जमशेदपुर: डाक विभाग के सिंहभूम मंडल की ओर से बुधवार को Kerala पब्लिक स्कूल (KPS), बर्मामाइन्स में विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों एवं आम नागरिकों को डाक विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना तथा विशेष रूप से बचत योजनाओं, डाक जीवन बीमा (PLI) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) के प्रति जागरूक करना था।

जागरूकता कार्यक्रम में विद्यालय के कुल 104 शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भाग लिया। इस दौरान डाक विभाग के अधिकारियों ने योजनाओं से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी और प्रतिभागियों के सवालों का भी समाधान किया। अधिकारियों ने बताया कि डाक विभाग लंबे समय से देश के आम नागरिकों तक बचत, बीमा और वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन के माध्यम से दी गई जानकारी

कार्यक्रम के दौरान डाक विभाग के अधिकारियों ने ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन के माध्यम से डाक जीवन बीमा (PLI) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) की प्रमुख विशेषताओं को विस्तार से समझाया।

प्रेजेंटेशन के दौरान शिक्षकों को बताया गया कि डाक जीवन बीमा किस तरह काम करता है, इसके लिए पात्रता क्या है, प्रीमियम भुगतान की प्रक्रिया क्या है और पॉलिसीधारकों को किस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

अधिकारियों ने शिक्षकों को यह भी जानकारी दी कि डाक विभाग की बीमा सेवाओं का संचालन देशभर में फैले डाक नेटवर्क के माध्यम से किया जाता है। इससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक भी वित्तीय और बीमा सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

कम प्रीमियम और बोनस को बताया गया प्रमुख आकर्षण

कार्यक्रम में अधिकारियों ने डाक जीवन बीमा की विशेषताओं के बारे में बताते हुए कम प्रीमियम और बोनस से संबंधित जानकारी साझा की। अधिकारियों के अनुसार, डाक विभाग के बीमा उत्पादों के संचालन में एजेंट कमीशन और बड़े पैमाने पर विज्ञापन खर्च जैसी लागतों का प्रभाव अन्य मॉडलों की तुलना में अलग है।

उन्होंने बताया कि देशभर में मौजूद डाकघरों और कर्मचारियों के व्यापक नेटवर्क का उपयोग बीमा सेवाओं को संचालित करने के लिए किया जाता है। इससे प्रबंधन से संबंधित खर्च को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।

अधिकारियों ने बताया कि इससे होने वाली बचत का लाभ पॉलिसीधारकों तक बोनस के रूप में पहुंचाया जाता है। कार्यक्रम में लगभग 52 रुपये प्रति हजार तक बोनस की जानकारी भी साझा की गई। हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि वास्तविक लाभ संबंधित पॉलिसी की शर्तों और लागू नियमों पर निर्भर करता है।

डाक जीवन बीमा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान डाक जीवन बीमा के इतिहास के बारे में भी शिक्षकों को जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि डाक जीवन बीमा की शुरुआत 1 फरवरी 1884 को हुई थी।

इसके बाद डाक जीवन बीमा का विस्तार लगातार होता गया। अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 1894 में महिलाओं को बीमा कवरेज उपलब्ध कराने की दिशा में भी डाक विभाग ने महत्वपूर्ण पहल की थी। बाद में वर्ष 1995 से ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इस सेवा का विस्तार किया गया।

अधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से संचालित होने के कारण डाक जीवन बीमा का देश में एक ऐतिहासिक आधार है और समय के साथ इसकी सेवाओं में भी बदलाव किए गए हैं।

आयकर छूट और ऑनलाइन सुविधाओं की जानकारी

कार्यक्रम में शिक्षकों को डाक जीवन बीमा से जुड़ी विभिन्न सुविधाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि पात्र पॉलिसीधारकों को लागू नियमों के अनुसार आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत कर लाभ मिल सकता है।

इसके अलावा पॉलिसी को देश के किसी भी डाकघर में ट्रांसफर करने की सुविधा, ऑनलाइन प्रीमियम भुगतान और एडवांस प्रीमियम भुगतान पर उपलब्ध छूट जैसी सुविधाओं के बारे में भी बताया गया।

अधिकारियों ने शिक्षकों को यह भी जानकारी दी कि डाक जीवन बीमा की पात्रता अब केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले निजी संस्थानों के योग्य और डिग्रीधारी कर्मचारी भी उपलब्ध नियमों के अनुसार इस सुविधा का लाभ ले सकते हैं।

ग्रामीण डाक जीवन बीमा के बारे में भी दी जानकारी

कार्यक्रम में ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) पर भी विशेष चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जीवन बीमा की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से RPLI को शुरू किया गया था।

ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघरों का व्यापक नेटवर्क होने के कारण बीमा और बचत से जुड़ी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने में डाक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। शिक्षकों को बताया गया कि ग्रामीण परिवारों के बीच भी वित्तीय जागरूकता बढ़ाने में डाक विभाग की योजनाएं उपयोगी हो सकती हैं।

हर घर डाकघर की दिशा में बढ़ता डाक विभाग

मीडिया से बातचीत के दौरान डाक विभाग के अधिकारी ने कहा कि देशभर में 1.70 लाख से अधिक डाकघरों का नेटवर्क मौजूद है। उन्होंने बताया कि औसतन लगभग हर तीन किलोमीटर के दायरे में डाकघर की सुविधा उपलब्ध होने की बात विभाग की पहुंच को दर्शाती है।

अधिकारी ने कहा कि डाक विभाग का उद्देश्य केवल पत्र और पार्सल पहुंचाने तक सीमित नहीं है। समय के साथ डाकघरों के माध्यम से बचत, बीमा और अन्य वित्तीय सेवाएं भी लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि ‘हर घर डाकघर’ की सोच के तहत अधिक से अधिक लोगों को डाक विभाग की सेवाओं से जोड़ना महत्वपूर्ण है।

शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों और परिवारों तक पहुंचेगी जानकारी

डाक विभाग के अधिकारियों ने कहा कि स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य शिक्षकों के माध्यम से जानकारी को विद्यार्थियों और उनके परिवारों तक पहुंचाना भी है।

शिक्षक अपने विद्यार्थियों को डाक विभाग की बचत और बीमा योजनाओं के बारे में सामान्य जानकारी दे सकते हैं। इससे विद्यार्थियों के परिवारों तक भी वित्तीय जागरूकता का संदेश पहुंच सकता है।

अधिकारियों के अनुसार, आज के समय में वित्तीय योजना और बचत के प्रति जागरूकता आवश्यक है। ऐसे में स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान जागरूकता फैलाने के प्रभावी माध्यम बन सकते हैं।

स्कूल स्तर पर पहला जागरूकता कार्यक्रम

डाक विभाग के अधिकारी ने बताया कि स्कूल स्तर पर इस तरह का यह उनका पहला जागरूकता कार्यक्रम था। कार्यक्रम को मिली प्रतिक्रिया को देखते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन किए जाने की योजना है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस सहित शहर के अन्य सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों तथा प्रमुख संस्थानों में भी जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे।

इन कार्यक्रमों के माध्यम से डाक विभाग की बचत योजनाओं, बीमा सेवाओं और अन्य सुविधाओं के बारे में लोगों को सीधे जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा।

104 शिक्षकों की भागीदारी से कार्यक्रम सफल

केरला पब्लिक स्कूल, बर्मामाइन्स में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में 104 शिक्षक-शिक्षिकाओं की भागीदारी रही। शिक्षकों ने डाक जीवन बीमा, ग्रामीण डाक जीवन बीमा और बचत योजनाओं से संबंधित जानकारी को ध्यानपूर्वक सुना।

कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने योजनाओं की प्रक्रिया और सुविधाओं को सरल तरीके से समझाने का प्रयास किया। डाक विभाग की ओर से कहा गया कि इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को उपलब्ध सरकारी सेवाओं और वित्तीय योजनाओं के बारे में प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराना है।

आगे भी जारी रहेगा जागरूकता अभियान

डाक विभाग के सिंहभूम मंडल की ओर से संकेत दिया गया कि आने वाले समय में जागरूकता अभियान को और व्यापक किया जाएगा। स्कूलों और कॉलेजों के अलावा विभिन्न सरकारी एवं निजी संस्थानों में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस पहल के माध्यम से डाक विभाग अपनी बचत और बीमा सेवाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ वित्तीय जागरूकता को बढ़ावा देने का प्रयास करेगा। केरला पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यक्रम को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा गया।