जमशेदपुर: पश्चिम के विधायक एवं पटना साइंस कॉलेज से भौतिकी विषय में एम.एससी. की शिक्षा प्राप्त कर चुके Saryu Roy को आईआईबीएम एवं जाकिर हुसैन शिक्षण संस्थान समूह का मुख्य संरक्षक नामित किया गया है। संस्थान की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह निर्णय शिक्षण संस्थान के विस्तार, शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और भविष्य की विकास योजनाओं को नई दिशा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
संस्थान के निदेशक डॉ. रोहित सिंह ने सरयू राय के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे संस्थान के मंडल के सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी। सरयू राय के अनुभव और शिक्षा के क्षेत्र से उनके जुड़ाव को देखते हुए संस्थान को उम्मीद है कि उनके मार्गदर्शन से आने वाले समय में शैक्षणिक गतिविधियों को और व्यापक बनाया जा सकेगा।
इस अवसर पर पटना स्थित ज्ञान भवन में संस्थान का 48वां वार्षिक समारोह आयोजित किया गया। समारोह में संस्थान के मंडल के सदस्यों के अलावा शिक्षाविदों, पदाधिकारियों, शिक्षकों और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

48वें वार्षिक समारोह में जुटे शिक्षाविद और गणमान्य लोग
आईआईबीएम एवं जाकिर हुसैन शिक्षण संस्थान समूह के 48वें वार्षिक समारोह में संस्थान की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान शिक्षा के बदलते स्वरूप, विद्यार्थियों की आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों को ध्यान में रखते हुए संस्थान के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर विचार किया गया।
समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा देने की जरूरत है, जिसमें उन्हें विषयगत ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, तकनीकी दक्षता और रोजगार के लिए आवश्यक कौशल भी प्राप्त हो।
इसी सोच को ध्यान में रखते हुए संस्थान ने आने वाले समय में नए व्यावसायिक और रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है।
खुसरूपुर में बनेगा एकीकृत शैक्षणिक परिसर
वार्षिक समारोह से पहले आयोजित बैठक में पटना के खुसरूपुर में एक एकीकृत शैक्षणिक परिसर विकसित करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। संस्थान के अनुसार, इस परिसर के निर्माण की दिशा में शीघ्र आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
प्रस्तावित परिसर में विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक, तकनीकी और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने की योजना है। संस्थान का उद्देश्य ऐसा शैक्षणिक वातावरण तैयार करना है, जहां विद्यार्थियों को एक ही परिसर में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े शिक्षा और कौशल विकास के अवसर मिल सकें।
नए परिसर के माध्यम से शिक्षा को रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई पूरी करने के बाद अपने पसंदीदा क्षेत्र में करियर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल पर जोर
संस्थान की बैठक में शैक्षणिक विस्तार और गुणवत्ता के साथ विद्यार्थियों के व्यावहारिक कौशल विकास को प्राथमिकता देने पर विशेष चर्चा हुई। संस्थान का मानना है कि आज के प्रतिस्पर्धी दौर में विद्यार्थियों के लिए केवल डिग्री प्राप्त करना पर्याप्त नहीं है।
विद्यार्थियों को अपने विषय की जानकारी के साथ-साथ तकनीकी ज्ञान, संचार कौशल, समस्या समाधान की क्षमता और कार्यक्षेत्र की वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण मिलना जरूरी है।
इसी उद्देश्य से संस्थान की ओर से ऐसे पाठ्यक्रम विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, जिनमें कक्षा में मिलने वाली शिक्षा के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण को भी शामिल किया जाएगा।
पैरामेडिकल विज्ञान के नए पाठ्यक्रम होंगे शुरू
बैठक में संस्थान ने पैरामेडिकल विज्ञान से जुड़े पाठ्यक्रम शुरू करने का भी निर्णय लिया। स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार बढ़ती मांग को देखते हुए पैरामेडिकल शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए रोजगार का महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जा रहा है।
संस्थान की योजना विद्यार्थियों को इस क्षेत्र में आवश्यक शैक्षणिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है। प्रस्तावित पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में करियर के अवसर प्राप्त हो सकेंगे।
हालांकि, इन पाठ्यक्रमों की विस्तृत सूची, प्रवेश प्रक्रिया और संचालन से जुड़ी अन्य जानकारी संस्थान की ओर से आगे जारी की जाएगी।
नवाचार आधारित और रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों पर भी जोर
बैठक में पैरामेडिकल विज्ञान के अलावा नवाचार आधारित, कौशल विकास और रोजगारोन्मुखी नए पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी सहमति बनी। संस्थान का कहना है कि आज के समय में शिक्षा व्यवस्था को बदलती औद्योगिक और व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
इसी को ध्यान में रखते हुए नए पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक, व्यावहारिक प्रशिक्षण और उद्योग की जरूरतों से संबंधित कौशल प्रदान करने पर ध्यान दिया जाएगा।
संस्थान का उद्देश्य विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। इसके लिए पाठ्यक्रमों में समय के साथ आवश्यक बदलाव करने और नए विषयों को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है।
संस्थान के विस्तार पर हुई विस्तृत चर्चा
बैठक में संस्थान के विस्तार और भविष्य की विकास योजनाओं पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। इसमें नए शैक्षणिक कार्यक्रमों के साथ-साथ विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा की गुणवत्ता को लगातार मजबूत करने पर चर्चा हुई।
बोर्ड के सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि संस्थान का आगामी विकास केवल भवन और आधारभूत संरचना तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके साथ शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशिक्षित शिक्षक, आधुनिक पाठ्यक्रम और विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना भी समान रूप से महत्वपूर्ण है।
संस्थान का प्रयास होगा कि विद्यार्थियों को बदलते समय के अनुरूप शिक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे उच्च शिक्षा और रोजगार दोनों क्षेत्रों में बेहतर अवसर हासिल कर सकें।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और नवाचार बनेगा विकास का आधार
संस्थान के बोर्ड ने आगामी योजनाओं के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष जोर दिया है। इनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावसायिक कौशल, नवाचार और रोजगारपरक प्रशिक्षण शामिल हैं।
संस्थान के अनुसार, इन चारों क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़कर विद्यार्थियों के लिए बेहतर शैक्षणिक और करियर अवसर तैयार किए जा सकते हैं।
नई शिक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों को केवल परीक्षा आधारित ज्ञान देने के बजाय उनकी प्रतिभा और रुचि के अनुसार कौशल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे विद्यार्थी अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद नौकरी के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी आगे बढ़ सकेंगे।
Saryu Roy के अनुभव का मिलेगा संस्थान को लाभ
सरयू राय के मुख्य संरक्षक बनने के बाद संस्थान को उनके अनुभव और मार्गदर्शन का लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है। वे पटना साइंस कॉलेज से भौतिकी में एम.एससी. की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और सार्वजनिक जीवन में लंबे समय से सक्रिय हैं।
संस्थान का मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र से उनके पुराने जुड़ाव और सार्वजनिक जीवन के अनुभव से संस्थान की भविष्य की योजनाओं को दिशा देने में सहायता मिल सकती है।
मुख्य संरक्षक के रूप में उनकी भूमिका संस्थान के विकास, शैक्षणिक विस्तार और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों से जुड़ाव को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी पर जोर
संस्थान के महानिदेशक प्रो. रोहित सिंह ने कहा कि प्रतिष्ठित जनप्रतिनिधियों, पूर्व प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, शिक्षाविदों और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े लोगों की सहभागिता से संस्थान को भविष्य की योजनाओं के लिए व्यापक मार्गदर्शन मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि किसी भी शिक्षण संस्थान के विकास के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभवी लोगों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण होता है। इससे विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ वास्तविक कार्यक्षेत्र की जानकारी भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
संस्थान की कोशिश होगी कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शैक्षणिक गतिविधियों से जोड़ा जाए और विद्यार्थियों को उनके अनुभव का लाभ मिले।
रोजगार की बदलती जरूरतों के अनुरूप तैयार होंगे विद्यार्थी
वर्तमान समय में रोजगार के क्षेत्र तेजी से बदल रहे हैं। नई तकनीक, डिजिटल क्षेत्र, स्वास्थ्य सेवाएं और कौशल आधारित उद्योग युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को इन बदलावों के अनुरूप तैयार करना शिक्षण संस्थानों के सामने बड़ी चुनौती है।
आईआईबीएम एवं जाकिर हुसैन शिक्षण संस्थान समूह ने इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए रोजगारपरक और कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।
नए पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा देने की कोशिश की जाएगी, जिससे वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों का लाभ उठा सकें।
बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार की नई पहल
खुसरूपुर में प्रस्तावित एकीकृत शैक्षणिक परिसर और नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत को संस्थान के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे पटना और आसपास के क्षेत्रों के विद्यार्थियों को व्यावसायिक एवं रोजगारपरक शिक्षा के नए विकल्प उपलब्ध होने की उम्मीद है।
संस्थान का लक्ष्य आने वाले समय में शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है। इसके लिए नए पाठ्यक्रमों के साथ आधुनिक शैक्षणिक पद्धतियों को अपनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
बिहार और झारखंड के विद्यार्थियों को भी मिल सकता है लाभ
संस्थान की विस्तार योजनाओं का प्रभाव बिहार के साथ-साथ झारखंड के विद्यार्थियों पर भी पड़ सकता है। दोनों राज्यों के बीच शैक्षणिक और रोजगार के स्तर पर लंबे समय से आवागमन और जुड़ाव रहा है।
पटना में प्रस्तावित नए परिसर और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के शुरू होने से बिहार-झारखंड के विद्यार्थियों को अपने आसपास ही व्यावसायिक शिक्षा के अतिरिक्त विकल्प मिल सकते हैं।
संस्थान के नए शैक्षणिक कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावहारिक प्रशिक्षण और कौशल विकास का अवसर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
भविष्य की योजनाओं को लेकर संस्थान की तैयारी
48वें वार्षिक समारोह और बैठक के दौरान लिए गए निर्णयों से स्पष्ट है कि संस्थान आने वाले वर्षों में अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है। एकीकृत परिसर, पैरामेडिकल विज्ञान, कौशल विकास और नवाचार आधारित पाठ्यक्रम इस विस्तार के प्रमुख हिस्से होंगे।
संस्थान की ओर से कहा गया है कि आगामी विकास योजनाओं का केंद्र विद्यार्थी और उनकी जरूरतें होंगी। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ रोजगार के लिए जरूरी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना प्राथमिकता रहेगी।
Saryu Roy के मुख्य संरक्षक बनने के साथ संस्थान को उनके मार्गदर्शन और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की सहभागिता से अपनी आगामी योजनाओं को गति देने की उम्मीद है। खुसरूपुर में प्रस्तावित एकीकृत परिसर और नए रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम आने वाले समय में संस्थान के शैक्षणिक विस्तार की महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं।




















