चक्रधरपुर: बदलते दौर में जहां समय के साथ लोग अपने पुराने स्कूल, सहपाठियों और शिक्षकों Student को भूलते जा रहे हैं, वहीं दक्षिण-पूर्व रेलवे इंटर कॉलेज स्कूल, चक्रधरपुर के वर्ष 2007 बैच के पूर्व छात्रों ने गुरु-शिष्य के रिश्ते की एक ऐसी मिसाल पेश की, जो लंबे समय तक याद रखी जाएगी। स्कूल छोड़े हुए करीब 19 वर्ष बीत जाने के बावजूद इन पूर्व छात्रों का अपने शिक्षकों और विद्यालय के प्रति प्रेम और सम्मान आज भी कायम है।

शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को 2007 बैच के पूर्व छात्र अपने पुराने विद्यालय पहुंचे और अपने गुरुजनों से मुलाकात कर उन्हें सम्मानित किया। इस दौरान पूर्व छात्रों ने शिक्षकों को पुष्पगुच्छ भेंट किए, केक काटा, चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया और उपहार देकर सम्मान व्यक्त किया। वर्षों बाद एक साथ विद्यालय पहुंचने वाले पूर्व छात्रों को देखकर विद्यालय का माहौल भी भावुक और आत्मीय हो गया।

19 साल बाद भी विद्यालय से जुड़ी यादें ताजा

वर्ष 2007 में विद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र अलग-अलग क्षेत्रों में अपने करियर और जीवन में आगे बढ़ते चले गए। किसी ने पत्रकारिता को अपना पेशा बनाया, तो कोई फोटोग्राफी, पुलिस सेवा, शिक्षा, इंजीनियरिंग, व्यवसाय और कॉरपोरेट क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है।

समय के साथ सभी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में व्यस्त हो गए, लेकिन विद्यालय और शिक्षकों से उनका रिश्ता कभी खत्म नहीं हुआ। शिक्षक दिवस पर एक बार फिर सभी पूर्व छात्रों ने स्कूल पहुंचकर यह संदेश दिया कि गुरु का स्थान जीवन में हमेशा सर्वोच्च रहता है।

शिक्षकों को पुष्पगुच्छ और उपहार देकर किया सम्मान

शिक्षक दिवस के कार्यक्रम में पूर्व छात्रों ने विद्यालय पहुंचकर अपने शिक्षकों से मुलाकात की। उन्होंने शिक्षकों को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया और केक काटकर शिक्षक दिवस मनाया।

इसके बाद पूर्व छात्रों ने अपने गुरुजनों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त किया। शिक्षकों को उपहार भेंट कर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की गई।

कार्यक्रम के दौरान कई पुराने छात्र एक-दूसरे से मिलकर भी भावुक नजर आए। स्कूल के पुराने दिनों की यादें ताजा हुईं और छात्रों ने शिक्षकों के साथ अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा किए।

शिक्षक ही जीवन की सफलता की नींव रखते हैं

पूर्व छात्रों ने कहा कि जीवन में उन्हें जो भी सफलता मिली है, उसके पीछे उनके माता-पिता के साथ-साथ शिक्षकों का भी महत्वपूर्ण योगदान है। शिक्षकों ने उन्हें केवल किताबों का ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि संस्कार, अनुशासन, मेहनत, ईमानदारी और जीवन में सही निर्णय लेने की सीख भी दी।

उन्होंने कहा कि गुरु ही वह शक्ति हैं, जो व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं।

पूर्व छात्रों का कहना था कि विद्यालय छोड़े हुए 19 वर्ष हो गए हैं, लेकिन अपने गुरुओं के प्रति उनका सम्मान और प्रेम आज भी पहले जैसा ही है और आगे भी बना रहेगा।

गुरु का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता

पूर्व छात्रों ने कहा कि गुरु का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता। हालांकि, समय-समय पर अपने गुरुजनों का सम्मान कर और उनके चरणों में बैठकर आशीर्वाद प्राप्त कर विद्यार्थी अपनी भावनाओं को जरूर व्यक्त कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि उनके लिए शिक्षक केवल विद्यालय में पढ़ाने वाले व्यक्ति नहीं हैं, बल्कि जीवन की दिशा तय करने वाले मार्गदर्शक हैं। शिक्षकों की दी हुई सीख ने उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने और सफलता हासिल करने में मदद की।

देश के अलग-अलग हिस्सों में कर रहे हैं काम

2007 बैच के कई पूर्व छात्र आज देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग प्रतिष्ठित पदों पर कार्यरत हैं। इनमें पत्रकार, प्रोफेशनल फोटोग्राफर, पुलिस इंस्पेक्टर, Jio डिजिटल ब्रांच मैनेजर, भारत पेट्रोलियम ब्रांच मैनेजर, शिक्षक, बिजनेसमैन और इंजीनियर शामिल हैं।

इसके अलावा कई पूर्व छात्र सेल कंपनी, रूंगटा कंपनी सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों और कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।

पूर्व छात्रों की सफलता को विद्यालय के लिए भी गर्व का विषय बताया गया। शिक्षकों ने कहा कि यह खुशी की बात है कि उनके पढ़ाए हुए विद्यार्थी आज अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं और समाज में अपना योगदान दे रहे हैं।

शिक्षकों ने जताया विद्यार्थियों के प्रति स्नेह

कार्यक्रम के दौरान शिक्षकों ने भी अपने पूर्व छात्रों के प्रति स्नेह और भावनाएं व्यक्त कीं। शिक्षकों ने कहा कि वर्तमान समय में जब लोग अपने पुराने संबंधों और संस्थानों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे समय में पूर्व छात्रों का हर वर्ष विद्यालय पहुंचना और शिक्षकों का सम्मान करना बेहद खास है।

शिक्षकों ने कहा कि स्कूल छोड़े 19 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन 2007 बैच के छात्र हर वर्ष उनसे मिलने जरूर आते हैं। वे सम्मान करते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और पुराने संबंधों को उसी आत्मीयता के साथ बनाए रखते हैं।

उन्होंने कहा कि एक शिक्षक के लिए इससे बड़ा उपहार कुछ नहीं हो सकता कि उसके विद्यार्थी वर्षों बाद भी उसे याद रखें।

विद्यार्थियों की सफलता पर विद्यालय को गर्व

शिक्षकों ने कहा कि किसी भी विद्यालय के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि उसके विद्यार्थियों की सफलता होती है। 2007 बैच के छात्र आज अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं और अपने परिवार के साथ-साथ विद्यालय का नाम भी रोशन कर रहे हैं।

उन्होंने पूर्व छात्रों के उज्ज्वल भविष्य और निरंतर सफलता की कामना करते हुए कहा कि वे जीवन में आगे बढ़ते रहें और अपने विद्यालय तथा गुरुजनों से इसी तरह जुड़े रहें।

प्रधानाचार्य सहित कई शिक्षक रहे मौजूद

कार्यक्रम में विद्यालय के प्रधानाचार्य ओम पाल सिंह सहित पी.के. विश्वास, डी. नायक, शशि मैडम, सुमिता मेरी नाग, ए.एस. कुजूर, ए. गुरिया और सुधा देवी सहित अन्य शिक्षक उपस्थित रहे।

शिक्षकों ने पूर्व छात्रों के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम गुरु-शिष्य के रिश्ते को और मजबूत करते हैं। इससे वर्तमान विद्यार्थियों को भी अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना रखने की प्रेरणा मिलती है।

2007 बैच के इन पूर्व छात्रों का रहा विशेष योगदान

कार्यक्रम को सफल बनाने में 2007 बैच के धनंजय उर्फ जय कुमार, संतोष मुखी, शुभम दीवान, सुजीत होनहागा, निखिल रंजन कुमार सिंह, कोमल सिंह, विश्वनाथ तांती, दीपक सिंह और हर्ष गागराई सहित अन्य पूर्व छात्रों का विशेष योगदान रहा।

सभी ने मिलकर शिक्षक दिवस के आयोजन को यादगार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लंबे समय बाद एक साथ विद्यालय पहुंचने वाले पूर्व छात्रों ने पुरानी यादों को साझा किया और अपने शिक्षकों के साथ आत्मीय पल बिताए।

शिक्षक दिवस ने फिर मजबूत किया गुरु-शिष्य का रिश्ता

भारत में प्रत्येक वर्ष 5 सितंबर को डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। यह दिन शिक्षकों के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और उनके योगदान को याद करने का अवसर होता है।

चक्रधरपुर के दक्षिण-पूर्व रेलवे इंटर कॉलेज स्कूल में 2007 बैच के पूर्व छात्रों द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम इसी भावना को और मजबूत करता नजर आया। 19 वर्ष का लंबा समय बीतने के बावजूद छात्रों का अपने शिक्षकों के प्रति सम्मान और विद्यालय से जुड़ाव यह साबित करता है कि गुरु-शिष्य का रिश्ता समय, दूरी और उम्र की सीमाओं से कहीं बड़ा होता है।

पूर्व छात्रों ने जिस तरह अपने पुराने विद्यालय में पहुंचकर शिक्षकों का सम्मान किया, वह आज की पीढ़ी के लिए भी प्रेरणादायक संदेश है। कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि विद्यार्थी चाहे जीवन में कितने ही ऊंचे मुकाम पर क्यों न पहुंच जाएं, उनके जीवन में गुरु का स्थान हमेशा विशेष और सम्माननीय बना रहता है।