पूर्वी सिंहभूम: DM जिले में ग्रामीण क्षेत्रों तक सुरक्षित, नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने तथा स्वच्छता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSC) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समाहरणालय सभागार में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त श्री राजीव रंजन ने की।
बैठक में जल जीवन मिशन (JJM) एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [SBM(G)] के अंतर्गत जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान योजनाओं के क्रियान्वयन, निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप उपलब्धियों, लंबित कार्यों, गुणवत्ता, संचालन एवं रख-रखाव तथा आगामी कार्ययोजना से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल आपूर्ति पर जोर
बैठक में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार तक सुरक्षित एवं नियमित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। जल जीवन मिशन के तहत संचालित योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को पाइपलाइन के जरिए पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई।

उपायुक्त ने अधिकारियों से कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जाए। योजनाओं को पूरा करने के साथ-साथ यह भी आवश्यक है कि जलापूर्ति व्यवस्था लंबे समय तक सुचारू रूप से संचालित होती रहे।
उन्होंने योजनाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने तथा निर्माण कार्यों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। ग्रामीण नागरिकों को पेयजल के लिए किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए क्षेत्र स्तर पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
जल जीवन मिशन की योजनाओं की समीक्षा
बैठक में जल जीवन मिशन (JJM) के अंतर्गत जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा की गई। अधिकारियों से योजनाओं की वर्तमान स्थिति, पूर्ण किए गए कार्यों, प्रगति पर चल रहे कार्यों तथा लंबित योजनाओं के संबंध में जानकारी ली गई।
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक पर्याप्त मात्रा में निर्धारित गुणवत्ता वाला पेयजल नियमित रूप से उपलब्ध कराना है। इसके लिए जल स्रोत, पाइपलाइन, जलापूर्ति संरचना और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है।
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिन योजनाओं का कार्य विभिन्न कारणों से लंबित है, उनकी समस्याओं की पहचान कर समयबद्ध तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जाए। योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
योजनाओं की गुणवत्ता एवं समयबद्ध क्रियान्वयन
बैठक में जलापूर्ति योजनाओं की गुणवत्ता को महत्वपूर्ण विषय के रूप में लिया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन के दौरान गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए।
उपायुक्त ने कहा कि किसी योजना का निर्माण पूरा होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका प्रभावी संचालन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसलिए योजनाओं के निर्माण के साथ-साथ उनकी कार्यक्षमता, नियमित जलापूर्ति और रख-रखाव की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
समयबद्ध तरीके से योजनाओं को पूरा करने के लिए विभागीय स्तर पर नियमित समीक्षा एवं निगरानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।
संचालन एवं रख-रखाव की व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव से जुड़े विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कई बार योजनाओं के निर्माण के बाद नियमित रख-रखाव के अभाव में जलापूर्ति प्रभावित होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजनाओं के सतत संचालन के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि क्षेत्र में जलापूर्ति से संबंधित किसी भी तकनीकी समस्या की जानकारी मिलने पर उसका जल्द से जल्द समाधान किया जाए। जल स्रोत, पाइपलाइन, पंप, टंकी एवं अन्य आवश्यक उपकरणों की नियमित निगरानी और रख-रखाव सुनिश्चित किया जाए।
पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता पर जोर
बैठक में केवल वर्तमान जलापूर्ति व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए पेयजल स्रोतों की उपलब्धता एवं स्थिरता पर भी चर्चा की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों का संरक्षण और उनका दीर्घकालिक उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक बताया गया।
जल स्रोतों के संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करने, उपलब्ध जल स्रोतों की स्थिति पर नजर रखने तथा जल संरक्षण की गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पेयजल योजनाओं की सफलता के लिए जल स्रोतों की स्थिरता को प्राथमिकता दी जाए, ताकि भविष्य में ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।
‘कैच द रेन’ अभियान को बढ़ावा देने पर बल
बैठक में ‘कैच द रेन’ (Catch the Rain) अभियान के माध्यम से वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया। वर्षा जल को संरक्षित कर भूजल स्तर को बनाए रखने तथा भविष्य के लिए जल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन की विभिन्न संभावनाओं पर विचार करते हुए उपलब्ध जल स्रोतों के संरक्षण पर भी बल दिया गया। लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने तथा स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर चर्चा हुई।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की समीक्षा
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [SBM(G)] के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं की भी समीक्षा की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने, स्वच्छ वातावरण तैयार करने तथा स्वच्छता से संबंधित गतिविधियों को प्रभावी रूप से संचालित करने पर चर्चा हुई।
स्वच्छता केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा लोगों को स्वच्छता गतिविधियों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
लंबित कार्यों को समय पर पूरा करने का निर्देश
समीक्षा के दौरान विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लंबित कार्यों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाए।
जहां कार्यों में तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य किसी प्रकार की समस्या आ रही है, वहां संबंधित पदाधिकारी आपसी समन्वय के साथ समस्या का समाधान करें। योजनाओं को अनावश्यक रूप से लंबित रखने से आम जनता को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित होती हैं, इसलिए सभी स्तरों पर सक्रियता के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया।
लक्ष्य के अनुरूप उपलब्धियों की समीक्षा
बैठक में जल जीवन मिशन एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के निर्धारित लक्ष्यों के विरुद्ध प्राप्त उपलब्धियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से योजनाओं की प्रगति और लक्ष्य की स्थिति के बारे में जानकारी ली गई।
आगामी अवधि में निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। विभागीय पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाएं।
जिला स्तरीय परामर्श पर हुआ विचार-विमर्श
भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित किए जा रहे Departmental Summit के संदर्भ में प्राप्त निर्देशों के आलोक में District Level Consultation से संबंधित विषय पर भी बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।
इस दौरान जिले में जल एवं स्वच्छता से जुड़े विषयों की वर्तमान स्थिति, आवश्यकताओं, चुनौतियों और संभावित समाधान पर चर्चा की गई। जिला स्तर से संबंधित सुझावों एवं विषयों को प्रभावी रूप से सामने रखने के लिए आवश्यक बिंदुओं पर भी विचार किया गया।
विभागीय एवं पंचायत स्तर की भूमिका
ग्रामीण क्षेत्रों में जलापूर्ति और स्वच्छता योजनाओं की सफलता के लिए विभागीय स्तर के साथ पंचायत स्तर की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया। योजनाओं के प्रभावी संचालन में स्थानीय संस्थाओं और समुदाय की सहभागिता आवश्यक है।
बैठक में विभागीय अधिकारियों एवं पंचायत स्तर के संबंधित प्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। स्थानीय स्तर पर आने वाली समस्याओं की पहचान और उनके त्वरित समाधान के लिए प्रभावी समन्वय व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता बताई गई।
जनभागीदारी को बनाया जाए मजबूत
जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे विषयों में जनभागीदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया। ग्रामीण नागरिकों को जल के महत्व, जल स्रोतों के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
यदि आम लोग जल संरक्षण एवं स्वच्छता अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं, तो सरकारी योजनाओं के परिणाम और अधिक प्रभावी हो सकते हैं। इसलिए स्थानीय समुदायों को इन गतिविधियों से जोड़ने तथा उन्हें जिम्मेदारी का हिस्सा बनाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
क्षेत्र स्तर की समस्याओं के त्वरित समाधान का निर्देश
बैठक में उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि क्षेत्र भ्रमण एवं निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली समस्याओं का समय पर निराकरण सुनिश्चित करें। जलापूर्ति से जुड़ी समस्याओं के कारण ग्रामीण नागरिकों को परेशानी न हो, इसके लिए शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।
अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र में जाकर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लेने तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
योजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी
उपायुक्त ने जल जीवन मिशन एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की योजनाओं की नियमित निगरानी पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं की प्रगति की निरंतर समीक्षा से कार्यों में आने वाली समस्याओं की पहचान समय रहते की जा सकती है।
निगरानी के दौरान कार्य की गुणवत्ता, निर्धारित लक्ष्य, समय-सीमा, जलापूर्ति की स्थिति और रख-रखाव व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई।
ग्रामीण विकास में जल एवं स्वच्छता का महत्व
स्वच्छ पेयजल और बेहतर स्वच्छता ग्रामीण विकास के महत्वपूर्ण आधार हैं। सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीण परिवारों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। वहीं स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होने से स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण तैयार करने में मदद मिलती है।
जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को मजबूत किया जा सकता है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बैठक में योजनाओं की प्रगति को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
आगामी कार्ययोजना पर हुई चर्चा
बैठक के दौरान आगामी अवधि के लिए कार्ययोजना पर भी विस्तृत चर्चा की गई। अधिकारियों को उपलब्धियों के आधार पर आगे की प्राथमिकताएं निर्धारित करने तथा लंबित कार्यों को जल्द पूरा करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।
साथ ही यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से ग्रामीण नागरिकों तक पहुंचे। इसके लिए विभागीय स्तर पर बेहतर समन्वय, नियमित निगरानी और क्षेत्रीय समस्याओं का त्वरित समाधान आवश्यक बताया गया।
बैठक में उपस्थित रहे अधिकारी
बैठक में जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSC) के सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, जमशेदपुर एवं आदित्यपुर के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता भी बैठक में शामिल हुए।
DPMU तथा BPMU के पदाधिकारी एवं कर्मियों ने भी बैठक में भाग लिया। संबंधित पदाधिकारियों द्वारा जल जीवन मिशन एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत संचालित योजनाओं की प्रगति से संबंधित जानकारी प्रस्तुत की गई।
जल संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक
बैठक में यह संदेश भी सामने आया कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए प्रशासन, पंचायत, विभागीय पदाधिकारियों और आम जनता को मिलकर काम करना होगा।
वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों का संरक्षण, पानी के विवेकपूर्ण उपयोग और ग्रामीण स्तर पर जागरूकता जैसे प्रयासों को बढ़ावा देकर जल संकट की संभावनाओं को कम किया जा सकता है।
समाहरणालय सभागार में उपायुक्त श्री राजीव रंजन की अध्यक्षता में आयोजित जिला जल एवं स्वच्छता समिति की समीक्षा बैठक में जल जीवन मिशन एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की योजनाओं की व्यापक समीक्षा की गई। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित एवं नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने, जलापूर्ति योजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करने, गुणवत्ता बनाए रखने तथा योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं रख-रखाव पर विशेष जोर दिया गया।
इसके साथ ही पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता, जल स्रोतों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और ‘कैच द रेन’ अभियान को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत स्वच्छता गतिविधियों को प्रभावी बनाने तथा ग्रामीण समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई।
उपायुक्त ने अधिकारियों को योजनाओं की नियमित निगरानी करने, लंबित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने तथा क्षेत्र स्तर पर आने वाली समस्याओं का समय पर समाधान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने विभागीय एवं पंचायत स्तर पर बेहतर समन्वय और जनभागीदारी को मजबूत करने पर भी बल दिया।
बैठक का मुख्य उद्देश्य यही रहा कि जल एवं स्वच्छता से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक पात्र परिवार तक प्रभावी ढंग से पहुंचे और ग्रामीण नागरिकों को सुरक्षित पेयजल तथा बेहतर स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध हों।
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