जमशेदपुर: जमशेदपुर के बागबेड़ा स्थित हरहरगुट्टू कृष्णापुरी निवासी 12 वर्षीय Prateek Kumar सुनने और बोलने में असमर्थ प्रतीक ने घर में मोबाइल के माध्यम से शतरंज खेलना सीखा और अपनी प्रतिभा के दम पर झारखंड राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया। उनकी इस उपलब्धि पर जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाकर सम्मानित किया और आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

1 अक्टूबर को आयोजित इस सम्मान कार्यक्रम में सांसद ने प्रतीक कुमार को मिठाई खिलाकर उनकी उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ने के लिए उचित अवसर, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिलना चाहिए। प्रतीक की शतरंज में रुचि और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में भी पहल की गई। इस अवसर पर प्रतीक के पिता प्रभात कुमार, जिला भाजपा नेता सुबोध झा तथा अन्य लोग उपस्थित रहे।

मोबाइल से शतरंज सीखकर हासिल किया राज्य स्तर पर प्रथम स्थान

Prateek Kumar की सफलता की कहानी उनकी मेहनत और सीखने की इच्छाशक्ति को दर्शाती है। उनके पिता प्रभात कुमार ने जिला भाजपा नेता सुबोध झा को बताया कि प्रतीक सुन और बोल नहीं सकते हैं। इसके बावजूद उन्होंने शतरंज सीखने में रुचि दिखाई और घर में मोबाइल फोन की मदद से इस खेल को समझना शुरू किया।

प्रतीक ने किसी बड़े प्रशिक्षण केंद्र में शुरुआती शिक्षा प्राप्त करने के बजाय स्वयं अभ्यास करते हुए शतरंज की बारीकियां सीखीं। धीरे-धीरे इस खेल में उनकी रुचि बढ़ती गई और उन्होंने विभिन्न शतरंज प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया। इन प्रतियोगिताओं में उन्होंने पुरस्कार भी प्राप्त किए।

उनकी मेहनत का परिणाम तब सामने आया, जब उनका चयन झारखंड राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता के लिए हुआ। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उन्हें रांची बुलाया गया। वहां प्रतीक ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करते हुए प्रथम पुरस्कार हासिल किया और राज्य स्तर पर शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

प्रतीक की यह उपलब्धि उनके परिवार के लिए गर्व का विषय बनी। सीमित संसाधनों के बीच मोबाइल से शतरंज सीखकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में सफलता प्राप्त करना उनकी लगन और निरंतर अभ्यास को दर्शाता है।

सांसद विद्युत वरण महतो ने मिठाई खिलाकर किया सम्मानित

प्रतीक कुमार की उपलब्धि की जानकारी मिलने के बाद सांसद विद्युत वरण महतो ने उन्हें अपने कार्यालय में आमंत्रित किया। वहां उन्होंने प्रतीक को मिठाई खिलाकर सम्मानित किया और उनकी सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त की।

सांसद ने प्रतीक को भविष्य में भी शतरंज के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे की प्रतिभा को निखारने के लिए सही प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

इस दौरान प्रतीक की खेल संबंधी आवश्यकताओं पर भी चर्चा हुई। उद्देश्य यह था कि उन्हें ऐसा प्रशिक्षण मिल सके, जिससे वे अपनी खेल क्षमता को और बेहतर बना सकें तथा भविष्य की प्रतियोगिताओं में अधिक तैयारी के साथ भाग ले सकें।

प्रतीक की उपलब्धि ने यह भी रेखांकित किया कि दिव्यांग बच्चों को खेलों में भाग लेने और अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। उचित सहयोग मिलने पर वे विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना सकते हैं।

बेहतर प्रशिक्षण के लिए राहुल मित्रा को दी जिम्मेदारी

प्रतीक कुमार की शतरंज प्रतिभा को देखते हुए सांसद विद्युत वरण महतो ने उन्हें बेहतर प्रशिक्षण दिलाने की दिशा में पहल की। इसके तहत राहुल मित्रा को प्रतीक को शतरंज सिखाने और उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था में सहयोग करने की जिम्मेदारी दी गई।

बेहतर प्रशिक्षण मिलने से प्रतीक को खेल की तकनीकी बारीकियों, रणनीति निर्माण और प्रतियोगिताओं की तैयारी में मदद मिल सकती है। शतरंज में लगातार अभ्यास, सही मार्गदर्शन और प्रतिद्वंद्वी की चालों को समझने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अनुभवी प्रशिक्षक के मार्गदर्शन से उनके खेल में सुधार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

प्रतीक ने अब तक मुख्य रूप से मोबाइल के माध्यम से शतरंज सीखा है। ऐसे में व्यवस्थित प्रशिक्षण उनके लिए सीखने का अगला महत्वपूर्ण चरण हो सकता है। इससे उन्हें अपनी कमजोरियों को पहचानने, नई रणनीतियां सीखने और उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी करने में सहायता मिलेगी।

टाटा फाउंडेशन और सीएसआर के माध्यम से सहयोग की पहल

सांसद विद्युत वरण महतो ने टाटा फाउंडेशन एवं सीएसआर से जुड़े प्रमुख सौरव कुमार से भी प्रतीक कुमार को बेहतर प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए कहा। इस पहल का उद्देश्य प्रतीक को शतरंज के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सुविधाओं से जोड़ना है।

खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में प्रशिक्षण, अभ्यास की सुविधा, प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर और आर्थिक सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विशेष रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए उनकी जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण व्यवस्था उपलब्ध होना उपयोगी होता है।

प्रतीक के मामले में भी बेहतर प्रशिक्षण और सहयोग से उन्हें आगामी प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, टाटा फाउंडेशन या सीएसआर की ओर से सहयोग की औपचारिक स्वीकृति अथवा प्रशिक्षण व्यवस्था शुरू होने की अलग से पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए भी हुआ चयन

झारखंड राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने के बाद प्रतीक कुमार का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए भी हुआ। यह उनके खेल सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।

प्रतीक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल हुए और वहां कई दौर तक मुकाबले में हिस्सा लिया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह छठे राउंड में टीम से बाहर हो गए। हालांकि, राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता तक पहुंचना उनके लिए महत्वपूर्ण अनुभव रहा होगा, जिससे उन्हें उच्च स्तर के खिलाड़ियों के साथ खेलने और अपनी क्षमता को समझने का अवसर मिला।

राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार और राष्ट्रीय स्तर पर भागीदारी उनके खेल सफर की उल्लेखनीय उपलब्धियां हैं। अब बेहतर प्रशिक्षण के माध्यम से उनकी खेल क्षमता को और निखारने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही गई है।

प्रतीक के राज्य स्तरीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिता से संबंधित प्रमाणपत्र भी इस अवसर पर मौजूद थे। इन उपलब्धियों ने उनके परिवार और परिचितों के बीच खुशी का माहौल बनाया।

दिव्यांग बच्चों की प्रतिभा को अवसर देने की जरूरत

Prateek Kumar की कहानी समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। सुनने और बोलने में असमर्थ होने के बावजूद उन्होंने शतरंज में रुचि विकसित की, स्वयं अभ्यास किया और राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया।

ऐसे बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए परिवार, प्रशिक्षकों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और प्रशासन का सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। उचित प्रशिक्षण और सुविधाएं मिलने से दिव्यांग खिलाड़ी अपनी रुचि के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

खेल केवल प्रतियोगिता जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि इससे एकाग्रता, धैर्य, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास भी विकसित होता है। शतरंज जैसे खेल में खिलाड़ियों को हर चाल सोच-समझकर चलनी होती है। नियमित अभ्यास से इन क्षमताओं को और मजबूत किया जा सकता है।

प्रतीक की उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि प्रतिभा को पहचानकर सही दिशा में प्रोत्साहित करना जरूरी है। उनके लिए बेहतर प्रशिक्षण की पहल इसी दिशा में एक कदम है।

सम्मान कार्यक्रम में कई लोग रहे उपस्थित

Prateek Kumar को सम्मानित किए जाने के अवसर पर जिला भाजपा नेता सुबोध झा, सांसद प्रतिनिधि संजीव कुमार, जसवंत कुमार, राहुल मित्रा, प्रतीक के पिता प्रभात कुमार और सपन कुमार दास प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

सभी ने प्रतीक की उपलब्धि को सराहा और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में उनकी शतरंज यात्रा, राज्य स्तरीय सफलता और राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भागीदारी का उल्लेख किया गया।

सुबोध झा के अनुसार, प्रतीक की उपलब्धि अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन सकती है। उनकी सफलता बताती है कि रुचि, अभ्यास और उचित अवसर मिलने पर बच्चे अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ा सकते हैं।

मेहनत और लगन से आगे बढ़ने का संदेश

जमशेदपुर के 12 वर्षीय Prateek Kumar ने मोबाइल से शतरंज सीखकर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल किया और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अवसर प्राप्त किया। उनकी उपलब्धि को देखते हुए सांसद विद्युत वरण महतो ने उन्हें सम्मानित किया तथा बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की दिशा में पहल की।

अब प्रतीक के लिए अनुभवी प्रशिक्षक का मार्गदर्शन और जरूरी सुविधाएं उनके आगे के खेल सफर में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। यदि उन्हें निरंतर अभ्यास और प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर मिलते हैं, तो वे अपनी क्षमता को और विकसित कर सकते हैं।