जमशेदपुर: राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान NIT जमशेदपुर में सोमवार को हिंदी दिवस के अवसर पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान में सितंबर माह को हिंदी माह के रूप में मनाए जाने के क्रम में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और विद्यार्थी उत्साहपूर्वक शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्थान के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग को प्रोत्साहित करना तथा तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी और भारतीय भाषाओं की भूमिका को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान हिंदी की उपयोगिता, इसकी व्यापकता और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के क्षेत्र में इसके बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी केवल बातचीत और अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, नवाचार, प्रशासन और सामाजिक जुड़ाव की प्रभावी भाषा भी बन सकती है। इसके लिए आवश्यकता है कि हिंदी का प्रयोग दैनिक जीवन के साथ-साथ शैक्षणिक और व्यावसायिक कार्यों में भी बढ़ाया जाए।
भारत सरकार के शिक्षा मंत्री का हिंदी दिवस संदेश पढ़कर सुनाया गया
कार्यक्रम में भारत सरकार के माननीय शिक्षा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी का हिंदी दिवस संदेश पढ़कर सुनाया गया। अपने संदेश में उन्होंने हिंदी को भारत की सांस्कृतिक विरासत, राष्ट्रीय अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति बताया।

उन्होंने कहा कि हिंदी भारत की विविध भाषायी और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच संवाद स्थापित करने वाली महत्वपूर्ण भाषा है। देश के अलग-अलग क्षेत्रों, समुदायों और वर्गों के लोगों को जोड़ने में हिंदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सरलता, व्यापकता और आत्मीयता हिंदी की ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने वाली भाषा बनाती हैं।
शिक्षा मंत्री ने अपने संदेश में इस बात पर जोर दिया कि हिंदी को केवल साहित्य और सामान्य संवाद तक सीमित रखने के बजाय इसे आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
प्रशासन से लेकर तकनीक तक हिंदी के प्रयोग पर जोर
श्री प्रल्हाद जोशी ने अपने संदेश में कहा कि हिंदी प्रशासन, शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जनसंपर्क के प्रभावी माध्यम के रूप में अपनी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ देश की अन्य भारतीय भाषाओं को भी प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि आज भारत तेजी से तकनीकी और आर्थिक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में ज्ञान और नवाचार को देश के अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए भारतीय भाषाओं का प्रयोग जरूरी है। यदि तकनीकी ज्ञान और वैज्ञानिक उपलब्धियों को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाया जाए, तो इसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग को मिल सकता है।
विकसित भारत-2047 के संकल्प में भारतीय भाषाओं की भूमिका
शिक्षा मंत्री ने विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में हिंदी सहित भारतीय भाषाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए शिक्षा, तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि हिंदी में कार्य करना केवल संवैधानिक दायित्व नहीं है, बल्कि यह अपनी भाषायी विरासत के प्रति सम्मान, सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भागीदारी का प्रतीक भी है।
उन्होंने सभी से आह्वान किया कि हिंदी को ज्ञान, नवाचार, सुशासन और विकसित भारत के संकल्प की सशक्त भाषा बनाने के लिए मिलकर प्रयास किया जाए। उन्होंने कहा कि हिंदी को इन क्षेत्रों में प्रभावी भाषा बनाना ही हिंदी दिवस के आयोजन की वास्तविक सार्थकता होगी।
अपने संदेश के अंत में उन्होंने सभी को हिंदी दिवस की शुभकामनाएं दीं और ‘जय हिंद’ के साथ अपना संदेश समाप्त किया।
निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार का संदेश भी हुआ प्रस्तुत
कार्यक्रम में NIT जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार का संदेश भी प्रस्तुत किया गया। उन्होंने हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ भारत की बहुभाषी और समावेशी संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि भारत की भाषायी विविधता देश की ताकत है। हिंदी का विकास अन्य भारतीय भाषाओं के सम्मान और संरक्षण के साथ होना चाहिए। उन्होंने संस्थान के शिक्षक, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को शैक्षणिक, प्रशासनिक तथा व्यावसायिक कार्यों में हिंदी का अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
निदेशक के संदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि तकनीकी संस्थानों में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देने से विद्यार्थियों और समाज के बीच ज्ञान का बेहतर प्रसार संभव है। तकनीकी शिक्षा को स्थानीय और सरल भाषाओं से जोड़ना शिक्षा की पहुंच को और व्यापक बना सकता है।
हिंदी समिति के अध्यक्ष ने हिंदी माह के उद्देश्यों पर डाला प्रकाश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिंदी समिति के अध्यक्ष प्रो. निरंजन कुमार ने हिंदी दिवस के महत्व और हिंदी माह के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के विचार, भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने का माध्यम है।
उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ हिंदी के स्वरूप और प्रयोग के क्षेत्र भी व्यापक हुए हैं। डिजिटल माध्यम, तकनीकी शिक्षा, सोशल मीडिया और आधुनिक संचार के दौर में हिंदी की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है।
प्रो. निरंजन कुमार ने कहा कि संस्थान में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए केवल औपचारिक कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थियों को अपने दैनिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग बढ़ाना होगा।
उन्होंने सभी से अपील की कि वे कार्यालयीन कार्य, पत्राचार, नोटिंग, कार्यक्रमों और अन्य आवश्यक गतिविधियों में हिंदी के प्रयोग को प्राथमिकता दें। इससे हिंदी के प्रति व्यवहारिक दृष्टिकोण विकसित होगा और हिंदी माह का उद्देश्य भी सार्थक होगा।
हिंदी में कार्य करने के लिए दिलाई गई शपथ
हिंदी दिवस कार्यक्रम के दौरान हिंदी शपथ ग्रहण समारोह का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित शिक्षक, गैर-शिक्षण कर्मचारी और विद्यार्थियों ने हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग तथा इसके प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
शपथ के माध्यम से प्रतिभागियों ने संस्थान के विभिन्न कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने और हिंदी को सम्मानजनक स्थान दिलाने की दिशा में योगदान देने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने माना कि किसी भी भाषा को मजबूत बनाने के लिए उसके व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ाना आवश्यक है। केवल हिंदी दिवस के दिन हिंदी के प्रति जागरूकता व्यक्त करने के बजाय पूरे वर्ष इसके प्रयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है।
तकनीकी शिक्षा में हिंदी के विस्तार की जरूरत
एनआईटी जमशेदपुर जैसे तकनीकी शिक्षण संस्थान में हिंदी दिवस का आयोजन विशेष महत्व रखता है। देश में तकनीकी शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों और आम लोगों तक तकनीकी जानकारी को उनकी सहज भाषा में पहुंचाने की दिशा में हिंदी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि विज्ञान और तकनीक से जुड़े विषयों को भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराने से विद्यार्थियों को जटिल विषयों को समझने में मदद मिल सकती है। साथ ही शोध और नवाचार से जुड़ी उपलब्धियों को आम समाज तक पहुंचाने में भी भारतीय भाषाओं का प्रभावी उपयोग किया जा सकता है।
युवाओं में हिंदी के प्रति बढ़े रुचि
कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि युवा पीढ़ी आधुनिक तकनीक और डिजिटल माध्यमों से सबसे अधिक जुड़ी हुई है। ऐसे में हिंदी को डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अनुसंधान और नवाचार से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
यदि युवा तकनीकी ज्ञान के साथ हिंदी में लेखन, शोध और संवाद को भी बढ़ावा देते हैं, तो इससे हिंदी का दायरा और व्यापक हो सकता है। विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा और अन्य भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान के साथ हिंदी का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में डॉ. रजत त्रिपाठी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने हिंदी दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले संस्थान के सभी शिक्षक, कर्मचारियों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि हिंदी दिवस केवल एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि यह हिंदी के निरंतर प्रयोग और प्रचार-प्रसार का संकल्प लेने का अवसर है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि वे वर्षभर अपने कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा दें।
हिंदी दिवस ने दिया भारतीय भाषाओं को मजबूत बनाने का संदेश
NIT जमशेदपुर में आयोजित हिंदी दिवस कार्यक्रम ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ तकनीकी एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय भाषाओं की भूमिका को मजबूत करने का संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान यह विचार प्रमुखता से सामने आया कि हिंदी को केवल संवाद की भाषा न मानकर ज्ञान, विज्ञान, तकनीक, नवाचार और सुशासन की भाषा के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है।
हिंदी दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने संस्थान के शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों को हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के लिए प्रेरित किया। साथ ही विकसित भारत-2047 के निर्माण में भारतीय भाषाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए यह संदेश दिया गया कि भाषा को शिक्षा, तकनीक और नवाचार से जोड़कर ही उसके वास्तविक सामर्थ्य का उपयोग किया जा सकता है।




















