चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय में बुधवार को जिला जल एवं sanitation समिति (DWSC) की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने की। इस दौरान जिले में जल जीवन मिशन (JJM) और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) [SBM(G)] के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराने, जलापूर्ति योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने, योजनाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा स्वच्छता से जुड़ी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना रहा। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारियों ने योजनाओं की वर्तमान स्थिति और उनके क्रियान्वयन से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों की जानकारी दी।
ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजलापूर्ति पर विशेष ध्यान
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित, पर्याप्त और नियमित पेयजलापूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर विशेष चर्चा की गई। जल जीवन मिशन के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल पहुंचाने की दिशा में किए जा रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली गई।

उप विकास आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पेयजलापूर्ति से संबंधित योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में किसी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। जिन योजनाओं में तकनीकी, प्रशासनिक या अन्य किसी कारण से कार्य प्रभावित हो रहा है, उन समस्याओं की पहचान कर तत्काल समाधान किया जाए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल लोगों की मूलभूत आवश्यकता है। इसलिए जलापूर्ति योजनाओं को केवल कागजों पर पूरा करने के बजाय धरातल पर प्रभावी और उपयोगी बनाना आवश्यक है।
जल जीवन मिशन की योजनाओं की हुई समीक्षा
समीक्षा बैठक में जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले में संचालित विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई। योजनाओं की निर्माण स्थिति, जल स्रोत, पाइपलाइन, जलापूर्ति व्यवस्था और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली गई।
उप विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि सभी योजनाओं की नियमित निगरानी की जाए। कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप कराया जाए और योजनाओं के पूर्ण होने के बाद भी उनकी निगरानी एवं रख-रखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
समयबद्ध तरीके से कार्य पूरा करने का निर्देश
उप विकास आयुक्त उत्कर्ष कुमार ने बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि जलापूर्ति एवं स्वच्छता से संबंधित योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। जिन योजनाओं में किसी प्रकार की बाधा आ रही है, उसे उच्च स्तर पर लाने के बजाय संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय से उसका समाधान निकालें।
उन्होंने कहा कि योजनाओं में देरी होने से ग्रामीण जनता को सीधे तौर पर परेशानी होती है। इसलिए कार्यों की लगातार समीक्षा करते हुए लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाना चाहिए।
योजनाओं की गुणवत्ता और स्थायित्व सर्वोच्च प्राथमिकता
बैठक के दौरान उप विकास आयुक्त ने योजनाओं की गुणवत्ता और स्थायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलापूर्ति योजनाओं का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि वे लंबे समय तक ग्रामीण आबादी को सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध करा सकें।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही सामग्री की गुणवत्ता, निर्माण कार्य की निगरानी और तकनीकी परीक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
उन्होंने कहा कि किसी योजना का निर्माण पूरा होना ही उसकी सफलता नहीं है। योजना के माध्यम से ग्रामीणों को लंबे समय तक गुणवत्तापूर्ण पेयजल मिलता रहे, यह सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की गतिविधियों की समीक्षा
बैठक में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले में संचालित स्वच्छता गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने, स्वच्छ व्यवहार को बढ़ावा देने और लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने को लेकर अधिकारियों के साथ चर्चा की गई।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि ग्रामीण स्वच्छता केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। इसके लिए आम लोगों की भागीदारी और जागरूकता भी आवश्यक है। पंचायत स्तर पर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने और योजनाओं के प्रति उनकी सहभागिता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
भारत सरकार के डिपार्टमेंटल समिट को लेकर चर्चा
बैठक में भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा आयोजित किए जा रहे डिपार्टमेंटल समिट के मद्देनजर जिला स्तरीय परामर्श (District Level Consultation) से संबंधित विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
समिट के लिए निर्धारित चार प्रमुख विषयों को लेकर जिला स्तर पर आवश्यक तैयारियों और रणनीति पर चर्चा हुई। अधिकारियों ने इन विषयों से संबंधित वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार साझा किए।
जल अवसंरचना परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर जोर
डिपार्टमेंटल समिट के लिए निर्धारित प्रमुख विषयों में जल अवसंरचना परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन शामिल है। इस विषय पर चर्चा करते हुए जिले में चल रही जलापूर्ति परियोजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए और कार्य में आने वाली बाधाओं को जल्द दूर किया जाए। परियोजनाओं की प्रगति की जानकारी समय-समय पर उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
कैच द रेन अभियान को प्रभावी बनाने पर चर्चा
बैठक में ‘कैच द रेन’ अभियान को लेकर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। वर्षा जल के संरक्षण और उसके बेहतर उपयोग के लिए लोगों को जागरूक करने तथा जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
अधिकारियों ने जल संरक्षण के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और संभावनाओं पर चर्चा की। बैठक में यह बात सामने आई कि भविष्य में जल संकट से निपटने के लिए वर्षा जल का संरक्षण और जल स्रोतों का पुनर्भरण अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पेयजल स्रोतों की स्थिरता पर विशेष चर्चा
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद पेयजल स्रोतों की स्थिरता को लेकर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि केवल नए जल स्रोत विकसित करने के बजाय मौजूदा जल स्रोतों के संरक्षण और उनकी दीर्घकालिक क्षमता पर भी ध्यान दिया जाए।
जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्भरण और उचित उपयोग के लिए आवश्यक रणनीतियों पर विचार किया गया। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की स्थिति की नियमित निगरानी करने की आवश्यकता बताई गई।
ग्रामीण जलापूर्ति योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव पर जोर
बैठक में ग्रामीण पेयजलापूर्ति योजनाओं के संचालन और रख-रखाव को महत्वपूर्ण विषय के रूप में लिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि योजनाओं के निर्माण के बाद उनके संचालन में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो, इसके लिए आवश्यक व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए।
यदि किसी गांव में जलापूर्ति योजना तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित होती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाए। इसके लिए तकनीकी टीमों को सक्रिय रखने और विभागीय स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया।
जनभागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता
बैठक में पेयजल योजनाओं और स्वच्छता कार्यक्रमों को सफल बनाने में जनभागीदारी की भूमिका पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों ने माना कि सरकारी योजनाओं की सफलता तभी स्थायी हो सकती है जब ग्रामीण समुदाय भी इनके संचालन और संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाए।
पंचायत स्तर पर लोगों को जागरूक करने, जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी विकसित करने और जलापूर्ति योजनाओं के रख-रखाव में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।
विभागीय और पंचायत स्तर पर बेहतर समन्वय
उप विकास आयुक्त ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जल और स्वच्छता से जुड़ी योजनाएं कई स्तरों पर संचालित होती हैं। ऐसे में विभागीय अधिकारियों, तकनीकी टीमों, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि किसी भी योजना के क्रियान्वयन में यदि कोई समस्या आती है तो संबंधित अधिकारी दूसरे विभागों के साथ समन्वय कर उसका समाधान निकालें। बेहतर समन्वय से योजनाओं को समय पर पूरा करने और ग्रामीण जनता को इसका लाभ पहुंचाने में मदद मिलेगी।
तकनीकी टीमों को सक्रिय रहने का निर्देश
बैठक में तकनीकी टीमों की भूमिका पर भी चर्चा की गई। जलापूर्ति योजनाओं के निर्माण, संचालन और रख-रखाव में तकनीकी विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए संबंधित अभियंताओं और तकनीकी कर्मियों को नियमित रूप से योजनाओं का निरीक्षण करने और तकनीकी समस्याओं का समाधान करने का निर्देश दिया गया।
उप विकास आयुक्त ने कहा कि तकनीकी स्तर पर किसी प्रकार की लापरवाही के कारण पेयजलापूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों से प्राप्त शिकायतों का भी प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाना चाहिए।
अधिकारियों को नियमित निगरानी के निर्देश
बैठक में योजनाओं की नियमित निगरानी और प्रगति की समीक्षा को आवश्यक बताया गया। संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे क्षेत्र का निरीक्षण कर योजनाओं की वास्तविक स्थिति का जायजा लें।
सिर्फ कार्यालय स्तर पर रिपोर्ट के आधार पर योजनाओं की समीक्षा करने के बजाय धरातल पर जाकर कार्यों की स्थिति देखना आवश्यक बताया गया। इससे कार्यों में गुणवत्ता बनाए रखने और समस्याओं की पहचान करने में सहायता मिलेगी।
ग्रामीण जनता को मिलेगा सीधा लाभ
जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत संचालित योजनाओं का सीधा लाभ जिले के ग्रामीण परिवारों को मिलना है। सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों की दैनिक परेशानियां कम होंगी और स्वच्छता व्यवस्था बेहतर होने से स्वास्थ्य एवं जीवन स्तर में भी सुधार की संभावना बढ़ेगी।
जल स्रोतों के संरक्षण और जलापूर्ति योजनाओं के बेहतर रख-रखाव से भविष्य में भी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बैठक में विभिन्न अधिकारी रहे उपस्थित
समीक्षा बैठक में जिला जल एवं स्वच्छता समिति (DWSC) के सभी सदस्य उपस्थित रहे। इसके अलावा पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल चाईबासा और चक्रधरपुर के कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता एवं कनीय अभियंता भी बैठक में शामिल हुए।
बैठक में यूनिसेफ के कंसल्टेंट, जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (DPMU) तथा प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (BPMU) के पदाधिकारी और कर्मियों ने भी भाग लिया। सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मियों ने योजनाओं की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
जल और स्वच्छता योजनाओं को प्रभावी बनाने की दिशा में कदम
बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत संचालित सभी योजनाओं को निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
उप विकास आयुक्त ने कहा कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत बनाना और sanitation व्यवस्था को बेहतर करना प्रशासन की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए समयबद्ध क्रियान्वयन, गुणवत्तापूर्ण कार्य, नियमित निगरानी और जनभागीदारी पर विशेष ध्यान देना होगा।
उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों से टीम भावना के साथ कार्य करते हुए योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने का आह्वान किया। बैठक में यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि जल और स्वच्छता से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी और ग्रामीण जनता को योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराने के लिए हर स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
पश्चिमी सिंहभूम जिला समाहरणालय में आयोजित जिला जल एवं स्वच्छता समिति की यह बैठक ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही। बैठक में जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की प्रगति की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
समयबद्ध तरीके से योजनाओं को पूरा करने, जल स्रोतों को सुरक्षित रखने, वर्षा जल संरक्षण को बढ़ावा देने, पेयजल योजनाओं के उचित संचालन एवं रख-रखाव तथा ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि योजनाओं की गुणवत्ता और स्थायित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करें, ताकि जिले के ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्रभावी रूप से पूरा किया जा सके।




















