जमशेदपुर: पूर्वी Singhbhum जिले में अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन को लेकर बुधवार, 16 सितंबर 2026 को वरीय पुलिस अधीक्षक डॉ. ऐहतेशाम वकारिब की अध्यक्षता में मासिक अपराध गोष्ठी आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक, नगर की मौजूदगी में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के सभी पुलिस उपाधीक्षक, पुलिस निरीक्षक और थाना प्रभारियों ने हिस्सा लिया।
अपराध गोष्ठी के दौरान जिले में अपराध की वर्तमान स्थिति, विभिन्न थानों में लंबित कांडों, अनुसंधान की प्रगति तथा फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी सहित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में पुलिस अधिकारियों को अपराध नियंत्रण के साथ-साथ लंबित मामलों के निष्पादन में तेजी लाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
दो माह में लंबित कांड 1500 से कम करने का लक्ष्य
बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक ने लंबित कांडों के त्वरित, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अनुसंधान के स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा की जाए और अनावश्यक रूप से मामलों को लंबित न रखा जाए।

वरीय पुलिस अधीक्षक ने आगामी दो माह के भीतर जिले में लंबित कांडों की संख्या 1500 से कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया। इसके लिए सभी पर्यवेक्षी पदाधिकारियों और थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में लंबित मामलों की स्थिति की नियमित समीक्षा करने तथा प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लंबित कांडों के निष्पादन में तेजी के साथ-साथ अनुसंधान की गुणवत्ता का भी पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि मामलों का निष्पादन कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप प्रभावी ढंग से हो सके।
थाना स्तर पर लंबित मामलों की होगी नियमित समीक्षा
अपराध गोष्ठी में थाना स्तर पर लंबित मामलों की नियमित समीक्षा को महत्वपूर्ण बताया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्रों में दर्ज कांडों की स्थिति पर लगातार नजर रखें।
जिन मामलों में अनुसंधान पूरा होने की स्थिति है, उन्हें समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। वहीं जिन मामलों में अनुसंधान के लिए अतिरिक्त कार्रवाई की आवश्यकता है, उनमें आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया गया।
वारंट और कुर्की के मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश
बैठक में लंबित वारंट और कुर्की के मामलों की भी समीक्षा की गई। वरीय पुलिस अधीक्षक ने ऐसे मामलों के शीघ्र निष्पादन का निर्देश दिया।
इसके साथ ही विभिन्न मामलों में फरार चल रहे अभियुक्तों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि फरार अभियुक्तों के संबंध में उपलब्ध सूचनाओं का सत्यापन कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी पर विशेष जोर
अपराध नियंत्रण के लिए फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी को भी बैठक में प्राथमिकता दी गई। अधिकारियों को अपने थाना क्षेत्र में ऐसे अभियुक्तों की सूची की समीक्षा करने और उनकी गिरफ्तारी के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
पुलिस अधिकारियों को यह भी कहा गया कि गंभीर मामलों में फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए टीम गठित कर योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की जाए।
आदतन अपराधियों की पहचान और निगरानी
बैठक में आदतन अपराधियों (Habitual Offenders) की पहचान, निगरानी और उनके विरुद्ध निरोधात्मक कार्रवाई को लेकर भी दिशा-निर्देश दिए गए।
पुलिस को ऐसे अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखने और उनके संबंध में उपलब्ध सूचनाओं को अद्यतन रखने के लिए कहा गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि आवश्यकता के अनुसार आदतन अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कानूनी एवं निरोधात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
पुलिस का उद्देश्य ऐसे तत्वों की गतिविधियों पर निगरानी रखते हुए संभावित अपराधों को पहले ही रोकने की दिशा में काम करना है।
अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान जारी रखने का निर्देश
अपराध गोष्ठी में अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान की भी समीक्षा की गई। पुलिस अधिकारियों को अवैध हथियार रखने, खरीद-बिक्री या इस्तेमाल से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज कांडों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों से इन मामलों में अनुसंधान की प्रगति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई।
अवैध हथियारों के खिलाफ कार्रवाई को अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए संबंधित पदाधिकारियों को अभियान को प्रभावी बनाए रखने का निर्देश दिया गया।
चेन स्नैचिंग और चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली चेन स्नैचिंग और चोरी की घटनाओं को लेकर भी बैठक में विस्तृत चर्चा हुई। पुलिस अधिकारियों को ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया।
चेन स्नैचिंग और चोरी के मामलों में संलिप्त अपराधियों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। पुराने मामलों में अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए उपलब्ध सूचनाओं एवं तकनीकी साक्ष्यों का प्रभावी उपयोग करने की आवश्यकता बताई गई।
संवेदनशील इलाकों में बढ़ाई जाएगी निगरानी
अपराध गोष्ठी के दौरान पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संवेदनशील स्थानों की पहचान करने और वहां नियमित निगरानी रखने के निर्देश दिए गए। खासकर उन इलाकों पर ध्यान देने को कहा गया जहां चोरी, छिनतई या अन्य आपराधिक घटनाओं की आशंका अधिक रहती है।
थाना प्रभारियों को क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी और गश्ती व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने की दिशा में भी काम करने का निर्देश दिया गया।
महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की भी हुई समीक्षा
बैठक में महिलाओं के विरुद्ध अपराधों की स्थिति की भी समीक्षा की गई। वरीय पुलिस अधीक्षक ने ऐसे मामलों में पुलिस की कार्रवाई को त्वरित और संवेदनशील बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
महिलाओं से संबंधित मामलों में शिकायत प्राप्त होने के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया समय पर पूरी करने तथा पीड़ित पक्ष के साथ संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
महिला अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि महिलाओं के विरुद्ध अपराध से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जाए। ऐसे मामलों में जांच के दौरान आवश्यक साक्ष्य जुटाने, पीड़ित पक्ष की बात सुनने और कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई करने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
बैठक में अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि महिला अपराधों से जुड़े मामलों की नियमित समीक्षा की जाए, ताकि अनुसंधान की स्थिति पर वरिष्ठ अधिकारियों की प्रभावी निगरानी बनी रहे।
अनुसंधान की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान
मासिक अपराध गोष्ठी में केवल लंबित मामलों की संख्या कम करने पर ही नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान पर भी जोर दिया गया। वरीय पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि मामलों के त्वरित निष्पादन के साथ कानूनी प्रक्रिया और अनुसंधान की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है।
पुलिस अधिकारियों को प्रत्येक मामले की प्रकृति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने तथा अनुसंधान में सामने आने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों की गहनता से जांच करने के निर्देश दिए गए।
पर्यवेक्षी अधिकारियों को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी
बैठक में सभी पर्यवेक्षी पदाधिकारियों को अपने अधीन आने वाले थाना क्षेत्रों में लंबित कांडों और अनुसंधान की स्थिति की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया गया।
थाना प्रभारियों से अपेक्षा की गई कि वे लंबित मामलों की सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करें और प्रगति की जानकारी संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को उपलब्ध कराएं।
इससे थाना स्तर से लेकर जिला स्तर तक मामलों की मॉनिटरिंग की व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
अपराध नियंत्रण के साथ कानून-व्यवस्था पर जोर
मासिक अपराध गोष्ठी के माध्यम से जिले में अपराध नियंत्रण की रणनीति की समीक्षा के साथ कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहने और अपराध की संभावित घटनाओं पर प्रभावी तरीके से नजर रखने के निर्देश दिए गए।
बैठक में स्पष्ट किया गया कि लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन, फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी, अवैध हथियारों के खिलाफ कार्रवाई और आदतन अपराधियों की निगरानी अपराध नियंत्रण की प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देश
अपराध गोष्ठी में जिन प्रमुख बिंदुओं पर निर्देश दिए गए, उनमें लंबित कांडों का त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन, लंबित वारंट और कुर्की का शीघ्र निष्पादन, फरार अभियुक्तों की गिरफ्तारी, आदतन अपराधियों की पहचान एवं निगरानी, अवैध हथियारों के खिलाफ अभियान, आर्म्स एक्ट के मामलों की समीक्षा, चेन स्नैचिंग और चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण तथा महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में त्वरित और संवेदनशील कार्रवाई शामिल रही।
वरीय पुलिस अधीक्षक ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य करने और अपराध नियंत्रण के लिए आपसी समन्वय के साथ कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। बैठक में तय लक्ष्य के अनुसार आने वाले दो महीनों में लंबित कांडों की संख्या 1500 से नीचे लाने के लिए थाना और पर्यवेक्षी स्तर पर लगातार समीक्षा एवं मॉनिटरिंग पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।




















