जमशेदपुर: Karim सिटी कॉलेज, जमशेदपुर के स्नातकोत्तर (PG) रसायन विज्ञान विभाग की ओर से PG सेमेस्टर-III के विद्यार्थियों के लिए विभागीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह शैक्षणिक कार्यक्रम 1 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे रसायन विज्ञान विभाग के सभागार में आयोजित हुआ। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान के आधुनिक प्रयोगों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी देना था।
कार्यक्रम में विभाग के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संगोष्ठी के दौरान विभिन्न वैज्ञानिक और पर्यावरणीय विषयों पर चर्चा की गई तथा विद्यार्थियों को अपने विचार और शोधपरक प्रस्तुतियां रखने का अवसर भी मिला।
संगोष्ठी का मुख्य विषय रहा ‘ग्रीन केमिस्ट्री और स्थिरता’
संगोष्ठी का केंद्रीय विषय “ग्रीन केमिस्ट्री और स्थिरता” रहा। इसके साथ ही औषधीय पौधे, जल गुणवत्ता सूचकांक तथा मृदा प्रदूषण एवं उपचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी चर्चा में शामिल किया गया।

आज के समय में पर्यावरण प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों के लगातार हो रहे दोहन के बीच ग्रीन केमिस्ट्री का महत्व काफी बढ़ गया है। रसायन विज्ञान के क्षेत्र में ऐसी तकनीकों और प्रक्रियाओं को विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है, जिनसे पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे और संसाधनों का बेहतर एवं सुरक्षित उपयोग हो सके।
संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि वैज्ञानिक विकास के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को समझना भी आवश्यक है।
मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए डॉ. राजेश कुमार
कार्यक्रम में जमशेदपुर सह-ऑपरेटिव कॉलेज के स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार बतौर अतिथि वक्ता शामिल हुए। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ विभिन्न वैज्ञानिक और पर्यावरणीय विषयों पर अपने विचार साझा किए।
डॉ. राजेश कुमार ने ग्रीन केमिस्ट्री के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आधुनिक वैज्ञानिक प्रक्रियाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सतत वैज्ञानिक प्रथाओं, पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके समाधान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विद्यार्थियों को जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को समझाया।
सतत विकास पर विद्यार्थियों को किया जागरूक
संगोष्ठी के दौरान सतत विकास (Sustainability) को भी प्रमुख विषय के रूप में रखा गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि विकास की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित हो।
रसायन विज्ञान के क्षेत्र में सतत विकास का विशेष महत्व है। औद्योगिक प्रक्रियाओं, प्रयोगशालाओं और विभिन्न रासायनिक गतिविधियों में पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए सुरक्षित और प्रभावी तकनीकों को अपनाना आवश्यक है।
विद्यार्थियों को इस दिशा में शोध और नवाचार की संभावनाओं से भी परिचित कराया गया।
औषधीय पौधों के महत्व पर चर्चा
संगोष्ठी में औषधीय पौधों (Medicinal Plants) के महत्व पर भी चर्चा की गई। भारत में सदियों से विभिन्न पौधों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में किया जाता रहा है।
औषधीय पौधों में पाए जाने वाले विभिन्न प्राकृतिक रासायनिक तत्वों का वैज्ञानिक अध्ययन आज भी शोध का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। विद्यार्थियों को इस विषय के वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ उनके वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देना भी आवश्यक है।
जल गुणवत्ता सूचकांक पर विशेष जानकारी
कार्यक्रम में Water Quality Index यानी जल गुणवत्ता सूचकांक को भी चर्चा का विषय बनाया गया। विद्यार्थियों को जल की गुणवत्ता का आकलन करने तथा जल में मौजूद विभिन्न रासायनिक एवं भौतिक तत्वों के महत्व के बारे में जानकारी दी गई।
वर्तमान समय में जल प्रदूषण एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है। औद्योगिक कचरे, घरेलू अपशिष्ट और अन्य प्रदूषक तत्वों के कारण कई क्षेत्रों में जल की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
ऐसे में जल की गुणवत्ता की नियमित जांच और उसके वैज्ञानिक मूल्यांकन की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। विद्यार्थियों को जल संरक्षण और स्वच्छ जल के महत्व को भी समझाया गया।
मृदा प्रदूषण और उसके समाधान पर चर्चा
संगोष्ठी में मृदा प्रदूषण एवं उपचार (Soil Pollution and Remediation) भी प्रमुख विषय रहा। मिट्टी में रासायनिक पदार्थों, औद्योगिक अपशिष्ट और अन्य प्रदूषकों के जमा होने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित होती है।
मृदा प्रदूषण का प्रभाव केवल कृषि पर ही नहीं, बल्कि पर्यावरण, जल स्रोतों और मानव जीवन पर भी पड़ सकता है। इसलिए प्रदूषित मिट्टी की पहचान, उसके कारणों का अध्ययन और वैज्ञानिक उपचार बेहद आवश्यक है।
विद्यार्थियों को मृदा प्रदूषण को कम करने तथा प्रदूषित भूमि के पुनर्वास से संबंधित वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
संगोष्ठी की एक महत्वपूर्ण विशेषता विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम में कई छात्र-छात्राओं ने अपने शोध सारांश (Abstract) पहले ही विभाग में जमा कराए थे। इसके बाद उन्होंने निर्धारित विषयों पर अपने शोध पत्र और प्रस्तुतियां दीं।
इस प्रकार की गतिविधियों से विद्यार्थियों में शोध के प्रति रुचि विकसित होती है। साथ ही उन्हें किसी वैज्ञानिक विषय को समझने, उसका अध्ययन करने और उसे दूसरों के सामने प्रस्तुत करने का व्यावहारिक अनुभव भी मिलता है।
विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी प्रस्तुतियां देकर अपनी शैक्षणिक एवं शोध क्षमता का प्रदर्शन किया।
सेमेस्टर-III के विद्यार्थियों की उपस्थिति रही अनिवार्य
करीम सिटी कॉलेज के स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. खुर्शीद अनवर खान ने सेमेस्टर-III के सभी विद्यार्थियों की संगोष्ठी में उपस्थिति को अनिवार्य किया था।
उन्होंने विद्यार्थियों के लिए ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया। विभाग का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित शिक्षा देने के बजाय उन्हें आधुनिक वैज्ञानिक विषयों, शोध और व्यावहारिक ज्ञान से भी जोड़ना है।
संगोष्ठी में विद्यार्थियों की भागीदारी से यह भी स्पष्ट हुआ कि वे अपने विषय से जुड़े समसामयिक मुद्दों को समझने में रुचि रखते हैं।
शिक्षण के साथ व्यावहारिक ज्ञान पर जोर
विभागीय संगोष्ठी का एक प्रमुख उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा में पढ़ाए जाने वाले विषयों के साथ व्यावहारिक एवं शोधपरक ज्ञान से जोड़ना था।
रसायन विज्ञान एक ऐसा विषय है, जिसका संबंध पर्यावरण, चिकित्सा, कृषि, उद्योग और दैनिक जीवन के अनेक क्षेत्रों से है। इसलिए विद्यार्थियों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने विषय को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उसके व्यावहारिक उपयोग को भी समझें।
ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को नई जानकारी हासिल करने और वैज्ञानिक सोच विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं।
प्रश्नोत्तर सत्र ने बढ़ाई सहभागिता
संगोष्ठी के अंत में इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों ने वक्ता से विभिन्न विषयों से संबंधित सवाल पूछे और अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया।
प्रश्नोत्तर सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक संवादात्मक बनाया। विद्यार्थियों को अपनी शंकाएं सीधे विशेषज्ञ के सामने रखने का अवसर मिला।
इससे उन्हें विषयों को गहराई से समझने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद मिली।
पर्यावरणीय चुनौतियों को समझने का मिला अवसर
आज दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जल संकट, मृदा क्षरण और प्राकृतिक संसाधनों की कमी जैसी अनेक चुनौतियों का सामना कर रही है। ऐसे समय में विज्ञान के विद्यार्थियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
ग्रीन केमिस्ट्री जैसे विषय विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर देते हैं कि वैज्ञानिक प्रगति और पर्यावरण संरक्षण को एक साथ कैसे आगे बढ़ाया जा सकता है।
करीम सिटी कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी इसी दिशा में विद्यार्थियों को जागरूक करने की एक महत्वपूर्ण पहल रही।
डॉ. अली जान हुसैन रहे कार्यक्रम के कन्वीनर
इस विभागीय संगोष्ठी के कन्वीनर डॉ. अली जान हुसैन, सहायक प्राध्यापक, रहे। उनके मार्गदर्शन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विभाग के शिक्षकों और विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। संगोष्ठी के दौरान शैक्षणिक वातावरण के साथ विद्यार्थियों को संवाद और शोध प्रस्तुति का अवसर मिला।
विद्यार्थियों के लिए रहा ज्ञानवर्धक कार्यक्रम
पूरी संगोष्ठी विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक और उपयोगी रही। ग्रीन केमिस्ट्री, सतत विकास, औषधीय पौधे, जल गुणवत्ता तथा मृदा प्रदूषण जैसे विषयों ने विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान के व्यापक प्रभावों को समझने का अवसर दिया।
विशेषज्ञ वक्ता द्वारा साझा की गई जानकारी और विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत किए गए शोध पत्रों ने कार्यक्रम को शैक्षणिक रूप से महत्वपूर्ण बनाया।
वैज्ञानिक सोच और शोध को बढ़ावा देने की पहल
करीम सिटी कॉलेज का रसायन विज्ञान विभाग विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ शोध और व्यावहारिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। विभागीय संगोष्ठी इसी प्रयास का हिस्सा रही।
इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों को अपने विषय से जुड़े नए क्षेत्रों को समझने, शोध की संभावनाओं को पहचानने और वैज्ञानिक समस्याओं के समाधान की दिशा में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं।
Karim सिटी कॉलेज, जमशेदपुर के स्नातकोत्तर रसायन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित विभागीय संगोष्ठी ने विद्यार्थियों को ग्रीन केमिस्ट्री, स्थिरता, औषधीय पौधों, जल गुणवत्ता सूचकांक तथा मृदा प्रदूषण एवं उपचार जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जोड़ने का काम किया।
अतिथि वक्ता डॉ. राजेश कुमार के व्याख्यान, विद्यार्थियों की शोध प्रस्तुतियों और प्रश्नोत्तर सत्र ने कार्यक्रम को प्रभावी और ज्ञानवर्धक बनाया। कार्यक्रम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि रसायन विज्ञान केवल प्रयोगशाला और पुस्तकों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
कन्वीनर डॉ. अली जान हुसैन तथा रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. खुर्शीद अनवर खान के मार्गदर्शन में आयोजित यह संगोष्ठी विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, शोध रुचि और वैज्ञानिक सोच को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक पहल रही।




















