नई दिल्ली। सोने की कीमतों को लेकर दुनिया के जाने-माने निवेशक और अरबपति थॉमस कैपलान ने बेहद बड़ा अनुमान जताया है। उनका मानना है कि आने वाले वर्षों में सोने की कीमत 50,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। मौजूदा स्तरों से तुलना करें तो यह सोने की कीमत में कई गुना बढ़ोतरी होगी।
किटको न्यूज को दिए एक हालिया इंटरव्यू में कैपलान ने कहा कि उन्हें सोने के 30,000, 40,000 या यहां तक कि 50,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने में कोई बड़ी समस्या नजर नहीं आती। उन्होंने सोने में मौजूदा स्तर से एक और दस गुना तेजी को केवल संभावना नहीं, बल्कि ‘अपरिहार्य’ बताया।
यदि 50,000 डॉलर प्रति औंस की कीमत को करीब ₹95 प्रति डॉलर की विनिमय दर से भारतीय मुद्रा में परिवर्तित किया जाए, तो यह लगभग ₹15 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास बैठती है। हालांकि यह केवल अनुमानित गणना है और वास्तविक भारतीय कीमत पर डॉलर-रुपया विनिमय दर, आयात शुल्क, टैक्स तथा स्थानीय बाजार के प्रीमियम जैसे कई कारकों का असर पड़ेगा।

अभी क्यों चर्चा में है सोना?
2025 में सोने की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। इसके बाद पिछले कुछ महीनों में कीमतों में कुछ गिरावट आई है। इस सुधार के चलते बाजार में यह सवाल उठने लगा कि क्या सोने का लंबा तेजी वाला दौर समाप्त हो गया है।
हालांकि कैपलान समेत कई वैश्विक निवेशक और विश्लेषक अभी भी लंबी अवधि में सोने को लेकर सकारात्मक नजरिया रखते हैं। कैपलान का मानना है कि मौजूदा गिरावट व्यापक तेजी के बीच एक सामान्य करेक्शन हो सकती है।
मौजूदा गिरावट को बताया ‘1987 मोमेंट’
कैपलान ने सोने में मौजूदा गिरावट की तुलना 1987 के शेयर बाजार क्रैश से की है। उनका कहना है कि अगर सोने में बड़ी गिरावट आती भी है तो उसे संकट के बजाय लंबी अवधि के निवेश के अवसर के रूप में देखा जा सकता है।
1987 में अमेरिकी शेयर बाजार में ‘ब्लैक मंडे’ के दौरान डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में करीब 36 फीसदी की भारी गिरावट आई थी। हालांकि दशकों के लंबे चार्ट में वह गिरावट अपेक्षाकृत छोटी दिखाई देती है। कैपलान इसी उदाहरण के जरिए बताते हैं कि लंबी अवधि में बाजार की बड़ी गिरावट भी व्यापक तेजी के सामने छोटी नजर आ सकती है।
उन्होंने सोने और चांदी को लेकर लंबी अवधि में काफी सकारात्मक रुख जताया है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि 50,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर कब तक हासिल हो सकता है। उनके मुताबिक निकट भविष्य में सोने की दिशा को लेकर निश्चित तौर पर कुछ कहना मुश्किल है।
निवेशकों के लिए क्या मायने?
कैपलान का अनुमान बेहद आक्रामक है और इसे भविष्यवाणी या निश्चित कीमत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। सोने की कीमत पर वैश्विक ब्याज दरें, महंगाई, डॉलर की स्थिति, केंद्रीय बैंकों की खरीद, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और निवेशकों की मांग जैसे कई कारक असर डालते हैं।
इसलिए ₹15 लाख प्रति 10 ग्राम का आंकड़ा फिलहाल एक दीर्घकालिक अनुमान है, न कि सोने की तय होने वाली कीमत। निवेशकों को किसी भी निवेश निर्णय से पहले बाजार के जोखिम और विशेषज्ञों की सलाह पर विचार करना चाहिए।




















