जमशेदपुर: बुधवार को डालसा का मोबाइल वैन Bodam प्रखंड के माधवपुर गांव पहुंचा। यहां स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में कानूनी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चों और शिक्षकों ने हिस्सा लिया। डालसा की टीम ने बच्चों को विभिन्न कानूनों, उनके अधिकारों और समाज में व्याप्त कुरीतियों से बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
प्रधान जिला जज के निर्देश पर आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम
यह कानूनी जागरूकता कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकार, जमशेदपुर के अध्यक्ष सह प्रधान जिला जज अरविंद कुमार पांडेय के निर्देशानुसार आयोजित किया गया। वहीं डालसा सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी के मार्गदर्शन में मोबाइल वैन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र में यह कार्यक्रम पहुंचाया गया।
डालसा का उद्देश्य समाज के ऐसे लोगों तक कानूनी सहायता और जागरूकता पहुंचाना है, जो किसी कारण से न्याय व्यवस्था और कानूनी प्रावधानों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। इसी उद्देश्य के तहत ग्रामीण इलाकों में शिविर लगाकर आम लोगों और विद्यार्थियों को उनके अधिकारों तथा कानून की जानकारी दी जाती है।

राजकीय मध्य विद्यालय माधवपुर में लगा शिविर
मोबाइल वैन के माधवपुर पहुंचने के बाद राजकीय मध्य विद्यालय में विशेष कानूनी जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान डालसा की टीम ने विद्यार्थियों से बातचीत करते हुए उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनों के बारे में जानकारी दी।
शिविर में बच्चों को सरल भाषा में समझाया गया कि कानून केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने का माध्यम नहीं है, बल्कि कानून के बारे में जानकारी होने से व्यक्ति अपने अधिकारों की रक्षा भी कर सकता है। बच्चों को किसी भी तरह की परेशानी या शोषण की स्थिति में चुप नहीं रहने और उचित माध्यम से शिकायत करने के लिए प्रेरित किया गया।
डालसा के कार्य और उद्देश्य की दी जानकारी
जागरूकता शिविर के दौरान विद्यार्थियों को सबसे पहले डालसा के कार्य और उद्देश्य के बारे में बताया गया। टीम ने समझाया कि जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने तथा समाज के कमजोर और वंचित वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने में विधिक सेवा प्राधिकार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
बच्चों को बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति को कानूनी समस्या है और वह आर्थिक या अन्य कारणों से न्यायिक प्रक्रिया में सहायता लेने में कठिनाई महसूस करता है, तो वह विधिक सेवा संस्थानों से संपर्क कर सकता है।
बाल विवाह के खिलाफ किया जागरूक
शिविर में बाल विवाह को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। बच्चों को बताया गया कि कम उम्र में विवाह से शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्हें बाल विवाह की रोकथाम के लिए जागरूक रहने और अपने आसपास इस तरह की गतिविधि की जानकारी मिलने पर उचित स्तर पर सूचना देने की आवश्यकता समझाई गई।
विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि बाल विवाह केवल सामाजिक कुरीति ही नहीं, बल्कि कानून से जुड़ा गंभीर विषय है। इसलिए बच्चों और उनके परिवारों को इस संबंध में कानूनी प्रावधानों की जानकारी होना जरूरी है।
बाल श्रम और बच्चों के अधिकारों पर चर्चा
कार्यक्रम में बाल श्रम के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा की गई। टीम ने बताया कि बच्चों का स्थान शिक्षा और सुरक्षित वातावरण में है। कम उम्र में बच्चों से मजदूरी करवाने से उनके शारीरिक और मानसिक विकास पर असर पड़ सकता है तथा उनकी पढ़ाई बाधित होती है।
विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी देते हुए कहा गया कि यदि किसी बच्चे को जबरन काम कराया जा रहा हो या उसके साथ किसी प्रकार का शोषण हो रहा हो, तो ऐसी स्थिति में सहायता के लिए संबंधित संस्थाओं से संपर्क किया जा सकता है।
पॉक्सो एक्ट की दी जानकारी
शिविर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पॉक्सो एक्ट से संबंधित जागरूकता रहा। विद्यार्थियों को बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण देने वाले कानून के बारे में जानकारी दी गई।
टीम ने बच्चों को समझाया कि किसी भी प्रकार के गलत व्यवहार, अनुचित स्पर्श या यौन शोषण की स्थिति में चुप रहना जरूरी नहीं है। बच्चों को भरोसेमंद अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित कानूनी एवं सहायता संस्थान से संपर्क करने के लिए प्रेरित किया गया।
चाइल्ड ट्रैफिकिंग और चाइल्ड प्रोटेक्शन पर जागरूकता
कार्यक्रम में चाइल्ड ट्रैफिकिंग यानी बच्चों की तस्करी से जुड़े खतरों के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों को अनजान लोगों से सावधान रहने तथा किसी भी लालच या बहकावे में आकर अपरिचित व्यक्ति के साथ जाने से बचने की सलाह दी गई।
इसके साथ ही चाइल्ड प्रोटेक्शन से संबंधित विषयों पर भी चर्चा की गई। टीम ने बताया कि बच्चों की सुरक्षा परिवार, विद्यालय और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। किसी बच्चे के साथ हिंसा, शोषण या उपेक्षा होने की स्थिति में समय रहते सहायता लेना जरूरी है।
शिशु प्रोजेक्ट और बाल सुरक्षा की जानकारी
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को शिशु प्रोजेक्ट के बारे में भी जानकारी दी गई। बच्चों को उनके संरक्षण और सुरक्षित भविष्य से जुड़े प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया।
डालसा टीम ने बच्चों को बताया कि सरकार और विभिन्न संस्थाओं की ओर से बच्चों के संरक्षण तथा उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कई योजनाएं और व्यवस्थाएं संचालित की जाती हैं। जरूरत पड़ने पर इनके माध्यम से सहायता प्राप्त की जा सकती है।
डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संदेश
शिविर में डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ भी जागरूकता फैलायी गई। टीम ने विद्यार्थियों को बताया कि किसी महिला या व्यक्ति को अंधविश्वास के आधार पर डायन बताकर प्रताड़ित करना गलत है।
ऐसी घटनाएं समाज में भय और हिंसा को बढ़ावा देती हैं। विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच अपनाने और अंधविश्वास के आधार पर किसी के साथ भेदभाव या हिंसा नहीं करने का संदेश दिया गया।
नशा उन्मूलन को लेकर विद्यार्थियों को किया जागरूक
कार्यक्रम में नशा उन्मूलन को भी प्रमुखता से शामिल किया गया। विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान के बारे में बताया गया और नशे से दूर रहने की अपील की गई।
टीम ने कहा कि कम उम्र में नशे की आदत व्यक्ति के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बच्चों को स्वयं नशे से दूर रहने के साथ-साथ अपने आसपास के लोगों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना चाहिए।
मौलिक अधिकार और कर्तव्यों की दी जानकारी
डालसा टीम ने विद्यार्थियों को नागरिकों के मौलिक अधिकार और कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी दी। बच्चों को समझाया गया कि एक जिम्मेदार नागरिक के लिए अपने अधिकारों को जानना जितना आवश्यक है, उतना ही अपने कर्तव्यों को समझना भी जरूरी है।
उन्हें बताया गया कि समाज में कानून और व्यवस्था बनाए रखने में नागरिकों की जिम्मेदार भूमिका होती है। अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना भी आवश्यक है।
पेंशन योजना और सरकारी सुविधाओं की जानकारी
शिविर में केवल बच्चों से जुड़े कानूनों तक ही जानकारी सीमित नहीं रही। लोगों के हित से जुड़ी पेंशन योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। टीम ने बताया कि पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित प्रक्रिया और विभागों की जानकारी रखना जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह की जानकारी काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि कई बार पात्र व्यक्ति जानकारी के अभाव में सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं उठा पाते हैं।
प्राकृतिक आपदा और दुर्घटना बीमा पर भी चर्चा
कार्यक्रम में प्राकृतिक आपदा तथा दुर्घटना बीमा जैसे विषयों की भी जानकारी दी गई। टीम ने बताया कि दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में उपलब्ध सहायता और बीमा संबंधी प्रावधानों की जानकारी लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है।
विद्यार्थियों को अपने परिवार के सदस्यों को भी इन महत्वपूर्ण जानकारियों से अवगत कराने के लिए प्रेरित किया गया।
कानूनी समस्या होने पर सहायता लेने की अपील
जागरूकता शिविर के दौरान डालसा टीम ने विद्यार्थियों और ग्रामीणों से कहा कि किसी भी प्रकार की कानूनी समस्या होने पर उसे नजरअंदाज न करें। समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लीगल एड क्लीनिक अथवा सिविल कोर्ट स्थित डालसा कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।
टीम ने बताया कि कानूनी सहायता की जानकारी समय पर मिलने से कई समस्याओं का समाधान उचित माध्यम से किया जा सकता है। लोगों से यह भी अपील की गई कि वे कानून से जुड़ी अफवाहों के बजाय अधिकृत संस्थाओं से सही जानकारी प्राप्त करें।
डालसा टीम के सदस्य रहे मौजूद
माधवपुर में आयोजित कानूनी जागरूकता शिविर में डालसा की ओर से लीगल एड डिफेंस कौंसिल की सदस्य रंजना पांडेय के अलावा पीएलवी नागेन्द्र कुमार, दिलीप जायसवाल, राजेश राव, निताई चंद्र गोराई, गीता रानी दास और मिथिलेश तिवारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
टीम के सदस्यों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनके सवालों और जिज्ञासाओं को सुना तथा कानून से संबंधित जरूरी जानकारी साझा की।
बड़ी संख्या में छात्र और शिक्षक हुए शामिल
कानूनी जागरूकता शिविर में राजकीय मध्य विद्यालय के काफी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षकगण भी मौजूद रहे। विद्यार्थियों ने कानून से जुड़े विभिन्न विषयों को ध्यानपूर्वक सुना।
कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों को यह संदेश दिया गया कि कानून की जानकारी केवल वयस्कों के लिए ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए भी बेहद जरूरी है। बचपन से ही अधिकारों, कर्तव्यों और कानूनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होने से बच्चे स्वयं को सुरक्षित रखने के साथ-साथ समाज में भी जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों तक कानूनी जागरूकता पहुंचाने की पहल
डालसा का मोबाइल वैन अभियान ग्रामीण इलाकों तक कानूनी जागरूकता पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। ऐसे क्षेत्रों में जहां लोगों को न्यायिक व्यवस्था, सरकारी योजनाओं और कानूनी अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं मिल पाती, वहां शिविरों के माध्यम से सीधे लोगों तक जानकारी पहुंचाई जाती है।
माधवपुर में आयोजित कार्यक्रम में बच्चों को केंद्र में रखकर बाल विवाह, बाल श्रम, पॉक्सो एक्ट, मानव तस्करी और बाल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूक किया गया। साथ ही सामाजिक कुरीतियों, नशे और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर भी जानकारी साझा की गई।
इस तरह के कार्यक्रमों से विद्यार्थियों में कानून के प्रति समझ विकसित होने के साथ-साथ वे अपने परिवार और समाज में भी जागरूकता का संदेश पहुंचा सकते हैं।




















