जमशेदपुर: Jamshedpur पुलिस द्वारा सामुदायिक पुलिसिंग को और अधिक प्रभावी एवं जनसहभागिता आधारित बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में मानगो, बिरसानगर, पटमदा, जुगसलाई, श्यामसुंदरपुर एवं गुड़ाबांदा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न विद्यालयों में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को वर्तमान समय की प्रमुख सामाजिक एवं डिजिटल चुनौतियों के प्रति जागरूक करना तथा उन्हें सुरक्षित व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना रहा।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद स्थापित किया और उनकी समस्याओं, जिज्ञासाओं एवं सुरक्षा संबंधी सवालों को सुना। पुलिस की ओर से छात्रों को यह संदेश दिया गया कि अपराध की रोकथाम केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज और विशेष रूप से युवा वर्ग की सक्रिय भागीदारी से ही सुरक्षित वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।

नशे के खिलाफ छात्रों को किया जागरूक

जागरूकता कार्यक्रम के दौरान नशे के बढ़ते दुष्प्रभावों को प्रमुखता से उठाया गया। पुलिस पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि नशे की शुरुआत अक्सर छोटी उम्र में जिज्ञासा, दोस्तों के दबाव या गलत संगति के कारण होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह गंभीर लत का रूप ले सकती है।

छात्र-छात्राओं को नशीले पदार्थों से दूर रहने की सलाह देते हुए बताया गया कि नशा व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके परिवार और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित करता है। युवाओं को गलत संगति से बचने, अपने आसपास नशे से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी मिलने पर इसकी सूचना जिम्मेदार लोगों अथवा पुलिस को देने के लिए प्रेरित किया गया।

गलत संगति से बचने की अपील

पुलिस ने विद्यार्थियों से कहा कि पढ़ाई, खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक संगति को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन करने के लिए यदि कोई दबाव बनाता है तो उसका विरोध करें और इसकी जानकारी अपने माता-पिता, शिक्षक या पुलिस को दें।

साइबर अपराध से बचाव की दी जानकारी

कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा साइबर अपराध के प्रति जागरूकता रहा। वर्तमान समय में इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया विद्यार्थियों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में साइबर ठगी, फर्जी लिंक, ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड, सोशल मीडिया अकाउंट हैकिंग, फर्जी प्रोफाइल और अन्य डिजिटल अपराधों से बचने के उपायों की जानकारी छात्रों को दी गई।

पुलिस पदाधिकारियों ने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। मोबाइल नंबर, पासवर्ड, ओटीपी, बैंक संबंधी जानकारी और अन्य संवेदनशील विवरण किसी भी अनजान व्यक्ति को नहीं देना चाहिए।

ओटीपी और पासवर्ड साझा नहीं करने की सलाह

छात्रों को विशेष रूप से बताया गया कि बैंक या किसी सरकारी संस्था का अधिकारी बनकर फोन करने वाले व्यक्ति पर तुरंत भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है। सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करने और निजी तस्वीरें अथवा वीडियो साझा करने से भी बचने की सलाह दी गई।

पुलिस ने विद्यार्थियों को साइबर अपराध होने की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल अपने अभिभावकों, शिक्षकों अथवा पुलिस को जानकारी देने के लिए प्रेरित किया।

महिला सुरक्षा को लेकर छात्राओं को किया संवेदनशील

जागरूकता कार्यक्रम में महिला सुरक्षा को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। छात्राओं को उनके अधिकारों और उपलब्ध सुरक्षा तंत्र के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस ने कहा कि किसी भी प्रकार की छेड़खानी, पीछा करना, धमकी देना, ऑनलाइन उत्पीड़न या अन्य आपत्तिजनक व्यवहार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

छात्राओं को बताया गया कि परेशानी की स्थिति में वे अपने परिवार, शिक्षकों और पुलिस की मदद ले सकती हैं। पुलिस ने उन्हें आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखने और किसी भी गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया।

महिला सुरक्षा में समाज की भूमिका महत्वपूर्ण

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि महिलाओं और छात्राओं के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना केवल पुलिस का दायित्व नहीं है। परिवार, विद्यालय, समाज और युवाओं की सामूहिक जिम्मेदारी भी इसमें महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे अपने आसपास महिलाओं और छात्राओं के प्रति सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने में सकारात्मक भूमिका निभाएं।

बाल सुरक्षा और कानूनी प्रावधानों की दी जानकारी

कार्यक्रम के दौरान बच्चों की सुरक्षा से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रावधानों के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। पुलिस ने बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श की पहचान, असुरक्षित परिस्थितियों से बचने तथा किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर विश्वसनीय वयस्क से बात करने की सलाह दी।

विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि उन्हें स्वयं या उनके किसी मित्र के साथ किसी प्रकार का अनुचित व्यवहार दिखाई देता है तो उसे छिपाने के बजाय तुरंत माता-पिता, शिक्षक अथवा संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

पुलिस और विद्यार्थियों के बीच बढ़ा संवाद

इन कार्यक्रमों का एक प्रमुख उद्देश्य पुलिस और आम नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों एवं युवाओं के बीच विश्वास को मजबूत करना भी रहा। पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि पुलिस केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने वाली संस्था नहीं है, बल्कि अपराध की रोकथाम और समाज को सुरक्षित बनाने में भी उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को पुलिस की कार्यप्रणाली और सहायता प्राप्त करने के तरीकों की जानकारी दी गई। इससे बच्चों में पुलिस के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने और किसी भी आपात स्थिति में बिना डर के पुलिस से संपर्क करने का विश्वास बढ़ाने का प्रयास किया गया।

शिक्षकों और अभिभावकों की भूमिका भी अहम

पुलिस ने जागरूकता कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों एवं अभिभावकों से भी बच्चों की गतिविधियों पर सकारात्मक नजर रखने की अपील की। विद्यार्थियों में अचानक होने वाले व्यवहारिक बदलाव, पढ़ाई में रुचि कम होना, संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियां या गलत संगति जैसी परिस्थितियों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

पुलिस ने कहा कि बच्चों को डांटने या डराने के बजाय उनके साथ मित्रवत व्यवहार कर उनकी समस्याओं को समझना अधिक प्रभावी है। इससे बच्चे अपनी परेशानियों को परिवार और शिक्षकों के साथ आसानी से साझा कर सकेंगे।

जनभागीदारी से अपराध नियंत्रण का संदेश

जमशेदपुर पुलिस की इस पहल से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि अपराध नियंत्रण और सामाजिक सुरक्षा में जनभागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि नागरिक जागरूक रहें और समय रहते संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें तो कई अपराधों को होने से पहले ही रोका जा सकता है।

मानगो, बिरसानगर, पटमदा, जुगसलाई, श्यामसुंदरपुर एवं गुड़ाबांदा थाना क्षेत्रों के विद्यालयों में आयोजित कार्यक्रम इसी सोच का हिस्सा रहे। पुलिस ने विद्यार्थियों को जागरूक नागरिक बनने और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने की अपील की।

युवाओं को सुरक्षित भविष्य के लिए किया प्रेरित

कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे नशे से दूर रहें, साइबर दुनिया में सतर्क रहें, महिलाओं एवं बच्चों का सम्मान करें और किसी भी अपराध या असामाजिक गतिविधि की जानकारी मिलने पर जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाएं।

जमशेदपुर पुलिस की ओर से इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों को सामुदायिक पुलिसिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। पुलिस का प्रयास है कि कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ समाज के प्रत्येक वर्ग को सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए।

पुलिस का संदेश—जागरूक नागरिक, सुरक्षित समाज

विद्यालयों में आयोजित इन जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया कि जागरूकता, संवाद और जनसहभागिता के जरिए ही सुरक्षित समाज का निर्माण संभव है। विद्यार्थियों को भविष्य का जिम्मेदार नागरिक बताते हुए पुलिस ने उनसे न केवल स्वयं सतर्क रहने, बल्कि अपने परिवार और आसपास के लोगों को भी नशा, साइबर अपराध तथा महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की अपील की।