Teacher: दिवस के अवसर पर ऑल इंडिया आइडियल टीचर्स एसोसिएशन (AITA) और M.S. Industrial Training Institute (MSITI) के संयुक्त सहयोग से एक दिवसीय सिविल डिफेंस जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों एवं आम लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों में बचाव, प्राथमिक उपचार और सुरक्षा के विभिन्न उपायों के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियों के माध्यम से आपदा एवं दुर्घटना की स्थिति में तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी प्राप्त की।
Emergency Management से लेकर First Aid तक दिया गया प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को Emergency Management, Rescue Methods, CPR, Fire Safety और First Aid जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि किसी भी दुर्घटना या आपदा के समय शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि उस समय सही तरीके से प्राथमिक सहायता उपलब्ध करा दी जाए तो गंभीर स्थिति में किसी व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।

विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि दुर्घटना होने के बाद घबराने के बजाय स्थिति का आकलन करते हुए सुरक्षित तरीके से घायल व्यक्ति की मदद करनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करनी चाहिए।
CPR का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा CPR यानी Cardiopulmonary Resuscitation प्रशिक्षण रहा। विद्यार्थियों को बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति की सांस रुक जाए या वह अचानक बेहोश हो जाए, तो चिकित्सा सहायता पहुंचने तक किस प्रकार आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रशिक्षकों ने CPR की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझाया और विद्यार्थियों को बताया कि आपात स्थिति में सही तकनीक और सावधानी के साथ प्राथमिक सहायता देना बेहद महत्वपूर्ण है।
हार्ट अटैक और दुर्घटना की स्थिति में सावधानियों की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान हार्ट अटैक, बेहोशी, दुर्घटना, सांस रुकने तथा सिर में चोट जैसी परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी जानकारी दी गई।
विद्यार्थियों को बताया गया कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को बिना आवश्यक सावधानी के उठाने या खींचने से उसकी स्थिति और खराब हो सकती है। इसलिए घायल व्यक्ति को सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करना जरूरी है। साथ ही जल्द से जल्द चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
स्ट्रेचर नहीं होने पर बचाव के तरीके समझाए
कार्यक्रम में आपात स्थिति के दौरान स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर वैकल्पिक तरीके से स्ट्रेचर तैयार करने और घायल व्यक्ति को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षकों ने बताया कि प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना के समय कई बार आवश्यक संसाधन तत्काल उपलब्ध नहीं होते। ऐसी परिस्थिति में उपलब्ध साधनों का सुरक्षित तरीके से उपयोग कर घायल व्यक्ति को सहायता पहुंचाई जा सकती है।
Fire Safety को लेकर किया गया जागरूक
कार्यक्रम में फायर सेफ्टी को विशेष महत्व दिया गया। विद्यार्थियों को आग के विभिन्न प्रकार, आग लगने के संभावित कारण और अलग-अलग प्रकार की आग को नियंत्रित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले साधनों के बारे में जानकारी दी गई।
इसके अलावा आग लगने की स्थिति में स्वयं को सुरक्षित रखने, आसपास के लोगों को सतर्क करने तथा बचाव के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी विस्तार से समझाया गया।
प्रशिक्षकों ने कहा कि आग लगने के बाद घबराहट स्थिति को और गंभीर बना सकती है। इसलिए लोगों को पहले से ही अग्नि सुरक्षा के सामान्य नियमों की जानकारी होनी चाहिए।
बाढ़, भूकंप और आसमानी बिजली से बचाव की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को केवल आग और दुर्घटनाओं से ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के उपायों के बारे में भी जागरूक किया गया।
बाढ़, भूकंप, आसमानी बिजली और करंट लगने जैसी परिस्थितियों में क्या सावधानियां बरतनी चाहिए, इस पर जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि आपदा के समय सुरक्षित स्थान की पहचान करना, अफवाहों से बचना और प्रशासन एवं राहत एजेंसियों के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।
सिविल डिफेंस पदाधिकारियों ने किया मार्गदर्शन
कार्यक्रम में सिविल डिफेंस के पदाधिकारी श्री अरुण कुमार, श्री जितेंद्र तिवारी, श्री एस. सुशील तथा रेस्क्यू हेड श्री मजहरुल बारी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन, बचाव कार्य, प्राथमिक उपचार और सुरक्षा उपायों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी।
उन्होंने विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल गतिविधियों में शामिल करते हुए आपात स्थिति में शांत रहकर सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया।
खालिद इकबाल ने जागरूकता कार्यक्रमों को बताया जरूरी
M.S. Industrial Training Institute के डायरेक्टर जनाब खालिद इकबाल साहब ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस तरह के जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा, आग, दुर्घटना या किसी अन्य आपातकालीन परिस्थिति की कोई निश्चित समय सीमा नहीं होती। ऐसे में यदि आम लोगों और विद्यार्थियों को पहले से बचाव एवं प्राथमिक सहायता का प्रशिक्षण प्राप्त हो तो वे कठिन परिस्थितियों में स्वयं के साथ-साथ दूसरों की भी मदद कर सकते हैं।
AITA का जीवनोपयोगी कौशल पर जोर
ऑल इंडिया आइडियल टीचर्स एसोसिएशन (AITA) की ओर से कहा गया कि संगठन का उद्देश्य केवल शिक्षकों को एक मंच पर जोड़ना ही नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों और छात्राओं को भी मुख्यधारा से जोड़ते हुए उन्हें आवश्यक जीवनोपयोगी कौशल से जागरूक करना है।
संगठन का मानना है कि शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों को ऐसी व्यावहारिक जानकारी भी मिलनी चाहिए, जिसका उपयोग वे वास्तविक जीवन की कठिन परिस्थितियों में कर सकें।
विद्यार्थियों ने प्रैक्टिकल गतिविधियों में लिया हिस्सा
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने काफी उत्साह दिखाया। दानिश, कासिफ, फरीद, अरमान, शादाब, लोकेश, अब्दुल्लाह, शफकत सहित कई विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रैक्टिकल गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
विद्यार्थियों को CPR, रेस्क्यू, फर्स्ट एड और आपातकालीन स्थिति में सुरक्षित तरीके से घायल व्यक्ति को स्थानांतरित करने जैसी गतिविधियों के बारे में प्रशिक्षण दिया गया।
आयोजन को सफल बनाने में इनका रहा योगदान
कार्यक्रम को सफल बनाने में राष्ट्रीय संगठन के ब्यूरो चीफ जनाब शाकिर अजीमाबादी, सिविल डिफेंस सदस्य इरफान आलम, प्रिंसिपल मेहरूनिसा रूमी, नूरजहां, फैयाज रहमान और फरहाना मैम की निरंतर मेहनत एवं प्रयासों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
आयोजकों ने कहा कि विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि युवा वर्ग आपदा प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी जानकारी हासिल करने के प्रति काफी जागरूक है।
कठिन समय में जीवन बचाने में मददगार हैं ये कौशल
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि Fire Safety, CPR और First Aid जैसे कौशल केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर किसी व्यक्ति की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
सिर में चोट, हार्ट अटैक, दुर्घटना, बेहोशी, सांस रुकने या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में सही प्राथमिक सहायता की जानकारी होने से गंभीर परिणामों को कम करने में मदद मिल सकती है।
जागरूक समाज के निर्माण में ऐसे कार्यक्रम महत्वपूर्ण
सिविल डिफेंस लंबे समय से लोगों को आपदाओं और आपातकालीन परिस्थितियों से बचाव के लिए जागरूक करने तथा आवश्यक प्रशिक्षण देने का कार्य करता रहा है। कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि आपदा प्रबंधन केवल सरकारी एजेंसियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि आम नागरिकों को भी इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
Teacher दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम ने शिक्षा के साथ सुरक्षा और जीवनोपयोगी कौशल को जोड़ने का संदेश दिया। आयोजकों ने भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता जताई, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी और आम नागरिक आपातकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रह सकें।




















