आंध्र प्रदेश: चित्तूर जिले से एक बेहद सनसनीखेज और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है आरोप है कि एक महिला ने अपने पति की Murder के लिए पहले से पूरी साजिश रची। उसने मंदिर जाने के बहाने पति को अपने साथ ले गई, रास्ते भर अपने कथित प्रेमी को लाइव लोकेशन भेजती रही और सुनसान जगह पर जानबूझकर अपना हैंडबैग गिराकर पति को बाइक रोकने के लिए मजबूर किया। जैसे ही पति बाइक से उतरा, पहले से घात लगाए हमलावरों ने उस पर धारदार हथियारों से हमला कर उसकी हत्या कर दी।

पुलिस ने इस मामले में महिला, उसके कथित प्रेमी और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल लोकेशन की मदद से पुलिस ने कुछ ही घंटों में इस पूरी साजिश का खुलासा कर दिया।

मंदिर दर्शन का कार्यक्रम बना हत्या की साजिश

पुलिस के अनुसार, मृतक रमेश अपनी पत्नी हसिनी और छोटी बेटी के साथ भगवान श्री मल्लेश्वर स्वामी मंदिर में दर्शन करने जा रहा था। यह यात्रा सामान्य धार्मिक कार्यक्रम लग रही थी, लेकिन जांच में सामने आया कि यह पहले से तैयार की गई हत्या की योजना थी।

बताया जा रहा है कि हसिनी ने रास्ते में लगातार अपने प्रेमी युगंधर को लाइव लोकेशन भेजी, जिससे हमलावरों को दंपति की हर गतिविधि की जानकारी मिलती रही। इससे आरोपियों को सही समय और स्थान चुनने में आसानी हुई।

दो साल पहले हुई थी दोनों की शादी

मृतक रमेश की उम्र 23 वर्ष थी और वह तमिलनाडु के कृष्णगिरि जिले के सुलागिरी का रहने वाला था। करीब दो वर्ष पहले उसकी शादी आंध्र प्रदेश के शांतिपुरम मंडल के बोयानपल्ली गांव निवासी 19 वर्षीय हसिनी से हुई थी।

दोनों की एक छोटी बेटी भी है। रमेश होसुर स्थित एक निजी कंपनी में नौकरी करता था और परिवार के साथ सामान्य जीवन बिता रहा था।

शादी के बाद भी जारी रहा प्रेम संबंध

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि शादी के बाद भी हसिनी का अपने बचपन के मित्र युगंधर के साथ प्रेम संबंध बना रहा। दोनों अक्सर संपर्क में रहते थे और कथित तौर पर रमेश को अपने रास्ते से हटाने की योजना बना चुके थे।

जांच अधिकारियों का कहना है कि हत्या कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि पहले से सोची-समझी साजिश थी।

लाइव लोकेशन भेजकर करती रही हमलावरों की मदद

जांच के दौरान सामने आया कि मंदिर जाते समय हसिनी लगातार अपने मोबाइल फोन से प्रेमी युगंधर को लाइव लोकेशन भेज रही थी।

इससे हमलावर दंपति की हर गतिविधि पर नजर बनाए हुए थे और सही समय का इंतजार कर रहे थे।

पुलिस का मानना है कि यह डिजिटल सबूत इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुआ।

जानबूझकर गिराया अपना हैंडबैग

हत्या की योजना का सबसे अहम हिस्सा वह क्षण था जब पहाड़ी मार्ग के तीसरे हेयरपिन मोड़ के पास हसिनी ने कथित रूप से अपना हैंडबैग जानबूझकर सड़क पर गिरा दिया।

पति रमेश जैसे ही बैग उठाने के लिए बाइक रोककर नीचे उतरा, उसी समय पहले से छिपे युगंधर और उसके साथियों ने हमला कर दिया।

जंगल में दौड़ाकर की गई Murder

पुलिस के अनुसार, रमेश हमले के बाद अपनी जान बचाने के लिए लगभग 100 मीटर तक जंगल की ओर भागा।

लेकिन आरोपी उसका पीछा करते रहे और धारदार हथियारों से कई वार कर उसकी हत्या कर दी।

सबसे दुखद बात यह रही कि इस दौरान दंपति की छोटी बेटी भी घटनास्थल के आसपास मौजूद थी।

मां की शिकायत से खुला पूरा मामला

हत्या के बाद आरोपी महिला अपने प्रेमी और अन्य लोगों के साथ वहां से निकल गई।

जब देर रात तक हसिनी और उसकी बेटी घर नहीं पहुंचीं, तब उसकी मां ने पुलिस से संपर्क किया।

इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूरा मामला सामने आया।

सीसीटीवी फुटेज ने खोली साजिश की परतें

मंदिर मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए।

फुटेज में देखा गया कि रमेश अपनी पत्नी और बेटी के साथ मंदिर गया था।

लेकिन लौटते समय महिला दो अन्य युवकों के साथ उसी मोटरसाइकिल पर जाती दिखाई दी, जबकि रमेश उनके साथ नहीं था।

यहीं से पुलिस को शक हुआ और जांच की दिशा बदल गई।

मोबाइल लोकेशन और डिजिटल सबूत बने अहम कड़ी

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन रिकॉर्ड, कॉल डिटेल, लाइव लोकेशन डेटा और तकनीकी साक्ष्यों की जांच की।

इन डिजिटल सबूतों ने हत्या की पूरी साजिश को उजागर कर दिया।

इसके बाद पुलिस ने महिला, उसके कथित प्रेमी युगंधर और दो अन्य सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया।

बाल विवाह के एंगल की भी जांच

जांच के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि रमेश से शादी के समय हसिनी नाबालिग थी और नौवीं कक्षा में पढ़ती थी।

पुलिस अब इस दावे की भी जांच कर रही है। यदि यह सही पाया जाता है तो बाल विवाह निषेध कानून के तहत भी अलग से कार्रवाई की जा सकती है।

पुलिस कर रही है विस्तृत जांच

फिलहाल पुलिस हत्या की साजिश में शामिल सभी लोगों से पूछताछ कर रही है।

जांचकर्ता यह भी पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि हत्या की योजना कब बनाई गई, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने भी आरोपियों की मदद की।

डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

घटना ने खड़े किए कई गंभीर सवाल

यह घटना केवल एक हत्या का मामला नहीं बल्कि डिजिटल तकनीक के गलत उपयोग का भी उदाहरण बन गई है। लाइव लोकेशन जैसी सुविधा, जो सुरक्षा के लिए बनाई गई थी, उसका कथित रूप से अपराध को अंजाम देने में इस्तेमाल किया गया।

इस घटना ने पारिवारिक रिश्तों में विश्वास, डिजिटल सुरक्षा और अपराध की बदलती रणनीतियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आंध्र प्रदेश के चित्तूर में हुई यह घटना बेहद दुखद और चौंकाने वाली है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और डिजिटल तकनीक की मदद से हत्या की गुत्थी जल्दी सुलझ गई, लेकिन इस वारदात ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कितना खतरनाक हो सकता है। मामले की जांच अभी जारी है और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।