सरायकेला: खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत रघुनाथपुर स्थित रैनबो इंग्लिश School के छात्रावास से शनिवार की अहले सुबह करीब चार बजे लगभग पांच वर्षीय एक मासूम बच्चे के निकलकर भाग जाने का मामला सामने आया है। सुबह के समय टहलने निकले ग्रामीणों ने बच्चे को अकेले और रोते हुए देखा। इसके बाद ग्रामीणों ने उसे रघुनाथपुर स्थित एक चाय दुकान पर बैठाकर रखा और मामले की जानकारी पुलिस को दी।

घटना की जानकारी मिलते ही इलाके में लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। कम उम्र का बच्चा इतनी सुबह छात्रावास से बाहर कैसे निकल गया और उसे रोकने या तलाशने के लिए छात्रावास प्रबंधन की ओर से तत्काल क्या कदम उठाए गए, इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

सुबह करीब चार बजे हॉस्टल से निकला बच्चा

जानकारी के अनुसार, शनिवार की सुबह करीब चार बजे पांच वर्षीय बच्चा छात्रावास से निकलकर बाहर चला गया। उस समय आसपास का इलाका काफी शांत था। बच्चा अकेले ही रघुनाथपुर की ओर पहुंच गया। सुबह टहलने निकले कुछ ग्रामीणों की नजर जब बच्चे पर पड़ी तो उन्होंने उससे पूछताछ करने की कोशिश की।

बच्चा काफी डरा और सहमा हुआ था। वह लगातार रो रहा था और ठीक से अपनी बात भी नहीं बता पा रहा था। ग्रामीणों ने बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए उसे पास की एक चाय दुकान पर बैठाया और पुलिस को सूचना दी।

शिक्षक लेने पहुंचे तो छात्रावास जाने से किया इनकार

मामले की सूचना मिलने के बाद छात्रावास की ओर से एक शिक्षक बच्चे को लेने के लिए पहुंचे। बताया जाता है कि शिक्षक को देखते ही बच्चा और अधिक घबरा गया तथा उसने किसी भी स्थिति में छात्रावास वापस जाने से इनकार कर दिया।

बच्चा काफी देर तक रोता रहा। उसकी स्थिति देखकर ग्रामीणों ने पुलिस को मामले की सूचना देना उचित समझा। ग्रामीणों का कहना था कि इतने छोटे बच्चे का इस तरह भयभीत होना गंभीर चिंता का विषय है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

पुलिस ने बच्चे को थाने ले जाकर की पूछताछ

सूचना मिलने के बाद नीमडीह थाना के एएसआई टुना प्रसाद पुलिस दल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने बच्चे को अपने साथ थाना ले जाकर उससे बातचीत की और उसकी पहचान जानने की कोशिश की।

पूछताछ के दौरान बच्चे ने अपना नाम अर्णव गोप और पिता का नाम कुणाल गोप बताया। बच्चे ने अपना पता बलरामपुर मस्जिद रोड बताया। इसके बाद पुलिस ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर बच्चे के परिजनों से संपर्क किया और उन्हें घटना की जानकारी दी।

पुलिस की सूचना मिलने के बाद परिजनों के बीच भी चिंता का माहौल बन गया। बच्चे के सुरक्षित मिलने की जानकारी के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।

शिक्षक और बड़े बच्चों पर मारपीट का आरोप

पुलिस और ग्रामीणों के सामने बच्चे ने छात्रावास में अपने साथ कथित मारपीट किए जाने की बात कही। बच्चे का आरोप है कि छात्रावास में शिक्षक और कुछ बड़े बच्चे उसके साथ मारपीट करते थे। इसी डर के कारण वह शनिवार की सुबह छात्रावास से निकलकर भाग गया।

हालांकि, बच्चे द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हो सकी है। पुलिस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि छात्रावास में वास्तव में बच्चे के साथ किसी तरह की मारपीट या दुर्व्यवहार हुआ था या नहीं।

चूंकि बच्चा महज पांच वर्ष का है, इसलिए उसके बयान और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच सावधानीपूर्वक किए जाने की जरूरत है। पुलिस छात्रावास की व्यवस्था, बच्चों की निगरानी और घटना के समय मौजूद लोगों से भी जानकारी ले सकती है।

इतनी सुबह बच्चा हॉस्टल से बाहर कैसे निकला?

घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। पांच साल का बच्चा सुबह करीब चार बजे छात्रावास से निकलकर काफी दूर तक चला गया, लेकिन छात्रावास प्रबंधन को इसकी जानकारी कब हुई और बच्चे की तलाश के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए, यह भी जांच का विषय बन गया है।

छोटे बच्चों के छात्रावास में रहने के दौरान उनकी सुरक्षा और निगरानी की जिम्मेदारी प्रबंधन की होती है। ऐसे में इतनी कम उम्र के बच्चे का बिना किसी रोक-टोक के छात्रावास से बाहर निकल जाना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

पहले भी तीन बच्चों के भागने की चर्चा

ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि कुछ दिन पहले इसी छात्रावास से तीन बच्चे भाग गए थे। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि पहले भी ऐसी घटना हुई थी तो लगातार बच्चों के छात्रावास छोड़कर चले जाने के कारणों की जांच करना और भी जरूरी हो जाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि बच्चों को छात्रावास में किसी तरह की परेशानी है तो उसकी जानकारी सामने आनी चाहिए। वहीं, यदि बच्चों की सुरक्षा और निगरानी में किसी स्तर पर लापरवाही बरती जा रही है तो संबंधित विभाग और प्रशासन को इसकी जांच करनी चाहिए।

छात्रावास की व्यवस्था पर उठे सवाल

मासूम के हॉस्टल से निकलकर भागने की घटना के बाद छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। इनमें बच्चों की सुरक्षा, रात के समय निगरानी, हॉस्टल के प्रवेश और निकास की व्यवस्था तथा बच्चों की देखरेख जैसे मुद्दे शामिल हैं।

ग्रामीणों ने मांग की है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि बच्चों की देखरेख के लिए पर्याप्त शिक्षक और कर्मचारी मौजूद हैं या नहीं।

बच्चों के साथ मारपीट या दुर्व्यवहार की हो जांच

ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट, मानसिक प्रताड़ना या दुर्व्यवहार की शिकायतों की गंभीरता से जांच की जाए।

उनका कहना है कि छोटे बच्चों के मामले में उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि जांच में किसी तरह की लापरवाही या दुर्व्यवहार सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पुलिस ने बच्चे को सुरक्षित बरामद कर उसके परिजनों से संपर्क कर लिया है। बच्चे द्वारा लगाए गए आरोपों और छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

घटना ने एक बार फिर छोटे बच्चों के छात्रावासों में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस और संबंधित विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं और छात्रावास प्रबंधन की ओर से घटना को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है।