काठमांडू: Nepal तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार सुबह आई अचानक और तेज बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से नेपाल के रसुवा जिले के साथ-साथ नुवाकोट और धादिंग के कई इलाकों में भारी नुकसान की खबर सामने आई है। बाढ़ के तेज बहाव में घर, सड़कें, पुल, वाहन और कई अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। नेपाल पुलिस की शुरुआती जानकारी में 18 मौतों की पुष्टि हुई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में मृतकों का आंकड़ा 22 और उससे अधिक बताया गया। राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के कारण आंकड़े लगातार बदल रहे हैं।

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के साथ-साथ भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी चिंता बढ़ा दी है। विशेष रूप से नेपाल से भारत की ओर आने वाली नारायणी-गंडक नदी प्रणाली में जलस्तर बढ़ने की आशंका के चलते बिहार प्रशासन ने कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया है। वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 गेट भी एहतियातन खोल दिए गए हैं।

384 यात्रियों के लापता होने से बढ़ी चिंता

नेपाल में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में यात्रियों और पर्यटकों के लापता होने की खबर ने चिंता और बढ़ा दी है। नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक सूची के अनुसार 384 यात्री लापता बताए गए हैं। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। लापता विदेशी नागरिकों में कम से कम 105 भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं। इसके अलावा 37 प्रवासी भारतीयों यानी एनआरआई के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार यह सूची अभी अंतिम नहीं है। कई लोग संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण अपने परिवार या यात्रा एजेंसियों के संपर्क में नहीं आ पा रहे हैं। कुछ लोग सुरक्षित स्थानों पर भी पहुंच चुके हो सकते हैं। इसलिए लापता लोगों की संख्या में आगे बदलाव की संभावना बनी हुई है।

भोटेकोशी नदी में अचानक बढ़ा जलस्तर

बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक बाढ़ आने के बाद कुछ ही समय में पानी और मलबे का तेज बहाव नीचे की ओर बढ़ गया। रसुवा जिले का तिमुरे और आसपास का क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ। सीमा व्यापार से जुड़े प्रतिष्ठानों, सड़क मार्ग, पुलों और अन्य संरचनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

बाढ़ का असर आगे बढ़ते हुए त्रिशूली नदी के जलप्रवाह पर भी पड़ा। त्रिशूली नदी आगे चलकर नारायणी नदी में मिलती है और भारत में प्रवेश करने के बाद इसी नदी तंत्र को गंडक के नाम से जाना जाता है। यही कारण है कि नेपाल में आई बाढ़ का असर बिहार तक पहुंचने की आशंका को लेकर प्रशासन सतर्क है।

बाढ़ की वजह को लेकर क्या सामने आया?

बाढ़ के कारण को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग संभावनाएं सामने आई हैं। कुछ शुरुआती रिपोर्टों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी हिमनद झील के अचानक फटने की संभावना बताई गई थी।

हालांकि, बाद की रिपोर्टों में भूकंप के कारण बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने से नदी का रास्ता प्रभावित होने की बात सामने आई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप के बाद हुए आइस-रॉक एवलॉन्च से ल्हेंडे खोला नदी में अचानक भारी जलप्रवाह पैदा हुआ, जिसने नीचे के क्षेत्रों में तबाही मचाई। घटना के वास्तविक कारणों को लेकर विस्तृत जांच और वैज्ञानिक आकलन अभी जारी है।

कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान

अचानक आई बाढ़ से नेपाल के कई इलाकों में जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। नदी के तेज बहाव और मलबे ने बिजली परियोजनाओं से जुड़े ढांचे, सड़कों और संपर्क मार्गों को प्रभावित किया है।

नेपाल के पर्वतीय क्षेत्रों में जलविद्युत परियोजनाएं स्थानीय अर्थव्यवस्था और ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में बाढ़ से इन परियोजनाओं को हुआ नुकसान आने वाले दिनों में भी प्रभावित क्षेत्रों के लिए चुनौती बन सकता है।

नेपाल में सेना और सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा

आपदा के बाद नेपाल सरकार ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव कार्य में लगी हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण कई स्थानों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।

नेपाल पुलिस ने प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, सड़क मार्गों से मलबा हटाने और लापता लोगों की तलाश के लिए विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय शुरू किया है। पुलिस की मेडिकल टीम को भी प्रभावित क्षेत्र में भेजा गया है।

लापता भारतीयों की तलाश तेज

105 भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबर के बाद भारत में भी चिंता बढ़ गई है। लापता लोगों में बड़ी संख्या में ऐसे यात्री बताए जा रहे हैं जो नेपाल के रास्ते धार्मिक एवं पर्यटन यात्राओं पर गए थे।

नेपाल पर्यटन बोर्ड, स्थानीय प्रशासन, ट्रैवल एजेंसियों, गाइडों और सुरक्षा एजेंसियों की मदद से लापता लोगों की पहचान और स्थिति का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए संपर्क व्यवस्था सक्रिय की है।

भारत ने नेपाल को सहायता का भरोसा दिया

आपदा की गंभीरता को देखते हुए भारत ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की है। दोनों देशों की एजेंसियां राहत और बचाव से जुड़ी जानकारी साझा कर रही हैं।

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी और सीमा से लगे भारतीय क्षेत्रों में संभावित बाढ़ का खतरा है। हिमालयी क्षेत्र में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा के बाद नदियों के जलप्रवाह में अचानक बदलाव का असर निचले इलाकों तक पहुंच सकता है।

बिहार में बढ़ी सतर्कता

नेपाल में आई बाढ़ के बाद बिहार प्रशासन ने गंडक नदी के जलस्तर को लेकर विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। बिहार के जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने नदी के जलप्रवाह और बैराज की स्थिति पर लगातार निगरानी शुरू की है।

राज्य सरकार ने पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली सहित गंडक नदी बेसिन के संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं। कुछ अन्य सीमावर्ती और संवेदनशील जिलों को भी स्थिति के अनुसार सतर्क रहने को कहा गया है।

गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोले गए

पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज पर निगरानी बढ़ा दी गई है। बिहार सरकार के अनुसार बैराज के सभी 36 गेट एहतियात के तौर पर खोल दिए गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, इससे पानी के दबाव को नियंत्रित करने और जलप्रवाह को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। बैराज पर तकनीकी टीम को तैनात किया गया है और जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।

जिलाधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश

बिहार के मुख्य सचिव ने संबंधित जिलों के जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों को नदी के जलस्तर, तटबंधों, पुलों, निचले इलाकों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रशासन को यह भी कहा गया है कि आवश्यकता पड़ने पर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। इसके लिए निकासी योजना, नाव, राहत सामग्री और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था तैयार रखने को कहा गया है।

NDRF और SDRF की टीमें रहेंगी तैयार

संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों को तैयार रखा गया है।

गोपालगंज में एनडीआरएफ टीम भेजने और मुजफ्फरपुर तथा बेतिया में अतिरिक्त टीमों की व्यवस्था करने की तैयारी की गई है। प्रशासन को नाव, भोजन, पेयजल, दवाइयां और राहत सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

लोगों से अफवाहों से बचने की अपील

प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक सूचना पर भरोसा करें। नदी और तटबंधों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

यदि जलस्तर तेजी से बढ़ता है तो प्रशासन की ओर से जारी निकासी संबंधी निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी होगा। लोगों को आपात स्थिति के लिए जरूरी दस्तावेज, दवाइयां और आवश्यक सामान तैयार रखने की सलाह भी दी जा सकती है।

आपदा ने बढ़ाई हिमालयी क्षेत्र में चिंता

Nepal की इस भीषण बाढ़ ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र में अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और जलवायु संबंधी जोखिमों को सामने ला दिया है। पर्वतीय क्षेत्रों में नदियों के जलप्रवाह में अचानक बदलाव होने से कुछ ही मिनटों में बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।

ऐसी घटनाओं में समय पर चेतावनी, मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था और सीमा पार सहयोग बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। नेपाल और भारत के बीच नदियों का साझा जलप्रवाह होने के कारण दोनों देशों के लिए आपदा संबंधी सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान भी आवश्यक है।

फिलहाल राहत और बचाव सर्वोच्च प्राथमिकता

फिलहाल नेपाल में राहत और बचाव एजेंसियों की प्राथमिकता लापता लोगों को तलाशना, घायलों को चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना और प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है।

वहीं बिहार में प्रशासन गंडक नदी के संभावित जलस्तर वृद्धि पर नजर बनाए हुए है। मृतकों और लापता लोगों के आंकड़े लगातार बदल रहे हैं, इसलिए अंतिम संख्या राहत और बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। नेपाल पुलिस की उपलब्ध आधिकारिक अपडेट में बुधवार दोपहर तक 18 मौतों की पुष्टि की गई थी, जबकि विभिन्न बाद की रिपोर्टों में इससे अधिक आंकड़े सामने आए हैं।

Nepal तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी के तेज बहाव ने रसुवा सहित कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित कर दिया है और सैकड़ों यात्रियों के लापता होने की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। इनमें 105 भारतीय नागरिकों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है।

भारत के बिहार में भी संभावित जलस्तर वृद्धि को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट और निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोले गए हैं और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमों को तैयार रखा गया है।

फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता नेपाल में फंसे और लापता लोगों को सुरक्षित निकालना तथा प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है। साथ ही बिहार में नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की सतर्कता बेहद महत्वपूर्ण है। स्थिति पर दोनों देशों की एजेंसियां लगातार नजर बनाए हुए हैं और आने वाले घंटों में जलस्तर तथा राहत अभियान की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।