनाना भी अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।

प्राचार्या ने व्यक्त किया आभार

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने प्रतियोगिता को सफल बनाने के लिए निर्णायक मंडल, मॉडरेटर, प्रतिभागियों और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों की मेहनत और उत्साह की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को समृद्ध बनाते हैं और विद्यार्थियों को अपने कौशल को विकसित करने के लिए बेहतर मंच प्रदान करते हैं।

विद्यालय की शैक्षणिक प्रतिबद्धता को मिली मजबूती

इस सफल आयोजन ने मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल की विद्यार्थियों में वक्तृत्व कला, आलोचनात्मक चिंतन और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

विद्यालय द्वारा इस तरह के कार्यक्रमों के आयोजन से विद्यार्थियों को कक्षा के बाहर भी सीखने और अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने के अवसर मिलते हैं। यह शिक्षा के व्यापक उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सामाजिक परिवर्तन में युवाओं की आवाज

कार्यक्रम में यह संदेश भी उभरकर सामने आया कि युवाओं की आवाज समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकती है। विद्यार्थियों को अपने विचारों को केवल प्रतियोगिता तक सीमित न रखते हुए उन्हें समाज की बेहतर दिशा के लिए उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।

आज के विद्यार्थी आने वाले समय के नागरिक, पेशेवर, शिक्षक, नेता और समाज के जिम्मेदार सदस्य होंगे। इसलिए उनमें संवाद, तर्क, संवेदनशीलता और नेतृत्व जैसे गुणों का विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है।

यादगार रहा आयोजन

27 अगस्त 2026 को आयोजित फ्रैंक एंथनी मेमोरियल ऑल इंडिया इंटर-स्कूल डिबेट प्रतियोगिता विद्यालय के लिए एक यादगार आयोजन रहा। कार्यक्रम में बौद्धिक विचारों, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और प्रभावी अभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।

प्रतिभागियों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतियोगिता में भाग लिया और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। निर्णायक मंडल के अनुभवी सदस्यों और मॉडरेटर के मार्गदर्शन ने आयोजन को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल, जमशेदपुर में आयोजित फ्रैंक एंथनी Memorial ऑल इंडिया इंटर-स्कूल डिबेट प्रतियोगिता विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, तर्क और अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण मंच साबित हुई। 27 अगस्त 2026 को आयोजित इस प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों ने अपने विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हुए अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए सार्वजनिक वक्तृत्व को केवल तर्क-वितर्क का माध्यम न मानकर आलोचनात्मक सोच, सहानुभूति और रचनात्मक संवाद का साधन बताया। उन्होंने प्रतिभागियों को अपनी आवाज का उपयोग सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन के लिए करने का संदेश दिया।

प्रतिष्ठित निर्णायक मंडल में श्री परविंदर भाटिया, श्रीमती सीमा तिवारी और श्रीमती सुनीता सिन्हा जैसे अनुभवी व्यक्तित्वों की उपस्थिति रही, जबकि डॉ. राजकुमारी घोष ने प्रतियोगिता के सत्र का प्रभावी संचालन किया।

कार्यक्रम के अंत में विजेता टीमों को पुरस्कार प्रदान किए गए तथा प्राचार्या श्रीमती संगीता सिंह ने सभी निर्णायकों, प्रतिभागियों और आयोजन टीम के प्रति आभार व्यक्त किया। यह आयोजन विद्यालय की ओर से विद्यार्थियों में वक्तृत्व कौशल, आलोचनात्मक चिंतन, आत्मविश्वास और शैक्षणिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।