चाईबासा: देश में बेरोजगारी को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सेतु बिहार आईटीआई के निदेशक Dr. Parmanand Modi ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि देश के किसी भी राज्य, जिले, कस्बे या मोहल्ले में यदि कोई युवक या युवती स्वयं को बेरोजगार महसूस कर रहा है, तो उसे आगे आकर संपर्क करना चाहिए। उनके अनुसार, इस पहल का उद्देश्य युवाओं तक पहुंचना और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना है।
Dr. Parmanand Modi ने अपने संदेश में कहा कि देश में बेरोजगारी नहीं होने के नारे को सार्थक बनाने के लिए समाज के लोगों को मिलकर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने परिवार, आसपास और समाज में ऐसे युवाओं की पहचान करें, जो रोजगार की तलाश में हैं या अपने पैरों पर खड़ा होना चाहते हैं। उन्होंने इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की भी अपील की, ताकि रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़ी पहल का दायरा बढ़ाया जा सके।
देश में बेरोजगारी नहीं है’ के नारे को सार्थक बनाने की अपील
Dr. Parmanand Modi ने अपने संदेश की शुरुआत ‘मित्रों नमस्कार’ से करते हुए लोगों से सीधे संवाद किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी के परिवार या समाज में कोई बच्चा, युवक या युवती बेरोजगार है, तो उसके बारे में जानकारी साझा की जाए, ताकि उसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास किया जा सके।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि युवाओं को केवल रोजगार की तलाश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उपलब्ध अवसरों की जानकारी प्राप्त कर अपने कौशल और क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में भी प्रयास करना चाहिए।
उनके संदेश में रोजगार के सवाल को सामाजिक भागीदारी से जोड़ने का प्रयास किया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस पहल को सकारात्मक नजरिए से देखें और जरूरतमंद युवाओं तक इसकी जानकारी पहुंचाएं।
हालांकि, ‘देश में बेरोजगारी नहीं है’ उनका नारा और संदेश है। इसे देश में बेरोजगारी की वास्तविक स्थिति का प्रमाण नहीं माना जा सकता। बेरोजगारी की स्थिति का आकलन करने के लिए आधिकारिक रोजगार संबंधी आंकड़ों और सर्वेक्षणों को देखना आवश्यक होता है।
चाईबासा में आदिवासी समाज के युवाओं ने लिया आत्मनिर्भर बनने का संकल्प
Dr. Parmanand Modi ने अपने संदेश में चाईबासा जिले के आदिवासी समाज के युवाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां के कई युवाओं ने आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया है। उन्होंने इसे युवाओं में आगे बढ़ने और अपने भविष्य के लिए प्रयास करने की भावना से जोड़कर प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए। इसके लिए शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण, कौशल विकास और रोजगार से जुड़े अवसरों की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
आत्मनिर्भर बनने का संकल्प युवाओं को अपनी क्षमताओं को पहचानने और भविष्य की योजनाओं पर काम करने के लिए प्रेरित कर सकता है। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कौशल विकास तथा रोजगार संबंधी जानकारी तक पहुंच युवाओं के लिए उपयोगी हो सकती है।
डॉ. मोदी ने अपने संदेश के माध्यम से इस तरह की पहल को व्यापक स्तर पर पहुंचाने का आह्वान किया, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों के युवा भी आत्मनिर्भरता के प्रयासों से जुड़ सकें।
कार्यक्रम में कई लोगों की उपस्थिति का किया उल्लेख
अपने संदेश में डॉ. परमानंद मोदी ने चाईबासा में आत्मनिर्भरता के संकल्प से जुड़ी पहल के दौरान उपस्थित लोगों के नाम भी साझा किए।
उन्होंने सावन हसदा, राम सिंह समर, मगीलाल गिलवा, हरि समर, राकेश गिलुआ, बीरेंद्र शाह, रतन समद और हरि सांभर सहित अन्य लोगों का उल्लेख किया।
इन नामों के माध्यम से उन्होंने यह बताने का प्रयास किया कि आत्मनिर्भरता के संदेश को आगे बढ़ाने में स्थानीय लोगों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। युवाओं को प्रेरित करने और उन्हें अवसरों के प्रति जागरूक बनाने में सामाजिक सहयोग की भूमिका हो सकती है।
हालांकि, उपलब्ध संदेश में इस पहल के तहत युवाओं को उपलब्ध कराए जाने वाले रोजगार, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता या नियुक्ति संबंधी किसी विशिष्ट कार्यक्रम का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
निजी शिक्षकों और नौजवानों तक संदेश पहुंचाने की अपील
डॉ. परमानंद मोदी ने अपने संदेश में देश के करोड़ों निजी शिक्षकों और नौजवानों का उल्लेख करते हुए लोगों से अपील की कि वे इस पहल को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।
उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से संदेश को शेयर करने, लाइक करने और फॉलो करने का आग्रह किया। उनका उद्देश्य बताया गया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले बेरोजगार युवक-युवतियों तक यह संदेश पहुंच सके।
सोशल मीडिया आज रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास से जुड़ी जानकारी साझा करने का एक माध्यम है। इसके जरिए किसी पहल की जानकारी दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाई जा सकती है। हालांकि, केवल संदेश साझा करने से रोजगार सुनिश्चित नहीं होता। युवाओं को वास्तविक अवसरों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और रोजगार संबंधी सेवाओं से जोड़ना भी जरूरी है।
डॉ. मोदी की अपील इसी व्यापक संवाद की दिशा में युवाओं और समाज के लोगों को जोड़ने का प्रयास है।
युवाओं के लिए कौशल विकास और आत्मनिर्भरता का महत्व
रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के कई रास्ते हो सकते हैं। तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, स्वरोजगार, उद्यमिता और उपलब्ध नौकरियों की जानकारी इनमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आईटीआई जैसे तकनीकी प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से युवाओं को विभिन्न व्यवसायों से जुड़े कौशल सीखने का अवसर मिल सकता है। प्रशिक्षण के बाद संबंधित क्षेत्र में नौकरी तलाशना, अप्रेंटिसशिप करना या अपनी योग्यता के अनुसार स्वरोजगार शुरू करना संभावित विकल्प हो सकते हैं।
चाईबासा और आसपास के क्षेत्रों के युवाओं के लिए भी कौशल विकास और रोजगार संबंधी सही जानकारी उपयोगी हो सकती है। इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों, रोजगार कार्यालयों और अन्य आधिकारिक माध्यमों से जानकारी प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।
युवाओं को किसी भी रोजगार या प्रशिक्षण योजना से जुड़ने से पहले उसकी पात्रता, शर्तों और उपलब्ध अवसरों की पुष्टि करनी चाहिए। इससे वे अपने भविष्य के लिए बेहतर जानकारी के आधार पर निर्णय ले सकते हैं।
हर बेरोजगार युवा तक पहुंचे संदेश डॉ. मोदी ने किया आह्वान
Dr. Parmanand Modi ने अंत में लोगों से अपील की कि वे इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में सहयोग करें। उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज के लोग इस पहल को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखेंगे और बेरोजगार युवाओं तथा युवतियों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में मदद करेंगे।
उनका कहना है कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना जरूरी है। समाज के लोगों की भागीदारी से रोजगार और कौशल विकास से जुड़ी जानकारी साझा करने का दायरा बढ़ाया जा सकता है।
चाईबासा के युवाओं द्वारा आत्मनिर्भर बनने का संकल्प और डॉ. परमानंद मोदी की अपील इस बात पर केंद्रित है कि युवा अपने भविष्य के लिए सक्रिय प्रयास करें तथा समाज भी उनके प्रयासों में सहयोग दे।
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